‘सरकार’ को दे दी शिकायतकर्ताओं को सीधा करने की सुपारी
- सरकारी जमीन पर जिसकी कॉलोनी का किया खुलासा, उसी की शिकायत पर पुलिस-प्रशासन ने कर दिया जीना मुश्किल
इंदौर. विनोद शर्मा ।
असरावद खुर्द की सरकारी जमीन पर कॉलोनी काटने वाले भू-माफिया गुंडों से शिकायतकर्ताओं पर जो दबाव नहीं बनवा पाए, अब उसकी जिम्मेदारी जरखरीद अफसरों को सौंप दी गई है। न नियम, देखा न कायदा, अफसर भी निकल पड़े शिकायतकर्ताओं को सबक सीखाने। जातिसूचक शब्दों की झूठी शिकायत पर एक तरफ पुलिस ने पूर्व सरपंच पर शिकंजा कसा तो दूसरी तरफ कब्जों के खिलाफ कमर कसकर बैठे मौजूदा सरपंच को सरकारी जमीन से गुमटी हटाने के मामले में धारा 40 का नोटिस थमाकर प्रशासनिक अधिकारियों ने पद से हटाने की तैयारी शुरू कर दी।
सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर चर्चा में आया असरावद खुर्द सरकारी सपोर्ट से भू-माफियाओं की जागिर बनता जा रहा है। मौजूदा सरपंच भोजराज चौधरी और पूर्व सरपंच सीताराम चौधरी व अन्य शिकायकर्ताओं की शिकायत पर दबंग दुुनिया ने कब्जों का खुलासा किया। कलेक्टर पी.नरहरि के आदेश पर एसडीएम श्रृंगार श्रीवास्तव, तहसीलदार राजकुमार हलधर और पटवारी आर.एस.पवार ने जांच की। जांच के दौरान सरकारी जमीन (सर्वे नं. सर्वे नं. 19/2, 19/3, 37/1/1, 37/1/3, 37/2, 171/1, 171/1/1, 171/1/2, 171/1/3, 171/1/4 और 172/1) पर चार साल में अवैध कॉलोनियां कट चुकी है। यहां तकरीबन 170 मकान बन चुके हैं। तकरीबन 50 का निर्माण जारी है। कब्जों की वीडियोग्राफी हो चुकी है। आधुनिक मशीन से जमीन का सीमांकन भी हो चुका है। हालांकि अब तक कार्रवाई शुरू नहीं हुई।
भू-माफियाओं की धमकी पर पुलिस मौन...
पूर्व सरपंच पिंकी राजौरिया के पति पप्पू राजौरिया, देवर दिनेश राजौरिया, समधी महेश भीमाजी, विनोद मोरे, अमरचंद, सिकंदर व अन्य ने कॉलोनी काटी है। इसका खुलासा सतत प्रकाशित समाचारों में किया। 14 दिसंबर को पप्पू राजौरिया और विनोद मोरे ने रिपोर्टर को तीन अलग-अलग फोन से धमकी दी जिसकी शिकायत डीआईजी संतोष सिंह और सीएसपी आजादनगर को की। रिकॉर्डिंग की सीडी भी दी लेकिन महीनेभर में पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। जब भी सीएसपी कार्यालय में फोन करके पूछा एक ही जवाब मिला, मेडम अभी छूट्टी पर हैं, लौटेंगी तब कार्रवाई होगी। शिकायत में उल्लेखित था कि पप्पू और उसके साथियोें ने शिकायतकर्ता और उसका साथ देने वाले हर शख्स को सबक सीखाने की बात कही है। इसीलिए भू-माफियाओं ने गुंडों का सहारा नहीं अफसरों की ही मदद ली।
जहां मिला पैसा, वहां काम हुआ ऐसा
सरकारी जमीन कब्जा मुक्त कराने की कल्पना करने वाले शिकायतकर्ताओं और उनके सहयोगियों को सरकार की तरफ से सराहना या प्रोत्साहन नहीं मिला। उलटा, पप्पू राजौरिया की झूठी शिकायत पर पहले आदिमजाति कल्याण थाने की पुलिस ने पूर्व सरपंच सीताराम चौधरी को पकड़ा। जैसे-तैसे अधिकारी कन्वेंस हुए और चौधरी को छोड़ा। इसके बाद 30 दिसंबर को तेजाजीनगर पुलिस ने पप्पू की शिकायत पर चौधरी को पकड़ा, फोन जब्त कर लिया। पूरा परिवार परेशान होता रहा। शुभचिंतकों की दखल के बाद चौधरी को देर रात छोड़ा गया।
