Tuesday, June 28, 2016

15 करोड़ का विकास शुल्क लिया और कर गए हजम

चम्पू चौकड़ी का कारनामा
हर प्लॉट पेटे वसूले 62 हजार, न बिजली दी, न पानी
इंदौर. विनोद शर्मा ।
2450 प्लॉट की कॉलोनी और ट्रांसफार्मर सिर्फ एक...। 250 से अधिक मकान बन चुके हैं। कोई 100 मीटर लंबी केबल टांगकर बिजली ले रहा है तो किसी को एक से डेढ़ किलोमीटर दूर तक केबल टांगना पड़ी है। यह हकीकत है मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान द्वारा शिलन्यासित हुई फिनिक्स टाउन की जहां कागजों पर सुविधाओं  का सब्जबाग दिखाकर चंपू चौकड़ी विकास शुल्क पेटे 15 करोड़ रुपए वसूलकर हजम कर चुकी है।
अक्टूबर 2007 में हुई इन्वेस्टर्स समिट के दौरान फिनिक्स देवकॉन से एमओयू करने के बाद मुख्यमंत्री ने कॉलोनी का शिलान्यास किया था।  सुविधाओं के वादे के साथ बड़े-बड़े ब्रोशर दिखाकर लोगों को प्लॉट बेचे गए। आठ साल हो चुके हैं लेकिन कॉलोनी में अब तक न पेयजल के पते हैं। न सीवरेज के। न ही बिजली के। पूरी कॉलोनी में सिर्फ एक ट्रांसफार्मर और हाइटेंशन (एचटी) के खम्बों पर झूलते तार ही नजर आते हैं जिन में उलझकर कई मवैशी जान गवां चुके हैं। हवा के साथ बिजली की आवाजाही लगी रहती है। तारों के जंजाल के बीच अपने तार पहचानकर दुरुस्त करना बिना इलेक्ट्रीशियन की मदद के संभव नहीं है।
62000 रुपए/घर वसूला गया विकास शुल्क
जमीन की कीमत के साथ कॉलोनी के विकास शुल्क भी लिया गया है। 1000 वर्गफीट के प्लॉट पर 50 हजार और 1500 वर्गफीट के प्लॉट पर 75 हजार रुपए। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से स्वीकृत ले-आउट के अनुसार यहां 2303 प्लॉट थे जबकि बिल्डर ने बेचे हैं 2450 प्लॉट। यदि औसत 62000 रुपए/घर के हिसाब से भी वसूली हुई तो इसका मतलब यह है कि कुल 15.19 करोड़ रुपए वसूले गए।
टेम्प्रेरी कनेक्शन से ही कट गए चार साल
तकरीबन दो हजार तारों से जूझता जो एक ट्रांसफार्मर कॉलोनी में नजर आता है उस पर भी बिजली कंपनी ने टेम्प्रेरी कनेक्शन ही दिया था। कनेक्शन की वैधता सिर्फ एक साल होती है। जरूरत पड़ने पर इसकी अवधि बढ़वाई जा सकती है। यहां चार साल हो गए हैं इसी टेम्प्रेरी कनेक्शन से। मजे की बात यह है कि अब तक किसी ने समयसीमा बढ़ाने का आवदेन भी नहीं दिया है।
दो करोड़ में स्थाई होगा कनेक्शन
अस्थाई कनेक्शन को स्थाई कराने के लिए क्षेत्रवासियों ने बिजली कंपनी से भी संपर्क किया लेकिन अधिकारियों ने यह कहते हुए मना कर दिया कि कॉलोनी बड़ी है और ग्रीन बनाना पड़ेगा जिस पर दो करोड़ रुपए खर्च होंगे। कॉलोनाइजर यह पैसा चुका दे और कनेक्शन ले ले। खम्बे भी लगाना होंगे। उधर, 15.19 करोड़ वसूलकर बैठी चम्पू चौकड़ी दो रुपए खर्च करने को तैयार नहीं है। अब प्लॉटहोल्डर 2 करोड़ लाएं भी तो कहां से। वह भी तब जब विकास शुल्क पहले ही दिया जा चुका हो।
यह है सुविधाओं की कहानी
पानी :: चूंकि कॉलोनी में कॉलोनाइजर की तरफ से पानी की व्यवस्था नहीं है इसीलिए प्लॉट पर पहले बोरिंग होता है फिर मकान बनता है। बिना बिजली के बोरिंग भी नहीं चलते। एक टंकी बनी तो थी लेकिन कभी इस्तेमाल में आई ही नहीं।
गार्डन :: कॉलोनी में दो दर्जन गार्डन विकसित होना थे, एक भी गार्डन नहीं बना। क्षेत्रवासियों के प्रयास से कुछ बगीचे बचे हैं।
स्कूल :: पिछले हिस्से में टीएंडसीपी के ले-आउट के अनुसार स्कूल बनना था लेकिन नहीं बना।
सीवरेज :: 2450 प्लॉटों की इस कॉलोनी में आधा फीट डाया के पाइप की सीवरेज लाइन और डेढ़ फीट गहरे चेम्बर किसी मजाक से कम नहीं है।
सड़क :: बड़ा नाला पाइप में दबाकर मेन रोड बनाई गई है इसीलिए दो इंच बरसात में पानी ओवर फ्लो होकर पूरी सड़क पर डेढ़-दो फीट तक भर जाता है। सिर्फ एक सड़क होने के कारण लोग घर में कैद होकर रह जाते हैं।
(न सीवरेज ट्रीटमेँट प्लांट बना। न ट्रांसफर स्टेशन बना। न क्लब हाउस।)

