Thursday, August 10, 2017

इंदौर के बॉबी का समधी है छत्तीसगढ़ का पप्पू

सालों ने संभाल रखा है 250 करोड़ का शराब कारोबार
इंदौर. विनोद शर्मा ।
छत्तीसगढ़ में जिस सोना ग्रुप के खिलाफ इनकम टैक्स की इन्वेस्टिगेशन ने धुआंधार छापेमारी की है उसके सर्वेसर्वा बलदेव ‘पप्पू’ भाटिया इंदौर के कुख्यात भू-माफिया रणवीरसिंह ‘बॉबी’ छाबड़ा के होने वाले समधी हैं। यही पप्पू हरपाल सिंह भाटिया उर्फ ‘मोनू’ और गुरमीतसिंह भाटिया ‘सोनू’ के जीजा हैं। पप्पू का पैसा मालवा-निमाड़ की शराब दुकानों में इस्तेमाल करने वाले सोनू-मोनू के माध्यम से ही बॉबी ने सोना समूह की सिमरन फीशरीज को 2013 में ऊंची बोली लगवाकर इंदिरासागर में मछली पकड़ने का ठेका दिलवाया था।
सोना समूह के साथ ही इनकम टैक्स की इन्वेस्टिगेशन विंग ने मोनू-सोनू भाटिया के सिमरन समूह पर भी कार्रवाई की थी। छापेमार कार्रवाई के दौरान सिमरन समूह में पप्पू भाटिया का खुला इन्वॉल्वमेंट सामने आया। बताया जा रहा है कि होलटाइम डायरेक्टर रहते पप्पू भाटिया ने ही सिमरन समूह को वजनदार बनाया है। मोनू-सोनू से बॉबी की नजदीकी है। उसी की सलाह से सिमरन समूह ने पोल्ट्री फार्म के आगे अपना कारोबार बढ़ाया। जनवरी 2013 में सिमरन फीशरीज प्रा.लि. नाम की कंपनी पंजीबद्ध कराई और 62.50 करोड़ की ऊंची बोली लगाकर इंदिरासागर में मछली पकड़ने का ठेका कंपनी को दिलवाया। इसके अलावा कंपनी ने बाणसागर का भी ठेका लिया। दोनों ठेके 2013 में लिए हैं जो कि 2018 तक चलेंगे।
एक तीर से दो शिकार
बॉबी ने सिमरन को ठेका दिलाकर एक तीर से दो शिकार किए। पहला ठेका दिलाकर पप्पू भाटिया परिवार में पेठ बनाई और दूसरा परम्परागत ठेका छीनकर अपने खास प्रतिद्वदी रिंकू भाटिया को नीचा दिखाने की कोशिश की। छह महीने पहले ही पप्पू के बेटे से बॉबी ने अपनी बेटी का संबंध जोड़ा। फॉर्च्यून लैंडमार्क होटल में दोनों की सगाई हुई।
मुर्गी पालन से ही आगे बढ़ी कंपनी
सिमरन समूह 1980 से स्थापित है। सिमरन फार्म लिमिटेड (एसएफएल) के नाम से कंपनी 1984 में पंजीबद्ध हुई। 1993 में प्रा.लि. कंपनी बनी। कंपनी पोल्ट्रीफार्म का बड़ा कारोकार करती रही। खंडवा रोड और सिमरोल में कई पोल्ट्रीफार्म है। मप्र, छत्तीसगढ़, गुजरात, राजस्थान, पंजाब, जम्मू और महाराष्ट्र में कामकाज फैला हुआ है। कंपनी में सालाना ग्रोथ दर्ज की गई। इसीलिए कंपनी का कारोबार बढ़कर 444 करोड़ तक पहुंच गया। इसके बाद समूह ने सिमरन हेचरीज प्रा.लि., सिमरन लेब्स (वेटलाइन) प्रा.लि., सिमरन फुड्स प्रा.लि. और सिमरन फीड्स प्रा.लि.।
250 करोड़ का है शराब कारोबार
सोनू भाटिया जहां पोल्ट्री फार्म और फीशरीज का काम संभालते हैं वहीं मोनू भाटिया पप्पू भाटिया के शराब कारोबार को मालवा-निमाड़ में फैलाए हुए है। आंकड़ों के लिहाज से बात करें तो मोनू की इंदौर, खरगोन और बड़वानी में तकरीबन एक दर्जन समूहों में तीस से ज्यादा दुकाने हैं। इसमें बॉम्बे हॉस्पिटल समूह की दुकानें ही 36 करोड़ से ज्यादा की ली गई थी। इसके अलावा इंदौर में मालवा मिल ग्रुप, ट्रांसपोर्टनगर ग्रुप, तेजाजीनगर-मिर्जापुर ग्रुप, चोरल ग्रुप और खंडवा नाका-पालदा ग्रुप हैं। खरगोन में बलवाड़ा और बड़वाह ग्रुप हैं। बड़वानी में तीन-चार ग्रुप और हैं। बताया जा रहा है कि 150 करोड़ की दुकानें तो इंदौर शहर में ही हैं। 100 करोड़ की अन्य दुकानें हैं। सभी दुकानों के ठेके अलग-अलग कंपनियों के नाम पर लिए गए हैं। वहीं कुछ दुकानों के लिए हरपाल सिंह भाटिया उर्फ मोनू के नाम भी इस्तेमाल किया गया है।
डमी डायरेक्टर्स के भरौसे है कंपनियां
पप्पू भाटिया ने मोनू-सोनू भाटिया को सिमरन से हटकर भी तकरीबन दो दर्जन कंपनियों में डायरेक्टर बना रखा है।  आरवीएस ट्रांसपोर्ट कंपनी एलएलपी, पेंथर ट्रांसपोर्ट एंड लॉजिस्टिक, आदिवासी डिस्टीलरीज प्रा.लि., सिम्फा लेब्स प्रा.लि. और राज इन्फ्रासिटी प्रा.लि. में मानू डायरेक्टर है। प्योरजेन बायोटेक लि. और सिमरन इन्फोटेक प्रा.लि. में सोनू डायरेक्टर है।  इसके अलावा समूह की कोलकाता और दिल्ली सहित देशभर में 100 से अधिक कंपनियां पंजीबद्ध हैं। इनमें से ज्यादातर के डायरेक्टर डमी हैं। सिर्फ केश फ्लो रोटेट करने और बैंक शीट बनाए रखने के लिए यह कंपनियां सिर्फ कागजों में चल रही है। 

