Saturday, June 3, 2017

नौ दिन में पाठक ने छोड़ी सात कंपनियों की डायरेक्टरशीप

खातों की पूछपरख होते ही अगस्त 2015 में दिये इस्तीफे
145 करोड़ का आसामी  मंत्री अब सिर्फ एक ही कंपनी में ही सक्रिय
इंदौर. विनोद शर्मा ।
कटनी हवाला कांड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के हाथ लगे दस्तावेज रोज नई कहानी उजागर कर रहे हैं। दस्तावेजों के अनुसार सतीश सरावगी और महेंद्र गोयनका जिन कंपनियों में डायरेक्टर हैं उनमें मंत्री संजय पाठक भी डायरेक्टर रहे हैं। यह बात अलग है कि उन्होंने घपले के उजागर होने की भनक लगते ही कंपनियों से किनारा कर लिया। बहरहाल, प्रदेश के सबसे पैसे वाले विधायक इन दिनों एक ही कंपनी में डायरेक्टर हैं। बताया जा रहा है कि इन कागजी कंपनियों ने रकम को इधर-उधर करने के साथ ही बैंकों से भारीभरकम लोन लेने में भी मदद की।
सतीश सरावगी के घर से जब्त किए गए दस्तावेजों की ईडी ने जांच शुरू कर दी है। जांच में सरावगी बंधुओं और महेंद्र गोयनका के साथ पाठक परिवार के लिंक मिले हैं। ईडी के पास इस बात के भी पुख्ता प्रमाण है कि 19 जनवरी 2017 को प्रिवेंशन आॅफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत ईसीआईआर दर्ज करने के बाद ही निर्मला पाठक और निधि पाठक ने कागजी कंपनियों से किनारे की तैयारी शुरू कर ली। 21 जनवरी को ईडी ने कटनी में छापेमार कार्रवाई की। 23 जनवरी को डायरेक्टरशीप से इस्तीफा स्वीकार करते ही कॉर्पोरेट अफेयर्स डिपार्टमेंट ने कंपनियों से निर्मला पाठक-निधि पाठक का नाम हटा दिया।
मामला खुलते ही, किनारे हो गए पाठक
फाइनेंशियल इंटेलीजेंस यूनिट (एफआईयू), इनकम टैक्स और ईडी की जांच में पता चला कि फर्जी कंपनियों से हवाला 2008-09 से 2015-16 के बीच हुआ है। मामले में रजनीश तिवारी ने  इनकम टैक्स का नोटिस मिलने के बाद कटनी पुलिस के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। इसी बीच जांच एजेंसियों द्वारा खातों की जुटाई जा रही जानकारी की भनक लगते ही संजय पाठक ने कंपनियों के डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया। आंकड़ों के लिहाज से बात करें तो 13 से 21 अगस्त 2015 के बीच नौ दिनों में पाठक ने सात कंपनियों से इस्तीफा दिया। जबकि इससे पहले 1 अपै्रल 2012 को ही स्नोव्हील स्प्लायर नाम की कंपनी एक ही कंपनी से इ्स्तीफा दिया था। अभी पाठक सिर्फ एनएम पब्लिकेशन में ही डायरेक्टर हैं।
संजय पाठक यहां थे डायरेक्टर
कंपनी अपाइन्टमेंट छोड़ी
यश लॉजिस्टिक प्रा.लि. 16 जनवरी 2006 13 अगस्त 2015
सायना एग्रीकल्चर प्रा.लि. 18 अक्टूबर 2010 13 अगस्त 2015
अतिशा कंस्ट्रक्शन प्रा.लि. 16 जनवरी 2006 13 अगस्त 2015
सायना स्टील्स प्रा.लि. 17 मार्च 2008 21 अगस्त 2015
सायना इंडस्ट्री प्रा.लि. 13 अगस्त 2008 18 अगस्त 2015
निर्मल छाया नेचर रिसोर्ट 24 जुलाई 2007 18 अगस्त 2015
वॉल्टर कमर्शियल प्रा.लि. 19 मार्च 2007 18 अगस्त 2015
सरावगी इन कंपनियों में भी रहा डायरेक्टर
अभी सतीश सरावगी के सिर्फ तीन कंपनियों में डायरेक्टर है। महाकालेश्वर माइन्स एंड मेटल्स प्रा.लि., रेनाइसेंस माइनिंग एंड मिनिरल्स प्रा.लि. और नीरनिधि मार्केटिंग प्रा.लि.।  इनके अलावा तिरूपति जेम्स प्रा.लि., नताली माइन्स एंड मिनिरल्स प्रा.लि.Ñ रेडरोज सप्लाई,  शक्तिदाता मार्केटिंग प्रा.लि., मल्टीमोड डिस्ट्रीब्यूटर्स प्रा.लि. में भी डायरेक्टर पद पर रहा है। इन सभी में डायरेक्टरशीप से 2015 और 2016 में इस्तीफा दिया है।
इन पतों पर पंजीबद्ध कंपनियों की मांगी सूची
ईडी और आयकर ने एमसीए से संजय पाठक के घर (शांति भवन पाठक वार्ड कटनी मप्र) के पते पर पंजीबद्ध एन.एम.पब्लिकेश प्रा.लि., डिवाइन मार्ट इंटरनेशन प्रा.लि., सायना स्टील्स प्रा.लि.Ñ, सुख सागर  फुड्स प्रा.लि., आकांक्षा कंसेप्ट ट्रेडिंग एंड मार्केटिंग, यश लॉजिस्टिक की जानकारियां मांगी है। इसके साथ ही 14सी महाऋी देवेंद्र रोड दूसरी मंजिल कोलकाता, मुंबई, नागपुर, ठाणे और रायपुर के पतों पर पंजीबद्ध कंपनियों की विस्तृत जानकारी मांगी है।