Thursday, June 2, 2016

नौ साल, छह राज्य और पायलेट बाबा के 8000 पीड़ित

- पुलिस जांच में ही उलझी
इंदौर. विनोद शर्मा ।
अलीगढ़ (उप्र) में रूद्र कम्प्यूटर एज्यूकेशन संस्था है जो ग्रामीण बच्चों को मुफ्त कम्प्यूटर शिक्षा देती है। संस्था ने 2009 में आइकावा कम्प्यूटर एज्यूकेशन सोसायटी की फ्रेंचाइजी ली। इगलास में केंद्र खोला और 1 रुपए की फीस पर शिक्षा देने लगे। टीचर को तनख्वाह संस्था देती थी। रूद्र का काम देख एक सज्जन ने भी फ्रेंचाइजी लेना चाही। रूद्र ने नियमानुसार आइकावा के नाम 50 हजार की डीडी बनवाई और बरेली  आॅफिस में जमा करवा दी। कुछ दिन बाद संस्था बंद हो गई। रूद्र के पैसे तो डूबे ही जिसके पैसे जमा करवाए वह भी तकादा लगाने लगा।
न सिर्फ रूद्र के संचालक बल्कि बिहार, उप्र, उड़िसा, झारखंड, राजस्थान और पश्चिम बंगाल में तकरीबन 8000 लोग ऐसे हैं जिन्हें नौ साल से अपनी जमा रकम और दोषियों को सजा मिलने का इंतजार है। किसी ने एक सेंटर की एवज में राशि जमा की हुई तो किसी ने दो या तीन के लिए। 2009 से लेकर 2016 के बीच लगातार शिकायतों का दौर जारी है हालांकि अब तक न आइकावा इंटरनेशनल एज्यूकेशन सोसायटी के खिलाफ पुलिस ने सख्त कार्रवाई की। न ही सोसायटी के अध्यक्ष योगीराज पायलेट बाबा  और उपाध्यक्ष योगमाता केकओ आइकावा के खिलाफ। यही वजह है कि दोनों इन राज्यों में जाने से बचते हैं।
आईकावा और यूकेब ने मिलाया था हाथ
उप्र के दो प्रमुख एनजीओ (आइकावा इंटरनेशनल एज्यूकेशन और यूकेब लिटरेसी मिशन) न हाथ मिलाया और रूरल और सेमी अर्बन एरिया में आईटी प्रोग्राम शुरू किए। इसे आइकावा की फ्रेंचाइजर्स के लिए शुभ संकेत बताया गया।
2008 से शंका का केंद्र था संस्थान
अलीगढ़ के योगेंद्र सिंह ने 10 नवंबर 2008 को शंका व्यक्त की। रूद्र संस्था से पूछा था कि क्या संस्था का आईटी प्रोग्राम यूं ही चलता रहेगा। सवाल 2-3 महीने से उनके सेंटर को आइकावा से मिलने वाली रॉयल्टी न मिलने के कारण पूछा गया था। आइकावा के चेक भी बाउंस होने लगे थे।
12 नवंबर को संजय सिंह ने जवाब देते हुए लिखा कि आइकावा का आईटी प्रोग्राम लगातार जारी रहेगा। चेयरमैन हिमांशु राय ने पूर्ववत प्रोग्राम चलाए रखने की जानकारी दी।
124 फ्रेंचाइजी की सूची जारी हुई
13 नवंबर 2008 को आईकावा ने 124 लोगों की सूची जारी की जिन्होंने फ्रेंचाइजी में रुचि जताई थी। चंदौली, धानपुर के सरफराज अहमद, कानपुर से गणेश दीक्षित, ललितपुर के पंचमसिंह पटेल,  आजमगढ़ से नीतू सिंह, बदायू से अंतरसिंह यादव, कौशाम्बी से शमिम हैदर रिजवी, पिलीभीत से तौलेराम गंगवार, वाराणासी से अजय कुमार,  जौनपुर से शेषनारायण मिश्रा, हमीरपुर से प्रतीपाल सिंह जैसे नाम शामिल हैं।
यह है चोरों की जमानत...
संस्था.. आइकावा इंटरनेशनल एज्यूकेशनल
पता - हल्दवानी नैनीताल
अध्यक्ष : महायोगी पायलेट बाबा
उपाध्यक्ष : योगमाता केकओ आइकावा
चेयरमैन : हिमांशु राय
एमडी : ईशरत खान
डायरेक्टर डेवलमेंट : इरफान खान
डायरेक्टर फाइनेंस : विजय प्रकाश यादव
चीफ मैनेजर : क्यू.ए.रिजवी
कौनसा सेंटर कौन संभालता है..
जी.डी.शाक्य(आगरा), इजहार हुसैन(बरैली), धर्मेंद्र सिंह भदौरिया (कानपुर), केके मिश्रा(गौरखपुर), शाकिब अब्बास (वाराणासी), बिपिन मिश्रा (बिहार-झारखंड-राजस्थान), सुधीर श्रीवास्तव (बिहार, झारखंड, उड़िसा), एस.दास गुप्ता (डीओ-उड़िसा) और पवन सिंह (डीओ-बिहार), इकबाल अहमद (डीओ पटना)
ऐसे करता था सिस्टम काम...
- स्वरोजगार के नाम पर युवाओं को प्रेरित किया गया।
- सब्जाबाग यह दिखाया कि फ्रेंचाइजी मिलने के बाद आप एज्युकेशन देते रहो, टीचर की फीस संस्था दे देगी।
- फ्रेंचाइजी के लिए 50 हजार की डीडी बनवाकर संस्था में जमा करना पड़ता था जिसे सुरक्षा निधि कहते थे।
- इसके बाद ही फ्रेंचाइजी लेने वाले बच्चों को एडमिशन दे सकते हैं।
गुंडागर्दी पर उतर आए
महायोगी पायलेट बाबा ने धोखाधड़ी के खुलासों के बाद सन्यास को किनारे रखकर गुंडागर्दी शुरू कर दी। उन्होंने दबंग दुनिया की टीम को भी जमकर धमकाया। इस बात की शिकायत कलेक्टर कवीद्र कियावत और डीआईजी राकेश गुप्ता से की गई है।

