Tuesday, February 9, 2016

आयकर के निशाने पर ‘शक्ति’ और अमिताभ बच्चन

- 7 करोड़ से ज्यादा का किया भुगतान, 20 करोड़ खर्च किए थे एक ही विज्ञापन केंपेन पर
- अनुबंध और भुगतान में भी खेल
इंदौर. विनोद शर्मा।
डमी डायरेक्टर और डमी कंपनियों का ‘शक्ति’शाली खेल उजागर करने के बाद इनकम टैक्स इन्वेस्टिगेशन विंग की निगाहें शक्ति पंप्स और बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन के बीच 2013 में हुए करार पर भी है। दोनों के बीच दो विज्ञापनों को लेकर करार हुए था। बताया जा रहा है कि शक्ति पंप्स ने बच्चन को 7 करोड़ रुपए से ज्यादा का भुगतान किया।
इनकम टैक्स इन्वेस्टिगेशन विंग ने गुरुवार को प्रतिभा सिंटेक्स और शक्ति पंप्स इंडिया प्रा.लि. के खिलाफ सर्च की कार्रवाई शुरू की थी। प्रतिभा सिंटेक्स के 11 ठिकानों पर कार्रवाई शनिवार रात तक संपन्न हो चुकी थी जबकि शक्ति पंप्स के कुछ ठिकानों पर कार्रवाई जारी है। विंग के हाथ कई अहम सबूत लगे हैं। इस दौरान मुंबई बेस्ड नेट वेल्यु मिड इंडिया प्रा.लि. के माध्यम से शक्ति पंप्स और अमिताभ बच्चन के बीच हुए विज्ञापन के करार  के दस्तावेजी प्रमाण भी मिले हैं। अनुबंध जुलाई 2013 में हुआ था जब अमिताभ ने शक्ति पंप्स के लिए ‘अन्नदाता’ विज्ञापन किया था। सितंबर 2013 में बनकर तैयार हुआ यह विज्ञापन सालभर करीब-करीब सभी प्रमुख चैनलों पर चला। इसके बाद 2014 में अमिताभ को शक्ति सोलर पंप्स के लिए साइन किया गया। 40 सेकंड का एड बना। कुछ दिनों तक चला लेकिन बाद में डील केंसल हो गई।
भुगतान किया ज्यादा, बताया कम...
सूत्रों की मानें तो विज्ञापन के लिए शक्ति पंप्स ने एक नंबर में जितना पेमेंट करना बताया है भुगतान उससे ज्यादा का किया गया है। इसमें नेट वेल्यू मीडिया प्रा.लि.की भूमिका अहम रही। हालांकि कंपनी के कर्ताधर्ता इस बात को सिरे से नकारते हैं। उनकी मानें तो पैसे का लेनदेन कंपनी और बच्चन के बीच हुआ। हमने सिर्फ मिलाने का काम किया और उसकी कमीशन ली।
20 करोड़ का था अन्नदाता
23 जुलाई 2014 को कंपनी के वाइस प्रेसीडेंट (मार्केटिंग) अंकित पाटीदार ने अमिताभ बच्चन को शक्ति पंप्स के सोलर पंप्स की सीरिज के विज्ञापन के लिए साइन किया था। इस दौरान पाटीदार ने बताया था कि सितंबर 2013 में अमिताभ बच्चन ने अन्नदाता को जो एड किया था उसकी कैंपेनिंग व एड पर करीब 20 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। उस वक्त कंपनी की वर्थ 400 करोड़ थी। 1.16 लाख पंप बेचे और 62 हजार पंप निर्यात किए।
यहां-यहां चला विज्ञापन...
टेलीवीजन : सभी बड़े न्यूज चैनल।
रेडियो : सभी प्रमुख एफएम रेडियो
अखबार : हिंदी, मराठी, तमिल, तेलगू, अंग्रेजी
मैग्जीन : कृषि जगत और ग्राम संस्कृति से लेकर इंडिया टूडे और एअर इंडिया तक।
ऐसे थे विज्ञापन
हम हैं अन्नदाता की शक्ति : 1.04 मिनट
शक्ति सोलर पंप : 40 सेकंड

