Sunday, August 24, 2025

कारोबारी कलह में घर में घुसकर चिराग जैन की हत्या, पार्टनर पर आरोप

 



बेटे ने की शिनाख्त, बोला विवेक अंकल आए थे घर में 

विवेक ने वीडियो जारी करके कहा चिराग ने मुझे धोखा दिया

शनिवार सुबह व्यापारी चिराग जैन की उनके पूर्व साझेदार विवेक जैन ने चाकू मारकर हत्या कर दी। कनाडिया थाना क्षेत्र स्थित मिलन हाइट्स बिल्डिंग में हुई इस वारदात को मृतक के बेटे ने अपनी आंखों से देखा।आरोपी की पहचान की। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। फरार आरोपी की तलाश में टीमें गठित कर दी। शुरुआती जांच में कारोबारी विवाद को वजह माना गया है। 

जानकारी के मुताबिक, चिराग जैन और आरोपी विवेक जैन बिजनेस पार्टनर थे। दोनों के बीच लंबे समय से व्यापार को लेकर विवाद चल रहा था। चिराग स्कीम-140 के पास स्थित मिलन हाइट्स में रहते थे। विवेक जैन मौके प पहुंचा। दोनों के बीच कहासुनी हुई। विवाद इतना बढ़ा कि विवेक ने घर में रखा चाकू उठाकर चिराग पर कई वार कर दिए। चिराग की मौके पर ही मौत हो गई। वारदात को अंजाम देने के बाद विवेक मौके से भाग निकला। 

कुछ देर बाद आसपास के लोगों ने देखा कि घर का गेट खुला हुआ है। अंदर खून फैला हुआ है। फौरन पुलिस को सूचना दी। घटना के वक्त चिराग की पत्नी पूनम जिम गई हुई थी। जब लौटी, तो देखा पति खून से लथपथ जमीन पर पड़ा था। परिवार में हड़कंप मच गया। तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। 

घटना के समय चिराग का 10 साल का बेटा घर पर मौजूद था। जिसने पूरे मामले को देखा। बाद में पुलिस को बताया कि पापा के बिजनेस पार्टनर विवेक अंकल ही घर में आए थे। बच्चे की गवाही के बाद पुलिस ने विवेक को मुख्य आरोपी मानते हुए केस दर्ज कर लिया। पुलिस ने चिराग के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी। घटनास्थल से कुछ अहम सबूत भी बरामद किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। 

लम्बे समय से अनबन थी चिराग-विवेक में 

एडिशनल डीसीपी अमरेंद्र सिंह के मुताबिक, चिराग जैन अपने परिवार के साथ रहते थे। उनकी सांवेर रोड पर पाइप की फैक्ट्री है। तिलक नगर में रहने वाले बिजनेस पार्टनर विवेक जैन से पिछले कुछ समय से चिराग का विवाद चल रहा था। शनिवार सुबह विवेक बात करने के बहाने चिराग के घर पहुंचा था।

आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों को भी खंगाल रहे

कनाडिया टीआई सहर्ष यादव ने बताया कि घटना सुबह करीब 6:30 से 7 बजे के बीच की है। दोनों के बीच किस बात को लेकर विवाद हुआ, ये जांच के बाद ही पता चलेगा। आरोपी बिजनेस पार्टनर फरार है। 

दोस्त ने कहा- गले-पेट पर चाकू के 10-12 घाव

चिराग के दोस्त दीपक जैन ने बताया कि जब हम पहुंचे तो चिराग खून से लथपथ थे। उनके गले और पेट पर 10-12 चाकू के निशान थे। चिराग- विवेक दोनों भिंड के रहने वाले थे। कारोबार के लिए इंदौर आए थे। कारोबार के लिए लोन लिया था। प्रॉपर्टी गिरवी रखी थी। जिसे  विवेक फ्री कराना चाहता था। चिराग ने मना कर दिया था। सांवेर रोड पर कारखाना है। चिराग ने वहां विवेक का आनाजाना प्रतिबंधित कर दिया था।  

चिराग ने दिया धोखा 

आरोपी विवेक जैन ने एक वीडियो जारी की। जिसमें बताया कि मैं 12 साल से अरियन सेल्स में चिराग के साथ पार्टनर हूं। 50% हिस्सेदारी है। मेरी संपत्ति भी लगी है। जिसका  निपटारा नहीं हुआ। चिराग ने मेरे साथ बेईमानी की। कई बार समझाया। नहीं समझा। मुझे कंपनी से ही बाहर कर दिया। हिसाब-किताब की बात करता हूं तो जवाब नहीं देता। 


