Tuesday, February 9, 2016

कोई कितने ही हाथ-पैर मार ले, ई-रजिस्ट्री बंद नहीं होगी- मलैया

प्री-बजट बैठक में मंत्री की दो टूक
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
दुनिया आगे जा रही है तो हम क्यों ई-रजिस्ट्री को बंद करके पीछे जाएं। फिर व्यवस्था के पीछे हाथ धोकर पड़े पंजीयन कायार्लय के अधिकारी विरोध करें या फिर वकील या स्टॉम्प वेंडर। विरोध से राजस्व प्रभावित नहीं होगा। जिसे रजिस्ट्री कराना है वह आज नही कराएगा तो महीनेभर बाद कराएगा। कराएगा जरूर। इसीलिए राजस्व की चिंता नहीं है, वह कहीं नहीं जाएगा। यहीं आएगा। मीडिया से बातचीत के दौरान दो टुक शब्दों में यह बात मप्र के वित्त मंत्री जयंत मलैया ने कही।
प्री-बजट प्लानिंग के मद्देनजर बुधवार को वाणिज्यिक कर मुख्यालय में संपन्न हुई अहम बैठक के दौरान वित्त मंत्री मलैया ने बजट को लेकर उद्योगपतियों, व्यापारियों और कर सलाहकारों से रायशुमारी की।फार्म-49 की अनिवार्यता और उसके उत्पादों की सूची 34 से बढ़ाकर 66 किए जाने के मामले में उन्होंने कहा कि मामले की समीक्षा कर रहे हैं। किसी पर अनावश्यक भार नहीं बढ़ाया जाएगा। महीने-दो महीने में पेट्रोल-डीजल पर लगाए जा रहे अतिरिक्त भार व उसके विरोध पर मंत्री ने कहा कि सरकार पेट्रोल-डीजल पर वन-टाइम अतिरिक्त भार बढ़ाने की तैयारी में है ताकि बार-बार न बढ़ाना पड़े। उन्होंने कहा कि कभी मप्र में पेट्रोल-डीजल पर वेट-इंट्री टैक्स ज्यादा था। अब दूसरे राज्य हमसे आगे हैं।
टैक्स टार्गेट और कलेक्शन पर मंत्री ने स्वीकारा कि कलेक्शन के मामले में अभी पीछे हैं। दो महीने वसूली पर जोर होगा। उन्होंने हनुवंतिया टापू की तारिफ की और पर्यटन स्थलों के निजी सहयोग से विकास को मिली केबिनेट की हरी झंडी की सराहना की। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्रालय भी पर्यटन में भागीदारों को रियायत देगा।
सुझाव जो बजट के लिए मिले...
चेक पोस्ट और रास्ते में होने वाली चैकिंग के दौरान तकनीकी त्रुटियों पर जो पांच गुना पेनल्टी लगती है वह खत्म हो। सांकेतिक पेनल्टी के प्रावधान हो। जिला स्तर पर रीजनल एडवाईजरी बोर्ड गठित हो। बोर्ड की बैठक में व्यावसायियों की समस्याओं का समाधान किया जा सके।
रमेश खंडेलवाल, अध्यक्ष
अहिल्या चेम्बर आॅफ कार्मस
यदि किसी कारोबारी ने मप्र के किसी कारोबारी से पूरी कीमत देकर माल खरीदा है और प्रदेश के कारोबारी ने रिटर्न भी दे दिया है तो फिर क्रेता का इनपुट टैक्स रिबेट अमान्य किया जाना गलत है। आॅइल कंपनियों द्वारा बेचे जा रहे पेट्रोल-डीजल पर अलग-अलग तरह से जो टैक्स लगाए जा रहे है वह भी गलत है।
आर.एस.गोयल, वरिष्ठ कर सलाहकार
रिटर्न में संसोधन की तारीख 30 नवंबर तय हो।  व्यापारिक संगठनों को विश्वास में लिए बिना किसी भी तरह के प्रावधान में बदलाव न हो
पी.डी.नागर, सीए
रजिस्टर्ड कारोबारियों द्वारा मप्र के बाहर से खरीदे जा रहे वाहनों पर जो 1 के बजाय 10 प्रतिशत इंट्री टैक्स लिया जा रहा है वह गलत है। जिन नए उत्पादों को फार्म-49 की सूची में शामिल किया है उन्हें तत्काल हटाया जाना चाहिए।
केदार हेड़ा, सचिव सीटीपीए
सुझाव यह भी...
- चेक पोस्ट की व्यवस्था खत्म हो।
- रिटर्न वेरिफिकेशन फार्म जमा करने की आवश्यकता खत्म हो।  क्योकि रिटर्न फाइल करने के लिए पासवर्ड विभाग ही देता है।
- ई रिटर्न इंटरमिडीयेटर आयकर की तरह वाणिज्यिक कर में भी हो। सीए डिजिटल सिग्नेचर से एक साथ इकट्ठे रिटर्न अपलोड कर सकें।


