- बड़वाह के पास पंपिंग स्टेशन और लाइन बिछाने का काम शुरू
- फरवरी 2018 है डेडलाइन
इंदौर-उज्जैन के 158 गांवो की 50 हजार हेक्टेयर जमीन तर करेगा 15 क्यूसेक पानी
इंदौर. विनोद शर्मा ।
सर्वे और डिजाइन की कागजी कवायदों के बाद 2157 करोड़ रुपए की नर्मदा-गंभीर लिंक परियोजना का मैदानी काम शुरू हो चुका है। इसकी शुरुआत बड़वाह के पास पंप हाउस-1 के निर्माण से हो चुकी है। कुछ स्थानों पर पाइप लाइन डालने का काम भी चल रहा है। इस प्रोजेक्ट के तहत नर्मदा-शिप्रा सिंहस्थ लिंक के मुकाबले तीन गुना ज्यादा पानी आएगा और 50 हजार हेक्टेयर जमीन को नई जान मिलेगी।
नर्मदा-शिप्रा लिंक का कॉन्ट्रेक्ट फरवरी 2015 में दिया था। काम 3 साल में (फरवरी 2018 तक) पूरा करना है। अनुबंध के अनुसार कंपनी ने फरवरी से दिसंबर के बीच उस पूरे क्षेत्र का सर्वे किया जहां लाइन डाली जाना है। पंप हाउस बनना है। इसके बाद डिजाइन बनाई गई। सरकार की मंजूरी के बाद कंपनी ने नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (एनवीडीए) की हरी झंडी मिलते ही बिना शिलान्यास की औपचारिकता का इंतजार के काम शुरू कर दिया। बड़वाह के पास पंपिंग स्टेशन (पीएस-1) का काम शुरू हो चुका है। जैसे नर्मदा-शिप्रा लिंक में सिसलिया वॉटर रिजर्वर बना है वैसा इस प्रोजेक्ट में नहीं बनेगा। नर्मदा-गंभीर लिंक परियोजना के तहत ओंकारेश्वर केनाल की राइट साइड (किलोमीटर 9.775) से डायरेक्टर पानी लिफ्ट होगा। बड़वाह से 3200 एमएम की एमएस पाइप मेन लाइन 34 किलोमीटर (16 किलोमीटर वन क्षेत्र और 18 किलोमीटर निजी-सरकारी जमीन) की आम्बाचंदन गांव तक डाली जाना है। एक तरफ पाइपों मोंडलिंग सिमरोल में शुरू हो चुकी है तो दूसरी तरफ बड़वाह के पास पाइप लाइन बिछाई जाने लगी है।
ऐसा होगा प्रोजेक्ट
- 3200 एमएम डाया कि लाइन डलेगी ओंकारेश्वर से आम्बाचंदन के बीच 34 किलोमीटर में।
- यहां से भागोदा तक 40 किलोमीटर 3200 एमएम पाइप लाइन डलेगी। यहां से दो अलग-अलग लाइन होगी। नदी के दोनों ओर। एक 75 किलोमीटर लंबी। दूसरी 57.5 किलोमीटर लंबी।
- इससे इंदौर-उज्जैन जिले की 6 तहसील और 158 गांवों की 50 हजार हेक्टेयर जमीन में सिंचाई होगी। आम्बाचंदन से यशवंत सागर के बीच इस पानी का औद्योगिक और घरेलू उपयोग होगा।
- वन क्षेत्र की 13.60 हेक्टेयर जमीन पर पाइप और बिजली लाइन डलेगी। पंप हाउस बनेगा। पाइपलाइन 1 मीटर की गहराई में डल रही है।
कितनी क्षमता है नहर की
जिस नहर से पानी लिफ्ट किया जाना है उसकी क्षमता 85 क्यूमिक है। इसमें 36 क्यूमिक पानी ओएसपी फ्लो केनाल में छोड़ा जाता है जबकि 15 क्यूमेक पानी ओएसपी लिफ्ट केनाल में। बचा 34 क्यूमिक पानी इसमें से 15 क्यूमेक पानी नर्मदा-मालवा-गंभीर लिंक प्रोजेक्ट को मिलेगा।
फायदा यहां...
