Thursday, August 21, 2025

चड्‌डी उतारकर जीतू ने अपने राजनीतिक आकाओं को भी नंगा कर दिया


20 साल में हर परिषद में दिखी दो नंबर की दादागिरी, इस बार एकलव्य पड़ा भारी
विनोद शर्मा । 

पार्षद कमलेश कालरा के घर पर हमला करवाने वाले जीतू यादव को संगठन ने चुल्हा दिखा दिया है। पुलिस का शिंकसा कस रहा है। पूरी गैंग फरार है। नि:शब्द है। जीतू की गैंग कालरा के बेटे की चड्‌डी उताकर अपने उन राजनीतिक आकाओं को सामाजिक रूप से नंगा कर दिया है जिन्होंने एक दर्जन मुकदमे दर्ज होने के बावजूद न सिर्फ जीतू को पार्षद बनाया बल्कि अड़ के एमआईसी में भी जगह दिलाई।
 इस पूरे घटना क्रम ने यह बता दिया कि देश के सबसे स्वच्छ शहर की राजनीति कितनी गंदी हो चुकी है। कालरा के घर पर हमला कराकर जीतू तीन दिन तक सीना ताने घुमता रहा। उम्मीद थी कि आकाओं की छत्रछाया में वह सेफ है। इंदौर-1 और इंदौर-2 के बड़े नेताओं का मौन वृत अब तक कायम है। उनके पास न घटना को लेकर कोई जवाब है, न ही जीतू को सियासी सीढ़ी चढ़ाने की ठोस वजह। 
 महापौर और उनकी टीम को घेरने का जिम्मा लिए बैठे नगर निगम के नेताप्रतिपक्ष चिंटू चौकसे तो दूर कांग्रेस का एक पार्षद उठकर यह कहने नहीं आया कि जो हुआ गलत हुआ। शायद डर है कि कुछ बोले तो उनके कारनामें बाहर न आ जाएं। कैलाश विजयवर्गीय पर आए दिन कटाक्ष कसने वाले कांग्रेस नेता सज्जनसिंह वर्मा के मुंह से एक शब्द नहीं फुटा। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी की इंदौर से जुड़े मामलों में खामौशी पार्टी कार्यकर्ताओं को हमेशा खलती है। पटवारी के खामौश होने की एक वजह उनके भाई नाना और जीतू की बेजोड़ दोस्ती भी हो सकती है। जिन लोगों ने कालरा के घर हमला किया था उसमें कुछ ऐसे भी थे जो नाना समर्थक थे। फिर पटवारी क्यों बोले? कांग्रेस को सोचना चाहिए कि वह हाथ आए मुद्दों पर यदि ऐसे चुप रही तो लोग उन्हें मौका देंगे भी नहीं। सिर्फ देवेंद्रसिंह यादव की बयानबाजी से कुछ नहीं होगा।    
 मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने घटना के विरोध में ट्वीट करके इंदौर के नेताओं के मुंह में जुबान दे दी। हाथ में अंगुली दे दी ताकि सांसद शंकर लालवानी जैसे लोग अपने ही समाज के व्यक्ति के लिए चार लाइन लिख सके। महापौर को भी कालरा की याद सीएम के ट्वीट के बाद आई। 
दो नंबर पर गृहण लगा हुआ है
आपराधिक कार्यकर्ताओं को संरक्षण देने की इंदौर-2 के विधायक रमेश मेंदोला की आदत उनके लिए गृहण साबित हो रही है। जिसके आगे उनकी व्यक्तिगत चमक फिकी पड़ जाती है। 2004 से 2024 तक जितनी भी परिषद रही, किसी न किसी पार्षद की हरकत उनके गले की फांस बनती रही। यही वजह है कि रिकार्ड मतों से जीत के बावजूद पार्टी उन्हें बड़ा मौका देने लायक नहीं समझती।  
तीखे प्रहार से हिली इंदौर-2 की जमीन 
इस पूरे घटनाक्रम में एक ही चेहरा हीरो बनकर उभरा। वो था एकलव्य गौड़। जिसके तीखे शाब्दिक तीरों ने बड़े-बड़े सियासतदानों का मुंह बंद कर दिया। एकल्व्य ही थे जो अकेले डटे थे। डटे हैं। जीतू की गिरफ्तारी तक डटे भी रहेंगे। यह कहना भी गलत नहीं होगा कि एकलव्य ने इंदौर-2 के जमें जकड़े नेताओं की जमीन भी हिला दी। एकल्व्य खुलकर जीतू का समर्थन करने वाले नेताओं के खिलाफ ऐलान-ए-जंग कर चुके हैं।