मुसाखेड़ी में कटी बेनाम कॉलोनी

- कटारे और मालवीय बेच रहे हैं प्लॉट
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
चौतरफा अवैध कॉलोनियों से घिरी तकरीबन डेढ़ एकड़ जमीन...। पुराने गेट और बाउंड्रीवाल तोड़कर रोड बनाई...। उस पर 12-30, 15-30 और 20-40 की साइज में प्लॉट काट दिए। 100 रुपए के कच्चे स्टॉम् पर 1100 रुपए/वर्गफीट के हिसाब से सौदे किए जा रहे हैं। ताजा-तरीन अवैध कॉलोनी का यह मामला सामने आया है मुसाखेड़ी स्थित इदरीशनगर और शांतिनगर के बीच का जहां नानूराम कटारे और सुरेंद्र मालवीय बेनाम कॉलोनी काट रहे हैं।
कॉलोनी का खुलासा मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान नगर निगम आयुक्त को इदरीश कॉलोनी निवासी अंकित तोमर द्वारा की गई लिखित शिकायत के बाद हुआ। शिकायत और मौके से मिली जानकारी के अनुसार 20-40 का एक प्लॉट 9 लाख रुपए में बेचा जा रहा है। प्लॉट कटारे बेच रहा है। खरीदारों को किस्त सुविधा भी दी जा रही है बिना ब्याज के। खरीदारों में भरौसा बढ़ाने के मकसद से प्लॉट पर निर्माण करके बेचा रहा है। इदरीसकॉलोनी और शांतिनगर के बीच काटी जा रही 28 प्लॉटों की इस कॉलोनी को अब तक नाम नहीं दिया गया है क्योंकि नए नाम से कार्रवाई का खतरा रहता है। बाद में इसे इदरीशनगर ही कहा जाएगा।
शिकायत दर्ज, कार्रवाई के आदेश...
नगर निगम ने शिकायत दर्ज कर ली है। निगमायुक्त मनीष सिंह ने जोन-11 के देवकीनंदन वर्मा को को कार्रवाई के आदेश भी जारी कर दिए हैं।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
झूठी अफवाह उड़ा रहे हैं। मेरे प्लॉट थे उन पर मकान बना रहे हैं। बाकी प्लॉट दूसरे के हैं। प्लॉट 6 साल से हैं। विवाद चल रहे हैं। ईस्माइल से ली थी जमीन। थाने तक मामला पहुंचा। कब्जे हटवाए थे।
नानूराम कटारे, कॉलोनाइजर
कॉलोनी नहीं काट रहे हैं, गरीबों को बसा रहे हैं। 10 हजार  वर्गफीट का प्लॉट था उस पर यदि प्लॉट गरीबों को दे रहे हैं तो क्या बुराई है। हम तो गरीबों की सहायता कर रहे हैं।
सुरेंद्र मालवीय, कॉलोनाइजर


कॉर्पोरेट फ्रेंडली होगा बजट-2016 - मलैया

आसान होगा काम ताकि ज्यादा मिले कर
इंदौर. विनोद शर्मा।
देश और देश के कारोबार के उत्थान के लिए केंद्र सरकार ने ‘ईज आॅफ डूइंग बिजनेस’ की जो थ्यौरी दी है मप्र भी उस पर दम से काम करेगा। इसकी शुरूआत 2016-17 के प्रस्तावित बजट से होगी जिसे कॉर्पोरेट फे्रंडली बनाया जाएगा। मप्र के कारोबार और कारोबारियों के रास्ते आने वाली मुश्किलों को दूर करने के प्रयास किए जाएंगे। टैक्स प्रणाली का सरलीकरण होगा ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग जुड़े व टैक्स जमा करें।
गुरुवार सुबह रेसीडेंसी में व्यापारिक संगठनों के साथ हुई बैठक के बाद दबंग दुनिया से बातचीत के दौरान यह बात वित्त मंत्री जयंत मलैया ने कही। मंत्री मलैया ने कहा कि प्री-बजट को लेकर चार शहरों में बैठकें होना है। जबलपुर और भोपाल के बाद इंदौर में भी बैठक हो चुकी है। तीनों शहरों में सबसे ज्यादा सुझाव टैक्स प्रणाली के सरलीकरण को लेकर मिले हैं। मैं विश्वास दिलाता हूं कि इस दिशा में सराकर भी तत्पर है। हम भी चाहते हैं व्यवस्था सरल हो ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग टैक्स जमा करें। ज्यादा से ज्यादा टैक्स मिले। फार्म-49 की सूची में उत्पादों की संख्या 34 से बढ़ाकर 66 की है उसे लेकर जो भी चीजें सामने आ रही है उनके संबंध में ग्वालियर में होने वाली चौथी बैठक में अधिकारियों व जानकारों के साथ बैठकर निर्णय लेंगे। वाणिज्यिक कर कार्यालयों को कॉर्पोरेट फ्रेंडली बनाएंगे ताकि कारोबारियों को वहां सम्मान मिले। झिड़कियां नहीं। वेट रिटर्न फार्म को आसान बनाएंगे।
चेक पोस्ट भी खत्म होगी!
उन्होंने कहा कि चेक पोस्ट को लेकर भी चर्चा जारी है। अरसे से विचार किया जा रहा है कि चेक पोस्ट समाप्त कर रेंडम या ट्रांजिट चैकिंग की जाए। इससे चेक पोस्ट की धांधलियां भी रूकेगी और व्यापारियों को भी राहत मिलेगी। इस मसले पर बजट में नई चीजें सामने आएगी, मैं अभी उनका खुलासा नहीं कर सकता।
ताकि कारोबारियों को मिले राहत...
वेट रिटर्न फार्म क्लिष्ट है जो सरल किया जाना चाहिए। वेट लागू करते वक्त कहा था रिटर्न पोस्टकार्ड साइज का होगा। आज 8-10 पेज का है यह फार्म। सी फार्म  का अप्रुवल आॅनलाइन हो। रिटर्न के साथ व्यापारी ने क्रय-विक्रय की जो लिस्ट दी है वह उसके विभाग के पोर्टल पर उसके अकाउंट के आगे डिस्प्ले हो। मिसमेच रिपोर्ट भी डिस्प्ले हो। अभी आॅनलाइन पेमेंट के लिए सिर्फ तीन बैंकें अधिकृत है जिससे कारोबारी समय पर पेमेंट नहीं कर पाते। इसीलिए अधिकृत बैंकों की संख्या बढ़ाई जाना चाहिए। रिफंड मिलने में भी दिक्कत हे रही है। इसीलिए रिफंड वाउचर से नहीं, चेक से हो। सी-फार्म और फार्म-49 की लिमिट बढ़ाने के लिए कारोबारियों को चक्कर न लगाना पड़े। बिना किसी लिमिट के फार्म दिए जाएं। फाइलों के रखरखाव की समुचित व्यवस्था हो।
आर.एस.गोयल, वरिष्ठ कर सलाहकार