तहसील गांव की संख्या
सांवेर 28
देपालपुर 53
उज्जैन 20
घटिया 33
बड़नगर 17
खाचरोद 7
(इन तहसीलों में पेयजल की व्यवस्था भी प्रोजेक्ट के माध्यम से होगी। इन गांवों की 50 हजार हेक्टेयर जमीन को पाइप्ड प्रोजेक्ट से सिंचित किया जाएगा ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पानी पहुंचे।)
- फरवरी 2018 है डेडलाइन
इंदौर-उज्जैन के 158 गांवो की 50 हजार हेक्टेयर जमीन तर करेगा 15 क्यूसेक पानी
इंदौर. विनोद शर्मा ।
सर्वे और डिजाइन की कागजी कवायदों के बाद 2157 करोड़ रुपए की नर्मदा-गंभीर लिंक परियोजना का मैदानी काम शुरू हो चुका है। इसकी शुरुआत बड़वाह के पास पंप हाउस-1 के निर्माण से हो चुकी है। कुछ स्थानों पर पाइप लाइन डालने का काम भी चल रहा है। इस प्रोजेक्ट के तहत नर्मदा-शिप्रा सिंहस्थ लिंक के मुकाबले तीन गुना ज्यादा पानी आएगा और 50 हजार हेक्टेयर जमीन को नई जान मिलेगी।
नर्मदा-शिप्रा लिंक का कॉन्ट्रेक्ट फरवरी 2015 में दिया था। काम 3 साल में (फरवरी 2018 तक) पूरा करना है। अनुबंध के अनुसार कंपनी ने फरवरी से दिसंबर के बीच उस पूरे क्षेत्र का सर्वे किया जहां लाइन डाली जाना है। पंप हाउस बनना है। इसके बाद डिजाइन बनाई गई। सरकार की मंजूरी के बाद कंपनी ने नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (एनवीडीए) की हरी झंडी मिलते ही बिना शिलान्यास की औपचारिकता का इंतजार के काम शुरू कर दिया। बड़वाह के पास पंपिंग स्टेशन (पीएस-1) का काम शुरू हो चुका है। जैसे नर्मदा-शिप्रा लिंक में सिसलिया वॉटर रिजर्वर बना है वैसा इस प्रोजेक्ट में नहीं बनेगा। नर्मदा-गंभीर लिंक परियोजना के तहत ओंकारेश्वर केनाल की राइट साइड (किलोमीटर 9.775) से डायरेक्टर पानी लिफ्ट होगा। बड़वाह से 3200 एमएम की एमएस पाइप मेन लाइन 34 किलोमीटर (16 किलोमीटर वन क्षेत्र और 18 किलोमीटर निजी-सरकारी जमीन) की आम्बाचंदन गांव तक डाली जाना है। एक तरफ पाइपों मोंडलिंग सिमरोल में शुरू हो चुकी है तो दूसरी तरफ बड़वाह के पास पाइप लाइन बिछाई जाने लगी है।
ऐसा होगा प्रोजेक्ट
- 3200 एमएम डाया कि लाइन डलेगी ओंकारेश्वर से आम्बाचंदन के बीच 34 किलोमीटर में।
- यहां से भागोदा तक 40 किलोमीटर 3200 एमएम पाइप लाइन डलेगी। यहां से दो अलग-अलग लाइन होगी। नदी के दोनों ओर। एक 75 किलोमीटर लंबी। दूसरी 57.5 किलोमीटर लंबी।
- इससे इंदौर-उज्जैन जिले की 6 तहसील और 158 गांवों की 50 हजार हेक्टेयर जमीन में सिंचाई होगी। आम्बाचंदन से यशवंत सागर के बीच इस पानी का औद्योगिक और घरेलू उपयोग होगा।
- वन क्षेत्र की 13.60 हेक्टेयर जमीन पर पाइप और बिजली लाइन डलेगी। पंप हाउस बनेगा। पाइपलाइन 1 मीटर की गहराई में डल रही है।
कितनी क्षमता है नहर की
जिस नहर से पानी लिफ्ट किया जाना है उसकी क्षमता 85 क्यूमिक है। इसमें 36 क्यूमिक पानी ओएसपी फ्लो केनाल में छोड़ा जाता है जबकि 15 क्यूमेक पानी ओएसपी लिफ्ट केनाल में। बचा 34 क्यूमिक पानी इसमें से 15 क्यूमेक पानी नर्मदा-मालवा-गंभीर लिंक प्रोजेक्ट को मिलेगा।
फायदा यहां...
तहसील गांव की संख्या
सांवेर 28
देपालपुर 53
उज्जैन 20
घटिया 33
बड़नगर 17
खाचरोद 7
(इन तहसीलों में पेयजल की व्यवस्था भी प्रोजेक्ट के माध्यम से होगी। इन गांवों की 50 हजार हेक्टेयर जमीन को पाइप्ड प्रोजेक्ट से सिंचित किया जाएगा ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पानी पहुंचे।)
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