Friday, April 8, 2016

कुम्भ से पहले कब्जों का कलह sinhath 2016

साधुओं के प्लॉटों पर साधुओं का कब्जा
- मेला अधिकारी से लेकर थाने तक पहुंची शिकायतें
उज्जैन से विनोद शर्मा । 
सुंदरधाम आश्रम के महामंडलेश्वर बृजबिहारी दास को मंगलनाथ क्षेत्र में प्लॉट नंं. 203/5 और 203/9 आवंटित हुआ था। टिन शेड उखाड़कर इन प्लॉटों पर  तेरह भाई त्यागी नामक गुट के साधुओं  ने कब्जा कर लिया है। इतना ही नहीं, साधुओं ने ठेकेदार को भी धमका दिया है। ठेकेदार ने भी यह कहते हुए काम बंद कर दिया कि आप किसी और से काम करवा लो। महीनेभर से भटक रहे हैं लेकिन कब्जा हटाकर उन्हें प्लॉट दिलाने की हिम्मत न प्रशासनिक अधिकारियों ने की। न ही पुलिस ने।
सिर्फ बृजबिहारी दास ही नहीं ऐसे 22 अपै्रल से 21 मई के बीच उज्जैन सिहंस्थ के साक्षी बनने आए दर्जनों साधु हैं जो अर्से तक प्लॉट आवंटन के लिए परेशान रहे। अब प्लॉट पर हुए अवैधानिक कब्जे और कब्जेदारों से जुझ रहे हैं। मंगलनाथ जोन में ऐसे संतापित संतों को अधिकारियों के आगे-पीछे चक्कर काटते देखा जा सकता है। हालांकि अधिकारी यह कहते हुए उन्हें झिड़की दे रहे हैं कि प्लॉट की सुरक्षा की जिम्मेदारी आपकी है, हमारी नहीं।
साधुओं में हो रहा है झगड़ा..
सांदीपनि आश्रम के पास रामानंदी निर्मोही अखाड़े की जमीन और मंदिर है जो मेला कार्यालय से भी आवंटित है। बीते दिनों कुछ संत मौके पर पहुंचे और सामान फेंक कब्जा शुरू कर दिया। दोनों गुट के बीच मारपीट हुई। वाहनों में तोड़फोड़ हुई। बंदुकें तक निकली। बाद  में जीवाजीगंज पुलिस ने राजेंद्रदास, रामजीदास और उनके साथियों के खिलाफ धारा 427, 451 ,32, 506  और 34 के तहत केस दर्ज किया। बंदूकें कब्जे में ली।
एक का प्लॉट दूसरे को...
काम से जल्दी मुक्त होने के लिए पिछले सिंहस्थ की सूची को आधार बना कर उन साधु संतों को वहीं जमीन आवंटित कर दी है, जहां पिछले सिंहस्थ में जमीन दी गई थी। नंबरिंग उट पटांग है।  महंत सुखरामदास महाराज ने बताया कि जो प्लॉट आवंटित किया था वहां पहले किसी संत का आश्रम बन रहा था। बीते सिंहस्थ हमें जिस नंबर की जमीन दी थी वह भी बदल गया जबकि बाकी का वही नंबर है।
बुनियादी सुविधा का भी संकट
मंगलनाथ में जमीन पाने के बाद भी कई संत सुविधाओं के लिए खड़े नजर आ रहे हैं। कहीं जमीन आवंटन के बावजूद जमीन बराबर नहीं है। कहीं न नल के पते हैं, न ही बिजली के। न सुविधाघर के। महंत रामस्वरू ने बताया कि जमीन मिल गई है लेकिन पानी-बिजली नहीं है। पड़ौस में खेत है और किसान भला आदमी है जो पानी दे रहा है।
प्लॉट तो हम लेकर रहेंगे...
जो प्लॉट अलॉट हुआ है वही 2004 के सिंहस्थ में भी मिला था। इतने  सिंहस्थ किए हैं लेकिन इतनी अव्यवस्था और अराजकता कहीं नहीं दिखी। फरवरी में ही उज्जैन आ गए थे सोचा था जल्दी जल्दी आश्रम बना लेंगे लेकिन महीनाभर जमीन कब्जामुक्त होने के इंतजार में ही बीत गया। अधिकारी कहते हैं करते हैं देखते हैं। जमीन हम लेकर रहेंगे। अखाड़े से हैं। महामंडलेश्वर की उपाधि प्राप्त हैं।
महामंडलेश्वर बृजबिहारी दास
आसपास वाले ही जीम गए प्लॉट
मुझे प्लॉट नं. 269 दिया गया है। आवंटन के बाद जब मौके पर पहुंचे तो देखा कि एक तरफ से प्लॉट नं. 268 वाले संतों ने कब्जा कर लिया है तो दूसरी तरफ प्लॉट नं. 270 वाले कब्जा किए बैठे हैं। 269 के नाम पर अब कुछ नहीं बचा। पांच दिन से अधिकारियों को शिकायत कर रहे हैं लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं।
देवेंद्र राज, अयोध्या
एक का प्लॉट दूसरे को...
काम से जल्दी मुक्ति के लिए बीते सिंहस्थ के आधार पर संतों को प्लॉट दे दिए। कुछ को वही नंबर मिला। नंबरिंग उट पटांग है। जो प्लॉट आवंटित किया था वहां पहले किसी संत का आश्रम बन रहा था। बीते सिंहस्थ हमें जिस नंबर की जमीन दी थी वह भी बदल गया।
महंत सुखरामदास महाराज, अयोध्या
ऐसे साधुओं को बाहर करें ताकि शांति से मने सिंहस्थ
अखिल भारतीय श्री पंच दिगम्बर अनी अखाड़ा ने मेला अधिकारी को पत्र लिखकर प्लॉटों पर कब्जा करने और अशांति फैलाने वाले शंतों को बाहर करने की मांग की है। कहा  कि अखाड़े के सभी नागा/अतीत पंच की सहमति से अखाड़े की सदस्यता खत्म करके भक्तिदास गुरु गंगादास (पंचवटी नासिक), रामशरणदास गुरु (अयोध्यादास शांति आश्रम उज्जैन), रामजन्मदास शास्त्री और गुुरु प्रभुदास जम्बू (वृंदावन) को नासिक कुम्भ से बाहर कर दिया गया था। ये अखाड़े के नियम-परम्परा नहीं मान रहे थे। अब ये उज्जैन में भी अशांति फैला रहे हैं। कोई घटना होती है तो जिम्मेदार यही होंगे। अखाड़े के पदाधिकारी व पंच नहीं। इन्हें मेला क्षेत्र से बाहर करें।