45 मीटर चौड़ी प्रस्तावित रोड बना डाला मार्केट

निगम के अफसरों ने दिया अभयदान, तोड़ने के नाम पर निभाई औपचारिकता
इंदौर. विनोद शर्मा ।
नए आरटीओ भवन में अधिकारी बैठे भी नहीं कि नायता मुंडला गांव में भू-माफियाओं ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग और नगर निगम की मंजूरी के बिना ही मार्केट बनाना शुरू कर दिया। अवैध निर्माण की शिकायत पर  पर नगर निगम के मैदानी अमले ने वहीं हथौड़े चलाए जहां बड़ी कार्रवाई से बचने के लिए भू-माफिया चलवाना चाहते थे। यही वजह है कि मास्टर प्लान 2021 की प्रस्तावित 45 मीटर चौड़ी सड़क पर यह निर्माणाधीन मार्केट जस का तस खड़ा है।
मार्केट मुंडला नायता की सर्वे नं.  269/मिन-2 की जमीन पर बन रहा है जो कि नए आरटीओ के ठीक सामने है। राजस्व रिकार्ड में 0.560 हेक्टेयर यह जमीन शासकीय है और इसका भू-उपयोग सड़क के रूप में दर्शाया गया है। इस जमीन पर राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण के चलते मुंडला नायता निवासी युसुफ पिता हुस्ना नायता और गम्मू पिता हुस्ना नायता बड़ा मार्केट बना रहे हैं। मार्केट 100 बाय 15 फीट लंबा बन रहा है। इसकी शिकायत ओमप्रकाश पिता गब्बुलाल ने की थी।
इसे नहीं दूसरे को तोड़ा
18 अपै्रल 2016 को ओमप्रकाश द्वारा की गई शिकायत के अनुसार उनकी शिकायतों को लगातार नजरअंदाज किया गया। जिला प्रशासन और नगर निगम ने संयुक्त कार्रवई करके आरटीओ की सड़क के लिए गरीबों के झौपड़े तोड़ दिए लेकिन सामने का मार्केट नजर नहीं आया। इस संबंध में उन्होंने नगर निगम आयुक्त मनीष सिंह को भी शिकायत की।
सांप भी मर गया, लाठी भी नहीं टूटी
शिकायतों के कारण क्षेत्रीय बिल्डिंग आॅफिसर और बिल्डिंग इंस्पेक्टर्स दबाव में थे। इसीलिए उन्होंने रिमुवल की कार्रवाई की। इस कार्रवाई को ऐसे अंजाम दिया गया ताकि भू-माफिया का ज्यादा नुकसान न हो।
ऐसे तोड़ा...
- मार्केट 26 बीम कॉलम पर खड़ा है। इनमें से एक सिरे के सिर्फ दो कॉलम तोड़े गए। इससे 10 बाय 15 का एक हिस्सा ऐसे झूक गया जैसे कोई डिजाइन हो। बाकी मार्केट यथावत खड़ा है।
- इसी तरह मार्केट से लगकर हो रह दूसरे निर्माण पर कार्रवाई की गई जो कि प्लींथ लेवल तक ही था। यहां भी मार्केट पूरा सेफ है।
तीन दिन का मांगा था समय, 8 दिन बीत गए
निगम के मैदानी अमले ने सफाई देते हुए कहा कि हमने तो तोड़ना शुरू कर दिया था लेकिन निर्माणकर्ता समूह में आ गए थे। उन्होंने पहले हंगामेबाजी की और बाद में अवैध निर्माण को स्वयं तीन दिन में तोड़ लेने का आश्वसन दिया था। इस बात को भी आठ दिन से ज्यादा हो चुके हैं। अब तक अफसरों ने झांककर भी नहीं देखा।
क्या कहते हैं अफसर
क्यों नहीं तोड़ा...।
सात दिन का समय दिया था ताकि वह तोड़ ले।
सात नहीं तीन दिन का समय दिया था?
हां, तीन दिन का। जमीन का विवाद था।
निगम को जमीन देखना थी या निर्माण की अनुमति?
हां, निर्माण अवैध है।
आरोप है कि आपने बचाया है निर्माण?
नहीं, हम तोड़ेंगे।
कब, आठ दिन से ज्यादा तो हो गए?
एक-दो दिन में रिमुवल लगवाते हैं।
असित खरे, बिल्डिंग आॅफिसर

