मप्र हाईकोर्ट की प्रोसिडिंग पर स्टे
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
एक्साइज ड्यूटी की जद में आने वाले प्रोडक्ट का उत्पादन भले 15 दिन हो लेकिन ड्यूटी पूरे महीने की आरोपित की जाती है। बाकी दिन भले मशीनें बंद ही क्यों न पड़ी रही हो। इस नोटिफिकेशन के खिलाफ देशभर में पहले ही आवाज बुलंद थी शुक्रवार को इंदौर की एमएसएस फुड प्रोडक्ट ने भी सुप्रीमकोर्ट में नोटिफिकेशन और उसके आधार पर विभाग द्वारा आरोपित की गई ड्यूटी को चुनौती दे दी। अब मामले की सुनवाई सिर्फ सुप्रीमकोर्ट में ही होगी।
पान मसाला पैकिंग मशीन (क्षमता निर्धारण और ड्यूटी संग्रह) नियम 2008 के तहत 1 जुलाई 2008 को सेंट्रल एक्साइज ने नोटिफिकेशन नं. 30/2008 जारी किया था। इसके आर्टिकल 226 कांस्टिट्यूशनल वैलिडिटी के तहत डीम्ड प्रोडक्शन पर एक्साइज ड्यूटी आरोपित की जाती है। इसी नियम के आधार पर एमएसएस फुड प्रोडक्ट प्रा.लि. की बंद मशीनों पर भी ड्यूटी आरोपित की गई। जिसे कंपनी ने पहले हाईकोर्ट में चुनौती दी लेकिन वहां सरकारी वकील ने दलील दी कि ऐसे प्रकरण सुप्रीमकोर्ट में विचाराधीन है। इसके बाद कंपनी ने सुप्रीमकोर्ट में रीट पीटिशन (डब्ल्यूपी) नं. 419/2016 दायर की जिस पर शुक्रवार को जस्टिस मदन बी.लोकरू और एनबी रमन्ना की कोर्ट (नं.8) ने सुनवाई की। सुनवाई के बाद कोर्ट ने हाईकोर्ट की प्रोसिडिंग को यथास्थिति रखने के आदेश देते हुए स्पष्ट कर दिया कि अब इस मामले की सुनवाई सिर्फ सुप्रीमकोर्ट में ही होगी।
क्या है डीम्ड प्रोडक्ट
किस कीमत के कितने पान मसाला पाउच एक मशीन बनाती है इसका आंकलन करके प्रति मशीन एक्साइज ड्यूटी आरोपित की जाती है। जैसे एक मशीन 1 से 1.5 रुपए तक की कीमत वाले 3744000 पाउच बनाती है। इससे किसी को आपत्ति नहीं थी। आपत्ति इस बात से थी कि यदि कोई कंपनी इसी मशीन से 15 दिन में 1872000 पाउच बनाकर प्रोडक्शन बंद कर देती है तो उससे वही ड्यूटी क्यों वसूली जा रही है जो 3744000 पाउच बनाने के बाद वसूल की जाना चाहिए थी। मशीन बंद होने के बाद जिस वैचारिक प्रोडक्ट पर ड्यूटी आरोपित की जा रही है उसे डिम्ड प्रोडक्ट कहते हैं। यह मामला देश के अन्य राज्यों की हाईकोर्ट से होते हुए सुप्रीमकोर्ट तक पहले ही जा चुका है। मप्र की हाईकोर्ट से भी मामला वहां पहुंच गया।
क्यों लगाया गया केस..