छत्तीसगढ़ के ‘पप्पू’ की सिमरन इंदौर में

पांच दिन से जारी है इनकम टैक्स इन्वेस्टिगेशन विंग की छापेमारी, इंदौर में रविवार को संपन्न हुई
इंदौर. विनोद शर्मा ।
छत्तीसगढ़ के जिस सबसे बड़े शराब कारोबारी बलदेवसिंह ‘पप्पू’ भाटिया के 22 ठिकानों पर छापा मारकर इनकम टैक्स इन्वेस्टिगेशन विंग ने छत्तीसगढ़ में हंगामा मचा दिया है उसका साम्राज्य इंदौर और आसपास के शहरों में भी फैला हुआ है। फिर मुद्दा इंदिरासागर में 2013 से लेकर 2018 के बीच मछली पकड़ने का ठेका लिए बैठी सिमरन फिशरीज प्रा.लि. का हो या फिर 9 ए प्रेमनगर में रहने वाले गुरप्रीतसिंह भाटिया का जो पप्पू भाटिया की दर्जनभर कंपनियों में डायरेक्टर हैं। कनेक्शन को लेकर इंदौर में भी छापेमार कार्रवाई हुई जो रविवार को संपन्न हुई।
इनकम टैक्स ने छापेमार कार्रवाई से पहले जो ड्योजर बनाया था उसमें समूहों की कंपनी का नेटवर्क इंदौर तक सामने आया था। इसीलिए पप्पू के रायपुर स्थित ठिकानों के साथ ग्वालियर में बसंत विहार स्थित सहारा हॉस्पिटल और 3-4 अशोकनगर इंदौर स्थित सिमरन फीड्स प्रा.लि. के साथ ही 9 ए प्रेमनगर स्थित हरपालसिंह भाटिया और गुरमीतसिंह भाटिया (सोनू-मोनू) के घर भी कार्रवाई हुई। रविवार तक चली इस कार्रवाई के दौरान बड़ी तादाद में दस्तावेज बरामद किए गए हैं। इसके अलावा भी नकद व अन्य सामग्री भी मिली है जांच का हवाला देकर जिनका खुलासा रायपुर करने से मना कर दिया।
पप्पू का मामला सौंपा जाएगा ईडी को
बताया जा रहा है कि जांच के दौरान पप्पू भाटिया के संबंध देश छोड़कर भाग चुके 9 हजार करोड़ के कर्जदार विजय माल्या की कंपनी किंग फीशर से भी है। छापेमार वाले दिन से लेकर सोमवार शाम तक भाटिया आयकर अधिकारियों के सामने उपस्थिति नहीं हुए हैं। इसीलिए मामले में ईडी ने पुलिस को मामला सौंपने के साथ ही ईडी को भी इन्वॉल्व करने की तैयारी कर ली है।  बुधवार को समूह के रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, ग्वालियर, इंदौर, कोलकाता, दिल्ली के 22 परिसरों को जांच दायरे में शामिल किया गया था। इनमें समूह के घर, कार्यालय, कंपनियों के दफ्तर, अस्पताल, स्कूल और फैक्ट्री भी शामिल है।
पप्पू की ‘सोना’ का इंदौर कनेक्शन
्र्रपप्पू भाटिया छत्तीसगढ़ के सोना ग्रुप के सर्वेसर्वा है। भाटिया 3-4 अशोकनगर स्थित अंजनी प्लाजा इंदौर के पते पर 18 जनवरी 2013 से पंजीबद्ध सिमरन फीशरीज प्रा.लि. के होलटाइम डायरेक्टर हैं। इस कंपनी में हरपालसिंह भाटिया और गुरमीतसिंह भाटिया के साथ ही सतपालसिंह भाटिया, प्रभतेजसिंह भाटिया भी डायरेक्टर हैं। इस पते पर   सिमरन फीशरीज प्रा.लि., सिमरन फीड्स प्रा.लि. और सिमरन फुड्स प्रा.लि पंजीबद्ध है।
सोना ग्रीन पॉवर प्रा.लि., सोना पॉवर प्रा.लि., सोना इन्फ्रापार्क प्रा.लि., सोना वाइन लिमिटेड, सोना बेवेरेजेस प्रा.लि. जैसी कंपनियां सोना समूह का हिस्सा है। सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं, राजस्थान, मप्र, गुजरात और महाराष्ट्र के साथ दिल्ली तक कंपनियों का सिक्का चल रहा है।
दो साल में 15 करोड़ का लोन
छत्तीसगढ़ से लेकर मप्र तक प्राप्त राजनीतिक संरक्षण की वजह से ही जनवरी 2013 में पंजीबद्ध हुई सिमरन फीसरीज नाम की नई कंपनी को 2013 से 2018 के बीच पांच साल तक का मछली पकड़ने का ठेका दे दिया गया। 2013 से 2015 के बीच कंपनी विभिन्न बैंकों से 15 करोड़ 68 लाख 05  हजार 628 रुपए का लोन ले चुकी है। ब्रिकवर्क रेटिंग ने बी रेटिंग देते हुए 8.93 करोड़ की बैंक गारंटी दी।
....सोनाग्रुप का नेटवर्क....
फास्टट्रेक आयरन एंड पॉवर इंडिया प्रा.लि., बरमा एक्जिम प्रा.लि., जसपेर कंस्ट्रक्शन प्रा.लि., मेरलिन मल्टीटेक प्रा.लि., शाह लेमिनेट प्रा.लि., सिमरन बिल्डर्स प्रा.लि., अनडेन कोनडोर मार्केटिंग प्रा.लि., रणजीत बिल्डकॉन प्रा.लि., यूगनिर्माण पब्लिक स्कूल प्रा.लि., सोना मिनकॉन प्रा.लि., एसएसबी होटल्स प्रा.लि., सोना पॉवर प्रा.लि., पल्प एक्जिम प्रा.लि., सोना इन्फ्रापार्क प्रा.लि., कृष्णा इन्फ्रावेंचर प्रा.लि., सिमरन मिनरल्स एंड ओर्स प्रा.लि., सेठिया सर्विस प्रा.लि. और स्नोटॉप प्रा.लि.।
यह है सिमरन समूह के डायरेक्टर
सतपाल सिंह भाटिया सिविल लाइन रायपुर
हरपालसिंह भाटिया 9 ए प्रेमनगर इंदौर
गुरमीतसिंह भाटिया 9 ए प्रेमनगर इंदौर
बलदेव सिंह बस स्टैंड रोड राजनांदगांव
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बलदेव की कंपनियां :  सिमरनल फिशरीज, इकोरेक्स बिल्डटेक प्रा.लि., सोना पॉवर प्रा.लि., सोना ग्रीन पॉवर प्रा.लि., सिमरन बिल्डर्स प्रा.लि., शिक्षांतर एज्यूकेशनल अकेडमी प्रा.लि., चिरंजीव हॉस्पिटल सर्विस प्रा.लि. और शिक्षांतर नॉलेज फाउंडेशन।
सतपाल सिंह भाटिया : मेरलिन बिल्डकॉन प्रा.लि., सिमरीन फीसरीज प्रा.लि., सिमरन मिनरल्स एंड ओर्स प्रा.लि., पल्प एक्जिम प्रा.लि., बरमा एक्जिम प्रा.लि., अनडेन कोनडोर मार्केटिंग प्रा.लि., सोना बेवरेजस प्रा.लि., शाह लेमिनेट्स प्रा.लि., फास्टेÑक आयरन आॅर प्रा.लि., सोना पॉवर प्रा.लि., कृष्णा इन्फ्रावेंचर्स प्रा.लि., जसपेर कंसट्रक्शन प्रा.लि., सिमरन बिल्डर्स प्रा.लि., कलपतरू एक्जिम प्रा.लि., सोना वाइन लिमिटेड, बेंट होटल्स प्रा.लि., एसएसबी होटल्स प्रा.लि., स्नोटॉप प्रा.लि. और सोना इन्फ्रापार्क प्रा.लि.।
हरपाल सिंह भाटिया : आरवीएस ट्रांसपोर्ट कंपनी एलएलपी, पेंथर ट्रांसपोर्ट एंड लॉजिस्टिक, सिमरन फुड्स प्रा.लि., सिमरन फीसरीज प्रा.लि., सिमरन मिनरल्स एंड ओर्स प्रा.लि., सिमरन फीड्स प्रा.लि., सिमरन कुजीन प्रा.लि. और आदिवासी डिस्टीलरीज प्रा.लि., सिम्फा लेब्स प्रा.लि. और राज इन्फ्रासिटी प्रा.लि.।
गुरमीतसिंह भाटिया : सिमरन फुड्स प्रा.लि., सिमरन फीसरीज प्रा.लि., सिमरन मिनरल्स एंड ओर्स प्रा.लि., प्योरजेन बायोटेक लि., , सिमरन इन्फोटेक प्रा.लि.।
प्रभतेजसिंह भाटिया : रॉयल बोटलिंग कंपनी, सिमरन फीसरीज प्रा.लि., इकोरेक्स बिल्डटेक प्रा.लि., फास्टट्रेक आयरन एंड ओर प्रा.लि., सोना वाइन और सोना इन्फ्रापार्क प्रा.लि. । 