Saturday, August 23, 2025

महेंद्र जैन और अरूण डागरिया की प्रिंसेसे एस्टेट को वैध का तमगा

 कॉलोनी सेल का कमाल, देने जा रहे हैं

2023 में इसी सेल ने हीना पैलेस वैध कर दी थी, फिर अवैध छोड़ना पड़ा 

इंदौर. विनोद शर्मा । 

नगर निगम की कॉलोनी सेल अवैध कॉलोनियों को वैध करने के नाम पर "कमाल' कर रही है। 2023-24 में कलेक्टर द्वारा सरकारी घोषित की गई जमीन पर प्रस्तावित हीना पैलेस को नियमित करने की नाकाम कोशिश की गई। अब उसी अंदाज में लसूड़िया की सबसे विवादित कॉलोनी प्रिंसेस एस्टेट काॅलोनी को बालेबाले वैध किया जा रहा है। ये कॉलोनी कुख्यात भू-माफिया महेंद्र जैन और उनके साले अरूण डागरिया की है। जिनके खिलाफ प्लॉट के नाम पर धोखाधड़ी के एक दर्जन केस लसूड़िया थाने में लम्बित है। 

नगर निगम के "गांधीवादी' अफसरों ने भ्रष्टाचार को दो हिस्सों में बांट दिया है। एक सीधे-सीधे करना पड़ता है। दूसरा करना नहीं पड़ता, हो जाता है। इसका बड़ा उदाहरण है कॉलोन सेल। जब से अवैध कॉलोनियों के नियमीतिकरण की प्रक्रिया शुरू हुई है, कॉलोनी सेल ने एक के बाद एक ऐसे जादू दिखा दिए, जिससे सब हैरान हैं। इस कड़ी में  19 अगस्त 2025 को अखबारों में जाहिर सूचना प्रकाशित कराई गई। इसमें सर्वे क्रमांक 257पार्ट, 258पार्ट, 259पार्ट, 260पार्ट, 261 पार्ट, 262पार्ट, 263पार्ट, 264/1पार्ट, 268 पार्ट, 269 पार्ट, 324पार्ट, 325पार्ट, 326पार्ट, 328पार्ट, 329 पार्ट, 330 पार्ट पर कटी प्रिंसेस एस्टेट कॉलोनी का ही जिक्र है।  

सूचना के माध्यम से कॉलोनी के प्लॉटधारकों को सूचित करते हुए कहा गया है कि वे विकास शुल्क की राशि अनुसार अनिवार्य रूप से जमा कराएं। इसमें नगरीय प्रशासन एवं आवास  विभाग द्वारा 18 जुलाई 2023 को जाी पत्र (2915/1452905/2023/18-3)  का हवाला देते हुए कहा गया है कि 150 रुपए/वर्गफीट की दर से विकास शुल्क जमा कराने वालों की कॉलोनी वैध की जाएगी। हालांकि नियमानुसार कॉलोनी में मकान होना भी जरूरी है लेकिन इस कॉलोनी में मकान नहीं बने हैं। न रहवासी है। न रहवासी संघ। बावजूद इसके  कुख्यात भू-माफियाओं ने कॉलोनी को वैध करने का आवेदन लगा दिया। जिसे ले-देकर कॉलोनी सेल के कर्ताधर्ताओं ने स्वीकार भी कर लिया।

इससे पहले हीना पैलेस में हुआ था खेल

अगस्त 2023 में ही नगर निगम ने श्रीराम गृह निर्माण की अशरफ नगर को वैध करने की तैयारी की थी। इमसें खजराना के सर्वे नंबर 106, 1018, 1019/2, 1020, 1023/1, 1024, 1027, 1030 सहित 1028, 1437, 1015 1435, 1004, 1527 सहित अन्य खसरों की कुल 8.861 हेक्टेयर यानी 20 एकड़ से अधिक जमीन शामिल की गई है। इनमें से अधिकांश खसरे हीना पैलेस के थे। जिसकी जमीन कलेक्टर मनीष सिंह सरकारी घोषित कर चुके थे।  

कॉलोनी सेल कई जादू सफलता पूर्वक दिखा चुका...