बहू की फर्जी साइन करके करवाता रहा काम, झूठा शपथ-पत्र देकर बना पार्षद


सामने आने लगे जीतू देवतवार(जाटव) के झूठ दर झूठ
11 अपराध दर्ज है, शपथ-पत्र में बताए दो
परिषद की बैठकों में एक साल भी नहीं आई थी पूर्व पार्षद प्रिया यादव
इंदौर. विनोद शर्मा ।
भाजपा पार्षद कमलेश कालरा के घर गुंडे भेजने वाले पार्षद जीतू जाटव (देवतवार) बड़े जादूगर निकले। उनके खिलाफ 11 आपराधिक मामले दर्ज हैं लेकिन नामांकन में शपथ-पत्र देकर बताए सिर्फ दो मामले। इतना ही नहीं पिछली बार छोटे भाई की पत्नी प्रिया यादव को पार्षद बनाया था लेकिन पूरी पार्षदी जीतू जाटव ने की। प्रिया ने कुछ समय बाद ही जाटव परिवार और निगम से नाता तोड़ दिया था। ऐसे में यह भी जांच का विषय है 2015 से 2022 तक प्रिया यादव के साइन किसने किए। 
 प्रिया यादव ने कांग्रेस की उम्मीद्वार कुसुम मरमट को हराया था। इसके बाद मरमट ने प्रिया के जाति प्रमाण-पत्र को चुनौती दी थी। मरमट का आरोप था कि संविधान के अनुसार जाति का निर्धारण जन्म के समय से होता है। इस लिहाज से प्रिया यादव की जाति अन्य पिछड़ा वर्ग है, लेकिन उन्होंने खुद को शेड्यूल कास्ट (एससी) का बताते हुए टिकट लिया। प्रतिपरीक्षण के दौरान यादव ने स्वीकार किया कि उन्होंने महू में स्कूल में पढऩे के दौरान अनूसुचित जनजाति कोर्ट की स्कॉलरशिप हासिल की थी। हालांकि यह भी कहा, चुनाव लड़ते समय आयोग को गलत या झूठी जानकारी नहीं दी। वार्ड 24 अनुसूचित जाति के प्रत्याशी के लिए आरक्षित था। यादव ने खुद को अनुसूचित जाति का बताकर नामांकन पत्र दाखिल किया, जबकि उनके स्कूली शिक्षा के दस्तावेज में वर्ग अनुसूचित जनजाति दर्ज है।
 इसके बाद जाटव परिवार में कुछ विवाद हुआ। कुछ समय तक नगर निगम में जाने के बाद प्रिया यादव ने निगम जाना बंद कर दिया। बताया जा रहा है कि जाटव का घर भी छोड़ दिया था। इसके बाद भी वार्ड में 20 करोड़ से ज्यादा काम हुए थे। ये काम जीतू ने प्रिया की जगह दस्तखत करके मंजूर कराए और कराए थे। इसकी पुष्टी नगर निगम के परिषद सम्मेलन का हाजिरी रजिस्टर भी करता है। जिसमें 2015-16 में ही प्रिया के दस्तखत है। उसके बाद नहीं। 
झूठा शपथ-पत्र देकर लड़ा चुनाव 
भाजपा से छह साल के लिए निष्काशित होने और एमआईसी से हटाए जाने के बाद जीतू जाटव निर्दलीय पार्षद बचे हैं। ऐसे में अब चुनाव के दौरान उनके द्वारा दायर शपथ-पत्र सार्वजनिक हो रहा है जिसमें उन्होंने अपराध वाले कॉलम में स्वीकारा है कि उन पर दो अपराध दायर हैं वहीं पुलिस ने पिछले दिनों जो सूची जारी कि उसमें जीतू पर 11 अपराध दर्ज हैं। इसका सीधा मतलब है कि जीतू ने अपने शपथ-पत्र में नौ अपराध छिपाए। 
जीतू यादव पर दर्ज हैं 11 मामले
अपराध क्र. थाना
1-108/1999 परदेशीपुरा
2-141/1999 परदेशीपुरा
3-112/2005 परदेशीपुरा
4-217/2005 परदेशीपुरा
5-960/2005 संयोगितागंज
6-28/2010 परदेशीपुरा
7-178/2010 परदेशीपुरा
8-257/2011 परदेशीपुरा
9-64/17 परदेशीपुरा
10-303/19 परदेशीपुरा
11-17/10 परदेशीपुरा
(जीतू पर शहर के दो थानों में 11 केस है। 10 केस परदेशीपुरा ओर। संयोगितागंज थाने में है। उस पर चाकूबाजी, जुआ खेलने, हत्या का प्रयास, लूट का प्रयास करने, सरकारी अधिकारियों को धमकाने, बलवा, हत्या के प्रयास के भी केस दर्ज है। उसके अपराध देख पुलिस बाउंडओवर भी कह चुकी है।)