बनता जा रहा है घर की जगह अस्पताल, निगम को कम्पाउंडिंग का इंतजार

डॉक्टरों ने कर दी कायदे की सर्जरी
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
महापौर मालिनी गौड़ की सबसे प्रिय सड़क ‘लक्ष्मणसिंह गौड़ मार्ग’ पर घर का नक्शा पास करवाकर जो अस्पताल बनवाया जा रहा है उसे नगर निगम के मैदानी अमले का संरक्षण प्राप्त है। यही वजह है कि मेन रोड पर तन रही इस इमारत में हुए अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करना तो दूर, अधिकारियों ने जांच तक नहीं की। निगमकर्मियों के सहयोग और राजनीतिक संरक्षण के कारण अवैध निर्माण बेखौफ जारी है।
डॉ. मून पति भरत कुमार जैन, डॉ. शंकरलाल पिता पन्नालाल गुप्ता और डॉ. प्रमीला पति शंकरलाल गुप्ता के नाम दर्ज प्लॉट नं. 10 गुमाश्तानगर पर नगर निगम ने 21 अक्टूबर 2016 को बिल्डिंग पर्मिशन (3755/आईएमसी/जेड1/डब्ल्यू83/2016) जारी की थी। इस स्वीकृति के विपरीत संभ्रांत डॉक्टरों द्वारा भू-माफियाओं की तरह कैसे मनमाना निर्माण किया जा रहा है? इसका खुलासा दबंग दुनिया ने बीते दिनों किया था। उधर, पूर्व पार्षद परमानंद सिसोदिया भी लगातार मामले की शिकायतें कर रहे हैं। इतने सब के बावजूद न डॉक्टरों ने निर्माण रोका न ही नगर निगम के अधिकारियों ने निर्माण की हद तय की।
एप्पल जैसे हॉस्पिटल तन जाते हैं, अधिकारी देखते रहते हैं
10 गुमाश्तानगर ही अवैध निर्माण का मुद्दा नहीं है। इससे पहले कानून को समझने वाले डॉक्टरों की ‘समझदारी’ ने कमर्शियल कॉम्पलेक्स को एप्पल हॉस्पिटल बना दिया है। इससे पहले स्कीम-71 का ही महावीर हॉस्पिटल भी निगम के निशाने पर रहा। अभी भी नगर निगम के अधिकारी यह कहते हुए मामले को टाल रहे हैं कि अभी मामला अंडर कंस्ट्रक्शन में है और बनने के बाद कम्पाउंडिंग में आएगा ही तब देखेंगे।
हालांकि शहर में खड़ी कई ऐसी इमारते हैं जिन्हें निर्माणाधीन अवस्था में निगम द्वारा मेहरबानी करके नहीं रोका गया लेकिन बाद में वही इमारतें शहर के लिए बड़ा सिरदर्द साबित हो रही है। अब निगम उनका कुछ बिगाड़ भी नहीं पा रहा है।
जल्द ही दिखवाते हैं मामला
10 गुमाश्तानगर अभी निर्माणाधीन है। नीचे कमर्शियल और ऊपर आवासीय मंजूरी मिली है। शिकायतें मिली है। एक-दो दिन में मौका निरीक्षण करेंगे। जो अवैध निर्माण होगा उसे हटाएंगै।
अश्विन जनवदे, भवन अधिकारी