एक्सपेंस..
मद मार्च 2013 मार्च 2014
एडवर्टाइजिंग 43575314 75760787
मार्केट डेवलपमेंट 30000800 72166398

संतोष डेवकॉन के सुनील मंधवानी की मनमानी से

400 प्लॉट वाली जमीन फिर बाजार में
जमीन और अनुमतियों के बिना ही बेच डाले थे प्लॉट
इंदौर. विनोद शर्मा  ।
अपने भागीदारों को फर्जी साइन करके बाहर का रास्ता दिखाने वाले संतोष डेवकॉन प्रा.लि. के डायरेक्टर सुनील मंधवानी ने लिम्बोदी स्थित कंपनी की जमीन बेचने की तैयारी शुरू कर दी है। वह भी उस स्थिति में जब इस जमीन  पर टीएनसी और डायवर्शन कराकर न सिर्फ महालक्ष्मीधाम के नाम से कॉलोनी काटी जा चुकी है बल्कि 400 से ज्यादा लोगों को प्लॉट भी बेचे जा चुके हैं।
मामला ग्राम लिम्बोदी स्थित सर्वे नं. 240/1/1,   240/3/2, 240/4, 240/5, 240/6/1 और 240/6/2 की 5.232 हेक्टेयर सहित कुल 25.8 एकड़ जमीन का है। जमीन का नामांतरण 30 नवंबर 2011 को हुआ था जबकि पूरी 1126120 वर्गफीट जमीन का डायवर्शन (61/अ-2/12-13) हुआ 28 दिसंबर 2012 को। 2011 में 12 महीेने में पजेशन के वादे के साथ 1300 वर्गफीट की दर से प्लॉट बेचे गए थे। कुल 30 करोड़ रुपए इकट्ठा हुए। मंदवानी ने इसका हिसाब देने के बजाय फर्जी साइन करके अपने भागीदार मुकेश पिता अमरलाल माटा को संतोष डेवकॉन प्रा.लि. से बाहर कर दिया जबकि राजस्व रिकॉर्ड में आज भी जमीन संतोष डेवकॉन प्रा.लि. तर्फे डायरेक्टर मुकेश माटा का ही नाम दर्ज है।
कीमत लगा दी 3.5 करोड़ रुपए एकड़
बताया जा रहा है कि टीएनसी और डाइवर्शन के साथ काटी गई इस कॉलोनी में प्लॉट बेचे जा चुके हैं कई प्लॉटों की रजिस्ट्री हो चुकी हैं। बस कब्जा नहीं दिया गया। भागीदारों को बाहर करके कंपनी को विवादित कर दिया गया। अब इसी जमीन को 3.5 करोड़ रुपए एकड़ में बेचने की तैयारी है। मंधवानी के लिए 3.25 करोड़ में सौदा निपटना भी फायदेमंद है। क्योंकि जिस जमीन पर 30 करोड़ के प्लॉट बेचे जा चुके हैं उससे 3.25 करोड़/एकड़ के हिसाब से भी कुल 84.11 करोड़ मिलेंगे।
सौदा विश्वसनीय दलालों के माध्यम से...
मंधवानी ने जमीन का सौदा विश्ववसनीय दलालों के माध्यम से आगे बढ़ाया है। उसने अब तक जमीन के कागज भी नहीं दिए। जिन दलालों से सौदे की बात हुई उनका कहना है कि मंधवानी से पेपर मांगे तो उसका कहना है कि जिस दिन फाइनल बात होगी और पार्टी टोकन अमाउंट लेकर आएगी उसी दिन सब कागज पार्टी को दे दूंगा।
बिना जमीन के बेच दिए थे प्लॉट
जमीन की रजिस्ट्री नवंबर 2011 में हुई थी। संतोष डेवकॉन प्लॉट बेच चुकी थी फरवरी और सितंबर 2011 के बीच। कच्ची रसीद से। जिन पर महालक्ष्मीधाम और इंस्टॉलमेंट नंबर के साथ सिगनेचर लिखा है। रिमार्क भी है। इनका कोई उल्लेख नहीं, सिग्नेचर, कॉलोनी कहां, किसने काटी, क्या संपर्क नंबर। 7 जुलाई 2011 को दी गई फर्स्ट इंस्टॉलमेंट की एक रसीद दबंग दुनिया के पास है जिसमें 3,55,000 को आड़ी-तिरछी साइन के साथ 355 रुपए के रूप में लिखा गया है।
दिसंबर 2012 में डायवर्शन हुआ जबकि अपै्रल 2012 से ही डेवलपमेंट शुरू हो चुका था। जुलाई 2012 तक पुल और मेन रोड के साथ नाले की रिटेनिंग वॉल बन चुकी थी। आॅफिस बन चुका था। दो मेन रोड बन चुकी थी। 