पार्टी ने उजागर किए बदनाम बिल्डरों के चेहरे

- विवादों से है जिनका गहरा नाता
भोपाल. विनोद शर्मा ।
कान्हा फन सिटी पार्क की रेव पार्टी में बार बालाओं के साथ रंग-रलियां मनाते हुए भोपाल के जिन धन्नासेठों को पुलिस ने पकड़ा है उनमें कई बदनाम बिल्डर भी शामिल हैं। फिर वह गृह निर्माण सहकारी की जमीन पर गैरवाजिब तरीके से टाउनशीप खड़ी करके गैर सदस्यों को प्लॉट-फ्लैट बेचने वाले नितिन अग्रवाल हों या फिर स्वयं को भरौसे का दूसरा नाम कहने वाली क्रेडाई की भोपाल इकाई के अध्यक्ष वासिक हुसैन खान। बदनामों की सूची में एक और बड़ा नाम है एलएनसीटी समूह के सर्वेसर्वा अनुपम चौकसे का जिनका दामन भी व्यापमं से दागदार है।
सोमवार देर रात उजागर हुई रेव पार्टी अपने किस्म की पहली पार्टी नहीं थी। बल्कि मुंबई से रशियन लड़कियां या डांसर बुलाकर भोपाल में अक्सर ऐसी पार्टी होती रहती है। यह बात अलग है कि आयोजन गोपनीय रखा जाता है। सिर्फ उन्हीं को सूचना रहती है जिन्हें आयोजकों द्वारा सुचिबद्ध करके सूचना दी जाती है। इस पार्टी की मेजबानी ज्यादातर बिल्डर या उनके माध्यम से होता है। जबकि मेहमान होते हैं नेता और ब्यूृरोक्रेट्स जिन्हें साधकर प्रोजेक्ट आसानी से मंजूर कराए जा सकें। बहरहाल, एक तरफ पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगालना शुरू कर दिए हैं जिनसे विशेष मेहमानों के चेहरे भी सार्वजनिक हो सकते हैं।
अफसर संकट में
पुलिस द्वारा सीसीटीवी फुटेज खंगाले जाने की बाद से सरकारी महकमों से जुड़े वे तमाम लोग परेशान हैं जो उस दिन रेव पार्टी का आनंद लेते रहे और छापा पड़ने से पहले ही निकल गए। इनमें नगर निगम भोपाल, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के अधिकारी, जिला प्रशासन के अधिकारी, पुलिस प्रशासन के अधिकारियों के साथ न्यायिक क्षेत्र से जुड़े कई चेहरे भी शामिल थे।
बदनाम बिल्डरों ने बढ़ाया दबाव
अपने रसूख के दम पर इन बदनाम बिल्डरों ने पुलिस पर दबाव बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। उनकी कोशिश यही रही कि पहले तो केस रफादफा हो जाए या उनके नाम हटा दिए जाएं। या मीडिया के सामने उनके नाम सार्वजनिक न किए जाए। इसके लिए उन्होंने कभी नेताओं के फोन लगवाए तो कभी अफसरों के।
धु्रवनारायण सिंह से नजदीकी या भागीदारी?
बदनाम बिल्डरों की फेहरिस्त में बड़ा नाम है वासिक हुसैन खान। यूं तो यह कॉन्फीडरेशन आॅफ रीयल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन आॅफ इंडिया (क्रेडाई) के भोपाल चेप्टर के डायरेक्टर व अध्यक्ष हैं। इसके अलावा किसी एक लिमिटेड फर्म में डायरेक्टर नहीं है। क्योंकि इनका सारा कामकाज पार्टनर्शीप पर टिका है। यह बात अलग है कि अपने भागीदारों मनीष वर्मा व मोटवानी के खिलाफ लगाए गए धोखाधड़ी के मामले में भी यह कोर्ट के पूछे जाने के बावजूद अपने पार्टनर के नाम सार्वजनिक नहीं कर पाए। या यूं कहें कि सार्वजनिक नहीं किए। पूर्व विधायक, वरिष्ठ भाजपा नेता और शहला मसूद हत्याकांड से सुर्खियों में आए धु्रवनारायण सिंह से नजदीकी इसकी बड़ी वजह है। सूत्रों की मानें तो वासिक उन्हीं जमीनों पर काम करता है जो सिंह या सिंह से जुड़े लोगों की हो। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि दोनों भागीदार हैं।