खनन पर लगा ब्रेक, कंस्ट्रक्शन को झटका

दो गुने हो गए दाम, रूकेंगे कई काम
इंदौर. विनोद शर्मा ।
रेत उत्खनन मामले में लगातार घिरते जाने के बाद मप्र सरकार ने नर्मदा से वैध-अवैध रेत खनन पर प्रतिबंध लगा दिया है। पर्यावरण, नर्मदा और सड़कों के हित मेंं फैसले को जहां अच्छा बताया जा रहा है वहीं प्रतिबंध के बाद ही दोगुनी हुई रेत की कीमत और बढ़ी कंस्ट्रक्शन कॉस्ट को फैसले के साइड इफेक्ट के रूप में भी देखा जा रहा है। आंकड़ों के लिहाज से बात करें तो रविवार तक जो मल्टीएक्सल डम्पर रेत की कीमत 27000 रुपए थी फैसले के बाद सोमवार को वह 40 हजार रुपए में भी ढूंढे नहीं मिल रहा था। 24 घंटे में 48 प्रतिशत का इजाफा। 1000  वर्गफीट के घर में 60 हजार की जो रेत लगती थी अब उसके लिए 1.05 लाख चुकाना होंगे।
मुख्यमंत्री द्वारा लिए गए उत्खनन प्रतिबंध के फैसले से नर्मदा किनारे संचालित 200 से ज्यादा खदानों पर ताले डलना तय है। इनमें नेमावर, हरदा, हंडिया, नसरूल्लागंज, होशंगाबाद की खदानें प्रमुख रूप से शामिल हैं जिनसे इंदौर और भोपाल में रेत की सप्लाई होती है। नर्मदा से रेत निकालना पूरी तरह से बंद  होने के बाद  कंस्ट्रक्शन के बडेÞ गढ़ इंदौर और भोपाल सहित कई शहरों में रेत की किल्लत होगी। निर्माण कार्य तो बाधित होंगे ही साथ ही जहां आधे निर्माण हो चुक हैं वे भी ठप हो जाएंगे।
सबसे ज्यादा सरकारी ठेके प्रभावित
हाउसिंग के क्षेत्र में छाई मंदी के कारण हाउसिंग प्रोजेक्ट चल रहे हैं लेकिन उनकी रफ्तार पहले ही कम है। सबसे ज्यादा रेत की खपत हो रही है सरकारी प्रोजेक्ट्स में। यहां सीएसआर और एसओआर 28 रुपए क्यूबिक मीटर है। इसे 10 से 30 प्रतिशत अबोव के साथ ठेकेदार लेता है लेकिन रेत की नई दरों के बाद  कंस्ट्रक्शन कॉस्ट 70 रुपए क्यूबिक फीट तक बढ़ जाएगी।
कंस्ट्रक्शन धीमा : इंदौर और भोपाल में सबसे ज्यादा हाउसिंग प्रोजेक्ट हैं। इंदौर में ही तकरीबन एक हजार से अधिक बिल्डिंगे अंडर कंस्ट्रक्श्न हैं। इसके अलावा 400 से ज्यादा कॉलोनियों में विकासकार्य जारी हैं और तकरीबन हर कॉलोनी में कॉन्क्रिट सड़क ही बन रही है। रेत न मिलने से इनकी गति धीमी पड़ेगी।
घर महंगा
-- एक वर्गफीट कंस्ट्रक्शन में डेढ़ फीट रेत इस्तेमाल होती है। एक फीट रेत की कीमत रविवार तक 40 रुपए/फीट जो सोमवार शाम तक 70 रुपए/फीट हो गई। आने वाले दिनों में यही दाम 90 रुपए/फीट तक जाएंगे।
-- मतलब 1000 वर्गफीट कंस्ट्रक्शन करने के लिए 1500 फीट (40 घन मीटर) रेत लगेगी इसकी कीमत 60000 रुपए आती थी। सोमवार से यही कॉस्ट बढ़कर 105000 रुपए हो गई है। अंतर सीधे 45 हजार का।
-- ऐसे ही औसत कंस्ट्रक्शन कॉस्ट 1000 रुपए थी जो सोमवार से बढ़कर 1040 रुपए हो गई है। आगे 1100 रुपए तक बढ़ोत्तरी की संभावना है।
ऐसे पड़ेगा फर्क...
डम्पर पुरानी दर नई दर
मल्टीएक्सल 27000 40000
सिक्स व्हील 14000 28000
नर्मदा नदी से 5 हजार डम्पर रेत रोज निकाली जाती है। इसमें से 14 ट्रक रेत की खपत सिर्फ और सिर्फ इंदौर में है। भोपाल में 700 गाड़ी आती है। भोपाल में होशंगाबाद-बुधनी से नर्मदा की रेत आती है। वहीं भोपाल में तवा नदी से भी रेत आती है।
नदी, रेत खदानें और लाभान्वित शहर
नर्मदा नदी: नेमावर, हरदा, हंडिया, नसरूल्लागंज, होशंगाबाद सहित 200 खदानें। इंदौर, देवास, सीहोर, होशंगाबाद, भोपाल, धार, बड़वानी, खरगोन।
कारम नदी : सेंधवा  गुजरात- धूलिया, मालवा बड़वानी, सनावद में जाती है रेत।
हथनी नदी:  अलीराजपुर  गुजरात और मुंबई  तक जाती है रेत।
सरकार ने किया धोखा
नेमावर, हरदा, हंडिया और नसरूल्लागंज में खदानें चल रही है। नसरूल्लागंज में 12 खदानें 130 करोड़ में ठेके पर दी गई थी। इसके अलावा हरदा, नेमावर, हंडिया में 6 खदानें 34.50 करोड़ में गई थी। 30, 25-25 और 20 प्रतिशत के हिसाब से चार किश््तों में सरकार पैसे लेकर 2020 तक का आंवटन कर चुकी है। खदान मालिकों का कहना है कि सरकार ने बीच में ही अनुबंध तोड़कर खदानें बंद की। 20 हजार परिवार इस कारोबार से जुड़े थे।
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जल्दबाजी में लिया गया निर्णय है। जिन शहरों में नर्मदा के अलावा अन्य नदियों से रेत आती है वहां तो काम धक जाएगा लेकिन मालवा-निमाड़ में हालात बिगड़ना तय है। कंस्ट्रक्शन कॉस्ट 1000 से बढ़कर 1050 रुपए/वर्गफीट हो जाएगी। वहीं रेत के दाम की तरह बेरोजगारी भी बढ़ेगी। हाउसिंग से लेकर सरकारी प्रोजेक्ट तक सब अटक जाएगा।
अतुल सेठ, इंजीनियर