दबंग दुनिया और दबंग न्यूज द्वारा भगवान झुलेलाल के जन्मोत्सव पर आयोजित चेटीचंड महोत्सव को संपन्न हुए भले पांच दिन हो चुके हों लेकिन सोशल मीडिया पर महोत्सव और महोत्सव में पधारी ममतामई राधे मां अब भी सबसे ज्यादा देखे जा रहे हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण यू-ट्यूब है जहां चेटीचंड महोत्सव में राधे मां के स्वागत, आशीर्वचन, शोभायात्रा के दौरान इंदौर की सड़कों पर किए गए नृत्य और दबंग दुनिया परिसर में दबंग टीम को दिए आशीर्वाद को सोमवार रात 9.13 बजे तक 32700 लोग देख चुके हैं। लाइक कर चुके हैं।



जांच शुरू होते ही पाठक की मां-पत्नी ने छोड़ी कागजी कंपनियां

जबलपुर के दो युवकों को बनाया मोहरा
 इंदौर. विनोद शर्मा ।
आर्थिक रूप से मप्र के सबसे वजनदार विधायक संजय पाठक कटनी हवाला कांड मामले में भले कितनी ही सफाई पेश करे लेकिन मामले के तार उनसे जुड़ते जरूर हैं। हालांकि पुलिस, आयकर और प्रवर्तन निदेशालय(ईडी) के जांच शुरू करने के बाद पाठक और उनके समर्थकों ने इन तारों को काटने की कोशिश भी भरपूर की। कागजी तौर पर जितनी कामयाबी उन्हें मिली, उतनी ही नाकामयाबी भी मिली है।
कटनी हवाला कांड में बतौर मुख्य आरोपी सामने आए सतीश सरावगी, मनीष सरावगी, आयुष सरावगी और महेंद्र गोयनका जैसे नामों से पाठक परिवार ने कागजी किनारा कर लिया है। इसका बड़ा उदाहरण वे दर्जनभर कंपनियां हैं जिनमें पाठक की पत्नी निधि पाठक और मां निर्मला पाठक गोयनका व अन्य आरोपियों के साथ डायरेक्टर थी। जनवरी में जैसे ही ईडी ने दस्तावेज जब्त करके जांच शुरू की, निधि पाठक और निर्मला पाठक ने उन तमाम कंपनियों के डायरेक्टरशीप से इस्तीफा दे दिया। आज की तारीख में दोनों किसी कंपनी में डायरेक्टर नहीं है। उनकी जगह इंट्रड्यूज किया गया है जबलुपर के दो नौजवानों को। 31 वर्षीय ऋृषि पिता विजय अरोरा और 31 वर्षीय ही वरूण पिता राजेंद्र गौतम को।
गोयनका बड़ी कड़ी
दबंग दुनिया ने ‘सरावगी के घर से मिला फर्जी कंपनियों का जखिरा’ शीर्षक से रविवार को प्रकाशित समाचार में महेंद्र गोयनका के नाम का खुलासा किया था। गोयनका तिरुपति जेम्स प्रा.लि,  अतिशा कंस्ट्रक्शन, जियोमिन इंडस्ट्री, रोशनी स्टील,  यूरो प्रतीक इस्पात और सयाना स्टील्स प्रा.लि. में डायरेक्टर है। उसके साथ शांतिभवन पाठक वार्ड कटनी निवासी निर्मला पाठक और निधि पाठक भी आधी कंपनियों में डायरेक्टर रही हैं।
गोयनका इनमें भी डायरेक्टर रहा