मालवा चेंबर आॅफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के चेयरमैन प्रीतमलाल दुआ ने वैट अधिनियम के सरलीकरण और चेक पोस्ट को हटाने की मांग की। साथ ही स्मार्ट सिटी के विभिन्न बिंदुओं पर प्रकाश डाला। अफसरों की मौजूदगी में सामने आया, चेक पोस्ट पर 300 अफसर तैनात हैं। उन्हें जितना वेतन दिया जा रहा है, उतना ही पैसा चेक पोस्ट से आ रहा है। क्रॉस चेकिंग के लिए विभाग के पास फॉर्म-49 है। लिहाजा चेक पोस्ट निरर्थक हैं।- पटाखा एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा, शहर से बाहर करने के कारण पटाखा कारोबार प्रभावित हो रहा है। इससे विभाग को राजस्व भी नहीं मिल रहा। वित्त मंत्री ने कहा, यह स्थानीय स्तर का मामला है। फिर भी वे इस बाबद मुख्यमंत्री और कलेक्टर से बात करेंगे।- इलेक्ट्रिकल मटेरियल एसोसिएशन के किरण भाई शाह ने कहा, केंद्र और राज्य सरकार ऊर्जा संरक्षण के लिए एलईडी को बढ़ावा दे रही है। एलईडी पर दो श्रेणी में 5 और 14 प्रतिशत वैट लगता है। सरकार आगामी बजट में एलईडी पर वैट शून्य करे। इससे हम चाइनीज एलईडी से मुकाबला कर सकेंगे।- आॅटोमोबाइल डीलर एसोसिएशन के रोहित सांघी ने कहा, व्यापार मंदा है। इस पर लगने वाले वैट को कम करें, ताकि आॅटोमोबाइल डीलरों को राहत मिले।- सीटीपीए के एडवोकेट अश्विन लखोटिया, लोहा व्यापारी एसोसिएशन के इसहाक चौधरी, प्लायवुड एसोसिएशन के नरेंद्र बाफना ने फॉर्म-49 व्यवस्था समाप्त करने की मांग उठाई।- सीए ब्रांच इंदौर के अध्यक्ष सुनील खंडेलवाल, सचिव अभय शर्मा ने कहा, वैट आॅडिट रिपोर्ट की लिमिट 10 करोड़ से घटाकर 2 करोड़ की जाए और आॅडिट नहीं कराने वालों पर पैनल्टी 10 हजार के बजाय 50 हजार लगाई जाए।...तो अफसरों पर लगाएंगे पैनल्टी मालवा चेंबर के अध्यक्ष अजीतसिंह नारंग, सचिव सुरेश हरयानी ने कहा, गैर योजनागत व्यय को कम करें। इससे समस्याएं हल होंगी। ईज आॅफ डूइंग बिजनेस कैसे लागू हो, सरकार इस पर विचार करे। उन्होंने कहा, सभी संगठनों से जो सुझाव आए हैं, उनमें जो व्यावहारिक नहीं लग रहे हैं तो पुन: चर्चा करें। इस पर वित्तमंत्री ने कहा, बजट पूर्व एक बार और चर्चा के लिए इंदौर के लिए व्यापारियों, कर सलाहकारों को भोपाल बुलाया जाएगा, ताकि जनहित वाला बजट बन सके। वित्तमंत्री ने आश्वस्त किया, व्यापार करने में व्यावसायियों को अफसर परेशान करते हैं तो अफसरों पर पैनल्टी लगाई जाएगी।