नर्मदा ने बुझाई कान्ह की प्यास sinhastha 2016

जिस नदी को कभी श्राप कहने लगे थे उसी में कर रहे हैं स्नान
उज्जैन से विनोद शर्मा ।
उज्जैन से गुजर रही मोक्षदायनी शिप्रा से इंदौर की ओर ठीक चार किलोमीटर दूर राघो पीपल्या गांव है। इस गांव में अजब नजारा देखने को मिला। इस गांव में एक तरफ जहां कान्हं नदी के पानी को शिप्रा में मिलने से रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं वहीं दूसरी तरफ मिट्टी का डेम बनाकर इसी नदी में आ रहे नर्मदा के पानी को रोका जा रहा है ताकि कान्ह बायपास का काम प्रभावित न हो।
मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने जिस उम्मीद के साथ नर्मदा-शिप्रा लिंक परियोजना को मुर्तरूप दिया था परियोजना ने उससे बेहतर परिणाम दिए हैं। लिंक के माध्यम से मालवा की माटी तक पहुंची नर्मदा ने एक तरफ शिप्रा की प्यास बुझाई तो दूसरी तरफ सरकारी सख्ती के कारण छह महीने से सुखी पड़ी कान्ह की खाली गोद भी भर दी। हालात यह है कि कान्हं किनारे बसे जिन दो गांव के लोग अब तक गंदे पानी की बदबू से परेशान थे वे अब नदी में नहाते नअर आते हैं। अन्य कामों के लिए भी पानी इस्तेमाल कर रहे हैं।
कैसे पहुंचा पानी...
त्रिवेणी (शनि मंदिर, धेडिया गांव) में शिप्रा और कान्ह का संगम होता है। यहां मंदिर से 400 मीटर की दूरी पर मुक्तिधाम के पास एक स्टाप डेम बना है। नर्मदा का पानी छोड़े जाने के बाद से शिप्रा लबालब है। चूंकि आगे घाट के काम चल रहे हैं इसीलिए स्टॉप डेम पर पानी रोका गया है। चूंकि कान्ह नदी खाली थी इसीलिए स्टॉप डेम में जमा पानी अब कान्ह के खाली हिस्से में फैलता जा रहा है।
3.800 किलोमीटर तक पहुंचा पानी
नर्मदा का पानी तेजी से बढ़ रहा है। कुछ ही दिन में पानी त्रिवेणी से 4 किलोमीटर दूर स्थित गांव राघौ पीपल्या के पास (3.800 किलोमीटर) तक पहुंच चुका है। पानी पहुंचने से जहां ग्रामीण खुश है वहीं जल संसाधन विभाग की नींद उड़ी हुई है। इसीलिए यहां मिट्टी का स्टॉप डेम बनाकर पानी रोका जा रहा है। क्योंकि स्टॉप डेम से 400 मीटर दूर इंदौर की ओर ही कान्ह डायवर्शन का काम जारी है। काम 18 मीटरर की गहराई में हो रहा है। यदि पानी बढ़ा तो साइट चौक होना भी तय है। इसीलिए विभाग ने डेम से बाहर जाकर कान्ह नदी में मिल रहे नर्मदा के पानी को मोटर से खींचकर खेतों में छोड़ना शुरू कर दिया है।
कोई पुण्य किए होंगे, जो नर्मदा द्वार तक आ गई...
्नराघौ पीपल्या के लोगों का कहना है कि पहले तो गंदे पानी की बदबू से परेशान थे। खासकर शाम के वक्त। अब स्थिति ऐसी नहीं है। छह महीने से नदी सूखी थी लेकिन अब नर्मदा का पानी भी आने लगा है। हमने कोई पुण्य किए होंगे जो घर बैठे नर्मदा कान्ह के रास्ते दर्शन देने आ गई।
र्इंट भट्टे खींचने लगे पानी
गर्मी की आमद के कारण बोरिंग सूखने लगे हैं। ऐसे में नदी का बड़ा सहारा है। इसीलिए त्रिवेणी पार्क के पास और राघौ पीपल्या के पास स्थित बड़े-बड़े र्इंट भट्टों में नदी के पानी को इस्तेमाल किया जा रहा है जिसकी शिकायत भी बीते दिनों प्रशासन को की गई थी।