मां समलेश्वरी स्टील प्रा.लि.-अनुपपुर, आरबीएम फाइनेंस प्रा.लि.- पश्चिम बंगाल, सेव मिनिरल्स लि-हैदराबाद, टंडेम माइनिंग प्रा.लि.- रायपुर, एमआरए ग्लोबल-रायपुर, गीतांजली इस्पात-बिलासपुर, स्वस्तिक बिल्डमेट-रायपुर,  यूरो प्रतीक इस्पात-मुंबई,  नीरनिधि मार्केटिंग- जबलपुर, सायना एविएशन प्रा.लि.- रायपुर, रायपुर हैंडलिंग एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर- रायपुर, इन्फ्रासेस इन्फ्रास्ट्रक्चर- रायपुर और आरोप्लस इन्फ्रास्ट्रक्चर- रायपुर।
एक भी कंपनी में नहीं डायरेक्टर
मिनिस्ट्री आॅफ कॉर्पोरेट अफेयर्स के ग्वालियर कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार 30 दिसंबर 1949 को आनंदलाल गौतम के घर जन्मी निर्मला पाठक का डायरेक्टर आईडेंटिफिकेशन नंबर (डिन) 01940830 है। वे दिसंबर 2016 तक सात कंपनियों में डायरेक्टर थी, अभी किसी कंपनी में डायरेक्टर नहीं है। इसी तरह 4 अपै्रल 1974 को जन्मी विकास वाजपेयी की बेटी और संजय पाठक की पत्नी निधि भी आज किसी कंपनी में डायरेक्टर नहीं है। निधि के नाम पर पहला डिन 30 दिसंबर 2006 को जारी हुआ था तभी से वह अलग-अलग कंपनियों में डायरेक्टर रही हैं।
निर्मला पाठक
यश लॉजिस्टिक प्रा.लि. 12 अगस्त 2015
सायना एग्रीकल्चर प्रा.लि. 12 अगस्त 2015
अतिशा कंस्ट्रक्शन प्रा.लि. 12 अगस्त 2015
सायना स्टील प्रा.लि. 17 मार्च 2008
सायना इंडस्ट्री पा्र.लि. 13 अगस्त 2008
निर्मल छाया नेचर रिसोर्ट 17 अगस्त 2015
वाल्टर कमर्शियल प्रा.लि. 17 अगस्त 2015
निधि पाठक
यश लॉजिस्टिक प्रा.लि. 7 मार्च 2007
सायना एग्रीकल्चर प्रा.लि. 18 अक्टूबर 2010
अतिशा कंस्ट्रक्शन प्रा.लि. 16 जनवरी 2006
सायना स्टील प्रा.लि. 20 अगस्त 2015
सायना इंडस्ट्री पा्र.लि. 17 अगस्त 2015
निर्मल छाया नेचर रिसोर्ट 14 जुलाई 2007
वाल्टर कमर्शियल प्रा.लि. 19 मार्च 2007
अब इन सभी कंपनियों में वरूण गौतम
23 जनवरी 2017 को डायरेक्टर नियुक्त : सायना स्टील्स और अतिशा कंस्ट्रक्श प्रा.लि.
31 जनवरी 2017 को डायरेक्टर नियुक्त : यश लॉजिस्टिक, सायना एग्रीकल्चर
1 फरवरी 2017 को डायरेक्टर नियुक्त : सायना इंडस्ट्री, निर्मल छाया और वाल्टर कमर्शियल
ऋृषि अरोरा
31 जनवरी को डायरेक्टर नियुक्त :  यश लॉजिस्टिक, सायना एग्रीकल्चर और अतिशा कंस्ट्रक्शन
1 फरवरी को डायरेक्टर नियुक्त : सायना स्टील्स, सायना इंडस्ट्री, निर्मल छाया और वाल्टर कमर्शियल