बस लेन के दोनों ओर बनेगा फ्लाईओवर

शिवाजी जंक्शन के लिए पीडब्ल्यूडी का एक्शन प्लान
- अभी होलकर कॉलेज के सामने है दो तरफा फ्लाईओवर
इंदौर. विनोद शर्मा ।
बीआरटीएस के शिवाजी प्रतिमा जंक्शन पर जल्द ही सिग्नल बंद होने से वाहनों की लंबी कतार नहीं लगेगी। जिम्मेदारी को लेकर छिड़ी लंबी जंग के बाद लोक निर्माण विभाग ने जंक्शन पर फ्लाईओवर बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। इस फ्लाईओवर को होलकर कॉलेज के सामने बने फ्लाईओवर की तरह डिजाइन किया जा रहा है ताकि बस लेन यथावत रहे लकिन दोनों तरफ की जनरल लेन के वाहन ऊपर से आ-जा सके। आईडीए ने फ्लाईओवर के लिए पीडब्ल्यूडी के नाम पर सहमति तो दे दी है लेकिन इस संबंध में लिखित पत्रचार नहीं हुआ है इसीलिए फ्लाईओवर का भविष्य आगामी बजट में भी प्रभावित हो सकता है।
जंक्शन पर फ्लाईओवर कौन बनाएगा? इसे लेकर आईडीए और पीडब्लयूडी के बीच अर्से तक असमंजस चलता रहा। आईडीए ने हाथ खींच लिए हैं। अब पीडब्लयूडी ने अपने हिसाब से ब्रिज को बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। फ्लाईओवर की फाइल बनाकर मंजूरी के लिए भोपाल भेजी जा चुकी है। उम्मीद जताई जा रही है कि बजट सत्र में इस फ्लाईओवर को मंजूरी मिल जाएगी। हालांकि इसके लिए जरूरी है आईडीए की लिखित सहमति जो अब तक पीडब्लयूडी को नहीं मिली है।
ऐसा होगा फ्लाईओवर...
-- होलकर कॉलेज की तरह बस लेन के दोनों ओर जो सामान्य लेन है वहां बनेगा फ्लाईओवर। इसकी लंबाई 450 मीटर होगी। चौड़ाई (एक साइड 10 मीटर) होगी।
-- होलकर कॉलेज के सबवे में वाहनों को निकलने की जगह नहीं है लेकिन यहां एमवायएच से रिंग रोड की ओर का ट्रेफिक फ्लाईओवर के नीचे से गुजरेगा। बस लेन के सिग्नल यथावत रहेंगे।
-- फ्लाईओवर हार्डिया कम्पाउंड के पास से शुरू होगा और स्टेडियम जोन तक बनेगा। दोनों ओर के फ्लाईओवर के पास सर्विस रोड भी होगी।
-- छोटा नेहरू स्टेडियम की ओर वाला रोड बंद करके इसे सिर्फ चौराहे की तरह विकसित किया जा सकता है। अभी यह पंच राहा है।
थोड़ी बदल सकती है ट्रेफिक व्यवस्था
नए फ्लाईओवर के साथ चौराहे की ट्रेफिक व्यवस्था भी बदल सकती है। अभी रेसीडेंसी या वीआईपी एरिया के जो जज-अधिकारी व अन्य लोग छोटा नेहरू स्टेडियम की ओर से आते-जाते हैं उन्हें इस रास्ते को बंद करके व्हाइट चर्चा के पीछे, बीएसएनएल के जीएम हाउस के सामने से होते हुए गीताभवन चौराहे तक आना पड़ सकता है। इसी तरह एमवाय के सामने से आने वाली भोपाल या अन्य रूट की बसों को बस नेहरू प्रतिमा से गीताभवन-डाककुंज और कृषि कॉलेज होते हुए नया रूट दिया जा सकता है। इससे दवा बाजार के पास और एमवाय के सामने भी जाम नहीं लगेगा।
नए बजट में मिलेगी मंजूरी...
फ्लाईओवर की डिजाइन व डिटेल्स मंजूरी के लिए भोपाल भेज दी है। नए बजट में मंजूरी मिलने की उम्मीद है। प्रोजेक्ट को ऐसे डिजाइन किया जा रहा है ताकि काम में ज्यादा वक्त न लगे। कोशिश यही होगी कि सालभर में काम पूरा हो।
आर.एन.मिश्रा, एक्जीक्यूटिव इंजीनियर
पीडब्लयूडी (ब्रिज सेल)
फ्लाईओवर को पहले आईडीए बनाने वाला था लेकिन अब इसका काम पीडब्ल्यूडी अपने स्तर पर कराएगा
शंकर लालवानी, अध्यक्ष
आईडीए