सर्वधर्म की जमीन गैरसदस्यों को बेच दी
वासिक की तरत रीयल एस्टेट से ही जुड़ा है नितिन अग्रवाल का नाम जो कि स्वदेश बिल्डर्स एंड डेवलपर्स के डायरेक्टर हैं। अग्रवाल ने कोलार में स्थित अध्यक्ष रियाज खान से सर्वधर्म गृह निर्माण सहकारी संस्था की 22.72 एकड़ जमीन खरीदी और टाउनशिप का काम शुरू कर दिया। मामले की शिकायत के बाद ईओडब्ल्यू ने 27 नवंबर 2014 को 30 लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया था। 8 जनवरी को  कोलार नगर पालिका के तत्कालीन सीएमओ राजेश श्रीवास्तव, तत्कालीन सब इंजीनियर विनोद त्रिपाठी, बिल्डर नितिन अग्रवाल पी. राजू के घर पर और स्वदेश बिल्डर्स एंड डेवलपर्स के दफ्तर पर की छापे की कार्रवाई की और महत्वपूर्ण फाइलें जब्त की। स्वदेश ने सर्वधर्म की जमीन पर 11 साल पहले विकसित करके बेच दी। आठ एकड़ पर तो बिल्डिंग बनाकर दी गई है। कुल 300 से अधिक फ्लैट और मकान बनाकर बेचे जबकि संस्था के वास्तविक सदस्य भूखंड पाने से वंचित रह गए। ये आज भी प्लाट के लिए भटक रहे हैं और सोसायटी की जमीन पर कालोनी तानकर बिल्डर प्नितिन अग्रवाल और पी.राजू ने पांच सौ करोड़ रुपए के आसामी बन गए। हालांकि केस दर्ज होने के बाद दोनों फरार भी रहे।
डीमेट घोटाले में लिप्तता से सुर्खियों में अनुपम
डीमेट फजीर्वाड़े में एलएन मेडिकल कॉलेज व जेके हॉस्पिटल के डायरेक्टर होने के साथ डीमेट के सचिव रहे अनुपम पिता जयनारायण चौकसे 19 अक्टूबर 2013 को गिरफ्तार हो चुके हैं। कोलार थाने में कुल डीमेट के तीन मामले दर्ज हुए थे। पुलिस की गिरफ्त में आए सुरेंद्र सिंह चौहान, रणवीर आनंद, आदित्य रवि ने करीब पद्रंह छात्रों को एलएन मेडिकल कॉलेज में प्रवेश दिलवाया था। न सिर्फ इन आरोपियों बल्कि चौकसे के व्यापमं घोटाले के मुख्य आरोपी डॉ. जगदीश सगर से भी अच्छे ताल्लुक बताए जाते हैं।
फिल्म प्रोड्यूसर नहीं अनुपम के फाइनेंसर है धर्मेंद्र
रेव पार्टी में पकड़ाए जिस धर्मेंद्र गुप्ता ने स्वयं को पुलिस के सामने फिल्म प्रोड्यूसर बताया है असल में वे अनुपम चौकसे के जे.के.हॉस्पिटल और एन मेडिकल कॉलेज में एक्जीक्यूटिव डायरेटर हैं। इसके साथ ही वे 1973 में मप्र सरकार के साथ पंजीबद्ध हुए एनजीओ स्कूल आॅफ ब्रोडकॉस्टिंग एंड कम्यूनिकेशन के भी एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं जिसका कार्यक्षेत्र अब मुंबई है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता महाविद्यालय से संबद्धता प्राप्त इस संस्था में पत्रकारिता सिखाई जाती है। इससे पहले वे श्री बालाजी इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्वास्तिक ग्रांड के पदाधिकारी रहे हैं। मुलत: ग्वालियर से है जहां का डॉ. सगर भी निवासी है। गुप्ता का काम है मुंबई से अनुपम के लिए वित्तीय व्यवस्था जुटाना। अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि फिर उन्हें धर्मेंद्र ने फिल्म प्रोड्यूसर किस बिनाह पर बताया। कौनसी फिल्में वह प्रोड्यूस कर चुका है। 