सहुलियतों के संकट का शाही संताप sinhastha 2016

सिंहस्थ मेला क्षेत्र में कहीं संत पानी-बिजली के लिए परेशान तो कहीं सुविधाघर के लिए
उज्जैन से विनोद शर्मा ।
सिंहस्थ में बुनियादी सहुलियतों और जमीन आवंटन का का काम जितना तेजी से चल रहा है उतनी ही सुस्त है अस्थाई आश्रम को उपलब्ध कराई जाने वाली सहुलियतों का काम। फिर मामला सुविधाघर के निर्माण का हो या फिर बिजली या पानी की उपलब्धता का। हालात यह है कि साधुओं को पानी के लिए खेत-खेत भटकना पड़ रहा है। सहुलियत के सवाल पर अधिकारी संतों को यही कहते नजर आते हैं कि स्वामी एक-दो दिन में हो जाएगा।
  दत्त अखाड़ा, काल भैरव और मंगलनाथ जोन में जमीन पाने के बाद भी कई संत सुविधाओं के लिए खड़े नजर आ रहे हैं। कहीं जमीन आवंटन के बावजूद जमीन बराबर नहीं है। न नल के पते हैं, न ही बिजली के। न सुविधाघर के। जबकि इन व्यवस्थाओं पर काम करते-करते मैदानी अमले को दो-तीन महीने हो चुके हैं।  सहुलियतें दिखती भी है तो वहीं जहां बड़े संतों या संस्थाओं का डेरा लगा है। मंगलनाथ क्षेत्र के महंत रामस्वरू ने बताया कि जमीन मिल गई है लेकिन पानी-बिजली नहीं है। पड़ौस में खेत है और किसान भला आदमी है जो पानी दे रहा है।
किसान का पानी और उसी की बिजली
हमें यहां दो महीने हो गए हैं। न लाइट की व्यवस्था है। न ही पानी की। न जगह बराबर करने की। आगे लिखकर देते हैं तो जवाब मिलता है महाराज जी भेजते हैं। पानी आगे पटेल के खेत से ला रहे हैं। बिजली भी किसान से ले रखी है।
मलखानदास त्यागी, राजस्थान
सिक्युरिटी डिपॉजिट जमा, फिर भी बिजली नहीं
एक महीना हो गया है उज्जैन आए। नासिक के कुम्भ में बड़ा इंतजाम था। नल, जल और मल का यहां बुलाने पर भी कोई नहीं सुनता। टंकी रखी है तो नल नहीं है। जैसा नाम था वैसा काम नहीं है। सिक्युरिटी डिपॉजिट जमा कर चुके हैं लेकिन आठ दिन से बिजली कनेक्शन नहीं मिला। दूसरों से बिजली मांगना पड़ रही है। बाकी काम भी फीनिशिंग टच तक नहीं पहुंचे।
महंत रामकिशोर दास
बड़ा भक्तमहल दिगम्बर अखाड़ा
अयोध्या
हम 8 मार्च से यंहा हैं और सुविधा घर का काम शुरू हुआ है अब। मजबूरन बाहर जाना पड़ा। टँकी रखी है लेकिन नल कनेक्शन नही मिला।

संतोषजनक नहीं है व्यवस्था
अभी संतोषजनक काम नहीं है। मूलभूत सुविधाओं को लेकर परेशान हैं। आवश्यक सुविधा पर्याप्त मात्रा में नहीं है। यत्र-तत्र कहीं है। अखाड़ों की राय के बिना जमीन दी। खालसा के बीच अन्य व्यक्तियों के आने से व्यवधान होगा। अखाड़ों को नेतृत्व करने में दिक्कत आएगी।
महंत कृष्णदास, अध्यक्ष
अखिल भारतीय श्री पंच दिगम्बर अनी अखाड़ा
यह है मूलभूत समस्याएं...
- पूरे मेला क्षेत्र में बहुतायत में सुविधाघ बनाए जा रहे हं लेकिन तीनों ही क्षेत्र में सुविधाघर बनाने की गति धीमी है। खासकर काल भैरव और मंगलनाथ क्षेत्र में। कहीं सिर्फ र्इंट का बेस बना है तो कहीं उस पर लोहे का स्ट्रक्चर खड़ा है। कहीं अंडरग्राउंड सीवरेज लाइन डाली जा रही है।
- इसी तरह हर प्लॉट को नल कनेक्शन भी दिए गए हैं। नल का काम अभी 20 प्रतिशत ही हुआ है। कहीं कागज पर कनेक्शन दिए जा चुके हैं जबकि मौके पर पाइप तक के पते नहीं है। कालभैरव और मंगलनाथ क्षेत्र में नल कहीं-कहीं दिखते हैं।
- देखने में तो तीनों प्रमुख जोन बिजली के खम्बों से पटे पड़े हैं लेकिन यहां खम्बों पर न करंट न कनेक्शन। कुछ ही डीपी ऐसी हैं जिनसे सप्लाई जारी है। बिजली के अभाव में प्लॉटों का समतलीकरण और कुटिया बनाने काम प्रभावित हो रहा है।
- जो सुविधाघर बनाए हैं उनके दरवाजे सिंहस्थ का आगाज होने से पहले ही दरकने लगे हैं।