चप्पे-चप्पे पर छाया जीतू आज ढूंढे नहीं मिल रहा है

क्या से क्या हो गए देखते-देखते.... 

विनोद शर्मा 

वक्त दिखाई नहीं देता है, पर बहुत कुछ दिखा जाता है ! कुछ यही हाल है पार्षद जीतू देवतवार उर्फ जीतू जाटव, उर्फ जीतू यादव के। एक महीने पहले जन्मदिन पर जिस जीतू के होर्डिंग-बैनर पोस्टर शहर के चप्पे-चप्पे पर नजर आते थे, आज उसी जीतू को पुलिस ढूंढ रही है। जीतू तो जीतू...उसके गुर्गे भी भागते फिर रहे हैं पुलिस के डर से। 
 पार्षद कमलेश कालरा को अपनी ताकत का अहसास कराने की जिद ने जीतू को कहीं का नहीं छोड़ा। सोचा नहीं था कि कालरा को 'जीतू यादव क्या चीज है' ये समझाना उसे और उसके गुर्गों को इतना भारी पड़ेगा कि कोई साथ देने वाला नहीं मिलेगा। गुस्से में जिस संगठन को चुल्हें में जाए कहा था उसी संगठन ने सारा गुरुर उतार दिया। इंदौर के धांकदार राजनीतिक आकाओं की शह के बावजूद पार्टी ने छह साल के लिए बाहर का रास्ता दिखाया तो दूसरी तरफ महापौरे ने एमआईसी से।
 मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के तेवर तल्ख है। उनके आदेश पर गठित हुई एसआईटी ने 40 में से 29 हमलावरों को चिह्नित कर लिया है। वहीं 15 गिरफ्तार हो चुके हैं। बाकि को फरार करार देकर ईनाम घोषित किया जा रहा है। जीतू की हरकत से पूरे प्रदेश का सिंधी समाज नाराज है। खंडवा में अर्धनग्न होकर सिंधी समाज ने अपनी नाराजगी का इजहार भी किया। इससे पुलिस पर कार्रवाई का दबाव भी बढ़ गया है। पुलिस बयान लेना चाहती है लेकिन जीतू है कि गायब है। या यूं कहें कि फरार है। पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ हो रही है। फरारों की तलाश के लिए पांच टीमें बना दी गई। जो जगह-जगह छापेमारी कर रही है। 
 पुलिस की मानें तो मामला संगीन है। जीतू जल्द पेश नहीं हुआ तो उसे भी आरोपी बनाकर गिरफ्तार किया जा सकता है। पूरी जांच फास्ट ट्रेक पर है। एसआईटी को 15 दिन का वक्त दिया था। सात दिन बीत चुके हैं। अब तक ऐसे कई फुटेज सामने आए हैं जो उस दिन की तानाशाही की गवाही दे रहे हैं। फिर भले कालरा के घर पर हंगामेबाजी हो या फिर कारों के काफिले से कहर बरपाना। 
संगठन को नहीं मिल पाए सेनापति 
जीतू जाटव की जुनुन ने न सिर्फ उनकी मुश्किलें बढ़ाई है बल्कि उन नेताओं को भी संगठन के सामने सीना तानकर खड़े रहने लायक नहीं छोड़ा है। 11 अपराध दर्ज होने के बावजूद जिन नेताओं ने जीतू को टिकट दिलाकर पार्षद बनाया आज वे अपने बूते पर भाजपा का नगर अध्यक्ष और जिला अध्यक्ष नहीं बनवा पा रहे हैं। यदि उनकी चली होती तो अब तक संगठन को सेनापति मिल चुके होते लेकिन जितने नाम इनकी ओर से चलाए जा रहे हैं उन्हें लेकर सीएम सहित संगठन के पदाधिकारी सहमत कम है। इसीलिए फैसला अटका हुआ है। सुलह-समझाइश की कोशिशें जारी है। 
तीन और गिरफ्तार...
पुलिस ने शैलेंद्र दीपक जरिया, गोलू उर्फ अभिजीत आदिवाल, धीरज शिंदे और संतोष कमरिया को गिरफ्तार कर लिया है।