सीएम के स्वास्थ्य मिशन पर शैलबी का पलीता

की मालवा-निमाड़ में 150 से ज्यादा बच्चों की जांच, उपचार/सर्जरी एक भी नहीं
तीन महीने से ईलाज के इंतजार में बढ़ता जा रहा है रोग
इंदौर. विनोद शर्मा ।
ईलाज के नाम पर मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ करते आ रहे शैलबी हॉस्पिटल ने मुख्यमंत्री बाल हृदय उपचार योजना के नाम पर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान और उनकी सरकार आंखों में भी धूल झौंकी है। नेशनल एक्रिडिएशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हैल्थकेअर (एनएबीएच) से एक्रिडिएशन के बिना ही शैलबी इंदौर खंडवा, खरगोन, बड़वानी, देवास, शाजापुर, उज्जैन और धार जैसे जिलों में कार्डियक और आॅर्थोपेडिक पेशेंट्स की जांच की। गंभीर रोगियों को इंदौर में सर्जरी का झांसा देकर अब तक झुलाया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो ऐसे डेढ़ सौ से ज्यादा बाल ह्दय रोगी हैं जिनका सर्जरी/उपचार के इंतजार में रोग जानलेवा होता जा रहा है।
आरबीएसके के तहत मप्र सरकार ने मुख्यमंत्री बाल हृदय उपचार योजना शुरू की थी। योजना के तहत गांव, कस्बों और शहरों में शिविर लगाकर बाल हृदय रोगियों को चिह्नित किया जाना था ताकि बाद में उनका ईलाज एनएबीएच से एक्रिडेटेड किसी अस्पताल में कराया जा सके। शैलबी ने इंदौर और जबलपुर दोनों  हॉस्पिटल के एनएबीएच एक्रिडेशन का आवेदन किया लेकिन एक्रिडेशन हुआ सिर्फ जबलपुर हॉस्पिटल का। इस एक्रिडेशन के आधार पर दिसंबर से फरवरी के बीच शैलबी ने इंदौर, धार, खंडवा, खरगोन, मंदसौर, नीमच, रतलाम, झाबुआ सहित आसपास के शहर में कैंप लगाए। मरीजों की जांच की। उन्हें इंदौर में सर्जरी का वादा किया गया।
सिर्फ खंडवा में ही हुआ 36 पेशेंट का ईको
दो तरह के अभियान का हिस्सा बना था शैलबी। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य सुरक्षा योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत।  राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत बच्चों की जांच की गई। वहीं राष्ट्रीय सुरक्षा प्रोग्राम के तहत गरीबों की। खरगोन में जो कैंप लगा था उसकी जिम्मेदारी डॉ. सुधाशु अग्निहोत्रि और डॉ. आशीष सप्रे को दी गई थी। उनके साथ एक बीएमएस डॉक्टर भी था। 20 फरवरी 2017 को खरगोन में डॉ.अग्निहोत्री और डॉ. सप्रे ने जांच की थी।  36 बड़े और बच्चों का शारदा हॉस्पिटल में ईको हुआ। इनमें 7 वर्षीय विशाल, 2 वर्षीय विशाल, 6 वर्षीय काजल, 5 वर्षीय सपना, 15 वर्षीय राहुल के नाम शामिल हैं। ईको के 36 हजार रुपए का भुगतान किया गया था। झाबुआ में 7 पेशेंट की राशि मंजूर हुई थी।
-- सूत्रों की मानें तो हरदा, बड़वानी, रतलाम, अलीराजपुर, शाजापुर, आगर,  खंडवा, मंदसौर, नीमच, उज्जेैन में चिह्नित किए गए बच्चों की संख्या सौ से अधिक है। ऐसे तकरीबन डेढ़ सौ बच्चे चिह्नित किए गए थे उपचार/सर्जरी के लिए।
किसे कहां की दी गई थी जिम्मेदारी
जिला डॉक्टर तारीख
हरदा डॉ.ए.सप्रे और डॉ.ए.जैन 27 फरवरी
बड़वानी डॉ. एस.अग्निहोत्री 27 फरवरी
रतलाम डॉ. ए.सप्रे 7 फरवरी
इंदौर डॉ. ए.सप्रे/डॉ.ए.जैन 1 फरवरी
मंदसौर डॉ. एस.अग्निहोत्री 1 फरवरी
शाजापुर डॉ. ए.जैन 27 जनवरी
खरगोन डॉ.ए.सप्रे और डॉ.ए.जैन 20 फरवरी
खंडवा डॉ. ए.जैन 15 जनवरी
झाबुआ डॉ.ए.सप्रे 21 जनवरी
उज्जैन डॉ.एस.अग्निहोत्री 21 जनवरी
यहां-यहां हुई जांच
देवास महात्मागांधी जिला हॉस्पिटल
खरगोन शारदा हॉस्पिटल
बड़वानी जिला अस्पताल
कहां कितने पेशेंट किए चिह्नित
जिला मरीज
उज्जैन 43
बड़वानी 17
शाजापुर 07
खरगोन 36
झाबुआ 07
इंदौर 40
देवास 18
खंडवा 13
धार 18
मामा शैलबी ले रहा है जान
गरीब और गरीब बच्चों के लिए राज्य से लेकर केंद्र सरकार तक अलग-अलग स्वास्थ्य योजनाएं चला रही है ताकि उन्हें पर्याप्त चिकित्सा लाभ मिल सके। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अमले की कमीशनबाजी के कारण इन योजनाओं का लाभ गरीब और गरीब बच्चों को मिलने के बजाय अस्पतालों को मिल रहा है। शैलबी इंदौर ने 5 अपै्रल 2016 में एनएबीएच एक्रिडेशन के लिए आवेदन(एच-2016-1062) किया था लेकिन दस्तावेज उपलब्ध न करा पाने के कारण एक्रिडेशन हुआ नहीं। बावजूद इसके शैलबी जबलपुर के एक्रिडेशन के आधार पर मरीज जांचे गए। उपचार/सर्जरी के लिए चिह्नित किए गए लेकिन अब तक किसी की सर्जरी नहीं हो पाई शैलबी इंदौर में। जिन बच्चों की ज्यादा स्थिति बिगड़ी उन्हें आरबीएसके के दल को दूसरे अस्पताल में पहुंचाना पड़ा। ऐसे पेशेंट भी अंगुलियों पर गिने जा सकते हैं।
सरकार की आंखों पर शैलबी प्रेम का पर्दा
एनएबीएच के तहत मप्र में कुल 14 और इंदौर में पांच हॉस्पिटल एक्रिडेटेड हैं। बॉम्बे हॉस्पिटल, ग्रेटर कैलाश, सीएचएल हॉस्पिटल, मेदांता और चोइथराम हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के नाम सूची में हैं। सभी अस्पताल आरबीएसके के अभियान में शामिल हैं। बावजूद इसके शैलबी जबलपुर के लिए सीएमएचओ लिख रहे हैं।
किस शहर से कितना दूर है जबलपुर शैलबी
जिले से दूरी (किलोमीटर में) इंदौर
झाबुआ 708 150
अलीराजपुर 767 242
उज्जैन 521 54
खंडवा 546 180
खरगोन 634 170
बड़वानी 704 156
मंदसौर 649 208