1700 की शर्ट बेचकर बताते हैं 650 का कपड़ा

जी.सच्चानंद कला मंदिर के लिए लाभ का सौदा लिनन
- करोड़ों की टैक्स चोरी सामने आने की संभावना
इंदौर. विनोद शर्मा।
एक शर्ट के लिए 1 मीटर 60 सेंटीमीटर कपड़ा चाहिए। लिनन के इतने कपड़े की कीमत 600 से 650  रुपए है। 145 रुपए शर्ट का मैकिंग चार्ज। 745 रुपए में लिनन की शर्ट तैयार हो जाती है जिसे 250 रुपए के लेदर ब्रिफकेस में रखकर 1700 रुपए के होलसेल रेट पर बेचा जाता है। बुक्स में इसी शर्ट को 650 रुपए का सादा कपड़ा बता दिया  जाता है और सादा कपड़ा टैक्स फ्री है। ऐसे 650 रुपए के कपड़े को 1700 की शर्ट के रूप में बेचकर जी.सच्चानंद कला मंदिर हर महीने लाखों रुपए की टैक्स चोरी कर रहा है।
इसका खुलासा बुधवार को जी.सच्चानंद के आधा दर्जन ठिकानों पर वाणिज्यिक कर विभाग की एंटी इवेजन विंग ‘ए’ की छापेमार कार्रवाई के दौरान हुआ। सूत्रों की मानें तो फर्म लिनन क्लब के नाम से शर्ट बनाती है। हर दिन 1500 शर्ट बनाने का लक्ष्य है। फेब्रिक, मैकिंग चार्ज और डिस्पले पर कुल 1045 रुपए खर्च हो रहे हैं और पीस बिक रहा है 1700 रुपए में। यानी कमाई हुई 655 रुपए की। 1500 में से यदि हर दिन 1300 शर्ट भी बनती है तो भी एक दिन की कमाई हुई 8 लाख 51 हजार 500 रुपए। महीने की 2 करोड़ 55 लाख 45 हजार और सालाना 30 करोड़ 65 लाख 40 हजार जबकि लिनन का ही टर्नओवर है 80 करोड़ 66 लाख 50 हजार रुपए साल का।
कितनी टैक्स चोरी...
जानकारों के अनुसार फेब्रिक (बिना सिला कपड़ा) पर 1 प्रतिशत इंट्री टैक्स लगता है जबकि सिलाई के बाद रेडिमेड गार्मेंट पर 5 प्रतिशत वेट और 1 प्रतिशत इंट्री टैक्स। दोनों के बीच अंतर है 5 प्रतिशत टैक्स का। जी सच्चनानंद 80.66 करोड़ की लिनन शर्ट को 30.84 करोड़ का फेब्रिक बताता है और टैक्स चुकाता है 30.84 लाख जबकि टैक्स चुकाया जाना चाहिए 4.83 करोड़ रुपए। 80.66 लाख इंट्री टैक्स और 4.03 करोड़ वेट।
न सिर्फ फेब्रिज बल्कि बहुत कुछ
जी.सच्चानंद सिर्फ फेब्रिक और रेडीमेड गार्मेंट का काम नहीं करता बल्कि फर्म को इंटीग्रेटेड शोरूम बना दिया गया है जहां लोकल व ब्रांडेड (जुते, पर्स, बेल्ट) व अन्य ड्रेस मटेरियल भी मिल रहे हैं।
टैक्स चोरी से रुबरु हैं अफसर
बुधवार को जिन अफसरों ने छापा मारा है वे जी.सच्चानंद की कारगुजारियों का कच्चा चिट्ठा पहले से जानते हें। कार्रवाई के दौरान उनका होमवर्क मैदान पर दिखा भी। उन्होंने जो दस्तावेज जब्त किए हैं उनमें शर्ट मैकिंग का ठेका लेने वाले ठेकेदारों की पर्चियां, गार्मेंट मटेरियल की पर्ची शामिल है। अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई गुरुवार सुबह तक जारी रहेगी। तमाम दस्तावेज जांचने के बाद ही पता चलेगा कि फर्म ने कैसे और कितनी टैक्स चोरी की। 