सरावगी के घर से मिला कागजी कंपनियों का जखिरा

कटनी हवाला कांड
जबलपुर, कटनी, नागपुर, कोलकाता, रायपुर में फैलाया जाल
इंदौर. विनोद शर्मा।
कटनी हवाला कांड मामले का मुख्य आरोपी सतीश सरावगी कटनी, जबलपुर और नागपुर के पतों पर पंजीबद्ध अलग-अलग कंपनियों में डायरेक्टर है। सरावगी के भागीदारों और उनकी डायरेक्टरशीप वाली कंपनियों की फेहरिस्त भी लंबी है। शुरुआती जांच के अनुसार यह सभी कंपनियों दस्तावेजी होते हुए फर्जी हैं। इसका खुलासा शनिवार को कटनी में सरावगी के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की गई छापेमार कार्रवाई के दौरान हुआ। कार्रवाई के दौरान बड़ी तादाद में दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
शनिवार को टीम ने सतीश सरावगी के घर छापामारा। सतीश कटनी हवाला कांड का मुख्य आरोपी है जो पुलिस की गिरफ्त में है। सरावगी के घर से बड़ी तादाद में दस्तावेज बरामद किए गए है। बताया जा रहा है इन दस्तावेजों में कई फर्जी कटनी, जबलपुर, नागपुर और कोलकाता के पतों पर दर्ज कई कागजी कंपनियों की बड़ी फेहरिस्त विभाग के हाथ लगी है। इन कंपनियों के माध्यम से न कोयला कारोबारी सतीश सरावगी और मनीष सरावगी के दस्तावेजों में नीरनिधि कंपनी में महेन्द्र गोयनका की पार्टनरशिप का खुलासा होने के बाद ईडी की टीम ने उसकी भूमिका की भी जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसी नीरनिधि कंपनी से चाइना समेत खाड़ी देशों में हुए करोड़ों रुपएके ट्रांजेक्शन का ब्योरा भी जुटा रही है।
ताकि पता चले कितनी फर्में, कितना ट्रांजेक्शन
इंदौर से पहुंची ईडी की टीम ने कटनी पहुंचते ही फर्जी खातों के प्रकरणों में दर्ज चार एफआईआर और रिकार्डों को खंगालना शुरू किया। बताया जा रहा है कि फिलहाल जांच का फोकस फर्मों में किए गए ट्रांजक्शन पर है। बैंकों के स्टेटमेंट की जांच कर यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि बोगस फर्मों से सरावगी बंधुओं की कितनी फर्मों में ट्रांजेक्शन हुआ है?
ऐसा है कंपनी ट्री...
सतीश सरावगी
कंपनी पता पंजीबद्ध
महाकालेश्वर माइन्स-मेटल कटनी 11/04/2011
रेनाइसेंस माइनिंग एंड मिनिरल नागपुर 6/03/2013
निराधी मार्केटिंग प्रा.लि. जबलपुर 14/08/2011
भागीदार
महाकाल माइन्स : संजय मिश्रा, अर्जून कुमार गोयल, चंद्रभूषण बजाज
रेनाइसेंस माइनिंग : कृष्णकुमार मुन्नीलाल गुप्ता, सुलभ ए.के.गुप्ता, महेंद्र कुमार गोयनका
निराधी मार्केटिंग : सुनीलकुमार अग्रवाल
महेंद्रकुमार गोयनका, कटनी
तिरुपति जेम्स प्रा.लि रायपुर
अतिशा कंस्ट्रक्शन कटनी
जियोमिन इंडस्ट्री जबलपुर
रोशनी स्टील रायपुर
यूरो प्रतीक इस्पात ठाणे
स्याना स्टील्स प्रा.लि. कटनी
संजय मिश्रा, रीवा
महाकालेश्वर माइन्स एंड मिनिरल्स रीवा
महाकालेश्वर माइन्स एंड मेटल कटनी
महाकालेश्वर स्टोन क्रशर प्रा.लि. रीवा
रेडरोस सप्लाई प्रा.लि. कोलकाता
मल्टीमोड डिस्ट्रीब्यूटर्स प्रा.लि. कोलकाता
भागीदारा में
पुनीत मिश्रा, अरूण गोयल, चंद्रभूषण बजाज,  सरीता गुप्ता, आयुश सरावगी। ्नरेडरोज और मल्टीमोड का पता कोलकाता का है जबकि दिल्ली के बजाज को छोड़कर बाकी सब डायरेक्टर मप्र के हैं।
आयुष पिता शरद सरावगी, कटनी
नताली माइन्स एंड मिनिरल्स कटनी
रेडरोस सप्लाई प्रा.लि. कोलकाता
शक्तिदाता मार्केटिंग प्रा.लि. कटनी
मल्टीमोड डिस्ट्रीब्यूटर्स प्रा.लि. कोलकाता
भागीदार
अभिषेक बागड़िया(गिरधरगोपाल अलॉय एंड स्टील में भी डायरेक्टर) और अल्ताफ हुसैन (साइना इनटुरिज्म में भी डायरेक्टर)।
अरूण गोयल, मुरार कटनी
महाकालेश्वर माइन्स एंड मेटल प्रा.लि.(कटनी),  इबरा मिनिरल्स प्रा.लि. (नागपुर), शाहिन मल्टी एक्सप्लोरेशन प्रा.लि. (कटनी), शाहिन माइन्स एंड मिनिरल्स प्रा.लि. (नागपुर), गुडरॉक मिनिरल्स प्रा.लि. (नागपुर), फास्ट स्पीड डेवलपर्स प्रा.लि. (कोलकाता),  रेडरोस सप्लाई प्रा.लि. (कोलकाता),  शक्तिदाता मार्केटिंग्स (कटनी), शिवार्शी कमर्शियल प्रा.लि. (कटनी),  ट्राइकलर्स इन्फ्रास्ट्रक्चर (कोलकाता)
भागीदार
सतीश सरावगी, संजय मिश्रा, अरूण गोयल, चंद्रभूषण बजाज, जावेद सिद्दिकी, असदल्ला खान, राजी अहमद, जकी अहमद, शाहिल सिद्दिकी, अथर सिदिद्की, सुभाषचंद्र बंसल, आयुश सरावगी, श्रीकमल बजाज,