व्यापारियों को टैक्स-टेंशन कम, उपभोक्ताओं को राहत ज्यादा

जीएसटी : 23 दिन बाकी
इंदौर. विनोद शर्मा ।
गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) लागू होने में 23 दिन बाकी है। एमपी कमर्शियल टैक्स डिपार्टमेंट से लेकर कस्टम, सेंट्रल एक्साइज एंड सर्विस टैक्स डिपार्टमेंट में जहां डिपार्टमेंटल सेटअप बदले जा रहे हैं वहीं जीएसटी को लेकर व्यापारी वर्ग अब तक आशंकित है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे संदेशों से छोटे-मझोले व्यापारी खौफजदा हैं। इसीलिए दबंग दुनिया ने पड़ताल की। पता चला कि जीएसटी से व्यापारियों को डरने की जरूरत नहीं है। इससे व्यापारियों को टैक्स की दरों में राहत मिलेगी। उपभोक्ताओं को सामान सस्ता मिलेगा। सरकार को भी ज्यादा टैक्स मिलेगा।
जीएसटी को लेकर इंदौर में भी तैयारियां पूरी है। वरिष्ठ कर सलाहकार अभय शर्मा ने बताया कि अभी कोई भी फॉरेन इन्वेस्टमेंट होता है तो उसके सामने टैक्स क्लीयरिटी नहीं है। बांबे में यूनिट लगाई तो महाराष्ट्र का टैक्स रेट अलग। माल इंदौर भेजा तो मप्र का टैक्स रेट अलग। रेट दर नहीं निकल पाती। जीएसटी से पूरे भारत में एक टैक्स रेट होगा। बड़ी बात यह है कि अधिकारियों के लिए वसूली का जरिया बन चुकी जांच चौकियां खत्म हो जाएगी। व्यापार स्मूथ होगा। सेंट्रल एक्साइज जुड़ने से कास्ट कम होगी। सेंट्रल एक्साइज का रिबेट भी मिलेगा।