भू-माफिया और अफसरों की मिलीभगत का दूसरा शिकार हुए मौजूदा सरपंच भौजराज चौधरी। 4 जनवरी 2016 को एसडीएम श्रृंगार श्रीवास्तव ने कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए मप्र पंचायती राज स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 40 के तहत चौधरी को सरपंच पद से हटाने की चेतावनी तक दे दी। चौधरी का कसूर यह है कि उसने सरकारी जमीन पर किसी महिला को गुमटी लगाने से मना कर दिया। इसी महिला की शिकायत पर एसडीएम ने कार्रवाई की और यहां तक कहा कि जब गुमटी हटा रहे हो तो सरकारी जमीन पर बने या बन रहे मकान क्यों नहीं हटाए।
क्यों सवालों के घेरे में ‘सरकार’
- 2009 से 2015 के बीच असरावद की सरपंच पिंकी राजौरिया रही। उनके पति और उनके देवर व समधी ने कई परिवारों को सरकारी जमीन पर प्लॉट बेचे। नौटरी की। दर्जनों शिकायतें हुई लेकिन एसडीएम कार्यालय ने कोई नोटिस नहीं दिया। क्यों?
- अवैध कॉलोनी यदि राजौरिया परिवार की नहीं थी तो उन्होंने प्रशासन पर कब्जों पर कार्रवाई के लिए दबाव क्यों नहीं बनाया? प्रशासन ने पिंकी को धारा 40 का नोटिस क्यों नहीं दिया?
- एमआर-10 पर सीलिंग की जमीन पर कॉलोनी काटने वालों के खिलाफ प्रशासन ने एफआईआर कराई है। आधा दर्जन कॉलोनाइजरों की गिरफ्तारी की। फिर असरावद में कब्जेदारों पर रहमोकरम क्यों?
- पूर्व सरपंच और मौजूदा सरपंच के खिलाफ हुई शिकायतों की जांच किए बिना कैसे उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई? जबकि वे आदतन अपराधी नहीं है, सरकारी जमीन के चिंतक हैं।
- सरकारी जमीन पर जिसकी कॉलोनी का किया खुलासा, उसी की शिकायत पर पुलिस-प्रशासन ने कर दिया जीना मुश्किल
इंदौर. विनोद शर्मा ।
असरावद खुर्द की सरकारी जमीन पर कॉलोनी काटने वाले भू-माफिया गुंडों से शिकायतकर्ताओं पर जो दबाव नहीं बनवा पाए, अब उसकी जिम्मेदारी जरखरीद अफसरों को सौंप दी गई है। न नियम, देखा न कायदा, अफसर भी निकल पड़े शिकायतकर्ताओं को सबक सीखाने। जातिसूचक शब्दों की झूठी शिकायत पर एक तरफ पुलिस ने पूर्व सरपंच पर शिकंजा कसा तो दूसरी तरफ कब्जों के खिलाफ कमर कसकर बैठे मौजूदा सरपंच को सरकारी जमीन से गुमटी हटाने के मामले में धारा 40 का नोटिस थमाकर प्रशासनिक अधिकारियों ने पद से हटाने की तैयारी शुरू कर दी।
सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर चर्चा में आया असरावद खुर्द सरकारी सपोर्ट से भू-माफियाओं की जागिर बनता जा रहा है। मौजूदा सरपंच भोजराज चौधरी और पूर्व सरपंच सीताराम चौधरी व अन्य शिकायकर्ताओं की शिकायत पर दबंग दुुनिया ने कब्जों का खुलासा किया। कलेक्टर पी.नरहरि के आदेश पर एसडीएम श्रृंगार श्रीवास्तव, तहसीलदार राजकुमार हलधर और पटवारी आर.एस.पवार ने जांच की। जांच के दौरान सरकारी जमीन (सर्वे नं. सर्वे नं. 19/2, 19/3, 37/1/1, 37/1/3, 37/2, 171/1, 171/1/1, 171/1/2, 171/1/3, 171/1/4 और 172/1) पर चार साल में अवैध कॉलोनियां कट चुकी है। यहां तकरीबन 170 मकान बन चुके हैं। तकरीबन 50 का निर्माण जारी है। कब्जों की वीडियोग्राफी हो चुकी है। आधुनिक मशीन से जमीन का सीमांकन भी हो चुका है। हालांकि अब तक कार्रवाई शुरू नहीं हुई।
भू-माफियाओं की धमकी पर पुलिस मौन...