नगर-जिला अध्यक्ष को लेकर दिनभर उड़ी अफवाहें, चलती रहे खबरें

 
दिनभर टीनू छाए तो शाम को जिराती निकल के सामने आए
विजयवर्गीय के लिए नाक का विषय बना अपनी पसंद अध्यक्ष 
इंदौर. विनोद शर्मा । 
62 में से 56 जगह के नगर और जिला अध्यक्षों के नाम की घोषणा हो चुकी है। इंदौर नगर और जिला सहित छह जगह के अध्यक्ष को लेकर फैसला हो नहीं हो पा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बीच चल रहे शीतयुद्ध का हवाला देते हुए कुछ कहते हैं कि विजयवर्गीय के चलाए नाम चल जाते तो अब तक चल जाते। दूसरी तरफ शहर में दिनभर विजयवर्गीय की वजनदारी बताते हुए कभी दीपक जैन टीनू का नाम तय माना जाता रहा तो कभी कहा गया कि कैलाशजी अब पूर्व विधायक जीतू जिराती के लिए अड़ गए। 
 अलग-अलग चरणों में भाजपा 56 नगर व जिलाध्यक्षों के नाम की घोषणा कर चुकी है। अभी छह जगह बची है। इनमें निवाड़ी, छिंदवाड़ा, टीकमगढ़ और नरसिंहपुर के साथ इंदौर भी शामिल है। जहां न नगर अध्यक्ष का नाम तय हुआ है। न यह कि जिला अध्यक्ष चिंटू वर्मा को दोबारा मौका दिया जा सकता है। यूं तो इन नगर अध्यक्ष और शहर अध्यक्ष को लेकर कई महीनों से मारामारी मची है। दीपक जैन टीनू मंत्री विजयवर्गीय के भरोसे अपना नाम तय मानकर चल रहे थे। इसी बीच जिराती समर्थकों ने यह कहकर टीनू की टेंशन बढ़ा दी कि कैलाशजी ने जीतू का नाम आगे कर दिया है।
 सुबह से लेकर शाम तक जिसका जैसा मन किया, वैसा मैसेज बनाया और सोशल मीडिया पर वायरल करता रहा। नगर अध्यक्ष की दौड़ में शामिल मुकेश राजावत की तरफ से टीनू को लेकर एक कविता भी वायरल हो गई। जिस पर राजावत ने भी ऐतराज जताया और अपनी सफाई में कहा कि टीनू मेरा छोटा भाई है। 
ऐसे चलते रहे मैसेज-दर-मैसेज 
सबसे पहली खबर 12.30 बजे वायरल हुई। जब कहा गया कि संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा और विजयवर्गीय के बीच बंद कमरे में बैठक हो चुकी है और टीनू का नाम करीब-करीब तय है। दोपहर 1 बजे एक सर्वे सामने आया। जिसमें नगर अध्यक्ष के रूप में जिराती, राजावत, हरिनारायण यादव और सुमित मिश्रा में टीनू को सबसे ज्यादा लोगों ने पसंद किया। 1.30 बजे कुछ उत्साहितों ने कॉन्फिडेंस के साथ लिखा कि कैलाशजी के आशीर्वाद से टीनू के सिर सजेगा ताज। 1.45 बजे मैसेज आया कि हर दिग्गज चाहता है अपना जिला अध्यक्ष इसीलिए नहीं हो पा रहा है कुछ तय। 
शाम को जिराती पड़े भारी 
टीनू खुश हो पाते उससे पहले ही शाम 5 बजे बाजी पलट गई। खबर आने लगी कि विजयवर्गीय ने नगर अध्यक्ष के लिए जीतू जिराती की पेरवी की है। दूसरी तरफ कुछ लोगों ने एमआईसी सदस्य बबलू शर्मा के भाई शानू शर्मा का नाम चला दिया। 
विजयवर्गीय अकेले नहीं है इंदौर में...
अपनी पसंद का नगर अध्यक्ष और जिला अध्यक्ष बनाने में सिर्फ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की रूचि नहीं है। मंत्री तुलसीराम सिलावट, विधायक उषा ठाकुर, मालिनी गौड़ के साथ ही कांग्रेस से भाजपा में आए विशाल पटेल जैसे नेता भी नहीं चाहते कि चिंटू वर्मा की वापसी हो। ये सभी अपने-अपने समर्थकों के नाम बढ़ा रहे हैं। चूंकि इनमें विजयवर्गीय का वजन ज्यादा है इसीलिए वो जिसका नाम लेते हैं उसे लेकर मैसेज चलने लग जाता है। भले ही उन्होंने उक्त नाम की आवाज किसी ओर काम से लगाई हो।