सिंहस्थ ने बदली मंदिरों की सूरत sinhastha 2016

उज्जैन में 127 मंदिरों का जीर्णोद्धार अंतिम चरण में
महाकाल और मंगलनाथ में व्यापक काम, हरसिद्धि व नवगृह मंदिर भी बदले
उज्जैन से विनोद शर्मा।
सिंहस्थ 2016 को देखते हुए उज्जैन में जहां बुनियादी सुविधाओं पर व्यापक स्तर पर काम हो रहा है वहीं सवा सौ से अधिक बड़े-छोटे मंदिरों के स्वरूप को भी संवारा जा रहा है। निखारा जा रहा है। फिर बात महाकालेश्वर मंदिर परिसर की हो या फिर उत्तर दिशा में स्थित मंगलनाथ मंदिर की। हरसिद्धि मंदिर, काल भेरू  और नवगृह मंदिर सहित अन्य सभी मंदिरों में जीर्णोद्धार के काम तकरीबन फाइनल स्टेज पर है। सीविल वर्क पूरा हो चुका है। फिनिशिंग जारी है।
उज्जैन में इन दिनों हर गली और हर प्रमुख सड़क पर सिंहस्थ की तैयारियों पर जोरो पर हैं। शिप्रा नदी के किनारे घाट का विस्तार किया जा रहा है। पुराने घाटों को राजस्थान के लाल व गुलाबी पत्थरों से सजाया जा रहा है। इतना ही नहीं शहर और शहर के आसपास के तकरीबन 127 मंदिरों में जीर्णोद्धार व कायाकल्प जारी है। इसमें 84 महादेव मंदिर हैं जबकि 43 अन्य शासकीय मंदिर हैं। इनमें हरसिद्धि मंदिर, चिंतामन, मंगलनाथ, कालभैरव, सिद्धवट, गढ़कालिका, भर्तृहरि गुफा, शनि मंदिर, श्रीराम मंदिर व महाकाल मंदिर भी शामिल हैं। बड़े मंदिरों को छोड़कर बाकी मंदिरों को तकरीबन 10 करोड़ रुपए की लागत से संवारा जा रहा है। 100 से अधिक मंदिरों का कायापलट पूरा हो चुका है। बाकी जगह फिनिशिंग टच जारी है। मंदिरों का रंग-रोगन, बाउंड्रीवाल, परिसर की फ्लोरिंग, गर्भगृह मार्बल व सभा मंडप की छत की रिपेयरिंग व वॉटरप्रुफिंग की जा रही है। इसके अलावा प्रमुख मंदिरों की अप्रोच रोड भी नई बनाई गई जबकि कुछ की अप्रोच रोड सुधारी गई है। पत्थरों ने उज्जैन के मंदिरों को भी गुलाबी रंग में रंग दिया है। राजस्थानी कलाकारों द्वारा पत्थरों पर उकेरी गई नक्कासी देखते ही बनती है।
300 साल बाद फिर संवरा महाकाल मंदिर
राजा भोज द्वारा1050 ईस्वी में बनवाए गए ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर का जीर्णोद्धार मराठा काल में करीब 300 साल पहले हुआ था। जीर्णोद्धार 1740 में राणोजीराव सिंधिया के दीवान बाबा रामचंद शेणवी ने करवाया था। उस वक्त मंदिर में काले पत्थरों का इस्तेमाल किया गया था। अब सिंहस्थ के मद्देनजर इसी मंदिर को स्वर्ण मंदिर की तरह सजाया जा रहा है। इसके लिए मंदिर में न सिर्फ स्वर्ण मंडित शिखरों का रिनोवेशन कर उन्हें चमकाया जा रहा बल्कि गर्भगृह को भी रजत(चांदी)मंडित किया जा रहा है। नंदीगृह के स्तंभों पर पीतल की नक्काशीदार परत चढाई जा रही है। करीब एक दर्जन कारीगर दिन-रात स्तंभों पर पीतल चढाने के काम में लगे हैं। कोशिश की जा रही कि स्वर्ण शिखरों की तरह नंदीगृह सोने की आभा से दमके। इसके साथ श्रद्धालुओं की प्रवेश और निकासी की भी अलग-अलग व्यवस्था की जा रही है ताकि सिंहस्थ में आने वाले लोग सहूलियत के साथ भोलेनाथ महाकाल के दर्शन कर सके। इसीलिए दर्शन के लिए टनल मार्ग बनाया है जिसकी तारीफ स्वयं मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान भी कर चुके हैं। मंदिर परिसर में ही एक म्यूजियम भी बनाया गया है। जहा ंभगवान महाकाल के विभिन्न मुखौटे, रथ, और अन्य वो सामग्री रखी जाएगी, जो अभी आम लोगों को देखने को नहीं मिलती थी। फेसिलिटी सेंटर बना है। 10 बेड का हॉस्पिटल बना है।
गर्भगृह को छोड़ बाकी सब बदला...