33 करोड़ के एप्पल को 60 करोड़ का कर्जा

- बैंकों की मेहरबानी
इंदौर. विनोद शर्मा ।
नगर निगम और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट की आंख में धूल झौंककर बनाया गए अवैध एप्पल हॉस्पिटल पर बैंकों ने भी दिल खोलकर मेहरबानी बरसाई। इसका उदाहरण है हॉस्पिटल के नाम पर फ्रेंड्स यूनिटी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर प्रा.लि. को अलग-अलग बैंकों से मिला करीब 60 करोड़ का कर्ज है। वह भी तब जब अलग-अलग एजेंसियों की रेटिंग रिपोर्ट अस्पताल की प्रोजेक्ट कॉस्ट ही 33.14 करोड़ रुपए आंक रही थी।
कस्बा इंदौर के सर्वे नं. 1618/3/1, 1618/3/2, 1619/1 और 1619/2 की 18 हजार वर्गफीट जमीन पर बना है एप्पल हॉस्पिटल। मिन्सिट्री आॅफ कॉर्पोरेट अफेयर्स के अनुसार अस्पताल पर करीब 60 करोड़ का कर्ज है। इसमें करीब 52 करोड़ रुपए सिर्फ सेंट्रल बैंक आॅफ इंडिया से प्राप्त हुए। करीब साढ़े सात करोड़ रुपए यस बैंक की मुंबई ब्रांच से कर्ज लिया। जबकि अलग-अलग रिपोर्ट्स के अनुसार अस्पताल की अनुमानित प्रोजेक्ट लागत ही 33 करोड़ रुपए थी। मतलब अस्पताल शुरू हुए दो साल भी नहीं हुए कि प्रोजेक्ट लागत से दो गुना कर्ज लिया जा चुका है।
अलग-अलग रिपोर्ट में भी खुलासा
ब्रिकवर्क रेटिंग द्वारा 5 मई 2014 को जारी हुई रिपोर्ट के अनुसार 180 बेड के इस मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल की अनुमानित लागत 33.14 करोड़ है। इसे आधार मानते हुए सेंट्रल बैंक आॅफ इंडिया ने 24.13 करोड़ का लोन मंजूर किया था। पहली किश्त में 11.64 करोड़ रुपए जारी हुए। दूसरी में 12.49 करोड़ रुपए। कुछ ऐसी ही कहानी एसएमई रेटिंग एजेंसी आॅफ इंडिया लिमिटेड (स्मेरा) की दिसंबर 2016 को जारी रिपोर्ट  बयां करती है। स्मेरा रिपोर्ट के अनुसार 2015-16 में 2.90 करोड़ के घांटे के साथ कुल इनकम हुई 13.64 करोड़। 31 मार्च 2016 तक अस्पताल की नेटवर्थ 15.16 करोड़ थी इससे पहले वाले साल में यह आंकड़ा 8.82 करोड़ था।
दो रिपोर्ट और 20 बेड का अंतर
2014 की अपनी रिपोर्ट में ब्रिकवर्क रेटिंग ने बताया था कि अस्पताल 180 बेड का है जबकि दिसंबर 2016 में जारी स्मेरा की रिपोर्ट में 200 बेड का जिक्र है। दो साल में 20 बेड बढ़ गए।
कब किससे कितना लिया कर्ज
बैंक कब लिया कितना
सेंट्रल बैंक आॅफ इंडिया 20/10/2012 24.88 करोड़
सेंट्रल बैंक आॅफ इंडिया 29/02/2016 27.67 करोड़
यस बैंक लिमिटेड 13/03/2015 7.38 करोड़
बैंकों ने आंख बंद करके किया भरौसा
फ्रेंड्स यूनिटी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर प्रा.लि. को बेपनाह पैसा देने वाली बैंकों ने यह भी नहीं देखा कि अस्पताल की जिस बिल्डिंग पर इतना पैसा दिया जा रहा है असल में वह टीएनसीपी-नगर निगम के दस्तावेजों में अस्पताल है भी या नहीं। जिस जमीन पर अस्पताल बना है टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट ने 26 फरवरी 2011 को उसका कमर्शियल कॉम्पलेक्स के रूप में ले-आउट मंजूर किया था। माने वहां अस्पताल मंजूर ही नहीं हुआ। इतना ही अस्पताल को 30 हजार वर्गफीट निर्माण की अनुमति मिली और बनाया गया सीधे 60 हजार वर्गफीट। कभी भी नगर निगम की गाज गिरना तय है।
यह हैं फ्रेंड्स यूनिट के संचालक
मौजूदा डायरेक्टर : उमेश मित्तल, डॉ.मनोज शर्मा, दलजीतसिंह, राजेंद्रनगर अग्रवाल, हिंमांशु अग्रवाल, हरिसिंह पटेल और उर्वशी अग्रवाल
पूर्व डायरेक्टर : शैलेंद्रसिंह, ओमप्रकाश अग्रवाल, चारू राजन, गिरीश कवठेकर, अशोक सोनी, अमित सोनी और दीपक कुकरेजा 

