पूरी तरह अमल से पहले सुधार और समझाइश जरूरी
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
राशन वितरण प्रणाली व्यवस्था को हाईटेक करने के मकसद से राशन दुकानों पर लगई गई आधुनिक मशीनें शासन और विभागों के साथ अब उपभोक्ताओं को भी ठेंगा दिखा रही है। मशीन ने वितरण प्रणाली को सुधारने के बजाए उलझा कर रख दिया। एक आदमी के राशन की इंट्री पहले 2 मिनट में हो जाती थी, 8-10 मिनट लग रहे हैं। 4जी के जमाने में 2जी से चल रहे सर्वर के अटकने से 10 दिनों में दुकानों से राशन नहीं बंट पाया है। हर दिन दुकान पर कतार नजर आ रही है सो अलग।
राशन के लिए शासन और खाद्य आपूर्ति विभाग ने आधुनिक पाइंट आॅफ सेल (पीओएस) मशीनें दुकानों पर उपलब्ध करवाई। इसमें समग्र आईडी नंबर डालने के बाद संबंधित व्यक्ति के अंगूठे का निशान लिया जाता है। लेकिन कई उपभोक्ताओं के आधार नंबर लिंक नहीं होने से फिंगर प्रिंट मैच नहीं हो पा रहे हैं। जबकि इसमें उपभोक्ता और उसके पारिवारिक सदस्य की आईडी और नाम सही दर्ज होना चाहिए। उपभोक्ताओं की मशीनी शिनाख्ती या पर्ची निकलने में हो रही देर से एक राशनकार्ड पर राशन देने में 10-12 मिनट लग रहे हैं। पाबंदी के कारण दुकानदार चाहकर भी रजिस्टर में इंट्री करके राशन नहीं दे पा रहे हैं।
अकाउंट नहीं तो राशन नहीं...
सुप्रीमकोर्ट ने राशन वितरण में आधार की अनिवार्यता रोकी तो सरकार ने बैंक अकाउंट की अनिवार्यता लाद दी। गेैस की तरह सरकार भले राशन पर नकद सब्सिडी न दे लेकिन राशन वितरण के लिए राशनकार्डधारकों के बैंक अकाउंट जरूरी कर दिए गए हैं। 1 अपै्रल से जिन जिलों में उपभोक्ताओं को नकद सब्सिडी मिलेगी उनमें भी इंदौर को नाम नहीं है, फिर राशन से वंचित रखने का क्या मतलब।
सेल्समेन या सहायक ही खोल पाएगा मशीन
मशीन रोज ओपन करना पड़ती है। यह सेल्समैन या फिर उसके सहायक के थम्ब इम्प्रेशन से ही खुलती है। सेल्समैन या उस्रे सहायक की अनुपस्थिति में कोई अधिकृत होने के बावजूद राशन नहीं बांट पा रहा है। एक सेल्समैन ने बताया कि वह तीन बार थम्ब इम्प्रेशन अपडेट करवा चुका है लेकिन मशीन उसके थम्ब को एक्सेप्ट ही नहीं कर रही है।
राशन देने के बाद भी स्टॉक वहीं का वही
मशीन की बड़ी समस्या यह है कि इसमें स्टॉक अपडेट नहीं होता। उदाहरण के तौर पर एक उपभोक्ता को राशन देने के बाद जब मशीन से पर्ची निकाली जाती है तो उस पर उपभोक्ताओं को दिए गए राशन की क्वांटिटी तो होती है लेकिन वह सेल्समैन के स्टॉक से डिडक्ट नहीं होती।
यह भी होना चाहिए...
- जब तक मशीन संतोषजनक काम नहीं करती तब तक मेन्युअल वितरण भी हो।
- सप्ताह में एक बार सेल्समैन से स्टॉक डिटेल ली जाए।
- थम्ब इम्प्रेशन अटकने की स्थिति में रजिस्टर पर साइन कराई जा सके ताकि लोग भटके न।
नेटवर्क बना परेशानी
पीओएस मशीन को आॅपरेट करने के लिए विभाग ने निजी दूरसंचार कंपनी से टाईअप किया है। कंपनी भी 2 जी नेटवर्क उपलब्ध करा रही है जबकि अब 3जी और 4जी का दौर है। 2जी के मुकाबले इनकी स्पीड ज्यादा है इससे उपभोक्ताओं को सहुलियत भी ज्यादा मिलती।
मेंटेनेंस भी नहीं...