उज्जैन में महाकाल मंदिर के बाद यदि इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा में है तो वह है मंगलनाथ मंदिर। इस प्राचीन मंदिर में तीन साल से जीर्णोद्धार जारी है। तीन वर्षों में गर्भगृह को छोड़ मंदिर का तकरीबन पूरा हिस्सा गुलाबी पत्थरों से गुलाबी और दर्शनीय हो चुका है। पहले मंदिर का प्रवेश द्वार दक्षीण दिशा की ओर था जिसे तोड़ दिया गया है। नया प्रवेश द्वारा पूर्व दिशा की ओर बना है जो कि पूरी तरह नक्काशीदार लाल पत्थरों से बना हुआ है। मंदिर परिसर का क्षेत्रफल भी बढ़ गया है। परिसर में ही अव्यवस्थित दुकानों को व्यवस्थित करने के मकसद से मार्केट बन रहा है जहां हार-फूल और प्रसादी की दुकानें होगी। मंदिर में भीड़ मैनेजमेंट को देखते हुए जहां मुख्य द्वार पर दो तरफा सीढ़िया बनाई गई है वहीं विकलांग व बुजुर्गों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए रैम्प भी बनाया गया है।
मंदिर के मुख्य पूजारी दिप्तेश दुबे ने बताया कि तकरीबन 9 करोड़ की लागत से मंदिर का जीर्णोद्धार तकरीबन तीन साल पहले शुरू हुआ था। सिंहस्थ से पहले-पहले काम पूरा हो जाएगा। मंदिर का मौजूदा स्वरूप देखते ही बनता है। दर्शनार्थी भी इसकी तारीफ करते हैं। पहुंच मार्ग भी अच्छा हो गया है। सिद्धनाथ की ओर जाने के लिए नया पुल भी बना है।
नंदी भी बैठेंगे
पूर्व दिशा की ओर बने मंदिर के नवीनतम प्रवेशद्वार के दोनों ओर नंदी की आकर्षक प्रतिमाएं लगाई जाएंगी। धोलपुरी राजस्थानी पत्थरों से बनी नंदी की प्रतिमाओं का वजन एक-एक टन है।
बाल हनुमान मंदिर भी नया...
गढ़कालिका से काल भैरव की ओर जाते वक्त बायीं ओर बाल हनुमान मंदिर में जारी जीर्णोद्धार नजर आता है। मंदिर प्राचीन था जो अब तकरीबन पूरी तरह से नया और गुलाबी पत्थरों से लैस हो चुका है। काम जारी है। यहां हनुमानजी की प्रतीमा भी प्राचीन है। इंदौर से आकर अपनी आंखों के सामने मंदिर बनवा रही नीतू अग्रवाल ‘दीदी’ ने बताया कि मंदिर निर्माण तकरीबन 5 साल से जारी है। यहां किसी तरह के लोहे का इस्तेमाल नहीं किया है। बिम कालम की जगह यहां अलंगे इस्तेमाल किए गए हैं। सिंहस्थ से पहले-पहले मंदिर का काम पूरा हो जाएगा।
हरसिद्धि मंदिर
यहां भी रंग-रोगन हो चुका है। द्वार व्यवस्थित किया है। सामने की दुकानों को हटाकर सड़क पार रूद्रसागर की ओर शिफ्ट कर दिया है। चौराहे का सौंदर्यीकरण भी हुआ है।
चिंतामण गणेश...
सिंहस्थ की तैयारियां चिंतामण गणेश मंदिर तक भी पहुंची है यहां बीते वर्षों में शेड लगाया गया है ताकि श्रृद्धालू धूप या बरसात से बच सकें। इसके अलावा पश्चिम की ओर नया द्वार बनाया गया है जो कि मंदिर को नई सड़क से जोड़ता है।
काल भैरव
मंदिर का रंग-रोगन किया गया है। अंदर लाल पत्थर का काम भी जारी है। बाहर पार्किंग और मार्केट को व्यवस्थित किया गया है। वहीं एक सड़क काल भैरव से गढ़कालिका की ओर जाने के लिए निकाली गई है तो दूसरी काल भैरव से उन्हेल रोड पहुंचने के लिए।
संदिपनी आश्रम
अंकपात और मंगलनाथ रोड पर संदिपनी आश्रम है जिसका जीर्णोद्धार भी जारी है। यहां कुण्ड का सौंदयीकरण हुआ है। वहीं अंदर मंदिर परिसर का रंग-रोंगन भी हुआ है।
रामघाट के मंदिर
रामघाट को मंदिरों का क्लस्टर भी कहा जाता है यहां दर्जनभर से अधिक मंदिर हैं। शिप्रा नदी के दोनों ओर घांटों का जो निर्माण जारी है उन्हें गुलाबी रंग से रंगा गया है। इसीलिए शिप्रा के मंदिरों को भी साफ करके उनकी गुंबद गुलाबी कर दी गई है।
नवगृह मंदिर
इंदौर से उज्जैन की ओर आने पर डेंडिया गांव में नवगृह मंदिर है। सिंहस्थ ने इस मंदिर की काया भी पूरी तरह पलट दी। मंदिर के प्राचीन स्वरूप को यथावत रखा गया है। नौ रंगों में पूती मंदिर की गुम्बद नवरंगी हो गई हैं। सामने के मार्केट को दूर करके व्यवस्थित कर दिया गया है। पार्किंग भी व्यवस्थित कर दी है। घाटों का सौंदर्यीकरण हो चुका है। नदी और मार्केट के बीच पार्क भी बनाया जा रहा है ताकि श्रृद्धालु यहां बैठकर सुकुन की थोड़ी सांस ले सके। पेयजल और सुविधाघर की व्यवस्था भी दुरुस्त कर दी है। मंदिर परिसर में ही पूजा भवन भी बनाया जहां से एक तरफ कान्ह नदी का किनारा नजर आता है तो दूसरी तरफ से शिप्रा का किनारा।

