- दुबई में दर्ज है दो केस, रेड कॉर्नर नोटिस तक जारी कर चुका है यूएई
- ब्रिटिश नागरिकता लेकर दुबई में पाना चाहता था ऊंचाई
इंदौर. विनोद शर्मा ।
क्राइम ब्रांच की मदद से इंटरपोल ने शुक्रवार रात जिस कुख्यात बिल्डर निलेश अजमेरा को पकड़ा है उसके खिलाफ यूएई की मिनिस्ट्री आॅफ इंटीरियर दो प्रकरण दर्ज कर चुकी है। पीडीसी चेक देकर बाद में भुगतान न करने के मामले में एक प्रकरण दुबई लैंड डिपार्टमेंट ने दर्ज कराया था तो दूसरा केस उस कंपनी ने दर्ज कराया जिसे अजमेरा बंधुओं ने दुबई में काम करने के लिए ज्वाइंटवेंचर बनाया था।
सूत्रों की मानें तो निलेश ने भारतीय नागरिकता के साथ अगस्त 1996 को पासपोर्ट बनवाया था जिसकी वैधता अगस्त 2006 में खत्म हो गई। इसी बीच 2005 में निलेश ने ब्रिटिश नागरिकता ली। जुलाई 2005 में उसका पासपोर्ट बना। इसके बाद निलेश की इंदौर में पूछपरख बढ़ी। इसके बावजूद भारत और यूएई के बीच उसका ज्यादा आनाजाना रहा। 2006-07 में जब दुबई में जमीन के भाव सातवें आसमान पर थे तब निलेश ने एक रीयल एस्टेट प्रोजेक्ट तैयार किया जिसे अंजाम देने के लिए एक तरफ जहां इंदौर के ख्यात बिल्डरों से फंड जुटाया गया वहीं दूसरी तरफ दुबई की एक कंपनी को पार्टनर बनाया गया।
25 प्रतिशत दिया नकद, बाकी पीडीसी
दुबई में निजी जमीन नहीं है। वहां जमीन लैंड डिपार्टमेंट से लेना पड़ती है। बशर्तें कोई स्थानीय कंपनी या व्यक्ति प्रोजेक्ट में भागीदार हो। इसीलिए भागीदार बनाया और जमीन का एक चक खरीदी। 25 प्रतिशत राशि इंदौरी बिल्डरों से फंड जुटाकर दी। बाकी 75 फीसदी राशि के पोस्ट डेटेड चेक (पीडीसी) दे दिए। 2008 तक आसमान छू रहे दुबई की जमीनों के भाव 2008-09 में वैश्विक मंदी के कारण जमीन पर आ गए। तकरीबन 80 फीसदी कीमतें गिरी। ऐसे में अजमेरा ने जितनी पहली किश्त दी थी पूरी जमीन की कीमत ही उससे भी कम हो गई। पैसे ज्यादा दे चुके थे। पीडीसी अलग। इसीलिए भारी आर्थिक नुकसानी से बचने के लिए अजमेरा बंधु आधे-अधूरे प्रोजेक्ट में जितनी रिकवरी हो सकती थी उतनी करके दुबई से फरार हो गए।
यूं दर्ज हुआ केस...
प्रोजेक्ट समेटने के लिए की गई अजमेरा बंधुओं की तैयारी से परे दुबई लैंड डिपार्टमेंट ने तय तारीख में पीडीसी क्लीयरिंग के लिए लगा दिए जो बाद में बाउंस हुए। अजमेरा और उसके भागीदार को नोटिस दिए गए लेकिन जवाब नहीं मिला। अंतत: इनके खिलाफ चेक बाउंस और आर्थिक धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया।
जैसे-तैसे भागे दुबई से...