मशीनें ठीक से काम नहीं कर रही। मेंटेनेंस का जिम्मा जिस डीएसके डिजिटल कंपनी को दिया गया है, वह मशीनों में आए दिन आ रही समस्याओं का निराकरण नहीं कर पा रही है। हर दिन दर्जनों शिकायतें आ रही है। पाइंट आॅफ सेल (पीओएस) न तो ठीक से काम कर रही और न ही उपभोक्ताओं के फिंगर प्रिंट रिड कर रही है। चौंकाने वाली बात तो यह है कि मशीनें आधार कार्ड से भी लिंक नहीं हो पा रही है।
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
राशन वितरण प्रणाली व्यवस्था को हाईटेक करने के मकसद से राशन दुकानों पर लगई गई आधुनिक मशीनें शासन और विभागों के साथ अब उपभोक्ताओं को भी ठेंगा दिखा रही है। मशीन ने वितरण प्रणाली को सुधारने के बजाए उलझा कर रख दिया। एक आदमी के राशन की इंट्री पहले 2 मिनट में हो जाती थी, 8-10 मिनट लग रहे हैं। 4जी के जमाने में 2जी से चल रहे सर्वर के अटकने से 10 दिनों में दुकानों से राशन नहीं बंट पाया है। हर दिन दुकान पर कतार नजर आ रही है सो अलग।
राशन के लिए शासन और खाद्य आपूर्ति विभाग ने आधुनिक पाइंट आॅफ सेल (पीओएस) मशीनें दुकानों पर उपलब्ध करवाई। इसमें समग्र आईडी नंबर डालने के बाद संबंधित व्यक्ति के अंगूठे का निशान लिया जाता है। लेकिन कई उपभोक्ताओं के आधार नंबर लिंक नहीं होने से फिंगर प्रिंट मैच नहीं हो पा रहे हैं। जबकि इसमें उपभोक्ता और उसके पारिवारिक सदस्य की आईडी और नाम सही दर्ज होना चाहिए। उपभोक्ताओं की मशीनी शिनाख्ती या पर्ची निकलने में हो रही देर से एक राशनकार्ड पर राशन देने में 10-12 मिनट लग रहे हैं। पाबंदी के कारण दुकानदार चाहकर भी रजिस्टर में इंट्री करके राशन नहीं दे पा रहे हैं।
अकाउंट नहीं तो राशन नहीं...
सुप्रीमकोर्ट ने राशन वितरण में आधार की अनिवार्यता रोकी तो सरकार ने बैंक अकाउंट की अनिवार्यता लाद दी। गेैस की तरह सरकार भले राशन पर नकद सब्सिडी न दे लेकिन राशन वितरण के लिए राशनकार्डधारकों के बैंक अकाउंट जरूरी कर दिए गए हैं। 1 अपै्रल से जिन जिलों में उपभोक्ताओं को नकद सब्सिडी मिलेगी उनमें भी इंदौर को नाम नहीं है, फिर राशन से वंचित रखने का क्या मतलब।
सेल्समेन या सहायक ही खोल पाएगा मशीन
मशीन रोज ओपन करना पड़ती है। यह सेल्समैन या फिर उसके सहायक के थम्ब इम्प्रेशन से ही खुलती है। सेल्समैन या उस्रे सहायक की अनुपस्थिति में कोई अधिकृत होने के बावजूद राशन नहीं बांट पा रहा है। एक सेल्समैन ने बताया कि वह तीन बार थम्ब इम्प्रेशन अपडेट करवा चुका है लेकिन मशीन उसके थम्ब को एक्सेप्ट ही नहीं कर रही है।
राशन देने के बाद भी स्टॉक वहीं का वही
मशीन की बड़ी समस्या यह है कि इसमें स्टॉक अपडेट नहीं होता। उदाहरण के तौर पर एक उपभोक्ता को राशन देने के बाद जब मशीन से पर्ची निकाली जाती है तो उस पर उपभोक्ताओं को दिए गए राशन की क्वांटिटी तो होती है लेकिन वह सेल्समैन के स्टॉक से डिडक्ट नहीं होती।
यह भी होना चाहिए...
- जब तक मशीन संतोषजनक काम नहीं करती तब तक मेन्युअल वितरण भी हो।
- सप्ताह में एक बार सेल्समैन से स्टॉक डिटेल ली जाए।
- थम्ब इम्प्रेशन अटकने की स्थिति में रजिस्टर पर साइन कराई जा सके ताकि लोग भटके न।
नेटवर्क बना परेशानी
पीओएस मशीन को आॅपरेट करने के लिए विभाग ने निजी दूरसंचार कंपनी से टाईअप किया है। कंपनी भी 2 जी नेटवर्क उपलब्ध करा रही है जबकि अब 3जी और 4जी का दौर है। 2जी के मुकाबले इनकी स्पीड ज्यादा है इससे उपभोक्ताओं को सहुलियत भी ज्यादा मिलती।
मेंटेनेंस भी नहीं...
मशीनें ठीक से काम नहीं कर रही। मेंटेनेंस का जिम्मा जिस डीएसके डिजिटल कंपनी को दिया गया है, वह मशीनों में आए दिन आ रही समस्याओं का निराकरण नहीं कर पा रही है। हर दिन दर्जनों शिकायतें आ रही है। पाइंट आॅफ सेल (पीओएस) न तो ठीक से काम कर रही और न ही उपभोक्ताओं के फिंगर प्रिंट रिड कर रही है। चौंकाने वाली बात तो यह है कि मशीनें आधार कार्ड से भी लिंक नहीं हो पा रही है।
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