लोकायुक्त तक पहुंची एक शिकायत के अनुसार बिजलपुर की सनसाइन कॉलोनी और सिरपुर गांव की श्रीहरि विहार कॉलोनी भी वैध की गई। सनसाइन फार्म हाउस प्रोजेक्ट था जहां सिंधी समुदाय की अधिकांश हवेलियां बिना नक्शे या निगम से स्वीकृत नक्शे के विपरीत बनी है। इसी तरह श्रीहरि विहार में प्लॉटधारकों के पास न रजिस्ट्री है, न नोटरी। फिर भी कॉलोनी वैध हो गई। 

अक्षरधाम भी वैध करने की तैयारी 

इसी तरह 19 अगस्त 2025 को ग्राम मुसाखेड़ी के सर्वे नंबर 456/1, 456/2, 459, 460, 461, 461/1, 461/2, 463/5/4, 465/1, 465/3 की जमीन पर कटी अक्षरधाम कॉलोनी को वैध करने की तैयारी की गई। कॉलोनी से 1614 रुपए/वर्गमीटर पैसा विकास शुल्क मांगा गया। इसमें  1036 रुपए/वर्गमीटर आतंरिक विकास पर खर्च होगा और  578 रुपए/वर्गमीटर बाह्य विकास पर। तीन साल पहले कॉलोनी की शिकायतों के बाद अपर कलेक्टर डॉ. अभय बेड़ेकर ने जांच कराई थी। अमृता, मेघना और गणपति तीन सहकारी समितियों को मिलाकर करीब 90 एकड़ जमीन पर कुलभूषण मित्तल, अरविंद बागड़ी, रमेश जैन, जगदीश, राम ऐरन, किशोर गोयल, जगदीश टाइगर पर हेरफेर के आरोप लगे थे।  


Thursday, August 21, 2025

कलेक्टर ने फोड़ा बम...नौ दशक का होप ध्वस्त*

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*1000 करोड़ की 22.24 एकड़ जमीन सरकारी, कब्जा लिया* 
सरकारी जमीनों को कब्जा मुक्त कराने का कलेक्टर आशीष सिंह का अभियान जारी है। इस कड़ी में गुरुवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए कलेक्टर ने होप टेक्सटाइल की 86 साल पुरानी लीज निरस्त कर दी। सीमांकन कराकर तकरीबन 22 एकड़ जमीन का कब्जा ले लिया, जिसकी मौजूदा बाजार कीमत 1000 करोड़ से ज्यादा है। भाजपा के आयातित नेता अक्षय बम के कब्जे में रही यह जमीन जिला कोर्ट के पीछे है। 
  पिछले दिनों जमीन को लेकर प्रशासन ने नोटिस जारी किए थे, लेकिन प्रबंधन की तरफ से जवाब में कहा गया कि जमीन की लीज शासन द्वारा दी गई है। लीजधारक शासकीय पट्टेदार की श्रेणी में है, इस कारण उसके खिलाफ सुनवाई का अधिकार शासन या कलेक्टर के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने के कारण बुधवार को कलेक्टर ने सर्वे नंबर 282/2 की 22 एकड़ जमीन की लीज निरस्त कर दी। अपने आदेश में कलेक्टर ने पूर्व में इस तरह के मामले में हुई कोर्ट निर्णय का हवाला भी दिया गया।   
99 साल की लीज पर मिली थी जमीन 
सितंबर 1939 में नंदलाल एंड भंडारी संस को सर्वे नंबर 148, 151/1654, 148/1653 की 3.18 एकड़ और सर्वे नंबर 282/2 की 22.24 एकड़ जमीन इंडस्ट्रियल उपयोग के लिए दी गई। जमीन 99 साल की लीज पर पांच लाख रुपए में दी गई। पांच लाख की राशि 50-50 हजार की किश्तों में चुकाई जाएगी और साथ ही 6 हजार रुपए/साल किराया होगा। 1967 में सरकार के आदेश पर जमीन की सब लीज हुई। संकट के दौरान सरकार ने मजदूरों के हित में 1.35 करोड़ की गारंटी दी। बदले में जमीन का एक हिस्सा शासन में समाहित कर दिया। तय हुआ 8.24 एकड़ पर जो होप मिल है, वह चलती रहेगी। बाकि 14 एकड़ जमीन में से 2.60 एकड़ सड़क में जाएगी। बची 11.37 एकड़ में से 6.8 एकड़ सरकार के पास रहेगी। 4.5 एकड़ का व्यावसायिक-आवासीय उपयोग होगा। जो पैसा मिलेगा उससे मजदूरों का बकाया भुगतान होगा।
10.2 एकड़ पर न्यू सियागंज डेवलप करके बेच दिया
2012 में जिला प्रशासन को शिकायत मिली। बताया गया कि बम परिवार ने मनमाने तरीके से न्यू सियागंज बनाकर आधी जमीन बेच दी। पूर्व कलेक्टर आकाश त्रिपाठी ने जांच कराई। पता चला 4.5 एकड़ की व्यावसायिक-आवासीय अनुमति के विपरीत 10.2 एकड़ जमीन पर न्यू सियागंज डेवलप करके बेच दिया। अब 12 एकड़ जमीन ही खाली है। बम ने अपने जवाब में बताया कि 1996 के आदेश से पूरी जमीन मिल गई थी। न्यू सियागंज डेवलप करके मजदूरों की 14.25 करोड़ की देनदारी खत्म की। कलेक्टर कोर्ट इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुई और इसे लीज शर्तों का उल्लंघन माना। 
2012 में ही सरकारी हो गई थी जमीन 
2012 में कलेक्टर ने जमीन सरकारी घोषित की थी। बम कोर्ट चले गए। 
अप्रैल 2025 को कोर्ट ने कलेक्टर के आदेश को रद्द किया। कहा विधिवत सुनवाई नहीं हुई, फिर से सुने। 
कलेक्टर आशीष सिंह ने दो बार बम को नोटिस जारी किया। बम ने मामला कलेक्टर के क्षेत्राधिकार से बाहर का है। 
20 अगस्त को कलेक्टर ने लीज निरस्त कर दी। उसी आदेश पर एसडीएम जूनी इंदौर प्रदीप सोनी ने जमीन का कब्जा लिया।