यह भी बताया गया कि दुबई में जिस वक्त केस दर्ज हुआ था उस वक्त निलेश वहीं था। उसने वहां के कुछ स्थानीय अधिकारियों से सांठगांठ की। भारत के लिए उसकी फ्लाइट टेक आॅफ होने तक मामला टलवाया। निलेश के भारत रवाना होने के बाद पुलिस ने दुबई स्थित उसके ठिकानों पर दबिश दी।
यहां अफसरों ने की मदद
दुबई से इंदौर पहुंचे निलेश ने यहां बड़े-बड़े लोगों से दोस्ती की। इसमें इंदौर आईजी रहे संजय राणा व अन्य अधिकारियों के नाम भी शामिल थे। दोस्ती के कारण पुलिस निलेश पर कार्रवाई करने से बचती रही। फिर मामला दुबई केस की फरारी वाला हो या फिर इंदौर में फोनिक्स इन्फ्रास्ट्रक्चर के नाम पर निवेशकों के साथ की गई धोखाधड़ी का।
इनकम टैक्स की जांच
18 से 21 नवंबर 2015 के बीच इनकम टैक्स इन्वेस्टिगेशन विंग ने सेटेलाइट, चिराग रीयल एम्प्रेस, चौधरी एस्टेट, मयूरी हीना हर्बल प्रा.लि., और फोनिक्स ग्रुप के 20 ठिकानों पर दबिश दी। कार्रवाई आॅर्बिट मॉल स्थित फोनिक्स के आॅफिस, न्यू पलासिया स्थित चौधरी एस्टेट, पालिवालनगर स्थित अजमेरा बंधुओं के घर, चिराग शाह, वीरेंद्र चौधरी और अरूण डागरिया के घर पर हुई थी। अजमेरा के घर से 29 लाख नकद मिले। 68 लाख की ज्वैलरी मिली। कार्रवाई 21 नवंबर की सुबह 4 बजे अजमेरा बंधुओं द्वारा 20 करोड़ की काली कमाई स्वीकारे जाने के बाद खत्म हुई। 11 लॉकर सीज हुए।
ईडी का नोटिस
छापे में आईटी के हाथ कई सुराग लगे जिनसे अजमेरा बंधुओं द्वारा 400 करोड़ रुपया हवाला के माध्यम से इंदौर से दुबई पहुंचाने की पुष्टि हुई। इसके बाद तकरीबन एक हजार पन्नों की अप्राइजल रिपोर्ट आईटी ने मुख्यालय को सौंपने के साथ ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को सौंपी गई। ईडी जून 2010 में ईडी ने फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (फेमा) के तहत अजमेरा बंधुओं सहित 13 लोगों के खिलाफ इन्फोर्समेंट केस इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की।
मुख्यमंत्री से भी बढ़ाई दोस्ती
इंदौर में पहली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) 26-27 अक्टुबर 2007 को होटल फॉरर्च्यून में संपन्न हुई थी। इस समिट में 201 भारतीय और 100 विदेशी निवेशकों को न्यौता दिया गया। निमंत्रण पाने वालों में निलेश अजमेरा भी शामिल था जो उस वक्त सिप2सेव टेलीकॉम प्रा.लि. के डायरेक्टर थे। उनका नाम तत्कालीन उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने शामिल करवाया था। विजयवर्गीय के नजदीकी कहलाने वाले निलेश की इस समिट के बाद मुख्यमंत्री से भी करीबी बढ़ी। सितंबर 2005 में रजिस्टर्ड हुई इस कंपनी में मौजूदा डायरेक्टर निलेश के पिता पवन कुमार अजमेरा और सोनाली अजमेरा है।
- ब्रिटिश नागरिकता लेकर दुबई में पाना चाहता था ऊंचाई
इंदौर. विनोद शर्मा ।
क्राइम ब्रांच की मदद से इंटरपोल ने शुक्रवार रात जिस कुख्यात बिल्डर निलेश अजमेरा को पकड़ा है उसके खिलाफ यूएई की मिनिस्ट्री आॅफ इंटीरियर दो प्रकरण दर्ज कर चुकी है। पीडीसी चेक देकर बाद में भुगतान न करने के मामले में एक प्रकरण दुबई लैंड डिपार्टमेंट ने दर्ज कराया था तो दूसरा केस उस कंपनी ने दर्ज कराया जिसे अजमेरा बंधुओं ने दुबई में काम करने के लिए ज्वाइंटवेंचर बनाया था।
सूत्रों की मानें तो निलेश ने भारतीय नागरिकता के साथ अगस्त 1996 को पासपोर्ट बनवाया था जिसकी वैधता अगस्त 2006 में खत्म हो गई। इसी बीच 2005 में निलेश ने ब्रिटिश नागरिकता ली। जुलाई 2005 में उसका पासपोर्ट बना। इसके बाद निलेश की इंदौर में पूछपरख बढ़ी। इसके बावजूद भारत और यूएई के बीच उसका ज्यादा आनाजाना रहा। 2006-07 में जब दुबई में जमीन के भाव सातवें आसमान पर थे तब निलेश ने एक रीयल एस्टेट प्रोजेक्ट तैयार किया जिसे अंजाम देने के लिए एक तरफ जहां इंदौर के ख्यात बिल्डरों से फंड जुटाया गया वहीं दूसरी तरफ दुबई की एक कंपनी को पार्टनर बनाया गया।
25 प्रतिशत दिया नकद, बाकी पीडीसी
दुबई में निजी जमीन नहीं है। वहां जमीन लैंड डिपार्टमेंट से लेना पड़ती है। बशर्तें कोई स्थानीय कंपनी या व्यक्ति प्रोजेक्ट में भागीदार हो। इसीलिए भागीदार बनाया और जमीन का एक चक खरीदी। 25 प्रतिशत राशि इंदौरी बिल्डरों से फंड जुटाकर दी। बाकी 75 फीसदी राशि के पोस्ट डेटेड चेक (पीडीसी) दे दिए। 2008 तक आसमान छू रहे दुबई की जमीनों के भाव 2008-09 में वैश्विक मंदी के कारण जमीन पर आ गए। तकरीबन 80 फीसदी कीमतें गिरी। ऐसे में अजमेरा ने जितनी पहली किश्त दी थी पूरी जमीन की कीमत ही उससे भी कम हो गई। पैसे ज्यादा दे चुके थे। पीडीसी अलग। इसीलिए भारी आर्थिक नुकसानी से बचने के लिए अजमेरा बंधु आधे-अधूरे प्रोजेक्ट में जितनी रिकवरी हो सकती थी उतनी करके दुबई से फरार हो गए।
यूं दर्ज हुआ केस...