जी.सच्चानंद की मनमानी

फुटवेअर का टर्नओवर बुक्स में हकीकत से आधा
कपड़े के नाम पर आयात करता है चायना से फुटवेअर
इंदौर. विनोद शर्मा ।
1700 की शर्ट बेचकर बुक्स में 650 रुपए के फेब्रिक की बिक्री बताने वाला जी.सच्चानंद समूह चायना से डुप्लीकेट जुते व फेब्रिक आयात करके उसे ब्रांडेड बताकर बेच रहा है। बताया यह भी जा रहा है कि कई बार कंपनी ने कस्टम की आंखों में धुल झौंकते हुए फेब्रिक्स के बिल पर जुते आयात करती है। सारा इंदौर और मुंबई में बैठे दलालों के माध्यम से होता है।
जी.सच्चानंद पर वाणिज्यिक कर विभाग की कार्रवाई भले गुरुवार दोपहर खत्म हो चुकी हो लेकिन कार्रवाई के दौराज जो दस्तावेज सामने आए वे चौकाने वाले थे। फेब्रिक, शुटिंग-सर्टिंग व रेडीमेड का कारोबार करने वाली इस फर्म के विजयनगर, टॉवर चौराहा और अन्नपूर्णा रोड पर इंटीग्रेटेड शो-रूम है। जहां कपड़ों के साथ फुटवेअर, लेदर एसेसरिज, गोगल्स-ग्लासेस, बेल्ट, परफ्यूम, रेडिमेड जैकेट, कोट, ट्रॉली बेग, ब्रिफकेश भी उपलब्ध है। खास बात यह है कि फुटवेअर (मैन्स) की 2500 रुपए और फुटवेअर (वुमन्स) के नीचे की रेंज ही नहीं है।
बुक्स में टर्नओवर सवा करोड़ का...
जांच के दौरान जी.सच्चानंद ने अपने फुटवेअर सेग्मेंट का टर्नओवर सवा करोड़ बताया है। यदि औसत फुटवेअर की कीमत 2500 रुपए ‘जो कि वहां लोअर रेंज है’, तो सवा करोड़ के टर्नओवर में 5000 फुटवेअर की सेल बताई जा रही है। कंपनी के तीन बड़े शो-रूम है। अन्नपुर्णा रोड, टॉवर चौराहा और विजयनगर। यानी एक शो-रूम पर सालाना 1666 और हर महीने 138 फुटवेअर बिक रहे हैं।  रोजाना 4 जोड़ी फुटवेअर की ही बिक्री जो कि किसी भी सूरत में हजम नहीं होती। क्योंकि एक शो-रूम पर फुटवेअर का सेग्मेंट 3-4 लोग संभाल रहे हैं।
हकीकत यह है कि विजयनगर के एक शोरूम पर ही औसत 45 जुते रोज बिकते हैं जो महीने के करीब 1350 होते हैं और सालाना  16200 पीस। बाकी शोरूम पर 10-10 हजार पीस भी साल के बिकते हैं तो कुल सेल हुए 36200 पीस जो कि बुक्स में बताए गए फुटवेअर की संख्या से 7 गुना ज्यादा है। यहां वुडलैंड, गोस, बनिश, एडिडास, नायकी और पुमा जैसे ब्रांड की रेंज है। यदि 36200 पीस की औसत कीमत 1000 रुपए भी मानी जाती है तो कुल टर्नओवर 3.62 करोड़ होता है जो बुक्स में सिर्फ सवा करोड़ बताया है।
दामों की ऊंचाई...
सेंडल 900 रुपए
बेल्ट 699 रुपए
ब्रिफकेश 4995 रुपए
चश्मा 195  रुपए
जॉकेट 5999  रुपए
पर्स-बेग 895 रुपए
परफ्यूम 200 रुपए
(ये प्राइज इंडेक्स न्यूनतम वाला है।)
थोकबंद ठेका...
कंपनी का सारा कामकाज दलालों के माध्यम से होता है। चायना से आयातित माल को सुरक्षित शो-रूम तक पहुंचाने का थोकबंद ठेका इंदौर और मुंबई के दलालों के पास है। इस काम में सुरेश नाम के व्यक्ति की भूमिका खास रहती है। लिनन क्लब की शर्ट व कंपनी के अन्य उत्पादों की डिस्ट्रीब्यूटरशीप के लिए इंदौर में बंटी नीमा और मुंबई में श्रीपाल से संपर्क किया जाता है।