अवैध आरवी क्लब पर कार्रवाई के नाम पर टालमटौल


चिंटू की चमक के आगे फीकी पड़ी आयुक्त की धमक
इंदौर से लेकर भोपाल तक आया दबाव 
इंदौर. विनोद शर्मा । 
नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे के वार्ड में बेधड़क चल रहे आरवी पुल एंड क्लब के खिलाफ नगर निगम का रवैया के ढूलमूल रवैये ने ये बात साबित कर दी है कि सत्ता पक्ष-विपक्ष कितनी ही दिखावटी लड़ाई लड़ ले, असल में एक है। इसीलिए तो चौकसे का संरक्षण प्राप्त इस अवैधानिक क्लब को तोड़ने में नगर निगम ने कोई रूचि नहीं ली। जबकि चौकसे अफसरों से लेकर महापौर तक की घेराबंदी का अवसर नहीं छोड़ते। 
 आरवी पुल एंड क्लब सुखलिया ग्राम के सर्वे नंबर 376/1 व अन्य खसरों की तकरीबन 90 हजार वर्गफीट जमीन पर है। जो कि राजस्व रिकार्ड में अशोक व विनोद पिता गोपाल चौधरी के नाम दर्ज है। निर्माण अवैध है। न भवन अनुज्ञा है, न ही संपत्ति कर चुका रहे हैं। इसका खुलासा हिंदुस्तान मेल ने 12 दिसंबर को किया था। तब निगमायुक्त शिवम वर्मा ने आश्वस्त करते हुए कहा था कि क्लब के खिलाफ कानूनन कार्रवाई की जाएगी। 
 इसके बाद आयुक्त ने उपायुक्त लता अग्रवाल को निर्देशित किया। अग्रवाल के निर्देश पर पहले ही क्लब संचालकों और क्षेत्रीय पार्षद से उपकृत भवन अधिकारी सुधीर गुलवे ने एक नोटिस चस्पा कर दिया था। नोटिस में मालिकाना हक व वैधानिकता संबंधित दस्तावेज मांगे गए थे लेकिन क्लब संचालकों ने "गांधीजी' को आगे कर दिया। खूद पीछे हो गए। 
भोपाल तक का प्रेशर डलवाया
बताया जा रहा है कि आरवी क्लब को बचाना क्षेत्रीय पार्षद व नेताओं के लिए नाक का विषय बन चुका है। इसीलिए उन्होंने भवन अधिकारी से लेकर आयुक्त तक पर भोपाल के नामचीनों के फोन का दबाव डलवा दिया है। इसीलिए जो कार्रवाई शिवम वर्मा ने तत्पर्ता से शुरू कराई थी वह ठंडे बस्ते में पड़ गई।
अब मामले की शिकायत लोकायुक्त
शिकायतकर्ता ने बताया कि भवन अधिकारी भ्रष्ट है और हर नवनिर्मित से वसूली करते हैं। उन्हें चार साल से चल रहा अवैध आरवी क्लब क्यों दिखेगा। हमने सोचा था कि आयुक्त परिणाममुलक कार्रवाई करते हैं, उनसे अपेक्षा थी लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। पहले से पार्षद का प्रश्रय प्राप्त क्लब संचालक अब उन्मादी हो चुके हैं। वे गरिया रहे हैं। कहते हैं जिसको जितनी शिकायतें करना है, कर ले। मेरा कुछ नहीं बिगड़ेगा। इसीलिए मामले की शिकायत लोकायुक्त को की है। जिसमें क्लब संचालक से लेकर अधिकारियों तक को पार्टी बनाया है।
अनुमति के नाम पर कुछ नहीं  
क्लब-मैिरज गार्डन भले चार साल से चल रहा हो लेकिन इसका डायवर्शन (क्र. 22085559949) हुआ 28 जून 2024 को। इसके लिए चालान क्र. 051/9999999/0029/06/24/178100 से 315040 रुपए जमा किए गए थे। फिर भी क्लब का संपत्ति कर खाता नहीं खुला है। डायवर्शन अलग विषय है लेकिन उक्त जमीन चूंकि खसरे की है इसीलिए वहां टीएनसी के साथ निगम से भवन अनुज्ञा होना जरूरी है। जो क्लब संचालकों के पास नहीं है।