आज उज्जैन में महामंडेलश्वर बनेंगे इंदौर के महंत रामगोपालदास जी

उज्जैन से विनोद शर्मा ।
बचपन से ही ईश्वर को कॉलेज, भक्ति को शिक्षा और सेवा को ही दीक्षा मानते आए इंदौर के महंत रामगोपाल दास जी गुरुवार को गुुरुवर बनने जा रहे हैं। अखिल भारतीय पंच श्री रामानन्दीय दिगम्बर अनी अखाडा के ध्वज तले तकरीबन दो हजार संत-महंतों की मौजूदगी में पट्टाभिषेक करके उन्हें महामंडलेश्वर की उपाधि दी जाएगी। श्री रामगोपालदास जी  इंदौर के खातीपुरा (रीवर साइड रोड) स्थित श्री राम मंदिर के महंत हैं।
वृंदावन में शिक्षा-दीक्षा करके सन्यासी बने रामगोपालजी दस साल पहले पंचकुइया में स्थित लक्ष्मणदासजी महाराज के पास पहुंचे थे तब उन्होंने सोचा भी नहीं था सिंहस्थ 2016 उन्हें बड़ी सौगात दे जाएगा। पहाड़ी बाबा खालसा के पीठाध्यक्ष श्री राजेंद्र दास जी ने सेवा और समर्पण देखते हुए अपने शिष्य रामगोपालजी का नाम महामंडलेश्वर की उपाधि के लिए आगे बढ़ाया। बैशाख शुक्ल प्रदोष (त्रयोदषी) मंगलवार के पुन्य पुनीत अवसर पर पंच श्री रामानन्दीय दिगम्बर अनी अखाड़ा के चरणपादुकाजी  व श्री हनुमान जी के निशानों के सानिध्य में अंकपात चौराहा स्थित दिगम्बर अखाड़े में उनका पट्टाभिषेक होगा। गौरतलब है कि दो साल पहले राम मंदिर की जमीन को कब्जामुक्त कराने के लिए महंत जी ने काफी संघर्ष भी किया था।
गौ रक्षा को समर्पित रहेगा जीवन
23वर्ष की उम्र में सन्यास ले चुके श्री रामगोपाल जी ने बताया कि मैं अपने गुरू राजेंद्रदास जी की तरह अपना जीवन भी गौ रक्षा को समर्पित करूंगा। संत, समाज और गौ सेवा ही सर्वोपरी होगी।
बड़ी संख्या में संत रहेंगे मौजूद
 चित्रकूटस्थ श्रीतुलसीपीठाधीश्वर जगद्गुरू रामानन्दाचार्य श्री रामभद्राचार्य जी महाराज,श्री अग्रदेवाचार्य पीठाधीश्वर श्रीराघवाचार्य जी महाराज रैवासाधाम, श्री मलूकपीठाधीश्वर जगद्गुरु द्वाराचार्य श्री राजेन्द्रदेवाचार्य जी महाराज श्री आद्यवाराह पीठाधीश्वर श्री श्री रामप्रवेशदास जी महाराज श्री सूखानन्द पीठाधिश्वर जगदगुरु जी महाराज, इंदौर से लक्ष्मणदास महाराज, महामंडलेश्वर कम्प्यूटर बाबा सहित 2000 संत होंगे माजूद।
झनकारेश्वरदास बने जगदगुरू पीपा पीठाधीश्वर
अखाड़े में इसी खालसे के श्री मंगलपीठाधीश्वर टीलागाद्याचार्य श्री महंत श्री श्री १०८ श्री माधवाचार्य जी महाराज की अध्यक्षता में श्री झन्कारेश्वर दास (श्री त्यागी जी महाराज) को द्वाराचार्य जगद्गुरू पीपा पीठाधीश्वर बनाया गया। चांदी के सिंहासन पर पट्टाभिषिक्त कर छड़ी, छत्र, चंवर से अंलकृत  किया गया।
  