नाबालिग दुल्हन को ससुराल भेजा दुल्हे पर लादे केस, भेजा जेल

चंद्रावतिगंज पुलिस का कारनामा

सास-ससूर के साथ जेल के बाहर दुल्हे के बाहर आने का इंतजार कर रही है दुल्हन
आरोप : लड़का-लड़की वालों के बीच हो गया था समझौता, एक लाख न मिलने पर पुलिस ने निकाली खीज
इंदौर. विनोद शर्मा ।  
देश में 'गांधी' की ऐसी आंधी चल रही है कि आप किसी भी सरकारी कर्मचारी से मनचाहा कोई भी काम करा लो। खासकर पुलिस से। इसका उदाहरण है चंद्रावतिगंज थाना। जहां के चमत्कारी पुलिस अधिकारियों ने भागकर शादी करने वाली एक नाबालिग लड़की को ससुराल तो भेज दिया लेकिन दुश्कर्म का केस दर्ज करके दुल्हे को जेल भेज दिया। वो भी सिर्फ इसीलिए क्योंकि लड़के का परिवार एसआई साहब को एक लाख रुपए नहीं दे पाया। वहीं एक-दूसरे मामले में 14 साल की लड़की 32 साल के लड़के के साथ भागी। मां-बाप ने पुलिस को शिकायत की लेकिन पुलिस ने दूर का भाई बताकर लड़की लड़के को ही सौंप दी।
 मामला चंद्रावतिगंज थाने का है। जहां सेमदा निवासी सुनील चंद्रवंशी (18 साल) और दयाखेड़ा निवासी पूजा (परिवर्तित नाम) 11 दिसंबर 2024 को घर से भाग गए थे। भागकर दोनों ने शादी कर ली। इस बीच लड़की के माता-पिता ने थाने में लड़की की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। 1 जनवरी को सुनील-पुजा दोनों जैसे ही सेमदा पहुंचे। परिवार के लोग थाने ले गए। जहां लड़की वाले भी आ गए। दोनों परिवारों के बीच लम्बी बातचीत चली। पुलिस के पूछने पर पूजा ने कहा उसने मनमर्जी से शादी की है। वह सुनील के साथ ही रहना चाहती है। उसके माता-पिता ने कहा कि साहब इसे ससुराल ही भेज दो, हमें कोई दिक्कत नहीं। इसके बाद पुलिस ने पूजा को ससुराल वालों के हवाले कर दिया लेकिन सुनील को थाने में ही बैठा लिया। 
 इसके बाद सुनील को लेकर परिवार पर दबाव बनाया। मामला-रफादफा करना है तो एक लाख रुपए लगेंगे। इसके बाद इंदौर से कुछ लोग पहुंचे उन्होंने पुलिस से बात की। परिवार की आर्थिक स्थिति बताकर 25 हजार रुपए का ऑफर दिया। जिस पर नाराज होकर पुलिसकर्मियों ने कहा कि बात से पलटना भारी पड़ेगा। इसके बाद लड़की का मेडिकल कराया। लड़की के बयान के बावजूद उसके माता-पिता की पुरानी शिकायत पर सुनील पर बीएनएस की धारा 137(2), 87, 64(2) और एमबीएनएस 5एल/6 पाक्सो एक्ट लगा दिया। इसमें पुलिस ने लड़की के बयान का हवाला देते हुए कहा कि सुनील उसे बहला-फुसलाकर ले गया था। शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाए।  