पूर्व सरपंच पिंकी राजौरिया के पति पप्पू राजौरिया, देवर दिनेश राजौरिया, समधी महेश भीमाजी, विनोद मोरे, अमरचंद, सिकंदर व अन्य ने कॉलोनी काटी है। इसका खुलासा सतत प्रकाशित समाचारों में किया। 14 दिसंबर को पप्पू राजौरिया और विनोद मोरे ने रिपोर्टर को तीन अलग-अलग फोन से धमकी दी जिसकी शिकायत डीआईजी संतोष सिंह और सीएसपी आजादनगर को की। रिकॉर्डिंग की सीडी भी दी लेकिन महीनेभर में पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। जब भी सीएसपी कार्यालय में फोन करके पूछा एक ही जवाब मिला, मेडम अभी छूट्टी पर हैं, लौटेंगी तब कार्रवाई होगी। शिकायत में उल्लेखित था कि पप्पू और उसके साथियोें ने शिकायतकर्ता और उसका साथ देने वाले हर शख्स को सबक सीखाने की बात कही है। इसीलिए भू-माफियाओं ने गुंडों का सहारा नहीं अफसरों की ही मदद ली।
जहां मिला पैसा, वहां काम हुआ ऐसा
सरकारी जमीन कब्जा मुक्त कराने की कल्पना करने वाले शिकायतकर्ताओं और उनके सहयोगियों को सरकार की तरफ से सराहना या प्रोत्साहन नहीं मिला। उलटा, पप्पू राजौरिया की झूठी शिकायत पर पहले आदिमजाति कल्याण थाने की पुलिस ने पूर्व सरपंच सीताराम चौधरी को पकड़ा। जैसे-तैसे अधिकारी कन्वेंस हुए और चौधरी को छोड़ा। इसके बाद 30 दिसंबर को तेजाजीनगर पुलिस ने पप्पू की शिकायत पर चौधरी को पकड़ा, फोन जब्त कर लिया। पूरा परिवार परेशान होता रहा। शुभचिंतकों की दखल के बाद चौधरी को देर रात छोड़ा गया।
भू-माफिया और अफसरों की मिलीभगत का दूसरा शिकार हुए मौजूदा सरपंच भौजराज चौधरी। 4 जनवरी 2016 को एसडीएम श्रृंगार श्रीवास्तव ने कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए मप्र पंचायती राज स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 40 के तहत चौधरी को सरपंच पद से हटाने की चेतावनी तक दे दी। चौधरी का कसूर यह है कि उसने सरकारी जमीन पर किसी महिला को गुमटी लगाने से मना कर दिया। इसी महिला की शिकायत पर एसडीएम ने कार्रवाई की और यहां तक कहा कि जब गुमटी हटा रहे हो तो सरकारी जमीन पर बने या बन रहे मकान क्यों नहीं हटाए।
क्यों सवालों के घेरे में ‘सरकार’
- 2009 से 2015 के बीच असरावद की सरपंच पिंकी राजौरिया रही। उनके पति और उनके देवर व समधी ने कई परिवारों को सरकारी जमीन पर प्लॉट बेचे। नौटरी की। दर्जनों शिकायतें हुई लेकिन एसडीएम कार्यालय ने कोई नोटिस नहीं दिया। क्यों?
- अवैध कॉलोनी यदि राजौरिया परिवार की नहीं थी तो उन्होंने प्रशासन पर कब्जों पर कार्रवाई के लिए दबाव क्यों नहीं बनाया? प्रशासन ने पिंकी को धारा 40 का नोटिस क्यों नहीं दिया?
- एमआर-10 पर सीलिंग की जमीन पर कॉलोनी काटने वालों के खिलाफ प्रशासन ने एफआईआर कराई है। आधा दर्जन कॉलोनाइजरों की गिरफ्तारी की। फिर असरावद में कब्जेदारों पर रहमोकरम क्यों?
- पूर्व सरपंच और मौजूदा सरपंच के खिलाफ हुई शिकायतों की जांच किए बिना कैसे उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई? जबकि वे आदतन अपराधी नहीं है, सरकारी जमीन के चिंतक हैं।
No comments:
Post a Comment