नीतीश, ममता, आतिशी, भजनलाल पर भारी है मप्र का मोहन


सबसे रईस मुख्यमंत्रियों में पांचवें स्थान पर है डॉ.यादव 
तीन के पास है 60 से लेकर 910 करोड़
8 राज्यों के सीएम की संपत्ति 10 से 50 करोड़ के बीच है
18 सीएम ऐसे हैं जिनकी संपत्ति 1 से 10 करोड़ रुपए के बीच है
इंदौर. विनोद शर्मा । 
देश के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वर्तमान मुख्यमंत्रियों की संपत्ति की जानकारी सामने आई है। एडीआर की 2024 की रिपोर्ट की मानें तो मप्र के मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव संपत्ति और इनकम के मामले में दिल्ली, पंजाब, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में बने पहली बार के मुख्यमंत्री तो दूरी की बात तकरीबन दो दशक से बिहार के मुख्यमंत्री नितिश कुमार से भी कई गुना आगे हैं।  
 एडीआर ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि, प्रति मुख्यमंत्री की औसत संपत्ति 52.59 करोड़ रुपये है। भारत की प्रति व्यक्ति शुद्ध राष्ट्रीय आय 2023-2024 में लगभग 1,85,854 रुपये थी, जबकि एक मुख्यमंत्री की औसत आमदनी 13,64,310 रुपये है, जो भारत की औसत प्रति व्यक्ति आय का लगभग 7.3 गुना है। एडीआर के डेटा के मुताबिक, देश के 31 मुख्यमंत्रियों की कुल संपत्ति 1,630 करोड़ रुपये है।
 मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पास 42 करोड़ की कुल संपत्ति है। उनकी स्वयं की आय 24 लाख से अधिक है। उन्होंने बिजनस और एग्रीकल्चर से अच्छा पैसा बनाया है। उनके पास 32.1 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति है। वहीं, 9.9 करोड़ रुपये की चल सपत्ति है। इसके अलावा मोहन यादव के पास 8.5 करोड़ रुपये की लायबिलिटीज भी हैं। 2013 में उनकी संपत्ति 16 करोड़ थी जो बढ़कर 2018 में 31 करोड़ हो गई। 2013 से 2018 के अनुपात में 2018-2023 में उनकी संपत्ति नहीं बढ़ी। चुनाव आयोग को दिए गए ताजा हलफनामे में मोहन यादव ने अपनी संपत्ति का ब्योरा दिया था। इसके अनुसार मध्यप्रदेश के नए मुख्यमंत्री के पास 1.41 लाख रुपये कैश थे। जबकि उनकी पत्नी के पास 3.38 लाख रुपये की नकदी थी। बैंकों में जमा राशि की बात करें, तो अलग-अलग बैंकों में उनके और उनकी पत्नी के अकाउंट्स में 28,68,044.97 रुपये जमा थे। चुनावी हलफनामे के अनुसार, उन्होंने अपनी पत्नी के साथ कई कंपनियों के शेयर, डिबेंचर और बॉन्ड्स में 6,42,71,317 रुपये का निवेश किया हुआ है।
कितना कैश-कितना निवेश