महाकाल मंदिर में फायर फाइटिंग घोटाला

- दो साल पहले जुटाए सुरक्षा उपकरण फायर आॅफिसर ने पहली नजर में नकारे, फिर दोबारा कराया काम
- अन्यथा मंदिर प्रशासन की लापरवाही लेती कई की जान
इंदौर. विनोद शर्मा ।
मंदिरों में होती आ रही आगजनी की घटनाओं से सबक लेते हुए सिंहस्थ 2016 की तैयारियों के तहत महाकाल मंदिर परिसर में फायर फाइटिंग की व्यवस्था की गई थी जो बहुत ही हल्के स्तर की थी। न मानक का मेल  था, न ही क्वालिटी का। सिंहस्थ शुरू होने से ठीक पहले भोपाल से भेजे गए फायर सेफ्टी आॅफिसर ने इसकी पोल खोल दी। उनकी रिपोर्ट के आधार पर 22 अपै्रल को हुए पहले शाही स्नान से चंद घंटे पहले पुरानी लाइन उखाड़कर गुपचुप तरीके से नई फायर लाइन डाल दी गई।
सिंहस्थ 2016 के नाम पर उज्जैन में बड़े पैमाने पर हेराफेरा हुई है जिसका ताजा और बड़ा उदाहरण उस महाकाल मंदिर का फायर फाइटिंग सिस्टम है जहां कुंभ के दौरान दर्शन के लिए करोड़ों लोगों की आवाजाही रही। 2009 में मंदिर परिसर में हुई आगजनी की घटना के बाद 2013-14 में सिंहस्थ की तैयारियों के तहत भोपाल की एक कंपनी ने मंदिर में हाइड्रेंट बेस्ड फायर फाइटिंग इक्यूपमेंट लगाया। दो साल तक इक्यूपमेंट यूं ही लगे रहे। किसी ने कुछ चेक नहीं किया। भुगतान जरूर कर दिया। इसी बीच 10 अपै्रल को केरल के पुत्तिंगल देवी मंदिर परिसर में आतिशबाजी के दौरान लगी भीषण आग से 110 लोगों की मौत होने और 350 से ज्यादा के घायल होने के बाद मप्र सरकार चेती। सिंहस्थ में ऐसी कोई घटना न हो? इसी सोच के साथ पुलिस हेडक्वार्टर (भोपाल) से डीएसपी अनिल यादव को विशेष फायर सेफ्टी आॅफिसर बनाकर उज्जैन पहुंचाया गया। यादव और नगर निगम, उज्जैन के इंजीनियर नागेंद्र सिंह भदौरिया ने मातहतों के साथ दौरा किया और पहली ही नजर में सिस्टम को खारिज कर दिया। इसके बाद मंदिर प्रशासन चेता और ताबड़तोड़ नए सिरे से काम कराया।
क्यों नकारा...
होना चाहिए था- हाईड्रेंट सिस्टम के लिए माइल्ड स्टील (एमएस) या गेलवेनाज्ड आयरन (जीआइ) पाइप डाली जाना चाहिए। ताकि लाइन ्रपे्रशर में जवाब न दे।
हुआ यह - अनप्लास्टिक्ज्ड पॉलीविनिलक्लोराइड (यूपीवीसी) की पाइप लाइन डाल दी।
होना चाहिए था-  नार्म्स के हिसाब से पाइप का डाया 100 एमएम (4 इंच) होना चाहिए। ताकि आपात स्थिति में कम वक्त में ज्यादा पानी मिले।
हुआ यह- हाइड्रेंट के लिए 63 एमएम (2.5 इंच) डाया की लाइन डाली गई जिसकी वजह से प्रेशर बहुत कम था जबकि परिसर व मंदिर की ऊंचाई ज्यादा है।
होना चाहिए था- हाइड्रेंट व पंपिंग आॅटोमेटिक हो। ताकि आपात स्थिति में हाइडेÑंट यूज  करते ही पंपिंग आॅटोमेटिक शुरू हो जाए।
हुआ यह- कुंड में 5 एचपी की मोटर डाली गई लेकिन सिस्टम मेन्युअल था। आग लगने की परिस्थिति में हाइड्रेंट इस्तेमाल करने से पहले एक आदमी को पंप चालू करने भेजना पड़ता।
ताबड़तोड़ हुआ बदलाव
16 अपै्रल को यादव और उनकी टीम ने इक्यूमेंट की नेगेटिव रिपोर्ट दी और उन्हें खारिज कर दिया। 17 अपै्रल को ताबड़तोड़ मीटिंग बुलाई गई। इस मीटिंग में फायर फाइटिंग के क्षेत्र में काम करने वाली इंदौर की एक कंपनी को बुलाकर नए सिरे से काम की जिम्मेदारी दी गई। काम शुरू हुआ 18 अपै्रल से खत्म हुआ 24 अपै्रल को जबकि महाकुंभ के पहले शाही स्नान की धूम 21 अपै्रल से ही शुरू हो गई थी। 22 अपै्रल को 2 लाख लोगों ने महाकाल दर्शन किए थे। कंपनी ने 400 फीट लाइन डाली और 40 से अधिक फायर एस्टिंग्यूशर भी लगाए।
क्यों जरूरी है सुरक्षा
सिंहस्थ 2016 के दौरान करोड़ों लोग महाकाल मंदिर पहुंचे। यूं भी यहां दिनभर में हजारों श्रृद्धालू दर्शन करते ही हैं। विपरीत परिस्थिति में बड़ी जनहानि की संभावना बनी रहती है। मंदिर के आसपास 100 मीटर तक निर्माण है इसीलिए फायर ब्रिगेड भी नहीं पहुंच सकती। एक मात्र उपाय हाइड्रेंट सिस्टम है। अब भी यहां हाइड्रेंट की संख्या पर्याप्त नहीं है। मंदिर प्रशासन इस मुद्दे पर गंभीर नहीं है।
फिर कैसे हुई गड़बड़...
मंदिर प्रबंध समिति में प्रशासनिक अधिकारी हैं जिनका मूल काम ही मंदिर की गतिविधयों पर नजर रखना है। उनकी देखरेख के बावजूद कोई कंपनी हलका काम कैसे कर सकती है? यह बात किसी को हजम नहीं हो रही है। उलटा, संभावना यही जताई जा रही है कि अधिकारियों ने कमीशन लेकर हलका काम करवाया और बिना लाइन टेस्ट किए ही भुगतान भी कर दिया।
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काम किस सरकारी एजेंसी के माध्यम से कराया गया है और कैसे हुआ था? इसके साथ ही कैसे नए सिरे से काम कराया गया? इस पूरे मामले की जांच करवाता हूं। इसके बाद ही कुछ कह पाऊंगा।
कवींद्र कियावत, कलेक्टर
उज्जैन