शर्तों का कायदा, ठेकेदारों का फायदा

प्रतिद्विदी हुए कम, 19 लाख में होंगे 15.13 लाख के काम
इंदौर. विनोद शर्मा।
नगर निगम की तरह इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) में भी चहेते ठेकेदारों को फायदा पंहुचाने का खेल जारी है। इसका ताजा उदाहरण आईडीए बिल्डिंग के वार्षिक संधारण के निकाला गया टेंडर है जिसे खास कंडीशन अप्लाय करके जारी किया गया है ताकि सिर्फ वही ठेकेदार ठेका ले सके जिनका 'व्यवहार'  प्राधिकरण अफसरों और पदाधिकारियों को समझ आये। फिर भले वो एसओआर या टेंडर वेल्यु से 20-30 प्रतिशत अधिक का ही रेट कोट क्यों न करें।वैसे भी अतिरिक्त पैसाकौनसा अफसरों की जेब से जाने वाला है। जानकारों की माने तो आईडीए कन्डीशन हटाकर काम कराता है लागत 5-7 लाख रुपये कम आयगी।
मप्र लोक निर्माण विइएजी के संसोधित पत्र (एफ50/7/2015) के अनुसार 2 करोड़ तक के कामों को शर्तों(कंडीशन) से मुक्त रखने का आदेश सचिव सी.पी. अग्रवाल ने दिया था।इस आदेश को हवा में उड़ाते हुए आईडीए के अफसरों ने छोटे छोटे कामों में शर्तों का बोझ डाल दिया। इसी कड़ी में प्राधिकरण बिल्डिंग की मरम्मत के लिए बीते दिनों सशर्त टेंडर निकाला। रंगाई- टूटे कांच बदलने और टॉयलेट सुधार सहित अन्य कामों की लागत  15 लाख  13 हजार 699 आंकी गई। शर्तों के अनुसार इस काम को दो कम्पनियां ही कर सकती है। दोनों ही अधिकारियों की लाड़ली है। इसीलिए टेंडर 25 प्रतिशत ज्यादा के मिले। मतलब 15.13 लाख का काम अब 18.50 से 19 लाख के बीच होगा।
एक जैसे दो काम, एक विभाग, दो नियम
प्राधिकण 27 लाख की लागत से गंगवाल बस स्टैंड की दशा बदल रहा है। वहा भी संधारण का काम किया जा रहा है। प्राधिकरण ने टेंडर बुलाए तो 22.50 प्रतिशत कम के टेंडर मिले। यानी जिस काम की लागत आईडीए ने 27 लाख आंकी थी वही काम अब 20.92 लाख में हो रहा है। 6.08 लाख का फायदा हुआ प्राधिकरण को। काम 80 प्रतिशत तक हो चुका है। वहीं प्राधिकरण बिल्डिंग के काम को शर्तें लादकर 25 प्रतिशत ज्यादा में देन की तैयारी है अफसरों की। यहां अधिकारी 3.75 से 4 लाख रुपए ज्यादा देना चाह रहे हैं।
ओपन टेंडर हो तो 4-5 लाख का फायदा...
जानकारों की मानें तो शर्तों की जिद छोड़कर प्राधिकरण यदि ओपन टेंडर निकालता है तो 15.13 लाख का काम 10 से 11 लाख में ही हो जाएगा। 4-5 लाख की बचत होगी। इस राशि का इस्तेमाल कहीं ओर शहर के विकास में हो सकता है।
एक तीर, तीन शिकार...
पीडब्ल्यूडी एसओआर के विपरीत सशर्त टेंडर निकालकर प्राधिकरण के अधिकारी एक तीर से तीन शिकार कर रहे हैं। पहला : अपने चहेते ठेकेदारों को प्रतिद्विदियों से मुक्ति दिलाना। दूसरा : ठेकेदारों को फायदा पहुंचाना और तीसरा उसी फायदे में कमीशन लेकर अपनी जेब भरना।
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प्राधिकरण बोर्ड के समक्ष बड़े कामों की जानकारी आती है। छोटे काम अधिकारी अपने स्तर पर करते हैं। चूंकि अब मामला मेरे ध्यान में आया है तो मैं जानकारी लेता हूं, ऐसा क्यों हो रहा है।
शंकर लालवानी, अध्यक्ष
आईडीए