चुनाव आयोग को दिए गए ताजा हलफनामे में मोहन यादव ने अपनी संपत्ति का ब्योरा दिया था। इसके अनुसार मध्यप्रदेश के नए मुख्यमंत्री के पास 1.41 लाख रुपये कैश थे। जबकि उनकी पत्नी के पास 3.38 लाख रुपये की नकदी थी। बैंकों में जमा राशि की बात करें, तो अलग-अलग बैंकों में उनके और उनकी पत्नी के अकाउंट्स में 28,68,044.97 रुपये जमा थे। चुनावी हलफनामे के अनुसार, उन्होंने अपनी पत्नी के साथ कई कंपनियों के शेयर, डिबेंचर और बॉन्ड्स में 6,42,71,317 रुपये का निवेश किया हुआ है।
नायडू सबसे रईस सीएम 
एडीआर के मुताबिक,आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू 931 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति के साथ भारत के सबसे अमीर मुख्यमंत्री हैं, जबकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सिर्फ 15 लाख रुपये की संपत्ति के साथ सबसे कम संपत्ति वाली मुख्यमंत्री हैं। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू 332 करोड़ रुपये से अधिक की कुल संपत्ति के साथ दूसरे सबसे अमीर मुख्यमंत्री हैं। वहीं कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया 51 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति के साथ इस सूची में तीसरे स्थान पर हैं।
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भारत के सबसे अमीर मुख्यमंत्री 
राज्य सीएम संपत्ति
आंध्रप्रदेश चंद्रबाबू नायडू 910 करोड़
अरुणाचल प्रदेश पेमा खांडू 332 करोड़ 
कर्नाटक सिद्धरमैया 51 करोड़
नागालैंड नेफ्यू रियो 46 करोड़ 
मप्र डॉ.मोहन यादव 42 करोड़
पुडुचेरी एन.रंगास्वामी 38 करोड़
झारखंड हेमंत सोरेन 25.33 करोड़
असम हेमंत विसवा सरमा 17.10 करोड़
महाराष्ट्र देवेंद्र फडणवीस 13.27 करोड़
त्रिपुरा माणिक साहा 13.10 करोड़
अन्य करोड़ पति सीएम 
गुजरात भूपेंद्र पटेल 8.22 करोड़
हिमाचल प्रदेश सुखविंदरसिंह सुक्खू 7.81 करोड़
हरियाणा नायब सैनी 5.80 करोड़
उत्तराखंड पुष्करसिंह धामी 4.64 करोड़
छत्तीसगढ़ विष्णु देव साह 3.80 करोड़
बिहार नीतीश कुमार 3.10 करोड़
उप्र योगी आदित्यनाथ 1.55 करोड़
मणिपुर बिरेन सिंह 1.47 करोड़
राजस्थान भजनलाल शर्मा 1.46 करोड़
दिल्ली आतिशी 1.41 करोड़ 
केरल पिनरई विजयन 1.18 करोड़
 सबसे कम संपत्ति वाले मुख्यमंत्री
राज्य सीएम संपत्ति
प.बंगाल ममता बेनर्जी 15.38 लाख
जम्मू-कश्मीर उमर अब्दुल्ला 55.13 लाख
उप्र योगी आदित्यनाथ 54.94 लाख
बिहार नीतीश कुमार 64.82 लाख
पंजाब भगवंत मान 97.10 लाख 