मंधवानी पर मेहरबान पुलिस

2 दिसंबर को हुई एफआईआर, गिरफ्तारी अब तक नहीं
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
चार सौ प्लॉट होल्डरों के हितों पर पानी फेरकर कॉलोनी की जमीन बेचने निकले सुनील मंंधवानी पर राजेंद्रनगर पुलिस मेहरबान है। शायद यही वजह है कि नवीन पिता अमरलाल माटा की लिखित शिकायत पर एफआईआर दर्ज करने के महीनेभर बाद भी पुलिस मंधवानी को गिरफ्तार नहीं कर पाई। इससे पहले भी जुनी इंदौर और तेजाजीनगर थाने में भी महालक्ष्मीधाम के प्लॉट होल्डरों की शिकायत पर एफआईआर दर्ज करने के बाद मंधवानी बंधुओं को अंदर करने में महीनों लगा दिए थे। हालांकि इस संबंध में राजेंद्रनगर पुलिस का कहना है कि प्रयास जारी है।
माटा ने अपने शिकायत में लिखा था कि उन्होंने मंधवानी की गणेश रियल मार्ट प्रा.लि. द्वारा निहालपुर मुंडी में काटी गई कॉलोनी शिव सिटी में प्लॉट (498) खरीदा था। 1200 वर्गफीट के इस प्लॉट की कीमत व विकास शुल्क पेटे 3 लाख रुपए चुका भी दिए गए। उस वक्त कंपनी के डायरेक्टरों के बीच दीवानी मुकदमा (97-ए-2010) चल रहा था। इसीलिए निराकरण के बाद रजिस्ट्री का आश्वासन दिया लेकिन विवाद निपटने के बाद हमें सूचित तक नहीं किया गया। न ही मंधवानी ने मुलाकात की। इसीलिए वे डाइवर्शन व क्लब शुल्क नहीं चुका पाए।
15 दिसंबर को विवाद निपटने की सूचना मिली। मंधवानी से मिले लेकिन उन्होंने निराकरण नकार दिया जबकि एक अन्य डायरेक्टर ईश्वर माखिजा ने निराकरण की पुष्टि की। कुछ दिन बाद माखिजा ने बताया कि जिस प्लॉट के लिए आप चक्कर काट रहे हो वह रामचंद्र पागारानी को 4.80 लाख में कंपनी ने 23 दिसंबर 2014 को बेच दिया है। नकल मांगने पर उन्होंने मंधवानी के पास भेज दिया। मिलने पहुंचे तो मंधवानी ने गालीगलौज की।
एफआईआर दर्ज, अग्रिम जमानत खारिज