गेरूवे घाटों से सजी शिप्रा sinhastha 2016

सहुलियत से जहां चाहे वहां करें स्नान
- छोटे-मोटे 15 घाट तैयार
उज्जैन से विनोद शर्मा ।
सिंहस्थ 2016 में तकरीबन पांच करोड़ श्रृद्धालुओं के आगमन का अनुमान लगाया गया है। सबसे ज्यादा जोर होगा शाही स्नान पर। इसीलिए प्रशासन ने उज्जैन में त्रिवेणी से लेकर सिद्धवट तक नदी किनारे घाटों की वृह्द श्रृंखला बना दी है ताकि परम्परागत घाटों पर ही श्रृद्धालु स्नान के लिए निर्भर न रहे। आज यह स्थिति यह है कि नदी  के दोनों ओर कुल मिलाकर 8.5 किलोमीटर लंबे घाट ही घाट नजर आते हैं। शहरी क्षेत्र में नदी की लंबाई ही 17 किलोमीटर है जबकि इसमें आबादी से दूर जंगल एरिया भी शामिल है। मतलब यह कि आबादी के नजदीक जितनी लंबी नदी है उतने ही लंबे घाट हैं।
यदि आप सिंहस्थ में भीड़भाड़ से दूर शिप्रा स्नान करना चाहते हैं तो जरूरी नहीं कि आप रामघाट या नृसिंह घाट जैसे परम्परागत स्थानों पर ही जाएं। इंदौर से आ रहे हैं तो आप त्रिवेणी और प्रशांति धाम पर भी स्नान कर सकते हैं। आगे चिंतामण घाट, गऊ घाट, भूखी माता घाट और कबीर घाट पर भी ‘शिप्रे हर’ कर सकते हैं। लालपुल से दत्त अखाड़े के सामने स्थित मुक्तिधाम के सामने तक लगातार 3.5  किलोमीटर की लंबाई में घाटों का क्लस्टर है। क्लस्टर में चिंतामण घाट, कबीर घाट, भूखी माता घाट, दत्त अखाड़ा घाट, रामघाट, नृसिंह घाट और सुनहरी घाट शामिल हैं।
प्राचीन घाटों को मिला नया स्वरूप
रामघाट, नृसिंह घाट और दत्त अखाड़ा घाट को लाल पत्थरों से सजाया जा रहा है। वहीं त्रिवेणी, सुनहरी घाट, मंगलनाथ और सिद्धवट घाटों को भी विस्तार और नवीनता मिली है।
सभी जगह स्नान की तैयारी
सुरक्षा की दृष्टि से घाटों के अंतिम सीढ़ी पर रैलिंग लगाने से लेकर किनारे पर बेरिगेटिंग (ताकि श्रृद्धालुओं की कतार को मैनेज किया जा सके) भी की जा रही है।
हर घाट पर नौ तैराक होंगे तैनात
घाट पर 24 घंटे तैराक नियुक्त रहेंगे। इसमें तीन होमगार्ड के होंगे। तीन सीविल सविल डिफेंस के ‘जो कि उज्जैन पुलिस मुहैया कराएगी’ होंगे। तीन वॉलेंटियर ग्रुप से। मतलब एक घाट पर कुल नौ तैराक। इनकी ड्यूटी को आठ-आठ घंटे  में ऐसे बांटा जाएगा कि 24 घंटे घाट पर तैराक तैनात नजर आए। तैराकों के साथ हर घाट पर मोटर बोट ओर किनारे पर प्राथमिक चिकित्सा टीम भी मौजूद रहेगी।
राम घाट
यह सबसे प्राचीन स्नान घाट है, जिस पर कुम्भ मेले के दौरान श्रद्धालु स्नान करना अधिक पसन्द करते हैं। यह हरसिद्धि मंदिर के समीप स्थित है। यहां घाट की लंबाई 450 मीटर से ज्यादा है।
त्रिवेणी घाट
इंदौर से उज्जैन जाते हैं तो सबसे पहले  त्रिवेणी घाट आता है जहां नवग्रह मंदिर है। यहां शिप्रा-कान्ह  (खान नदी) का संगम है। शिप्रा नदी के जल को स्वच्छ रखने के मकसद से खान नदी को बायपास किया जा रहा है। यहां 220 मीटर लंबा घाट है जो सजधज का तैयार है। यहां 400 मीटर दूर भी नदी के दोनों और घाट हैं जिनकी लंबाई 230 मीटर हैं। ये दोनों नए घाट हैं।
गऊ घाट
यह घाट चिंतामन रोड पर वेधशाला (जंतर-मंतर) के पास है। घांट 50 मीटर लंबा है। यहां वैधशाला के साथ ही मंदिर भी है।
मंगल नाथ घाट
महाकाल की तरह ही बड़ा मंदिर है मंगल नाथ। यहां मंदिर के पास 300 मीटर लंबा घाट हैं। पहले घाट सिर्फ मंदिर के पास थे लेकिन अब नदी के दोनों तरफ घाट बना दिए गए हैं। पुराने घाट भी विस्तारित कर दिए गए हैं।
सिद्धवट घाट
यह घाट प्रसिद्ध सिद्धवट मंदिर के पास शिप्रा नदी के बायें किनारे पर स्थित है। सिंहस्थ महाकुम्भ पर्व व धार्मिक पवित्र नहान पर आने वाले श्रद्धालुओं के स्नान के लिए संसाधन विभाग ने 150 मीटर लंबे घाट बनाए हैं। इस घाट पर पहुंचने का रास्ता सिद्धवट मंदिर के पास से है।
कबीर घाट
यह घाट बड़नगर रोड बड़ी रपट के दायीं तरफ नदी के बांये किनारे पर है। सिंहस्थ महाकुंभ पर्व व धार्मिक पवित्र स्नान पर आने वाले श्रद्धालुओं के स्नान के लिए घाट बनाया गया है।
ऋणमुक्तेश्वर घाट
ऋणमुक्तेश्वर मन्दिर के पास ही ये घाट बना हुआ है। इस घाट पर भगवान शिव के मुख्यगण वीरभद्र की प्राचीन मूर्ति  है और बरगद का पुराना पेड़ है जिसके नीचे ऋणमुक्तेश्वर महादेव मंदिर है। यहां तकरीबन 100 मीटर लंबा घाट है।
भूखीमाता घाट
यह घाट प्रसिद्ध भूखीमाता मन्दिर के पास पउर के बायें ओर कि किनारे पर है। महाकुम्भ को देखते हुए इस घाट का निर्माण किया गया है। घाट तकरीबन 200 मीटर लंबा है। चिंतामण रोड या नृसिंह घाट के लिए बनी नई रोड से होते हुए यहां पहुंचा जा सकता है।
दत्त अखाड़ा घाट
घाट बड़नगर रोड पर छोटी रपट के बायीं तरफ है। इस घांट का नवीनीकरण किया जा चुका है। अब लाल पत्थर लग रहे हैं। घाट की लंबाई तकरीबन 300 मीटर है।
चिन्तामण घाट
चिन्तामण मार्ग पर रेलवे के लालपुल के नीचे नदी के बायें किनारे पर बना है चिंतामण घाट। इस घाट को भी नया बनाया गया है। चिन्तामण मार्ग रोड से होते हुए यहां पहुंचा जा सकता है।
प्रशांति धाम घाट
त्रिवेणी घाट के बाद उज्जैन की ओर यह तीसरा बड़ा घाट हैं जो कि प्रशान्तिधाम मंदिर के पास नदी के दायें तट पर है। घाट उज्जैन-इन्दौर मार्ग से लगभग 1.5 किलोमीटर दूर दायीं तरफ महावीर बाग कॉलोनी और त्रिवेणी ऐवेन्यू के पीछे है। महावीर बाग कॉलोनी से लगा हुआ ही इसका रास्ता है।
सुनहरी घाट
घाट बड़नगर मार्ग पर छोटी रपट के दांयीं तरफ  है। सिंहस्थ को देखते ही इस घाट का नवनिर्माण किया गया है। छोटी रपट से होते हुए यहां पहुंच सकते हैं।
नृसिंह घाट
भूखीमाता मन्दिर के सामने कर्कराज मन्दिर के दायीं तरफ है यह घाट कर्कराज मन्दिर उज्जैन से निकलने वाली कर्क रेखा पर स्थित है। इसीलिए इस घाट का महत्व भी ज्यादा है। घाट का नवनिर्माण और विस्तार भी किया गया है।