 बाद में पुलिस ने अपर सत्र न्यायाधीश सांवेर के समक्ष प्रस्तुत किया। कोर्ट ने पुलिस की कहानी सुनते हुए सुनील को जेल भेज दिया। पिछले 10 दिन से पूजा सहित पूरा परिवार कभी जेल के चक्कर काटता है तो कभी थाने के। न पुलिस उनकी सुनने को तैयार है। न ही कोई और। रो-रोकर पूजा का हाल बेहाल है। सुनील की मां की आंखें भी पथरा गई है। पिता की मजदूरी छूट गई है।
दोनों के आधार कार्ड में जन्मतिथि 2006
लड़के और लड़की वाले दोनों ही इस समय सुनील को बचाने में लगे हैं। दोनों ने दोनों के आधार कार्ड पुलिस को दिए। जिसमें दोनों की जन्म तिथि 2006 की है। इसका मतलब दोनों की उम्र 18 से ज्यादा है। जवाब में पुलिस ने पूजा की पांचवी की मार्कशीट पेश कर दी जिसमें उसकी जन्मतिथि 2008 लिखी है। ये मार्कशीट लड़की के पिता ने तब दी जब उन्होंने शिकायत की थी। 
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1.5 लाख लेकर 32 साल के 'भाई' को सौंप दी 14 साल की लड़की
चंद्रावति गंज का दूसरा मामला भी रोचक है। जहां कमल नाम का एक व्यक्ति लम्बे समय से 14 साल की अपनी नाबालिग बेटी की अभिरक्षा मांग रहा है। चूंकि कमल के खिलाफ उसी की पत्नी की शिकायत पर 10-12 मामले दर्ज है इसीलिए पुलिस उसे धमका के भगा देती है। कमल का आरोप है कि चंद्रावतिगंज में रहने वाली एक महिला का देवास निवासी 32 वर्षीय भाई मेरी 14 साल की बेटी को भगाकर ले गया था। जिसके सीसीटीवी फुटेज में पुलिस को दे चुका हूं। पुलिस लड़की को ढूंढ लाई थी। रातभर मेरी पत्नी और दो अन्य महिलाओं के साथ थाने पर रखा। दूसरे दिन मुझे गरियाते हुए पुलिसकर्मियों ने थाने से भगा दिया। मुझे या मेरी पत्नी को अभिरक्षा देने के बजाय पुलिस ने यह कहते हुए मेरी 14 साल की बेटी को उस आदमी को सौंप दिया जिसके साथ वह भागी थी। कमल का आरोप है कि इस मामले में पुलिस ने 1.5 लाख का लेनदेन किया।