कुरियर की आड़ में हवाला करने वाले पांच आंगड़ियों पर आयकर का छापा

- दवा बाजार और श्रीवर्धन कॉम्पलेक्स में दबिश, डेढ़ करोड़ सीज, दर्जनभर से पूछताछ
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
कुरियर के नाम पर इंदौर और गुजरात के बीच हवाले का कारोबार करने वाले पांच प्रतिष्ठानों के खिलाफ इनकम टैक्स इन्वेस्टिगेशन विंग ने छापेमार कार्रवाई की और करीब डेढ़ करोड़ रुपए बरामद किए। देर रात तक चली कार्रवाई के दौरान कई ऐसे लोग भी विंग के हाथ लगे जो अपना पैसा जमा करने आए थे या फिर लेने आए थे। इनसे भी पूछताछ की गई लेकिन कोई भी रकम का हिसाब नहीं दे पाया।
गोपनीय सूचना के आधार पर विंग ने आरएनटी मार्ग स्थित श्रीवर्धन कॉम्पलेक्स की चार और दवा बाजार की एक दुकान पर दबिश दी। श्रीवर्धन कॉम्पलेक्स में जहां राजीव कांतिलाल कुरियर कंपनी (पता- यूजी 11), एम. माधवलाल कंपनी (यूजी-22) राजेश जैन (सी-3) और आर. फाइनेंस एंड कुरियर कंपनी (यूजी-3) पर दबिश दी गई। यहां तीन प्रमाइसेस में रकम के साथ लोग भी पकड़े गए। वहीं सी-3 वाले राजेश जैन फरार हो गए। वहीं दवा बाजार में जिस प्रमाइसेस पर रेड हुई वह राजीव गुप्ता ‘मामा’ का है। इन पांचों जगह से डेढ़ करोड़ रुपए बरामद हुए हैं।
कड़ी पूछताछ
चूंकि कार्रवाई शाम 5 बजे हुई और देर रात तक चलती रही। इसीलिए जब तक लोगों को पता नहीं चला लोग अपना पैसा लेने और देने आते रहे। उन्हें विंग के अधिकारियों ने वहीं धर लिया और कड़ी पूछताछ की। किसी ने कहा खाना देने आए हैं तो किसी ने कहा कि प्यास लगी थी पानी पीने आ गया।
कुख्यात है श्रीवर्धन कॉम्पलेक्स
जिस श्रीवर्धन कॉम्पलेक्स में कार्रवाई हुई है वह हवाला कारोबार के लिए कुख्यात हो चुका है। 6 मई 2015 को धार पुलिस ने जेतपुरा से 47.50 लाख रुपए की हवाला रकम के साथ मेहसाणा निवासी अमृत पटेल और पाटण निवासी पिंकल पटेल को गिरफ्तार किया था। ये आंगड़िये अहमदाबाद की पटेल मणिलाल मगनलाल एंड संस आंगड़िया सर्विस के पास जा रहे थे जिनका क्षेत्रीय कार्यालय भी श्रीवर्धन कॉम्पलेक्स की दूसरी मंजिल पर था। दूसरी कंपनी पटेल दिनेशकुमार दशरथलाल जी का भी आॅफिस यहीं है। दोनों जगह नोटिस चस्पाए गए।
ऐसा है कैश कूरियर का कारोबार
- इंदौर में एक रजिस्टर के साथ आॅफिस खोला। जहां इंट्री होती है।
- नोट के नंबर से होता है केश ट्रांजेक्शन- जैसे किसी का पैसा इंदौर से अहमदाबाद पहुंचाना है तो रकम इंदौर में जमा होगी, ग्राहक को एक नोट का नंबर दे दिया जाता है। जो उस आदमी तक पहुंचाया जाता है जो अहमदाबाद में पैसे लेगा। जब वह अहमदाबाद आॅफिस में जाकर नोट नंबर बताएगा तो उसे टेली करके वहां बैठे लोग उसे पैसा दे देंगे।
- 80 फीसदी कारोबार ऐसे ही होता है। अहमदाबाद आॅफिस में जितना पैसा है उससे ज्यादा पहुंचाने का आॅर्डर मिलने पर ही आदमी के हाथों पैसा भेजा जाता है। वह भी सिर्फ अंतर राशि।
- इस राशि को जैकेट में ले जाते हैं। ले जाते वक्त बीच में बसें बदल-बदल कर जाते हैं ताकि पुलिस की निगाह न पड़े।
- जैसे बुकिंग यदि एक लाख रुपए की हुई है तो उसकी पर्ची ग्राहक को सिर्फ 1000 रुपए लिखकर ही दी जाती है। यानी बाकी 99 फीसदी गोलमाल।