- आयकर की कार्रवाई ने खोला जुगल‘बंदी’ का खेल
- नीचे से ऊपर तक के अधिकारियों के नाम
इंदौर. विनोद शर्मा ।
आयकर ने छापेमार कार्रवाई शराब कारोबारी शिवहरे समूह पर की लेकिन सबसे ज्यादा सदमे में है आबकारी विभाग और पुलिस महकमा। कार्रवाई के दौरान कई ऐसे दस्तावेजी प्रमाण आयकर अधिकारियों के हाथ लगे हैं जो शराब किंग और सरकारी अधिकारियों के ‘प्रगाढ़’ संबंध की पुष्टि करते हैं। इन दस्तावेजों के साथ रिपोर्ट लोकायुक्त को सौंपी जाएगी। यदि ऐसा हुआ पूरे आबकारी विभाग को शिवहरे की शराब महंगी पड़ेगी।
शिवहरे जितना बड़ा समूह है दस्तावेजों के मामले में उतना ही कच्चा और अगंभीर। कंपनी अपने कारोबार की डबल इंट्री रखी है। एक में वो जानकारी जो विभागों को दी जाती है और दूसरी में वो जानकारी जिसमें सभी काला-पीला रहता है। कार्रवाई के दौरान इनकम टैक्स को दोनों इंट्री मिल चुकी है। दूसरे दर्जे की असल इंट्री ने अधिकारियों को चौका दिया। उसमें आबकारी विभाग के एक-एक कर्मचारी-अधिकारी का नाम है। किसी की वार्षिक बंदी है। किसी की मासिक बंदी। बंदीदारों में पुलिस महकमे के अधिकारी भी हैं जो उन थानों पर पदस्थ हैं जहां से शराब की वैध-अवैध गाड़ियां निकलती है।
बताया जा रहा है की कार्रवाई के दौरान इनकम टैक्स जो रिपोर्ट बनाकर लोकायुक्त को सौंपेगा उसमें आबकारी विभाग के 90 फीसदी कर्मचारी-अधिकारियों के नाम का जिक्र है। लिहाजा लोकायुक्त के लिए भी इनके खिलाफ कार्रवाई चुनौती से कम नहीं होगी। चूंकि शिवहरे समूह का कारोबार इंदौर, ग्वालियर, शाजापुर, भोपाल, सतना, जबलपुर, बैतूल जैसे कई शहरों में फैला है इसीलिए सूची में वहां के अफसरों के नाम भी है।
राजनीतिक रसूखदार और नगर निगम के अफसर भी...
शिवहरे के बंदीदारों में राजनीतिक रसूखदारों के साथ ही नगर निगम, इंदौर के अफसरों के नाम भी हैं जिन्होंने विजयनगर में वाइनशॉप बनवाने में अहम भूमिका निभाई। या जो समय-समय पर शिवहरे के साथ नजर आते हैं। नगर निगम की टीम शिवहरे-भाटिया को रीयल एस्टेट कारोबार में खुले दिल से साथ देती है।
कभी सोचा नहीं था कार्रवाई होगी
अधिकारियों ने बताया कि शिवहरे समूह ने कारोबार को जितना अव्यवस्थित रूप से फैला रखा है उसे देखकर लगता है कि वह पूरी तरह आश्वस्त था कि कोई उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकता।
- नीचे से ऊपर तक के अधिकारियों के नाम
इंदौर. विनोद शर्मा ।
आयकर ने छापेमार कार्रवाई शराब कारोबारी शिवहरे समूह पर की लेकिन सबसे ज्यादा सदमे में है आबकारी विभाग और पुलिस महकमा। कार्रवाई के दौरान कई ऐसे दस्तावेजी प्रमाण आयकर अधिकारियों के हाथ लगे हैं जो शराब किंग और सरकारी अधिकारियों के ‘प्रगाढ़’ संबंध की पुष्टि करते हैं। इन दस्तावेजों के साथ रिपोर्ट लोकायुक्त को सौंपी जाएगी। यदि ऐसा हुआ पूरे आबकारी विभाग को शिवहरे की शराब महंगी पड़ेगी।
शिवहरे जितना बड़ा समूह है दस्तावेजों के मामले में उतना ही कच्चा और अगंभीर। कंपनी अपने कारोबार की डबल इंट्री रखी है। एक में वो जानकारी जो विभागों को दी जाती है और दूसरी में वो जानकारी जिसमें सभी काला-पीला रहता है। कार्रवाई के दौरान इनकम टैक्स को दोनों इंट्री मिल चुकी है। दूसरे दर्जे की असल इंट्री ने अधिकारियों को चौका दिया। उसमें आबकारी विभाग के एक-एक कर्मचारी-अधिकारी का नाम है। किसी की वार्षिक बंदी है। किसी की मासिक बंदी। बंदीदारों में पुलिस महकमे के अधिकारी भी हैं जो उन थानों पर पदस्थ हैं जहां से शराब की वैध-अवैध गाड़ियां निकलती है।
बताया जा रहा है की कार्रवाई के दौरान इनकम टैक्स जो रिपोर्ट बनाकर लोकायुक्त को सौंपेगा उसमें आबकारी विभाग के 90 फीसदी कर्मचारी-अधिकारियों के नाम का जिक्र है। लिहाजा लोकायुक्त के लिए भी इनके खिलाफ कार्रवाई चुनौती से कम नहीं होगी। चूंकि शिवहरे समूह का कारोबार इंदौर, ग्वालियर, शाजापुर, भोपाल, सतना, जबलपुर, बैतूल जैसे कई शहरों में फैला है इसीलिए सूची में वहां के अफसरों के नाम भी है।
राजनीतिक रसूखदार और नगर निगम के अफसर भी...
शिवहरे के बंदीदारों में राजनीतिक रसूखदारों के साथ ही नगर निगम, इंदौर के अफसरों के नाम भी हैं जिन्होंने विजयनगर में वाइनशॉप बनवाने में अहम भूमिका निभाई। या जो समय-समय पर शिवहरे के साथ नजर आते हैं। नगर निगम की टीम शिवहरे-भाटिया को रीयल एस्टेट कारोबार में खुले दिल से साथ देती है।
कभी सोचा नहीं था कार्रवाई होगी
अधिकारियों ने बताया कि शिवहरे समूह ने कारोबार को जितना अव्यवस्थित रूप से फैला रखा है उसे देखकर लगता है कि वह पूरी तरह आश्वस्त था कि कोई उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकता।
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