को-आॅपरेटिव की आड़ में हवाला बैंक

रेणुकामाता मल्टीस्टेट को-आॅपरेटिव बैंक पर इनकम टैक्स की कार्रवाई
5 हजार करोड़ के हवाले का अनुमान
इंदौर. विनोद शर्मा।
सुभाषचौक स्थित रेणुकामाता मल्टीस्टेट को-आॅपरेटिव बैंक में 90 फीसदी खाते रेडीमेड कारोबारियों के हैं। इस बैंक का इस्तेमाल फर्जी डीडी (डिमांड ड्राफ्ट) घुमाने के साथ कारोबारियों का दो नंबरी पैसा महाराष्ट्र और गुजरात के शहरों में पहुंचाने के लिए होता है। ये खुलासा सेंधवा, रायपुर के बाद मंगलवार को इंदौर में इनकम टैक्स इन्वेस्टिगेशन विंग की छानबीन के दौरान हुआ। बैंक की सभी ब्रांचों के साथ उसके खातेदार भी इनकम टैक्स के निशाने पर है। बैंक के रास्ते 5 हजार करोड़ से अधिक के हवाले का अनुमान लगाया जा रहा है।
विंग ने मंगलवार की शाम बैंक पर दबिश दी। विस्तृत जांच की। जांच के दौरान करीब 40 लाख रुपए लॉकर से मिले हैं जिन्हें सीज कर लिया गया। कार्रवाई देर रात तक चलती रही। इससे पहले रेणुकामाता की सेंधवा ब्रांच पर कार्रवाई हो चुकी है। वहां तकरीबन 2000 करोड़ के हवाले के प्रमाण मिलने की बात कही जा रही है। सोमवार को विंग ने रायपुर में भी बैंक के ठिकानों पर दबिश दी थी। जहां सर्वे के बाद कार्रवाई को सर्च में कन्वर्ट करना पड़ा। इसी कड़ी में इंदौर में भी कार्रवाई हुई।
कार्यक्षेत्र दो राज्यों का, काम चार राज्यों में
बैंक (पंजीयन क्र. एमएससीएस/सीआर/290/2008)  का पंजीकृÞत पता एल-24 एमआईडीसी अहमदनगर, नासिक है। पंजीयन के अनुसार बैंक का कार्यक्षेत्र महाराष्ट्र और गुजरात होना है लेकिन बैंक चार राज्यों में काम कर रही है। बैंक का पूरा तानाबना हवाले को लेकर ही बुना गया है। इंदौर में बैंक को करीब 10 साल हो गए हैं।
यहां सब काम एक निजी बैंक की तरह होता है। फिर मामला वेलकम किट के साथ एटीएम पिन देने का हो या फिर हर शाखा के साथ एटीएम का। डाटा सेंटर है। इसके एटीएम में विड्रॉल के साथ फास्ट केस आॅप्शन भी है। इसमें 100 से 10 हजार रुपए तक के आॅपशन है। 2014 में 385 सदस्य बने थे जबकि 2015 में 1647 सदस्य।
हवाला के हवाले है बैंक
एक दशक में एक हजार से अधिक मेम्बर बनाए हैं। इनमें करीब 650 रेडीमेड के कारोबार से जुड़े हैं। खाते कर्मचारियों के नाम पर है। संचालन दलालों के माध्यम से होता है। कारोबारियों की महाराष्ट्र और गुजरात के कारोबारियों से डील भी दलाल कराते हैं और दो नंबर का पैसा भी वही पहुंचाते हैं। इसीलिए खाते खोले गए हैं ताकि यहां से बेनामी डीडी बनाकर महाराष्ट्र-गुजरात तक इंदौरी कारोबारियों की रकम लाई ले जाई जा सके। कुटाल कॉम्पलेक्स, नाकोड़ा टॉवर, शिव विलास पैलेस, तिलकपथ और ईमलीबाजार के रेडीमेड कारोबारी जुड़े हैं इस बैंक से।
ऐसा है सिस्टम...
-- हवाला का माध्यम से कोई राशि आती है और वह सेम डे कारोबारी तक पहुंचती है तो उस पर एक प्रतिशत ‘सर्विस’ चार्ज देना होगा।
-- तीन दिन में ‘विड्रॉल’ कराएं तो जितना पैसा आया है उतना मिल जाएगा।
-- तीन दिन के बाद यदि पैसा ‘विड्रॉल’ होता है तो उस पर बैंक 6 प्रतिशत का ब्याज भी देती है। क्योंकि इस राशि का इस्तेमाल दूसरे लेन-देन में हो जाता है।
ऐसे होता है ड्राफ्ट एक्सचेंज...
गुरुशरण, कान्हा, राजेंद्र सूरी और श्रीवर्धमान को-आॅपरेटिव बैंकों की तरह यहां भी फर्जी डीडी का बड़ा खेल है। बैंक में ऐसे कई खाते हैं जिनके खातेदारों को मासिक वेतन देकर उनका खाता हवाले के लिए इस्तेमाल होता है। इन्हीं खातेदारों के नाम से फर्जी डीडी बनवाए जाते हैं इन डीडी को कारोबारियों को दे दिया जाता है। जैसे किसी होटल में रूपए की जगह कई बार सिगरेट या माचिस की पत्ती इस्तेमाल होती है वैसे ही यह डीडी एक से दूसरे कारोबारियों के बीच हस्तांतरित होती रहती है ताकि पकड़-धकड़ में बचाव आसान हो।
कपड़ा कारोबारियों में हड़कंप..
पहले सेंधवा और फिर रायपुर में सोमवार को हुई कार्रवाई के बाद ही इंदौर के कपड़ा कारोबारियों ने बैंक से कामकाज बंद कर दिया। यहां तक आपस में डीडी भी नहीं एक्सचेंज की। क्योंकि इससे पहले गुरुशरण और कान्हां में इन्हीं कारोबारियों के काले कारनामों की कलई खुल चुकी है।
एक नजर में बैंक
कुल ब्रांच : 103
राज्य : महाराष्ट्र, गुजरात, मप्र, आंध्रप्रदेश, कनार्टका और दिल्ली
कुल डिपॉजिट : 235.92 करोड़ (मई 2015 तक )
सिक्योर्ड एडवांस : 65.26 करोड़
लोन जो दिया : 177.38 करोड़
अध्यक्ष : प्रशांत भालेराव
उपाध्यक्ष : पांडुरंग देवकर
(मार्च 2015 को  332 करोड़ 99 लाख 66 हजार 613 रुपए की आॅडिट रिपोर्ट सबमिट की। )
खेल ऐसे भी
एक व्यक्ति आया उसने 5 लाख रुपए की डीडी बनवाई। पहचान-पत्र दिया। दूसरा व्यक्ति आया उसने 10 लाख की डीडी बनवाई लेकिन पहचान पत्र नहीं था। ऐसे में बैंक वाले पहले व्यक्ति के पहचान-पत्र पर ही दूसरी डीडी बना देते हैं इससे जिसने 5 लाख की डीडी बनवाई है उसकी कुल 15 लाख की डीडी बताई जाती है जबकि 10 लाख देने वाले का नाम तक नहीं रहता। इससे मोटी कमीशन ली जाती है। बैंक का खाता बैंक आॅफ बड़ौदा में भी है। एक नंबर का रोटेशन दिखाने के लिए यहां से वहां चक्रा चलाया जाता है। 