माटा के बार-बार शिकायत करने के बाद 2 दिसंबर 2015 में राजेंद्रनगर पुलिस ने सुनील मंधवानी के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया लेकिन पुलिस ने गिरफ्तार नहीं किया। इस दौरान मंधवानी ने जिला एवं सत्र न्यायालय में अग्रिम जमानत का आवेदन (4178/2015) किया जो 9 दिसंबर 2015 को द्वितीय एजेएस इंदौर कमल जोशी ने निरस्त कर दिया।
दो थानों पर दर्ज है तीन एफआईआर...
मंधवानी के खिलाफ जूनी इंदौर में अपराध क्रमांक 56/2015, 58/2015 और तेजाजीनगर थाने में अपराध क्रमांक 265/15 दर्ज है जो कि शपथ-पत्र के साथ 90 प्लॉट होल्डरों की संयुक्त शिकायत के बाद दर्ज किया गया। तीनों मुÞकदमे धारा 420, 467, 468, 469 और 471 के तहत दर्ज हैं।
कोशिशें जारी है...
प्रयास जारी है, गुरुवार को भी एसआई को मंधवानी के ठिकानों पर दबिश देने पहुंचाया था लेकिन वह मौके पर मिला नहीं। गिरफ्तारी हर हाल में होगी, वक्त भले लग रहा हो।
आर.एस.शक्तावत, थाना प्रभारी
मंधवानी के ठिकानों पर दबिश दी थी इत्तेफाकन वह मिला नहीं है। अभी उससे जुड़े संपर्क तलाशे जा रहे हैं।
रुपेश द्विवेदी, एएसपी
क्यों शंका के घेरे में पुलिस
-- सामान्यत: आरोपी की फरारी के दशा में पुलिस उसके परिजन पर शिकंजा कसती है ताकि पेश होने के लिए दबाव बने।
-- पुलिस का अपना मुखबिर तंत्र होता है जो पुलिस को पल-पल की सूचना देता है ऐसे में यह बात हजम नहीं होती कि मुखबिर तंत्र ने मंधवानी की सूचना पुलिस को दी ही न हो।
-- मंधवानी का मोबाइल (98260-85610) चालू है वह बेखौफ सबसे बात कर रहा है पुलिस ने अब तक उसकी कॉल डिटेल से लोकेशन क्यों नहीं निकाली।
-- मंधवानी के घर में कैमरे लगे हैं उनकी रिकॉर्डिंग क्यों नहीं देखी गई। क्यों परिवार पर दबाव क्यों नहीं बनाया गया।
-- इससे पहले भी जूनी इंदौर और तेजाजीनगर में दर्ज प्रकरणों में गिरफ्तारी एफआईआर दर्ज होने के महीनों बाद हुई।