बिना डायवर्शन-डेवलपमेंट के बिकने लगी इकोनॉमिक कॉरिडोर

होर्डिंग-झंडे लगाकर ही कटने लगे प्लॉट
इंदौर. विनोद शर्मा ।
फिनिक्स इन्फ्रा वाले जितेश नशीने, फिनिक्श डेवकॉन के चंपू-चिराग, ईशान टाउनशीप वाले प्रमोद बारासिंघे, ग्रीनलैंड शेल्टर वाले अरविंद बंजारी सहित आधा दर्जन बिल्डर एक साल से प्लॉट के नाम पर धोखाधड़ी के आरोप में जेल में है या जमानत पर छुटे हैं। इन उदाहरणों और हर जनसुनवाई में आने वाली दर्जनों शिकायतों के बावजूद कॉलोनी विकास के नाम पर इंदौर में मनमानी जारी है। कलेक्टर के सख्त के आदेश के बावजूद मुरादपुरा में डायवर्शन के लिए आवेदन तक किए बिना ही इकोनॉमिक कॉरिडोर नाम की कॉलोनी में प्लॉट बेचे जा रहे हैं।
कलेक्टर पी.नरहरि के निर्देश और भूमि विकास अधिनियम के नियमों के अनुसार किसानों के एग्रीमेंट और होर्डिंग झंडे लगाकर प्लॉट नहीं बेचे जा सकते। इसके बाद भी मुरादपुरा गांव में 24 बीघा जमीन पर भाग्योदय डेवकॉन प्रा.लि. इकोनॉमिक कॉरिडोर नाम की कॉलोनी बेच रही है। चौकाने वाली बात यह है कि सिर्फ टाउंड कंट्री प्लानिंग से तथाकथित रूप से स्वीकृत टीएनसी के नंबर दिखाकर ही प्लॉट बेचे जा रहे हैं। अब तक एसडीएम कार्यालय सांवेर में जमीन के डायवर्शन संबंधित आवेदन तक नहीं किया गया। डेवलपमेंट अनुमति तो दूर की बात है।
टीएनसी नहीं सिर्फ अनुसंशा
कॉलोनी टीएनसी दिखाकर बेची जा रही है वहीं टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के आला अधिकारियों के अनुसार इंदौर सहित 90 गांव की जमीनों को शामिल करके मास्टर प्लान 2021 तैयार किया गया है। इन्हीं गांवों में मास्टर प्लान के अनुरूप अभिन्यास स्वीकृत किया जाता है। जो गांव प्लानिंग एरिया से बाहर है उन गांव में सिर्फ कॉलोनी की अनुसंशा की जाती है ताकि एसडीएम कार्यालय से डायवर्शन मिलने में दिक्कत न हो।
अब तक आवेदन नहीं मिला
पालिया जंक्शन (उज्जैन रोड) से अलवासा करीब ढ़ाई किलोमीटर है। अलवासा से दो किलोमीटर दूर है मुरादपुरा गांव जो कि सांवेर तहसील में आता है। जिस जमीन पर कॉलोनी काटी जाना है उस जमीन का अब तक डायवर्शन नहीं हुआ है। इसकी पुष्टि सांवेर में पदस्थ अधिकारियों ने भी की। डायवर्शन शाखा के अनुसार अब तक मुरादपुरा में कोई डायवर्शन नहीं हुआ है।
सभी अनुमतियां होर्डिंग पर जरूरी
मुरादपुरा में जहां इकोनॉमिक कॉरिडोर कट रही है उसका डायवर्शन नहीं हुआ है। नियमानुसार किसी भी कॉलोनी के होर्डिंग पर टीएनसी, डायवर्शन और डेवलमेंट जैसी सभी अनुमतियों का उल्लेख जरूर है। अब मामला संज्ञान में है, मौके पर जाकर जांच करेंगे।
दिनेश पटेल, आरआई
डायवर्शन
अब अनुमतियां ही लेंगे
भाग्योदय देवकॉन ओपीसी प्रा.लि. के डायरेक्टर प्रीतम बाथम और  अशोक हटकर-अभिनय हटकर की इकोनॉकि सिविलकॉन प्रा.लि. को बिकवाने वाले मुरादपुरा पंचायत के एक पदाधिकारी का कहना है कि टीएनसी हो गई। उसके बाद ही प्लॉट बुकिंग कर रहे हैं। आगे डायवर्शन और डेवलपमेंट की अनुमति भी ले लेंगे। उनका साफ कहना है कि दूसरे गांवों में भी तो कॉलोनियां कट रही है सरकार को वह नजर नहीं आती क्या?