Thursday, January 21, 2016

इंदौर में दौड़ रही है अवैध एम्बुलेंस

इंदौर. विनोद शर्मा ।
अवैध मैजिक और वेन के साथ इंदौर की सड़कों पर अब अवैध एम्बुलेंसें दौड़ती नजर आ रही है। बिना स्ट्रेचर, बिना आॅक्सीजन और बिना किसी मेडिकल किट के महज नीली बत्ती एवं हूटर भर लगाकर सरकारी-गैर सरकारी अस्पतालों के सामने खड़ी की गई एम्बुलेंस आॅपरेटरों के लिए कमाई का जरिया बन चुकी है। इंदौर से देवास, धार, अलिराजपुर, भोपाल, ग्वालियर जैसे शहर तक मरीज ले जाने के नाम पर खुलेआम सौदेबाजी और दलाली हो रही है। प्राइवेट टैक्सियों की तरह मनमाना पैसा वसूला जा रहा है। अवैध एम्बुलेंस को लेकर न स्वास्थ्य विभाग सख्त है और न ही आरटीओ के पास कोई रणनीति है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बड़े शहरों में एम्बुलेंस की स्थिति को लेकर सर्वे करवाया था। इस दौरान अनेक सरकारी और निजी अस्पतालों की एम्बुलेंस निर्धारित मापदंडों पर खरी नहीं उतर पाई। अस्पतालों के बाहर खड़ी नजर आने वाली निजी एम्बुलेंस की हालत तो इससे भी ज्यादा खराब है। अधिकांश एम्बुुलेंस कंडम हो चुकी हैं। उनमें ईलाज व सुरक्षा संबंधित इंतजाम सिर्फ नाम के हैं। बावजूद वे सड़कों पर दौड़ रही हैं। इससे मरीज की जान को ज्यादा खतरा रहता है जबकि मापदंड के अनुसार एम्बुलेंस में लाइट सर्पोटिंग सिस्टम, वेंटीलेटर, एक कम्पाउण्डर व दो कर्मचारी, फर्स्ट-एड-बॉक्स, डिलेवरी कीट, फोल्डिंग स्ट्रेक्चर, अग्निशमन यंत्र, जीपीएस सिस्टम सहित अन्य सुविधाएं एम्बुलेंस में होनी चाहिए। जिससे रेफर्ड मरीजों को अन्य अस्पतालों में ले जाने-ले आने की सुविधा हो।
टेÑवल्स गाड़ियों से ज्यादा किराया
टूर्स एंड ट्रेवल्स की गाड़ियों से ज्यादा वसूला जा रहा है एम्बुलेंस का किराया। जबकि टूर्स एंड ट्रेवल्स की गाड़ियों में ऐसी और म्यूजिक सिस्टम लगा होता जबकि एम्बुलेंस में कुछ नहीं।
एम्बुलेंस टूर्स एंड टेÑवल्स
मारूति वेन 7-8 7-8
ट्रेवलर 16-17 13-16
ईको 10-11 7-8
टवेरा 10-13 9-10
दलाली कहां कितनी...
- किसी अस्पताल से मारूती वेन एम्बुलेंस में मरीज को खंडवा ले जाना है तो 2500 से 2700 रुपए लेते हैं। अस्पताल में वार्ड बॉय, रिसेप्शन, सिक्योरिटी वाले ‘जिसने पार्टी को नंबर दिया है’, को 300-700 रुपए तक दलाली देना पड़ती है।
- दलाली सभी अस्पतालों में ली जाती है। दलाली का पैसा निकालने के लिए एम्बुलेंस का किराया भी ज्यादा वसूला जाता है। एमवायएच में दलाली सबसे ज्यादा होती है।
- एलपीजी-सीएनजी लगी मारूति वेन से खंडवा आने-जाने का खर्च करीब 1000 रुपए आता है। पेट्रोल गाड़ी है तो 1400 रुपए का पेट्रोल। 1500 रुपए के डीजल में टवेरा जैसी गाड़ी खंडवा जाकर आ जाती है जो पैसा लेती है 4000 रुपए। इसमें 300-400 रुपए ड्राइवर को देते हैं।