'नाक' पर अटकी नगर अध्यक्ष-जिलाध्यक्ष की कुर्सी


अपने ही शहर में अकेले पड़े विजयवर्गीय
तिखी कलम
विनोद शर्मा  

इंदौर में भाजपा के नगर अध्यक्ष और जिला अध्यक्ष की लिस्ट आज शाम तक आ जाएगी...। पिछले तीन दिन से यह बात सुनी और पढ़ी जा रही है...। लिस्ट है कि जारी नहीं हो रही..। वजह है स्वयं मंत्री और मालवा के कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय..। जिन्हें अपनी पसंद का जिलाध्यक्ष और नगर अध्यक्ष बनाने में इस बार उनके ही सहयोगी नेताओं ने जोर कर दिए हैं...। दूसरे शब्दों में ये भी कहा जा सकता है कि नगर अध्यक्ष और जिला अध्यक्ष की लड़ाई में वे अकेले पड़ गए हैं..। हालांकि अपनी आदत के अनुसार विजयवर्गीय आखिर तक हार नहीं मानने को तैयार नहीं है..। जिलाध्यक्ष और नगर अध्यक्ष का चयन उनकी प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है..।
 62 में से 56 जिलों के नगर व जिलाध्यक्षों की घोषणा पार्टी कर चुकी है। इंदौर नगर-जिला अध्यक्ष सहित चार जिलों का फैसला और होना है। 2023 के विधानसभा चुनाव में स्वयं को राष्ट्रीय स्तर का नेता बताकर विजयवर्गीय ने प्रदेश की राजनीति में वापसी की थी। इसमें कोई संदेह नहीं कि मालवा-निमाड़ में उनके कद का कोई दूसरा नेता नहीं है। चिंटू वर्मा को जिलाध्यक्ष बनाने के साथ ही संजय शुक्ला और विशाल पटेल जैसे कांग्रेस नेताओं को तोड़कर वे ये साबित भी कर चुके हैं। 
  सियासत में समय बदलते देर नहीं लगती। शायद यही वजह है कि 12.40 लाख पौधे रोपकर देश-दुनिया में छाए विजयवर्गीय चिंटू को दोबारा जिलाध्यक्ष बनाने और नगर में अपनी पसंद का अध्यक्ष बनाने के लिए पसीना बहा रहे हैं। इसी को लेकर विजयवर्गीय और सिंधिया गुट के मंत्री तुलसीराम सिलावट के बीच भी ठनी हुई है। सिलावट ने अंतर दयाल जैसे मैदानी कार्यकर्ता का नाम आगे बढ़ाकर चिंटू के साथ ही विजयवर्गीय की मुश्किल भी बढ़ा दी।
जुबान ने बिगाड़ा खेल...
इंदौर के सियासी समीक्षकों की मानें तो विजयवर्गीय बढ़बोलेपन में विवादित बयान देने में माहिर है। फिर भले चुनाव के दौरान देपालपुर विधायक मनोज पटेल के बारे में कुछ भला-बूरा कहना हो या फिर विधायक उषा ठाकुर को। उनके कारिंदे इस मामले में और उनसे दो कदम आगे हैं। जिन्होंने डॉ.मोहन यादव के सीएम बनने के बाद शहर में चिंटू ने ऐसे कटाउट लगा दिए थे जिनमें यादव को विजयवर्गीय ने एक बांह में ऐसे भर रखा है। जैसे कोई कार्यकर्ता हो। इससे खफा होकर सीएम ने 24 घंटे में सभी कटाउट हटवा दिए थे। बात ये भी हुई कि यादव का टिकट बॉस ने ही फाइनल करवाया है। इन्हीं बातों से सीएम से विजयवर्गीय की बात बिगड़ी। 
कांग्रेसी सीखाएंगे कैसे चलेगी बीजेपी
चर्चा में एक बात और है। जिसकी कहीं पुष्टी तो नहीं है लेकिन आग की तरह फैली हुई है। बात यह है कि जब चिंटू वर्मा की दावेदारी का मंत्री तुलसीराम सिलावट ने विरोध किया तो विजयवर्गीय ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कह दिया कि अब कल के आए कांग्रेसी हमें सीखाएंगे कि बीजेपी में जिलाध्यक्ष कौन बनेगा? ये बात न सिर्फ सिलावट बल्कि सिंधिया तक पहुंची। सिंधिया से सीएम व पीएम तक। भाजपा पार्षद कमलेश कालरा और जीतू यादव विवाद ने रही-सही कसर भी पूरी कर दी। 
अकेले खड़े हैं कैलाश...
नगर अध्यक्ष और जिला अध्यक्ष को लेकर जारी तनातनी में अभी की स्थिति में विजयवर्गीय अकेले खड़े हैं। मंत्री तुलसीराम सिलावट, विधायक मनोज पटेल, उषा ठाकुर, मालिनी गौड़ और गोलू शुक्ला की राय उनसे मेल नहीं खाती। ऊपर से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर जिले के प्रभार के साथ वीटो पॉवर भी अपने पास रख लिए हैं। ये तो तय है कि विजयवर्गीय की पसंद से दोनों नाम तो तय नहीं होंगे। हुआ भी तो कोई एक। चिंटू से मोह छोड़े या फिर टीनू जैन से।

पहले एक लाख की बात की, अब तुम 10 हजार दिखा रहे हो... सब्जी की दुकान नहीं थाना है.. समझे...