इसी विवादित नोटिफिकेशन और उसके आर्टिकल का सहारा लेकर एमएसएस फूड पर टेक्लीकल ग्राउंड पर 8 करोड़ की ड्यूटी आरोपित की गई थी। जबकि कंपनी इस बात के तमाम प्रमाण पेश कर चुकी है कि उत्पादन उतना हुआ ही नहीं। कंपनी के कर्ताधर्ताओं के अनुसार उत्पादन बंद करके मशीनें बंद कर दी थी। बंद होने के बाद एक्साइज अफसरों ने मशीन का देखी और सील की। समय-समय पर इसका असेसमेंट भी हुआ। जितने दिन मशीन चली उतने दिन की ड्यूटी चुकाई। बावजूद इसके डिमांड नोटिस जारी किया।
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
एक्साइज ड्यूटी की जद में आने वाले प्रोडक्ट का उत्पादन भले 15 दिन हो लेकिन ड्यूटी पूरे महीने की आरोपित की जाती है। बाकी दिन भले मशीनें बंद ही क्यों न पड़ी रही हो। इस नोटिफिकेशन के खिलाफ देशभर में पहले ही आवाज बुलंद थी शुक्रवार को इंदौर की एमएसएस फुड प्रोडक्ट ने भी सुप्रीमकोर्ट में नोटिफिकेशन और उसके आधार पर विभाग द्वारा आरोपित की गई ड्यूटी को चुनौती दे दी। अब मामले की सुनवाई सिर्फ सुप्रीमकोर्ट में ही होगी।
पान मसाला पैकिंग मशीन (क्षमता निर्धारण और ड्यूटी संग्रह) नियम 2008 के तहत 1 जुलाई 2008 को सेंट्रल एक्साइज ने नोटिफिकेशन नं. 30/2008 जारी किया था। इसके आर्टिकल 226 कांस्टिट्यूशनल वैलिडिटी के तहत डीम्ड प्रोडक्शन पर एक्साइज ड्यूटी आरोपित की जाती है। इसी नियम के आधार पर एमएसएस फुड प्रोडक्ट प्रा.लि. की बंद मशीनों पर भी ड्यूटी आरोपित की गई। जिसे कंपनी ने पहले हाईकोर्ट में चुनौती दी लेकिन वहां सरकारी वकील ने दलील दी कि ऐसे प्रकरण सुप्रीमकोर्ट में विचाराधीन है। इसके बाद कंपनी ने सुप्रीमकोर्ट में रीट पीटिशन (डब्ल्यूपी) नं. 419/2016 दायर की जिस पर शुक्रवार को जस्टिस मदन बी.लोकरू और एनबी रमन्ना की कोर्ट (नं.8) ने सुनवाई की। सुनवाई के बाद कोर्ट ने हाईकोर्ट की प्रोसिडिंग को यथास्थिति रखने के आदेश देते हुए स्पष्ट कर दिया कि अब इस मामले की सुनवाई सिर्फ सुप्रीमकोर्ट में ही होगी।
क्या है डीम्ड प्रोडक्ट
किस कीमत के कितने पान मसाला पाउच एक मशीन बनाती है इसका आंकलन करके प्रति मशीन एक्साइज ड्यूटी आरोपित की जाती है। जैसे एक मशीन 1 से 1.5 रुपए तक की कीमत वाले 3744000 पाउच बनाती है। इससे किसी को आपत्ति नहीं थी। आपत्ति इस बात से थी कि यदि कोई कंपनी इसी मशीन से 15 दिन में 1872000 पाउच बनाकर प्रोडक्शन बंद कर देती है तो उससे वही ड्यूटी क्यों वसूली जा रही है जो 3744000 पाउच बनाने के बाद वसूल की जाना चाहिए थी। मशीन बंद होने के बाद जिस वैचारिक प्रोडक्ट पर ड्यूटी आरोपित की जा रही है उसे डिम्ड प्रोडक्ट कहते हैं। यह मामला देश के अन्य राज्यों की हाईकोर्ट से होते हुए सुप्रीमकोर्ट तक पहले ही जा चुका है। मप्र की हाईकोर्ट से भी मामला वहां पहुंच गया।
क्यों लगाया गया केस..
इसी विवादित नोटिफिकेशन और उसके आर्टिकल का सहारा लेकर एमएसएस फूड पर टेक्लीकल ग्राउंड पर 8 करोड़ की ड्यूटी आरोपित की गई थी। जबकि कंपनी इस बात के तमाम प्रमाण पेश कर चुकी है कि उत्पादन उतना हुआ ही नहीं। कंपनी के कर्ताधर्ताओं के अनुसार उत्पादन बंद करके मशीनें बंद कर दी थी। बंद होने के बाद एक्साइज अफसरों ने मशीन का देखी और सील की। समय-समय पर इसका असेसमेंट भी हुआ। जितने दिन मशीन चली उतने दिन की ड्यूटी चुकाई। बावजूद इसके डिमांड नोटिस जारी किया।
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