 किसी सीएम पर कितना कर्ज?
खांडू पर सबसे ज्यादा 180 करोड़ रुपये की देनदारी भी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सिद्धरमैया पर 23 करोड़ रुपये और नायडू पर 10 करोड़ रुपये से अधिक की देनदारियां हैं। इसमें यह भी कहा गया है कि 13 (42 प्रतिशत) मुख्यमंत्रियों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं, जबकि 10 (32 प्रतिशत) ने गंभीर आपराधिक मामले घोषित किए हैं, जिनमें हत्या के प्रयास, अपहरण, रिश्वतखोरी और आपराधिक धमकी से संबंधित मामले शामिल हैं।

18 बीघा जमीन को लेकर इंदौर-उज्जैन के बदमाशों में विवाद


फेंसिंग उखाड़ी, गेट तोड़ा, हवाई फायर हुए, पुलिस आंख पर पट्‌टी बांधे खड़ी रही
इंदौर. विनोद शर्मा । 
इंदौर में एक तरफ जमीन की कीमत आसमान छू रही है तो दूसरी तरफ जमीन पाने और कब्जाने के लिए गुंडे-बदमाशों से लेकर नेताओं तक होड़ लगी हुई है। दो दिन पहले इंदौर और उज्जैन के बदमाशों के बीच जमीन को लेकर जमकर जोरआजमाइश हुई। इसमें हवाई फायर भी हुए लेकिन प्रभावी नेता के दबाव में पुलिस ने मामला रफा-दफा कर दिया।  
 मामला सुपरकॉरिडोर से लगे पालाखेड़ी का है। यहां राधेलाल यादव की 18 बीघा जमीन है। जो उनके पिताजी बेच चुके हैं लेकिन यादव का कब्जा कायम है। उसकी मदद इंदौर-2 में कांग्रेस से भाजपा में आए एक नेता कर रहे हैं। जिन्होंने अपनी टीम बैठा रखी थी। इस बीच शनिवार को इंदौर-2 में ही रहने वाले कुछ बदमाश जमीन पर पहुंचे। उन्होंने कब्जेदार किसान और उसकी मदद करने वाले मैनेजर की पिटाई कर दी। डराने-धमकान के हिसाब से हितेश प्रधान "गोलू' और उसके सहयोगियों ने हवाई फायर भी किए। 
 सूचना उज्जैन पहुंची। जहां स्वयं को मुख्यमंत्री का रिश्तेदार बताने वाले नेता "जो राधे यादव के कब्जे को जायज मानते हैं, और उसको सुरक्षा का भरोसा दे चुके हैं', ने अपने गुंडे भेज दिए। दोनों पक्षों में जमकर हंगामा हुआ। सूचना मिलने पर गांधीनगर और बाणगंगा थाने का बल भी पहुंचा। पुलिस को देखकर सभी रवाना हो गए।  
पुलिस तमाशा देखती रही, कायम नहीं की
पुलिस मौके पर ऐसे पहुंची थी जैसे कोई मैच देखने आई हो। जैसे ही उज्जैन वालों का नाम आया, पुलिस के जवान किनारे हो गए। दूसरी तरफ के लोग स्वयं को कैलाश विजयवर्गीय और रमेश मेंदोला का समर्थक बताते रहे। इसीलिए पुलिस ने कार्रवाई न करने में भलाई समझी। 
एक बड़े बिल्डर की भूमिका भी सामने आई  
मामले में पालिया और पालाखेड़ी क्षेत्र में एक के बाद एक कॉलोनी काट रहे इंदौर-2 से राजनीतिक संरक्षण प्राप्त बिल्डर की भूमिका भी सामने आई है। जो इस जमीन पर कॉलोनी काटने की इच्छा रखता है। 
विवाद इसीलिए हुआ...
बताया जा रहा है कि 1980 में राधे के पिताजी जमीन बेच चुके थे। इसके बाद भी राधे ने कब्जा नहीं छोड़ा। बल्कि इंदौर-2 के आयातीत भाजपाई नेता की मदद से फेंसिंग करके गेट लगा दिया। कथित खरीदार की तरफ से जब प्रधान, राजा ठाकुर, सतीश ठाकुर, व अन्य लोग मौके पर पहुंचे तो उन्होंने गेट तोड़ दिया। फेंसिंग उखाड़ दी। सुरक्षाकर्मियों से लेकर मैनेजर तक से मारपीट की। बताया जा रहा है कि इस मामले में समझौता बैठक एक-दो दिन में होगी। जिसमें ठाकुरवाद हावी रहेगा। दूसरी तरफ राधेलाल को उज्ज्ैन के यादव से उम्मीदें हैं।