पहली बार पानी पर टुरिज्म कैबिनेट...

हनुवंतिया टापू पर आज बैठक
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
यकायक प्रदेशभर में चर्चा का केंद्र बन चुके हनुवंतिया टापू मंगलवार को एक दिन के लिए प्रदेश की ‘राजधानी’ बनेगा। यहां मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान और उनकी कैबिनेट की अहम बैठक होगी। इंदिरासागर  डेम में जमा नीलाभ नर्मदा के नीर पर तैरते क्रुज पर बैठक होगी। दो साल में दूसरी बार राजधानी से बाहर हो रही इस बैठक का मकसद हनुवंतिया के पर्यटन को बढ़ावा देना है।
हॉल में विशेष लाइटिंग, 40 आरामदायक कुर्सियां, प्रोजेक्टर लगाया जा रहा हैं। इस दौरान नर्मदा क्वीन बैक वॉटर में 2 किमी का सफर तय करेंगी। खासतौर मंत्रियों के लिए सरसो का साग और मक्के की रोटी भोजन में परोसी जाएगी। बैठक को लेकर सभी मंत्री एक दिन पहले इंदौर से सड़क मार्ग से हनुवंतिया आएंगे। सीएम शिवराजसिंह चौहान हेलिकॉप्टर से 2 फरवरी को पहुंचेंगे। ये पहला मौका है, जब कैबिनेट की बैठक हनुवंतिया में होगी।
यह है कैबिनेट का टाइम प्लान
दो फरवरी को सुबह 9 बजे मुख्यमंत्री हवाई जहाज से इंदौर पहुंचेंगे। यहां से वॉल्वो बस से पूरे मंत्रिमंडल के साथ दोपहर 12 बजे हनुवंतिया पहुंचेंगे। यहां पर नर्मदा क्वीन क्रूज पर सवार होंगे। क्रूज में कैबिनेट की बैठक होगी। इस दौरान क्रूज 19 किमी का जलमार्ग तय कर फेफरिया टापू पहुंचेगा। यहां भोजन होगा। इसके बाद फिर क्रूज से हनुवंतिया पहुंचेंगे। इस दौरान बड़े क्रूज के साथ छोटा क्रूज भी चलता रहेगा। मंत्री या मुख्यमंत्री की इच्छा हुई तो वे पानी में ही छोटे क्रूज में आ जाएंगे। इसकी रिहर्सल कर ली है।
यह होंगे बैठक के एजेंडे...
-- मप्र में पर्यटन का विस्तार।
-- सिंहस्थ के विकासकार्यों की समीक्षा। आवश्यकतानुसार नए कामों की स्वीकृति।
-- 18 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भोपाल आ रहे हैं उनकी यात्रा से जुड़ी तैयारियां। प्रोग्राम का स्वरूप।
-- धार के भोजशाला मामले में पूजा-नमाज।
--  प्रदेश में मौजूद किले और महलों को एक लाख रुपए में नीलाम करने और हेरिटेज स्थलों से लगी जमीनों को कलेक्टर गाइड लाइन के हिसाब से बिक्री।
-- हनुवंतिया से संत सिंगाजी की समाधि तक क्रूज चलाने को कैबिनेट की बैठक में मंजूरी मिल सकती है। यह जलमार्ग 15 किमी लंबा है।   फिलहाल पर्यटकों को हनुवंतिया से सिंगाजी जाने के लिए लंबा सड़क मार्ग तय करना पड़ रहा है।
ऐसा है वीआइपी अरेंजमेंट...
- कैबिनेट की मीटिंग नर्मदा क्वीन क्रूज पर होगी।
- इस एयरकंडीशंड क्रूज में 80 लोगों के बैठने की व्यवस्था है।
- मीटिंग में सीएम और सीएस सहित सारे मंत्री ग्राउंड फ्लोर पर, जबकि अफसर अपर फ्लोर पर बैठेंगे।
- सीएस एंटनी डेसा के मुताबिक, इस कैबिनेट को टूरिज्म कैबिनेट नाम दिया गया है।
- कैबिनेट का सिंगल प्वाइंट एजेंडा प्रदेश में पर्यटन का विकास है।
- कैबिनेट की मीटिंग लंच के बाद शुरू होगी।
- मीटिंग में पहले पर्यटन विभाग द्वारा एक प्रेजेंटेशन दिया जाएगा। इसके बाद सीएम मंत्रियों से सुझाव लेंगे।
- मंत्रियों के लिए हनुवंतिया में स्विस टेंट लगाए जा रहे हैं।
- बाद में ये टेंट जल महोत्सव के दौरान पर्यटकों को दिए जाएंगे।

तैयारियां जल महोत्सव की भी...
हनुवंतिया पर्यटन-स्थल पर 12 फरवरी से 10 दिवसीय जल-महोत्सव आयोजित होगा। पर्यटकों के रुकने के लिए टेंट सिटी बसाई है। महोत्सव के दौरान पतंगबाजी, वालीबॉल, कैंप-फायर, स्टार गेजिंग, साइकलिंग, पैरामोटरिंग, पेरासेलिंग, हॉट एयर बैलून, बर्ड वाचिंग जैसी गतिविधियां होंगी। 