अभी टैक्स व्यवस्था
मेन्यूफेक्चरर ने 100 रुपए का प्रोडक्ट बनाया। 20 रुपए सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी चुकाई। प्रोडक्ट हुआ 120 रुपए का।
मेन्यूफेक्चरर ने 120 में होलसेलर को माल बेचा। 10 प्रतिशत सेल टैक्स लगा। कीमत हुई 120+12=132 रुपए।
होलसेलर ने रिटेलर को 5% मार्जिन (132 का 5% याने 6.60 रुपए)  जोड़कर कीमत हुई 138.60 रुपए। इस पर 10 प्रतिशत (13.86 रुपए) सेल टैक्स चुकाया। कीमत हो गई 152.46 रुपए।
रीटेलर ने अंतिम उपभोक्ता को 5 % मार्जिन (152.46 पर 7.62 रुपए)  जोड़ा। कीमत हुई 160.08 रुपए। इस पर 10 प्रतिशत (16 रुपए) सेल टैक्स दिया। कीमत हो गई 176.08 रुपए।
यहां पूर्व में चुकाया हुआ सेंट्रल एक्साइज का रिबेट नहीं मिलता था। व्यापारी को सिर्फ सेल टैक्स का रिबेट मिलता था। याने रीटेलर ने उपभोक्ता से जो 16 रुपए सेल्स टैक्स वसूला है उसमें उसे 13.86 रुपए का रिबेट मिल जाएगा क्योंकि यह राशि होलसेलर ने सेल टैक्स के रूप में चुका दी थी। मतलब रिटेलर को जेब से देना होंगे 2.14 रुपए ही।
कुल टैक्स का भार  जो की अंतिम उपभोक्ता पर आया वो 16 सेल्स टैक्स + 20 सेंट्रल इक्साइज मिलाकर कुल हुआ 36 रुपए।
नई व्यवस्था
मेन्यूफेक्चरर ने 100 रुपए का प्रोडक्ट बनाया। 20 प्रतिशत जीएसटी लगा कीमत हुई 120 रुपए।
मेन्यूफेक्चरर होलसेलर को बेचेगा तो सेल टैक्स लगेगा नहीं। 5 प्रतिशत मार्जिन जोड़कर होलसेलर ने रिटेलर बेचा। 20 प्रतिशत (25.20) टैक्स लगा। कीमत हो गई 151.20 रुपए।  इसमें पहले चुका चुके 20 प्रतिशत जीएसटी पर रिबेट मिल जाएगा। याने नेट टैक्स लगेगा 5.20 रुपए।
रिटेलर जब 5 % मार्जिन के साथ अंतिम उपभोक्ता को माल बेचेगा तो उसे 26.20 रुपए की छूट मिल जाएगी।
भ्रम को ऐसे करें दूर
 ई-वे बिल : 50 हजार रुपए से कम की बिक्री आप अपनी बिल बुक पर कर सकते हैं। इससे ऊपर की बिक्री के लिए आॅनलाइन बिलिंग जरूरी है।  हालांकि शुरूआती दौर में यह लागू नहीं होगी। ई-वे बिल के समाधान और उद्योग की मांग के अनुरूप दरों में बदलाव की समीक्षा के लिए परिषद की 11 जून को फिर बैठक होगी। सरकार सीमा बढ़ाकर और अंतरराज्यीय आपूर्ति को अपने दायरे से हटाकर ई-वे बिल के प्रावधानों में छूट देने पर विचार कर रही है।
ट्रांजिट : जांच चौकियां खत्म होगी तो ट्रांजिट का खतरा बढ़ेगा। इसे लेकर भी भ्रम ज्यादा है। क्योंकि सेंट्रल एक्साइज और वाणिज्यिक कर के पास इतना मैदानी अमला नहीं है जो ट्रांजिट की संख्या बढ़ाई जा सके।
सेंट्रल एक्साइज : ट्रेडरों को सेंट्रल एक्साइज की भूमिका से भय है क्योंकि अब तक ट्रेडरों का पाला विभाग से नहीं पड़ा जबकि ऐसा नहीं है वक्त पर रिटर्न दाखिल करके विभागीय कार्रवाई से बचा जा सकता है।
रेवेन्यू न्यूट्रल रेट : जीएसटी से ज्यादातार कारोबार एक नंबर में होगा जिससे सरकार को टैक्स भी ज्यादा मिलेगा। इससे रेवेन्यू न्यूट्रल रेट सिद्धांत के तहत टैक्स की दरों में आगामी वर्षों में कभी भी आएगी। इसका फायदा ट्रेडरों से लेकर उपभोक्ताओं तक को मिलेगा।
सस्ती होगी चीजें : लागू होने से केंद्रीय सेल्स टैक्स (सीएसटी ), जीएसटी में समाहित हो जाएगा जिससे वस्तुओं की कीमतों में कमी आएगी । पूरे भारत में एक ही रेट से टैक्स लगेगा जिससे सभी राज्यों में वस्तुओं और सेवाओं की कीमत एक जैसी होगी।
ऐसी होगी रिटर्न व्यवस्था
अभी ज्यादातर छोटे कारोबारी अपनी खरीद और बिक्री का आकलन कर एक दिन में रिटर्न तैयार कर लेते हैं।  अब जीएसटी रिटर्न साइकल पूरे महीने चलेगा। कारोबारियों को आॅफलाइन की जगह आॅनलाइन आंकड़े सुरक्षित करने होंगे। पूरी प्रक्रिया में टेक्नॉलजी की महत्वूर्ण भूमिका होगी।
हर 10 तारीख को फॉर्म जीएसटीआर-1
फॉर्म जीएसटीआर-1 में  बेचे गए सामान या दी गई सेवाओं का जिक्र करना होगा। रजिस्टर्ड डीलरों को सप्लाइज के हरेक इनवॉइस और  ग्राहकों को बेचे गए सामान या दी गई सेवा की कर योग्य कीमत बताना होगी। दूसरे राज्य में बेचे गए माल या सेवा की कर कर योग्य कीमत 2.5 लाख है तो हर बिल लगेगा।
11 तारीख को फॉर्म जीएसटीआर-1 :- इसमें की घोषणा के आधार पर महीने की 11वीं तारीख को प्राप्तकर्ता के लिए जीएसटीआर-2ए फॉर्म तैयार हो जाएगा।
15 तारीख को फॉर्म जीएसटीआर-2ए :- इसमें दी गई जानकारी के अतिरिक्त कोई दावा करने के लिए 15 तारीख तक जीएसटीआर-2 फॉर्म जमा कर देना होगा।
16 तारीख को फॉर्म जीएसटीआर-2 :- इसमें आप जो सुधार करेंगे, उन्हें आपके सप्लायर को फॉर्म जीएसटीआर-1ए के जरिए मुहैया कराया जाएगा।
120 तारीख को फॉर्म जीएसटीआर-1ए : -  जीएसटीआर-1 और जीएसटीआर-2 के आधार पर 20 तारीख को आॅटो-पॉप्युलेटेड रिटर्न जीएसटीआर-3 उपलब्ध हो जाएगा जिसे आप पेमेंट के साथ जमा कर सकते हैं।
मिलान से होगी चोरी की संभावना दूर
फॉर्म जीएसटीआर-3 में मंथली रिटर्न फाइल करने की सही तारीख के बाद आंतरिक आपूर्ति और बाह्य आपूर्ति में मिलान होगा। तब इनपुट टैक्स क्रेडिट को आखिरी स्वीकृति मिलेगी। ऐसे होगा मिलान--
- सप्लायर का जीएसटीआईएन
- रिसीपिअंट का जीएसटीआईएन
- इनवॉइस या डेबिट नोट नंबर
- इनवॉइस या डेबिट नोट डेट
- टैक्सेबल वैल्यू
- टैक्स अमाउंट