प्रोजेक्ट समेटने के लिए की गई अजमेरा बंधुओं की तैयारी से परे दुबई लैंड डिपार्टमेंट ने तय तारीख में पीडीसी क्लीयरिंग के लिए लगा दिए जो बाद में बाउंस हुए। अजमेरा और उसके भागीदार को नोटिस दिए गए लेकिन जवाब नहीं मिला। अंतत: इनके खिलाफ चेक बाउंस और आर्थिक धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया।
जैसे-तैसे भागे दुबई से...
यह भी बताया गया कि दुबई में जिस वक्त केस दर्ज हुआ था उस वक्त निलेश वहीं था। उसने वहां के कुछ स्थानीय अधिकारियों से सांठगांठ की। भारत के लिए उसकी फ्लाइट टेक आॅफ होने तक मामला टलवाया। निलेश के भारत रवाना होने के बाद पुलिस ने दुबई स्थित उसके ठिकानों पर दबिश दी।
यहां अफसरों ने की मदद
दुबई से इंदौर पहुंचे निलेश ने यहां बड़े-बड़े लोगों से दोस्ती की। इसमें इंदौर आईजी रहे संजय राणा व अन्य अधिकारियों के नाम भी शामिल थे। दोस्ती के कारण पुलिस निलेश पर कार्रवाई करने से बचती रही। फिर मामला दुबई केस की फरारी वाला हो या फिर इंदौर में फोनिक्स इन्फ्रास्ट्रक्चर के नाम पर निवेशकों के साथ की गई धोखाधड़ी का।
इनकम टैक्स की जांच
18 से 21 नवंबर 2015 के बीच इनकम टैक्स इन्वेस्टिगेशन विंग ने सेटेलाइट, चिराग रीयल एम्प्रेस, चौधरी एस्टेट, मयूरी हीना हर्बल प्रा.लि., और फोनिक्स ग्रुप के 20 ठिकानों पर दबिश दी। कार्रवाई आॅर्बिट मॉल स्थित फोनिक्स के आॅफिस, न्यू पलासिया स्थित चौधरी एस्टेट, पालिवालनगर स्थित अजमेरा बंधुओं के घर, चिराग शाह, वीरेंद्र चौधरी और अरूण डागरिया के घर पर हुई थी। अजमेरा के घर से 29 लाख नकद मिले। 68 लाख की ज्वैलरी मिली। कार्रवाई 21 नवंबर की सुबह 4 बजे अजमेरा बंधुओं द्वारा 20 करोड़ की काली कमाई स्वीकारे जाने के बाद खत्म हुई। 11 लॉकर सीज हुए।
ईडी का नोटिस
छापे में आईटी के हाथ कई सुराग लगे जिनसे अजमेरा बंधुओं द्वारा 400 करोड़ रुपया हवाला के माध्यम से इंदौर से दुबई पहुंचाने की पुष्टि हुई। इसके बाद तकरीबन एक हजार पन्नों की अप्राइजल रिपोर्ट आईटी ने मुख्यालय को सौंपने के साथ ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को सौंपी गई। ईडी जून 2010 में ईडी ने फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (फेमा) के तहत अजमेरा बंधुओं सहित 13 लोगों के खिलाफ इन्फोर्समेंट केस इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की।
मुख्यमंत्री से भी बढ़ाई दोस्ती
इंदौर में पहली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) 26-27 अक्टुबर 2007 को होटल फॉरर्च्यून में संपन्न हुई थी। इस समिट में 201 भारतीय और 100 विदेशी निवेशकों को न्यौता दिया गया। निमंत्रण पाने वालों में निलेश अजमेरा भी शामिल था जो उस वक्त सिप2सेव टेलीकॉम प्रा.लि. के डायरेक्टर थे। उनका नाम तत्कालीन उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने शामिल करवाया था। विजयवर्गीय के नजदीकी कहलाने वाले निलेश की इस समिट के बाद मुख्यमंत्री से भी करीबी बढ़ी। सितंबर 2005 में रजिस्टर्ड हुई इस कंपनी में मौजूदा डायरेक्टर निलेश के पिता पवन कुमार अजमेरा और सोनाली अजमेरा है।
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