कोई कितने ही हाथ-पैर मार ले, ई-रजिस्ट्री बंद नहीं होगी- मलैया

प्री-बजट बैठक में मंत्री की दो टूक
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
दुनिया आगे जा रही है तो हम क्यों ई-रजिस्ट्री को बंद करके पीछे जाएं। फिर व्यवस्था के पीछे हाथ धोकर पड़े पंजीयन कायार्लय के अधिकारी विरोध करें या फिर वकील या स्टॉम्प वेंडर। विरोध से राजस्व प्रभावित नहीं होगा। जिसे रजिस्ट्री कराना है वह आज नही कराएगा तो महीनेभर बाद कराएगा। कराएगा जरूर। इसीलिए राजस्व की चिंता नहीं है, वह कहीं नहीं जाएगा। यहीं आएगा। मीडिया से बातचीत के दौरान दो टुक शब्दों में यह बात मप्र के वित्त मंत्री जयंत मलैया ने कही।
प्री-बजट प्लानिंग के मद्देनजर बुधवार को वाणिज्यिक कर मुख्यालय में संपन्न हुई अहम बैठक के दौरान वित्त मंत्री मलैया ने बजट को लेकर उद्योगपतियों, व्यापारियों और कर सलाहकारों से रायशुमारी की।फार्म-49 की अनिवार्यता और उसके उत्पादों की सूची 34 से बढ़ाकर 66 किए जाने के मामले में उन्होंने कहा कि मामले की समीक्षा कर रहे हैं। किसी पर अनावश्यक भार नहीं बढ़ाया जाएगा। महीने-दो महीने में पेट्रोल-डीजल पर लगाए जा रहे अतिरिक्त भार व उसके विरोध पर मंत्री ने कहा कि सरकार पेट्रोल-डीजल पर वन-टाइम अतिरिक्त भार बढ़ाने की तैयारी में है ताकि बार-बार न बढ़ाना पड़े। उन्होंने कहा कि कभी मप्र में पेट्रोल-डीजल पर वेट-इंट्री टैक्स ज्यादा था। अब दूसरे राज्य हमसे आगे हैं।
टैक्स टार्गेट और कलेक्शन पर मंत्री ने स्वीकारा कि कलेक्शन के मामले में अभी पीछे हैं। दो महीने वसूली पर जोर होगा। उन्होंने हनुवंतिया टापू की तारिफ की और पर्यटन स्थलों के निजी सहयोग से विकास को मिली केबिनेट की हरी झंडी की सराहना की। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्रालय भी पर्यटन में भागीदारों को रियायत देगा।
सुझाव जो बजट के लिए मिले...
चेक पोस्ट और रास्ते में होने वाली चैकिंग के दौरान तकनीकी त्रुटियों पर जो पांच गुना पेनल्टी लगती है वह खत्म हो। सांकेतिक पेनल्टी के प्रावधान हो। जिला स्तर पर रीजनल एडवाईजरी बोर्ड गठित हो। बोर्ड की बैठक में व्यावसायियों की समस्याओं का समाधान किया जा सके।
रमेश खंडेलवाल, अध्यक्ष
अहिल्या चेम्बर आॅफ कार्मस
यदि किसी कारोबारी ने मप्र के किसी कारोबारी से पूरी कीमत देकर माल खरीदा है और प्रदेश के कारोबारी ने रिटर्न भी दे दिया है तो फिर क्रेता का इनपुट टैक्स रिबेट अमान्य किया जाना गलत है। आॅइल कंपनियों द्वारा बेचे जा रहे पेट्रोल-डीजल पर अलग-अलग तरह से जो टैक्स लगाए जा रहे है वह भी गलत है।
आर.एस.गोयल, वरिष्ठ कर सलाहकार
रिटर्न में संसोधन की तारीख 30 नवंबर तय हो।  व्यापारिक संगठनों को विश्वास में लिए बिना किसी भी तरह के प्रावधान में बदलाव न हो
पी.डी.नागर, सीए
रजिस्टर्ड कारोबारियों द्वारा मप्र के बाहर से खरीदे जा रहे वाहनों पर जो 1 के बजाय 10 प्रतिशत इंट्री टैक्स लिया जा रहा है वह गलत है। जिन नए उत्पादों को फार्म-49 की सूची में शामिल किया है उन्हें तत्काल हटाया जाना चाहिए।
केदार हेड़ा, सचिव सीटीपीए
सुझाव यह भी...
- चेक पोस्ट की व्यवस्था खत्म हो।
- रिटर्न वेरिफिकेशन फार्म जमा करने की आवश्यकता खत्म हो।  क्योकि रिटर्न फाइल करने के लिए पासवर्ड विभाग ही देता है।
- ई रिटर्न इंटरमिडीयेटर आयकर की तरह वाणिज्यिक कर में भी हो। सीए डिजिटल सिग्नेचर से एक साथ इकट्ठे रिटर्न अपलोड कर सकें।