नक्शा पास कराया घर के लिए, बनाने लगे अस्पताल


गुमाश्तानगर में नगर निगम के अधिकारियों की मिलीभगत से डॉक्टरों ने कर दी नक्शे की सर्जरी
इंदौर. विनोद शर्मा।
महू नाका-फुटी कोठी के बीच की जिस सड़क को महापौर मालिनी गौड़ सबसे आदर्श सड़क बनाकर उसका नामकरण लक्ष्मणसिंह गौड़ के नाम करना चाहती हैं उस पर एक के बाद एक अवैध बिल्डिंगे खड़ी हो रही है। 10 गुमाश्तानगर में आवासीय अनुमति लेकर बनाया जा रहा हॉस्पिटल इसका ताजा उदाहरण है। जिसमें शुरूआती स्तर पर ही बड़ा अवैध निर्माण हो चुका है जबकि अभी 50 फीसदी काम बाकी है।
डॉ. मून पति भरत कुमार जैन, डॉ. शंकरलाल पिता पन्नालाल गुप्ता और डॉ. प्रमीला पति शंकरलाल गुप्ता के नाम दर्ज प्लॉट नं. 10 गुमाश्तानगर पर नगर निगम ने 21 अक्टूबर 2016 को बिल्डिंग पर्मिशन (3755/आईएमसी/जेड1/डब्ल्यू83/2016) जारी की थी। 5987.22 वर्गफीट के इस प्लॉट पर 1.5 एफएआर के साथ 8980.89 वर्गफीट निर्माण की अनुमति दी गई। वहीं सरकारी सहायता से पोषित हो रहे अवैध निर्माण और उससे बिल्डरों को मिलने वाले लाभ ने  डॉक्टर्स को नक्शे के विपरीत निर्माण की प्रेरणा दे दी। ओपन टू स्काय (ओटीएस) और मार्जिनल ओपन स्पेस (एमओएस) पर कब्जा करके इस्टिमेट से 100 प्रतिशत ज्यादा निर्माण किया जा रहा है।
क्लीनिक मंजूर, अस्पताल की तैयारी
फरवरी से मई के बीच लगातार निगम मुख्यालय पहुंची शिकायतों के आधार पर जब दबंग दुनिया की टीम ने तफ्तीश की तो पता चला कि मौके पर हॉस्पिटल बन रहा है। नगर निगम के दस्तावेज इसके विपरीत कहानी कहते हैं। स्वीकृत नक्शे के अनुसार मौके पर सिर्फ 672.64 वर्गफीट निर्माण ही मंजूर है जिसे क्लीनिक बताकर मंजूर करवाया गया था। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्लीनिक मंजूर कराकर अस्पताल कैसे बनाया जा सकता है।
मंजूर नौ हजार, बनना है 18 हजार वर्गफीट
पूर्व पार्षद परमानंद सिसोदिया द्वारा की गई शिकायत के अनुसार मंजूर किए गए 1975.83 वर्गफीट के स्थान पर 3600 वर्गफीट ग्राउंड कवरेज किया गया है। 4011.39 वर्गफीट का जो हिस्सा एमओएस के लिए छोड़ा जाना था उसके 1624.17 वर्गफीट हिस्से पर भी कब्जा किया जा चुका है। इसी में रैम्प बना दिया गया जो मास्टर प्लान 2021 के नियम 76 के अनुसार अवैध और जानलेवा है। ग्राउंड फ्लोर पर 400 और बेसमेंट के 1624 वर्गफीट सहित 18320 वर्गफीट निर्माण किया जाना है जबकि अनुमति मिली है सिर्फ 8980.89  वग्रफीट की। अंतर सीधे 9339.11 वर्गफीट का। इसके लिए बिल्डिंग में मंजूर (717 वर्गफीट) के चार ओटीएस भी नहीं छोड़े गए हैं।
अब नहीं रूका तो कब रूकेगा...
मामले में सिसोदिया का कहना है कि अभी शुरुआती दौर में ही नगर निगम को अवैध निर्माण रोककर निर्माणकर्ताओं, आर्किटेक्ट के साथ ही बीओ, बीआई, सीई दरोगा के खिलाफ कार्रवाई करना चाहिए। ताकि डॉक्टरी का पेशा करने वाले संभ्रांत लोग भू-माफियाओं से प्रेरित होकर अवैध निर्माण न कर सकें।
ऐसा बनना था ऐसा बन रहा है
ग्राउंड कवरेज 1980 3592.33
एमओएस 4021 1620 पर कब्जा
कमर्शियल 62.63 हॉस्पिटल
फ्लोर कंस्ट्रक्शन 7384.824 16300