चंद्रावतिगंज की एसआई जोड़ी ने पैसे की बात बिगड़ने पर लगाई सुनील पर संगीन धाराएं, बोले अब जमानत कराकर दिखा दो
इंदौर. विनोद शर्मा । 
नाबालिग दुल्हन को ससुराल भेजने और दुल्हे पर दुश्कर्म और पॉक्सो जैसी संगीन धाराओं में फंसाकर जेल भेजने के मामले में चंद्रावतिगंज थाने के एसआई कृष्णा पदामकर और विकास राठौर की भूमिका सामने आई है। इस मामले में हिंदुस्तान मेल के हाथ रिकार्ड लगी है जिसमें दोनों ने पैसे न देने पर दुल्हे को फंसाने की बात कही थी। 
 11 दिसंबर को पूजा और सुनील साथ भागे थे। भागकर शादी कर ली थी। 1 जनवरी को परिवार ने दोनों को थाने में पेश कर दिया था। पुलिस ने उनके पेश होने से पहले ही लड़के के परिवार पर एक लाख रुपए देने का दबाव बनाना शुरू कर दिया था। पहले गांव के दो लोगों के द्वारा बातचीत की गई। रकम बड़ी थी। लड़के के पिता देने में अक्षम थे। इसीलिए मामला इंदौर निवासी जितेंद्र यादव को बताया गया। यादव ने 30 दिसंबर की रात 8.45 बजे एसआई पदमाकर से बात की। 40 सेकंड बातचीत हुई। जिसमें तय हुआ कि 31 दिसंबर को थाने में मुलाकात होगी। 
 31 दिसंबर को दोपहर 12.19 बजे फिर जितेंद्र की पदमाकर से 17 सेकंड बातचीत हुई। इसमें पदामकर ने कहा कि थाने में ही आ जाओ, यहीं बात करेंगे। जितेंद्र और इंदौर जनपद सदस्य मुकेश यादव थाने पहुंचे। थाने में पदमाकर और राठौर दोनों थे। पदमाकर से दोनों ने पूछा चलों पैसे की बातचीत करने के बाद क्या होगा? पदमाकर ने कहा लड़के को लिखा-पढ़ी करके थाने से ही छोड़ देंगे। लड़की के मामले में कह देंगे कि वह मामा के यहां चली गई थी। कोर्ट में उसके बयान करा देंगे। दोनों बरी हो जाएंगे। केस भी नहीं होगा।  
 पदमाकर ने विकास की ओर इशारा करते हुए कहा बाकि बात इनसे कर लो। राठौर ने कहा जितेंद्र पत्रकार है इसीलिए उनसे बात नहीं करेंगे। इसीलिए वह कमरे में जनपद सदस्य को ले गया। दो अन्य भी थे। विकास ने कहा कितने पैसे दे देंगे। मुकेश ने कहा परिवार गरीब है। आपकी सेवा-पानी करा देंगे। विकास ने कहा सेवा-पानी मतलब। मुकेश ने मोबाइल पर टाइप करके 10 हजार बताए। विकास तिलमिला गया। पदमाकर से बात करने चला गया। फिर आकर बोला गांव के लोग पहले एक लाख रुपए की बात करके गए थे। अब तुम 10 हजार की बात कर रहे हैं। सब्जी-भाजी बिक रही है क्या यहां? कोई मदद नहीं होगी। जाओ अब तुम सुनील को बचाकर दिखाओ।  
 जितेंद्र 1 जनवरी को दोबारा थाने गए। दोपहर 2 बजे 31 सेकंड बात हुई। इस बार जितेंद्र ने कहा कि फाइनल बात कर लेते हैं। इस पर दोनों ने मुलाकात की। जितेंद्र ने कहा कि घर के जेवर बेचकर भी 25 हजार रुपए जुटा पाएंगे। इससे ज्यादा नहीं हो पाएगा। पदमाकर-राठौर ने कहा कि तुम रहने दो, तुम्हारे बस की बात नहीं है। हम देख लेंगे, हमें क्या करना है? ऐसे कोई मदद होती है क्या? 
फिर दोनों ने करके दिखा दिया...
1 जनवरी वही दिन था जब सुनील और पूजा थाने में पेश हुए थे, परिवार के साथ। पूजा के शादी करने और सुनील के साथ ही रहने की जिद पर परिवार झूग गया, माता-पिता-भाई ने कहा कि साहब ठिक है ये जब शादी कर चुकी है तो इसे ससुराल ही जाने दो। हमें कोई दिक्कत नहीं है। चूंकि लेनदेन की बात बिगड़ चुकी थी इसीलिए पदमाकर-राठौर ने पहले सांवेर अस्पताल में पूजा का मेडिकल कराया और फिर उसे ससुराल भेज दिया लेकिन सुनील को थाने में ही रखकर उस पर संगीन धाराएं बढ़ा दी ताकि उसकी जल्दी जमानत न हो। इनमें से एक है पॉक्सो। 
मैंने कोई शिकायत नहीं की...
पुलिस ने जिस पूजा से दुश्कर्म की कहानी गढ़कर सुनील को जेल पहुंचाया है उसका कहना है कि मैंने दुश्कर्म की कोई बात नहीं की। मुझे सुनील अच्छा लगता है। इसीलिए हमने रजामंदी से शादी की। शादी के बाद एक बार शारीरिक संबंध बने थे, वह भी दोनों की मर्जी से बने। मैंने पुलिस से कोई शिकायत नहीं की।