सिंहस्थ में नहीं होगा दूध का संकट sinhastha

उज्जैन से विनोद शर्मा ।
सिंहस्थ 2016 में आने वाले श्रृद्धालुओं को पर्याप्त मात्रा में दूध की आपूर्ति बने रहे इसके लिए उज्जैन दुग्ध संघ  भी तैयार है। संघ ने 147 सांची पार्लर स्थापित कर दिए हैं और सिंहस्थ के दौरान एक वक्त में तकरीबन सवा लाख लीटर दूध मुहैया कराया जाएगा। जरूरत पड़ी तो इंदौर और भोपाल दुग्ध संघ की मदद भी ली जा सकती है।
सिंहस्थ मेला क्षेत्र में लगने वाले स्थान चिह्नित कर पार्लर लॉटरी पद्धति से आवेदकों को आवंटित कर दिए हैं। तकरीबन 100 पार्लर ने काम भी शुरू कर दिया है। जल्द ही 1 अपै्रल तक सभी पार्लर खड़े हो जाएंगे।  पार्लर पर श्रद्धालुओं को स्टेण्डर्ड दूध 6 लीटर, 1 लीटर एवं 500 एमएल पैक में उपलब्ध मिलेगा। 15 किलोग्राम, 5 किलोग्राम एवं 1 लीटर पैक  में सांची घी भी मिलेगा। यात्रियों की सुविधा के लिए पार्लर पर श्रीखण्ड, लस्सी, फ्लेवर्ड मिल्क, नमकीन मठ्ठा, मावा, पनीर, दही, सादी छाछ, पेठा, मिल्क केक, रसगुल्ला, गुलाबजामुन आदि सांची के सभी उत्पाद पर्याप्त मात्रा में सुलभ होंगे। सिंहस्थ हेतु अतिरिक्त मांग की आपूर्ति करने के लिए मशीनरी, टेंकर, केरेट, क्रेन की व्यवस्था भी अपै्रल के पहले सप्ताह में हो जाएगी। प्लांट के विस्तारीकरण का  काम भी 10 अपै्रल तक पूरा हो जाएगा।
चार जोन में 50 हजार लीटर दूध..
सिंहस्थ मेला क्षेत्र को 6 जोन में बांटा गया है। इसमें से  मुख्य हैं चार। दत्त अखाड़ा, काल भैरव, मंगलनाथ और महाकाल। इन चारों जोन पर एक वक्त में कुल 50 हजार लीटर का स्टोरेज रहेगा। यहीं से सप्लाई होगी। सप्लाई के दौरान बाकी दूध की आपूर्ति के लिए भी हर पॉइन्ट पर आठ-आठ व्यक्ति तैनात रहेंगे जो स्टोरेज कम नहीं होने देंगे। हर जोन को करीब-करीब 10 से 12 हजार लीटर दूध मिलेगा।
73 हजार लीटर पार्लर पर
जोन पर 50 हजार लीटर दूध की आपूर्ति के साथ ही 147 सांची पार्लर को 500-500 लीटर दूध दिया जाएगा। यानी हर दिन पार्लर से ही 73500 लीटर दूध मिलेगा।
60 हजार से 1 लाख लीटर खपत बढ़ेगी
एक वक्त में सवा लाख लीटर दूध का स्टोरेज रहेगा।  पैकिंग मशीन नई लग रही है जो 10 अपै्रल तक लग जाएगी। 60 हजार से 1 लाख लीटर दूध की खपत बढ़ने का अनुमान है। अभी हमारे पास 2 से 2.25 लाख लीटर का कलेक्शन है। जरूरत पड़ी तो इंदौर और भोपाल से भी दूध लेंगे।
ताकि न आए यात्रियों को दिक्कत
उज्जैन दुग्ध संघ यात्रियों को दूध, घी और दुग्ध पदार्थ पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराने के लिए कृत संकल्पित है। इस हेतु झोन में अधिकारियों की ड्यूटी 24 घंटे लगा दी गई है तथा दो अधिकारी सम्पूर्ण झोन में भ्रमण कर आने वाली समस्या का निराकरण करने के लिए तत्पर रहेंगे।
के.के.माहेश्वरी, सीईओ
उज्जैन दुग्ध संघ