मंजूरी 18 मीटर की, ताना 27 मीटर ऊंचा एप्पल

डॉक्टरों ने कर दी स्वीकृत नक्शे की सर्जरी
इंदौर. विनोद शर्मा ।
एप्पल हॉस्पिटल बनाने वाली  फ्रेंड्स यूनिटी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के संचालकों ने बिल्डिंग निर्माण में मनमानी के ऐसे कीर्तिमान स्थापित किए हैं जो टॉप क्लास बदनाम बिल्डर नहीं कर पाए। फिर मामला कमर्शियल पर्मिशन लेकर बनाया गये अस्पताल का हो या फिर बिल्डिंग की ऊंचाई में किए गए खेल का। दस्तावेजों की मानें तो ले-आउट 18 मीटर(60 फीट) ऊंची बिल्डिंग का मंजूर हुआ था जबकि बिल्डिंग बनी ॅकरीब 27 मीटर (90 फीट) ऊंची।
एप्पल हॉस्पिटल की तफ्तीश रोज नए राज उगल रही है।   इस कड़ी में दबंग दुनिया के हाथ जो दस्तावेजी प्रमाण लगे हैं उनके अनुसार 26 फरवरी 2011 को टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट ने कस्बा इंदौर के सर्वे नं. 1618/3/1, 1618/3/2, 1619/1 और 1619/2 की 0.170 हेक्टेयर जमीन पर 18 मीटर ऊंची बिल्डिंग का ले-आउट (1362-1366/एसपी/640/10/नग्रानि) मंजूर किया था। 18 मीटर मतलब 60 फीट। यदि एक फ्लोर की ऊंचाई 10 फीट है तो कुल छह मंजिल।
27 मीटर ऊंची बना दी बिल्डिंग
मौके पर जो बिल्डिंग बनी है वह 18 मीटर से ज्यादा ऊंची है। बिल्डिंग में तीन बेसमेंट हैं। ग्राउंड फ्लोर और ऊपर सात मंजिल। चूंकि बेसमेंट का उपयोग पार्किंग के लिए होता है इसीलिए उसे बिल्डिंग की हाइट में काउंट नहीं किया जाता। इसी तरह ग्राउंड फ्लोर पर पार्किंग है तो भी हाईट पहली मंजिल से काउंट होगी। यहां डबल ग्राउंड फ्लोर हैं।
यदि सामान्यत: 10 फीट हाइट है तो भी 20 फीट ऊंचा तो ग्राउंड फ्लोर ही है। इस पर औसत 10 फीट के हिसाब से सात मंजिलें। मतलब कुल 90 फीट ऊंचाई। इसकी पुष्टि नगर निगम द्वारा की गई नपती की रिपोर्ट भी करती है। हालांकि उसमें छह मंजिल का ही जिक्र है। सातवीं मंजिल गायब है।
पतों में भी पचड़ा, ताकि न आए पकड़
टीएनसीपी : कस्बा इंदौर सर्वे नं. 1618/3/1, 1618/3/2, 1619/1 और 1619/2
नगर निगम : प्लॉट नं. 127-1-3, पीपल्याराव
एमसीए : 15/1 ट्रांसपोर्टनगर
एमसीआई : 5/1 भंवरकुआं मेनरोड
जस्टडायल : 15/1 भंवरकुआं मेनरोड
यह हैं फ्रेंड्स यूनिट के संचालक
नाम पता
उमेश मित्तल जैतपुरा धार
डॉ.मनोज शर्मा 61 अग्रवालनगर
दलजीतसिंह आर-118-119 खातीवाला टैंक
राजेंद्रनगर अग्रवाल 27 मनीषबाग
हिंमांशु अग्रवाल ए-23 नवलखा कॉम्पलेक्स
हरिसिंह पटेल 9 कालिंदी कुंज
उर्वशी अग्रवाल एफ-7 शिवमोतीनगर