नैनोद की जमीन को लेकर ठाकुर-सेंगर परिवार आमने-सामने

मंगल को दंगल

शुक्रवार को ठाकुरों ने सेंगर के लोगों को मारा था, मंगलवार को सेंगरों ने उतार फेंकी ठाकुरी की मालिकी 
इंदौर. विनोद शर्मा । 
बड़ा बांगड़दा क्षेत्र में शुक्रवार शाम को हुई उड़दंग मामले में नया मोड़ मंगलवार सुबह आया। जब 20-25 लोगों को लेकर पहुंचे एक भाजपा नेता ने जमीन पर हंगामा किया। शुक्रवार को जिन लोगों ने उनके चौकीदार और मैनेजरों के साथ मारपीट करके भगा दिया और अपने नाम के बोर्ड लगा दिए थे उनके बोर्ड उखाड़कर फेंक दिए। ये पूरा मामला सीसीटीवी में रिकार्ड हुआ। पुलिस को सूचना दी गई लेकिन गांधीनगर पुलिस फिर कार्रवाई से किनारा कर गई। 
 जो वीडियो सामने आया है उसके अनुसार जमीन नैनोद की है। शुक्रवार को हुए विवाद के बाद एडवोकेट अमित सिंह पिता सुरेंद्र सिंह ठाकुर ने अपने नाम को जो बोर्ड लगाया था उस पर जमीन की पहचान सर्वे नंबर 294/1 के रूप में अंकित की गई थी। रेवेन्यू रिकार्ड में ये जमीन रियल ड्रीम क्रिएशन एलएलपी तर्फे पार्थ पिता मोहन सेंगर के नाम दर्ज है। शुक्रवार तक यहां सेंगर परिवार के सिपाही ही तैनात थे जिन्हें ठाकुरों ने मारकर भगा दिया था। अपने नाम की तख्ती लगाई। सीसीटीवी कैमरे लगाए। खम्बे खड़े किए। सोचा अब कोई विवाद नहीं होगा। 
 एेसा हुआ नहीं। मंगलवार की सुबह 10 से 11 बजे के बीच सेंगर परिवार के लोग 20-25 लोगों को लेकर मौके पर पहुंचे। परिवार का एक सदस्य दौड़कर गया और एक पेड़ पर टंगे अमित ठाकुर के नाम के बैनर को उखाड़कर अपने जेसीबी के पास लाकर फेंक दिया। इनकी पहचान गोलू सेंगर के रूप में की गई है। दूसरी तरफ काले कपड़ों में एक व्यक्ति पूरे अभियान को लीड कर रहे थे जिनका नाम उदल सेंगर बताया गया। 
जमीन एक, दावेदार तीन 
हिंदुस्तान मेल की तफ्तीश में पता चला कि नैनोद की 5.127 हेक्टेयर जमीन के मालिकाना हक को लेकर लम्बे समय से विवाद चल रहा है। एडवोकेट अमित ठाकुर और सुमित ठाकुर ने बताया कि उनके पिता सुरेंद्र ठाकुर को नैनोद निवासी किसान 1980 में ही जमीन बेच चुके थे। भरोसे में नामांतरण नहीं हुआ था। लम्बे समय से खेती हम ही कर रहे थे। पिता के मरने के बाद होलकरों की नीयत बदली और वे जमीन बाजार में बेचने निकल पड़े। इस बीच नामांतरण को लेकर हमने केस लगाया था। जो तहसील में खारिज हो गया था। बाद में एसडीएम कोर्ट में लगाया। जो विचाराधीन है। इस बीच मनमाने ढंग से होलकरों ने सेंगर परिवार को रजिस्ट्री कर दी।   
दूसरा धड़ा है सेंगर परिवार। जिसने भी जमीन के पेटे किसान से एग्रीमेंट किया था। दस्तावेजों की मानें तो सेंगर परिवार का कब्जा जायज नजर आता है। क्योंकि रेवेन्यू रिकार्ड में 29 अक्टूबर 2024 को ही जमीन का नामांतरण (प्र.क्र. 3236/अ-6/2024-25) सेंगर की कंपनी के नाम हो चुका है। नामांतरण 18 अक्टूबर 2024 को हुई रजिस्ट्री MP179152024A11245996 के आधार पर हुई। जो कि किशोर व सुभाष पिता गोविंद होलकर और संजय व नंदन पिता कमलाकर होलकर सभी निवासी 8 बाराभाई वैष्णव मंदिर के सामने ने की थी। इन चारों के पास 25-25 प्रतिशत जमीन थी। 
तीसरा धड़ा किसान का बताया जा रहा है। जमीन की ऊंची कीमतों ने रजिस्ट्री के बावजूद किसानों का जमीन के प्रति मोह खत्म नहीं होने दिया।  
पुलिस को देखकर तीतर बीतर हुए,कार्रवाई नहीं हुई 
शुक्रवार को बदमाशों को यह कहकर जमीन पर ले जाया गया था कि वहां पार्टी है। जब जमीन पर पहुंचे तो वहां 25-30 लोग आपस में चिल्लापुकार कर रहे थे। पीछे के एक हिस्से में खाना भी बन रहा था। विवाद बढ़ा। सूचना मिलते ही पुलिस के 20-25 जवान मौके पर पहुंचे। जिन्हें देखकर लाठी-ठंडे से लड़ रहे लोग तीतर-बीतर हो गए। पुलिस कुछ देर के लिए गई,फिर विवाद हुआ। तब भी मौके पर पहुंची पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। बस यही कहा कि तुम लोग समझने को तैयार ही नहीं हो। हमारी नौकरी खाओगे।  
मंगलवार को पुलिस का मौन
मंगलवार के विवाद की सूचना भी पुलिस तक पहुंची, पुलिसकर्मी पहुंचे भी लेकिन राजनीतिक रसूख के कारण किसी के पर किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं हुई। सिर्फ ईंधन को धुएं में उड़ाकर अपनी गाड़ी घुमा ली।