- यानी छोटी गाड़ी पर मालिक को हर ट्रिप पर 800 रुपए बचते हैं जबकि बड़ी गाड़ी पर 2000 रुपए तक की बचत होती है।
- कम दूरी, ज्यादा किराया- उदाहरण के तौर पर मारूति वेन से बड़वाह जाना है तो 1500 रुपए किराया चुकाना पड़ता है जबकि खंडवा के लिए 2500 रुपए। इंदौर से बड़वाह 64 किलोमीटर। इंदौर से खंडवा 132 किलोमीटर दूर।
तीन तरह की होती है एम्बुलेंस...
एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस : जीवन के लिए घातक हर तरह की मेडिकल इमरजेंसी से संबंधित उपचार सुविधा इन एम्बुलेंस में उपलब्ध रहना चाहिए। अंत:स्वासनली इंटुबेशन, दवाएं, सलाइन, कार्डियक मॉनिटरिंग और इलेक्ट्रीकल थेरेपी के साथ क्वाइलिफाइड आॅपरेटर हो। इस पर 10 सेंटीमीटर की साइज में ‘एम्बुलेंस’ कांच पर लिखा (रिवर्स रिडिंग) हो। एम्बुलेंस के दोनों ओर 8 सेंटीमीटर साइज में नीले रंग के स्टार बने हों।
सहुलियत ::: वेंटिलेशन एअरवे इक्यूपमेंट, मॉनिटर, इन्फ्यूजन, इमोबिलिजेशन (सर्वाइकल बेल्ट जैसे), स्ट्रेचर, संचार साधन, इंज्यूरी प्रिवेंशन इक्यूमेंट।
बेसिक लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस : इनमें मरीजों को प्राथमिक और बुनियादी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होना चाहिए। इसकी छत पर भी हरे रंग से स्टार बना हो कमसकम 60 सेंटीमीटर का। इसके अलावा एम्बुलेंस के साथ जो स्टार बने हों वह भी हरे रंग के हों।
सहुलियत ::: कमसकम दो स्ट्रेचर, सक्शन डिवाइस, बेग-मास्क वेंटिलेशन यूनिट, आॅक्सीजन यूनिट
पेशेंट ट्रांसपोर्ट एम्बुलेंस :  इन वाहनों का इस्तेमाल सिर्फ शेड्यूल्ड विजिट के रूप में होना चाहिए। जैसे रूटीन फिजिकल एक्जामिनेशन, एक्स-रे या लेबोरेटरी टेस्ट या पेशेंड को अस्पताल से अन्य अस्पताल या घर पहुंचाने के लिए किया जाना चाहिए। ऐसे वाहनों पर एम्बुलेंस नहीं पेशेंट ट्रांसपोर्ट एम्बुलेंस लिखा जाता है। 8 सेंटीमीटर साइज में। स्टार नहीं होते।
सहुलियत : पुनर्जीवन किट, फर्स्ट एड बॉक्स, एम्बु बेग, आॅक्सीजन सिलेंडर एंड ऐसेसरीज।
हर एम्बुलेंस की अलग कहानी...
पेशेंट स्पेश एएलएस बीएलएस पीटीए
न्यूनतम लैंथ 2700 2700 1600
न्यूनतम विड्थ 1500 1500 940
न्यूनतम हाइट 1500 1500 1000
(साइज मिलीमीटर में)
सबसे जरूरी...
- एम्बुलेंस का पंजीयन स्वास्थ्य विभाग से कराना होगा।
- पंजीयन सिर्फ पंजीयन तिथि से पांच साल तक के लिए होगा।
- इस दौरान स्वास्थ्य विभाग और परिवहन विभाग को नियमिति इंस्पेशन करना होगा।
- फिटनेस टेस्ट भी नियमित हो।
- जांच के दौरान सभी उपकरण चालू अवस्था में मिले। अन्यथा पंजीयन रद्द।