ऊर्जा बजत का संदेश और भटकों को राह बताएंगे बिजली के खम्बे sinhastha 2016

सिंहस्थ के लिए बिजली कंपनी तैयार, पूरे मेला क्षेत्र में आई खम्बों की बाड़
उज्जैन से विनोद शर्मा ।
सिंहस्थ 2016 के दौरान मेला क्षेत्र और उज्जैन को रोशन रखने के साथ ही बिजली के खम्बे भटके लोगों को राह भी दिखाएंगे। बिजली आपूर्ति के लिए पूरी तरह कमर कसके मैदान में उतरी मप्र पश्चिम क्षेत्र बिजली वितरण कंपनी ने बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था करने के साथ ही खम्बों की मार्किंग भी शुरू कर दी है जिससे कि कोई भी व्यक्ति भटके नहीं।
अभी उज्जैन में बिजली की खपत 110 एमवीए हैं जबकि मेला क्षेत्र में ही 100 एमवीए खपत का अनुमान है। इसीलिए 500 एमवीए (26 नए सब स्टेशन 33/11 केवीए के हैं।) की क्षमता के सब स्टेशन विकसित कर मेला क्षेत्र में 11000 वोल्ट की 28 किलोमीटर लाइन डाली जा रही है। यहां 12 हजार 800 खम्बे लगाये गये हैं जिन्हें मिलाकर पूरे उज्जैन शहर में खम्बों की संख्या  33800 हो रही है।  इन खम्बों की मार्किंग की जा रही है। हर खम्बे की लोकेशन उसके नम्बर के साथ जीआईएस मेप पर अपलोड कर दी गयी है। यदि कोई राह भटकता है तो वह अपने परिचित को खम्बा नंबर बता सकता है। मोबाइल ऐप पर उस विशेष नम्बर द्वारा जीआईएस मेप के जरिये अपने परिचित की लोकेशन प्राप्त कर आसानी से मिल जाएगी
न सिर्फ दुधिया रोशनी, ऊर्जा बजत भी
मेला क्षेत्र के  इन खम्बों पर स्ट्रीट लाइट में एलईडी लाइट फिटिंग की गई है जिससे मेला क्षेत्र कम बिजली में ज्यादा दुधिया रोधन होगा। कुल 400 ट्रांसफार्मर्स लगना है जिसमें से 250 के करीब तैयार हो चुके हैं।
साधुओं को फ्री बिजली
मेला क्षेत्र के 13 अखाड़ों को 50 किलोवॉट तक बिजली नि:शुल्क दी जायेगी। इन अखाड़ों से कनेक्शन चार्ज भी नहीं लिया जायेगा। इसी तरह साधु-संतों को 30 किलोवॉट तक बिजली नि:शुल्क प्रदान की जायेगी। कनेक्शन के लिये मात्र 200 रुपये प्रति किलोवॉट का चार्ज लिया जायेगा।
ताकि न गुल हो बिजली
किसी कारण से बिजली जाती है तो उसका विकल्प भी तैयार हो रहा है।  यदि अति 33 केवी की सप्लाई बंद होती है, तो 3 मिनट बाद चार्ज कर दिया जाएगा। अन्यथा 33 केवी लाइन पर चलने वाले सब स्टेशंस को 2 मिनट में दूसरे 33 केवी फीडर से चालू कर दिया जाएगा। 33 केवी पॉवर ट्रांसफार्मर में खराबी आती है तो सब स्टेशन के 11 केवी फीडर को अन्य सब स्टेशन के 11 केवी फीडर से चेंज ओवर कर सप्लाई चालू कर दी जाएगी।
33 केवी सब स्टेशन से 11 केवी सप्लाई बंद होती है, तो लाइन 3 मिनट में चालू होगी। ट्रांसफार्मर में खराबी की स्थिति में सभी 6 जोन में चार-चार वितरण ट्रांसफार्मर ट्रॉली सहित मय केबल कट-आउट जुड़े हुए रखे रहेंगे। उन्हें तुरंत भेजकर 10 मिनट में बिजली सप्लाई चालू कर दी जाएगी।
जनरेट भी तैयार रहेंगे
मेला क्षेत्र में 50 स्थान पर आॅटो स्टार्ट जनरेटर रखे जाएंगे। यदि अति-उच्च-दाब 33 केवी, 11 केवी लाइन उप-केंद्र या वितरण ट्रांसफार्मर में कहीं भी खराबी आती है, तो मात्र 3 सेकंड में जनरेटर तथा आॅटो चेन से बिजली सप्लाई तुरंत चालू हो जाएगी।
1703 का मैदानी अमला रहेगा तैयार
सिंहस्थ को देखते हुए सिंहस्थ संभाग अलग बना है। मेला अवधि के दौरान अधिकारियों, कर्मचारियों सहित विभाग का कुल अमला 1 हजार 703 है। विद्युत विभाग का यह अमला सुरक्षा के लिये विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है।
कहां  कितना पैसा खर्च
भैरवगढ़  एचटी सब स्टेशन : 22.85 करोड़
ज्योतिनगर-रातड़िया विस्तार : 12.65 करोड़
मंगलनाथ सब स्टेशन : 3.47 करोड़
महाकाल उपकेंद्र : 1.25 कोड़
150 करोड़ में रोशन रहेगा उज्जैन
सिंहस्थ में हिजलि की दिक्कत नहीं रहेगी। न सिर्फ आवश्यकता से ज्यादा बिजली की व्यवस्था की बल्कि आपूर्ति बरकरार रखने के लिए भारी भरकम मैदानी अमला और बिजली का विकल्प भी तैयार है। करीब करीब 150 करोड़ रुपये खर्च होंगे रौशनी पर।
राजेंद्र शुक्ल ऊर्जा एवम् खनीज मंत्री