कॉम्पलेक्स की मंजूरी, बना एप्पल हॉस्पिटल

टीएंडसीपी और नगर निगम की आंखों में झौंकी धूल
इंदौर. विनोद शर्मा ।
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से लेकर नगर निगम और जिला प्रशासन तक की आंख में धूंल झौंकने के मामले में इंदौर के डॉक्टर भी बदनाम बिल्डरों से कम नहीं है। इसका बड़ा उदाहरण है एप्पल हॉस्पिटल। फ्रेंड्स यूनिटी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर प्रा.लि. के हॉस्पिटल की बिल्डिंग जिस प्लॉट पर खड़ी है उसका हॉस्पिटल के लिए कभी नक्शा ही पास नहीं हुआ है। कॉम्पलेक्स की मंजूरी लेकर अस्पताल बना डाला।
लगातार मिल रही शिकायतों के बाद जब दबंग दुनिया ने टीएंडसीपी और नगर निगम में कस्बा इंदौर के सर्वे नं. 1618/3/1, 1618/3/2, 1619/1 और 1619/2 की 0.170 हेक्टेयर (18258 वर्गफीट) के दस्तावेज खंगाले। कई चौकाने वाले तथ्य सामने आए। पता चला कि फ्रेंड्स यूनिटी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर प्रा.लि. के हॉस्पिटल जिस बिल्डिंग में करीब 180 बेड का सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल संचालित कर रहा है किसी भी नक्शे में उसे अस्पताल के रूप में परिभाषित नहीं किया गया है। 26 फरवरी 2011 को टीएंडसीपी ने वाणिज्यियक प्रयोजन के लिए ले-आउट मंजूर किया था।
मंजूर तो कॉम्पलेक्स हुआ था, अस्पताल बाद में बना
टीएंडसीपी से प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार राजेश पिता एमएल बंसल, बद्रीलाल बंसल, मोहनलाल बंसल, चंद्रकला बंसल, ममला बंसल और वर्षा बंसल के नाम से 26 फरवरी 2011 को टीएनसी हुई।
बाद में बंसल परिवार से फ्रेंड्स यूनिटी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर प्रा.लि. तर्फे डॉ. राजेंद्र पिता रामचरण अग्रवाल निवासी 21 मनीष बाग कॉलोनी ने खरीदी। 7 फरवरी 2012 को जारी नामांतरण प्रकरण 5 के बाद नामांतरण हुआ।
चूंकि 24 फरवरी 2011 को हुई टीएनसी की मियाद 25 फरवरी 2014 तक थी इसीलिए उसी टीएनसी को मान्य करते हुए डॉ. अग्रवाल ने निर्माण जारी रखा। नगर निगम ने 13 अपै्रल 2012 को बिल्डिंग पर्मिशन (0453) जारी की। अक्टूबर-नवंबर 2012 में बिल्डिंग का काम शुरू हुआ।
टीएंडसीपी के अधिकारियों की मानें तो आज दिन तक उक्त प्लॉट पर अस्पताल की टीएनसी नहीं की गई है। मंजूर कॉम्पलेक्स हुआ उसे बाद में अस्पताल में बदल दिया गया है।
कमर्शियल बिल्डिंग नहीं बन सकती अस्पताल
मप्र भूमि विकास अधिनियम और मास्टर प्लान 2021 के अनुसार कमर्शियल बिल्डिंग और अस्पताल के नियम अलग-अलग हैं। दोनों के फ्लोर हाइट भी अलग रहती है। अस्पताल पब्लिक सेमी पब्लिक (पीएसपी) के तहत मंजूर होता है। वाणिज्यिक भवन में ग्राउंड कवरेज 50 प्रतिशत तक मिलता है वहीं अस्पताल में ग्राउंड कवरेज 30 प्रतिशत से ज्यादा नहीं मिलता।
अस्पताल के लिए जरूरी जमीन
100 + बेड 4 से 6 हेक्टेयर
30-100 बेड 3 से 5 हेक्टेयर
0-30 बेड 2 से 4 हेक्टेयर
नर्सिंग होम 0.20 से 0.50 हेक्टेयर
अस्पताल के नियम
बेड संख्या ग्राउंड कवरेज एफएआर हाइट फ्रंट एमएओस तीन तरफा
100 + 30% 1.25 24 मीटर 15 मीटर 6-6 मीटर
30-100 30% 1.25 24 मीटर 15 मीटर 6-6 मीटर
0-30 30% 1.25 18 मीटर 12 मीटर 4.5-4.5 मीटर
हैल्थ सेंटर 30% 1.25 18 मीटर 12 मीटर 4.5-4.5 मीटर
नर्सिंग होम 30% 1.25 18 मीटर 12 मीटर 4.5-4.5 मीटर
पॉलीक्लीनिक 30% 1.25 18 मीटर 12 मीटर 4.5-4.5 मीटर
मंजूरी अनुसार
टोटल प्लॉट एरिया 1700 वर्गमीटर 100%
मंजूर ग्राउंड कवरेज 850 वर्गमीटर 50%
एमओएस एंड ओपन एरिया 850 वर्गमीटर 50 %
एफएआर 1.5
एमओएस
भंवरकुआं रोड की ओर 9 मीटर
खातीवाला टैंक की ओर 6 मीटर
ट्रांसपोर्टनगर की ओर 6 मीटर
ट्रांसपोर्टनगर रोड की ओर 6 मीटर