- कछुआ रफ्तार तो कैसे हो सुधार
छह महीने का दावा और सालभर बाद भी अधूरी रोड, छह महीने ओर लगेंगे
- पार्किंग से लेकर ट्रेंचिंग ग्राउंड तक बनी रोड
इंदौर, सिटी रिपोर्टर ।
छह महीनों की समयसीमा के साथ शुरू हुआ धार रोड की सूरत संवारने का काम सालभर बाद भी आधा-अधूरा है। कंपनी के मौजूदा रवैये और मैदानी हकीकत को देखते हुए यह कह पाना मुश्किल है कि आगामी छह महीनों में भी सड़क पूरी बन जाएगी। कंपनी की धीमी रफ्तार और नगर निगम के अधिकारियों की अनदेखी ने हादसों का हाई-वे साबित हो चुकी इस रोड पर दुर्घटनाओ की संभावनाएं दोगुनी कर दी है। वह भी उस स्थिति में जब निगम और पीडब्ल्यूडी के बीच जारी मालिकाना हक की कश्मकश के बीच सड़क को सिरपुर के आगे भी तीन किलोमीटर तक और बनाया जाना बाकी है।
मुद्दा है तकरीबन ढाई किलोमीटर लंबे धार रोड (गंगवाल बस स्टैंड से सिरपुर तालाब) का। नगर निगम चुनाव के परिणामों के बाद दिसंबर 2009 में महापौर डॉ.उमाशशि शर्मा ने इस सड़क का जो कायापलट शुरू किया था वह आज भी अंजाम तक नहीं पहुंचा। नगर निगम और कंपनी इसकी वजह बिजली-टेलीफोन लाइनों की शिफ्टिंग में हुई देर को कारण मानते हैं वहीं क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की मानें तो कंपनी द्वारा एक साथ कई सड़कों पर काम शुरू किए जाने के कारण देर हुई है। कंपनी की इस गलती का खामियाजा हादसों के रूप में लोगों को चुकाना पड़ रहा है। आंकड़ों के लिहाज से बात करें तो सिरपुर तालाब से जिला अस्पताल के बीच ही साल में दो सौ से ज्यादा छोटे-मोटे हादसे हो ही जाते हैं।
डेढ़ साल से बदहाल है रोड की 'धारÓ
इंदौर की व्यस्ततम सड़कों में से एक और हादसों की होड़ के कारण हाई-रिस्क जोन साबित हो चुके इस रोड की धार खत्म हुए दो साल हो गए हैं। अक्टूबर 2008 से अक्टूबर 2009 तक पहले सीवरेज प्रोजेक्ट के कारण सड़क के एक हिस्से पर आवाजाही बंद रही और सालभर से सड़क की शक्ल सूधारने के नाम पर। सड़क की बदहाली को लेकर न निगम के अधिकारी गंभीर है और न ही क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि नगर निगम ने इस रोड का काम पूरा किए बगैर मालवा मिल के सामने की उस रोड का काम शुरू कर दिया जिस पर निर्माणाधीन भंडारी क्रॉसिंग के कारण यातायात का दबाव पहले ही कम था। कंचनबाग से नाथ मंदिर और नाथ मंदिर से आरएनटी मार्ग के साथ हाईकोर्ट से होटल बलवास के बीच बनाई गई रोड क
छह महीने तो ओर लगेंगे
१. गंगवाल बस स्टैंड से जीएनटी तक 200 मीटर की दोनों पट्टियां पक्की है। बाकी दो सौ मीटर में एक हिस्सा बना है। रामकृष्णबाग पुलिया का काम भी होना है।
२. जीएनटी से जिला अस्पताल के बीच 700 मीटर के हिस्से में जिला अस्पताल वाली साइड में सड़क एक हिस्से में बनी है।
(दोनों हिस्सों में देरी की वजह 2008-09 में डाली गई सीवरेज लाइन को बताया जाता है। अधिकारी कहते हैं रुककर काम करेंगे नहीं तो सड़क बैठ जाएगी)
३. जिला अस्पताल से गंगानगर कलाली के बीच तीन सौ मीटर हिस्सा डामर का है जो उबडख़ाबड़ हो चुका है। दोनों तरफ के वाहन एक पट्टी पर ही चलते हैं।
४. कलाली से लेकर चंदननगर चौराहे के बीच सड़क सड़क कम, ट्रेंचिंग ग्राउंड 'यादा नजर आती है। तकरीबन 300 मीटर लंबा यह हिस्सा पूरी तरह कचरे और सीवरेज की गाद से गड़ा है। हालाकि बीच में नाले के पास सीमेंट का कुछ हिस्सा जरूर बना है। पुल की स्लैब डलना बाकी है।
५. चंदननगर चौराहा बदहाल है। अग्निहोत्रि पेट्रोल पंप के सामने और सिरुपर गांव की ओर टूकड़ों में रोड बनी है। सबसे 'यादा हादसे यहीं होते हैं।
देर की वजह बहानेबाजी
सीवरेज की लाइन डल चुकी है। लोगों ने स्वे'छा से निर्माण भी हटा लिए। बिजली कंपनी खंबों की शिफ्टिंग भी काफी हद तक कर चुकी है लेकिन निगम है कि बहाने पर बहाने बनाकर काम में देर कर रहा है। दो-तीन बार अधिकारियों को लताड़ भी चुके हैं लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा।
प्रिती अग्निहोत्रि, पार्षद
वार्ड-1
आश्वासन देकर अलविदा हो जाते हैं महापौर
निगम के अधिकारी मोटी चमड़ी के हो चुके हैं उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता कोई कितना ही परेशान क्यों न होता रहे। दिसंबर में सालभर पूरे हो जाएंगे लेकिन सड़क आधी भी नहीं बनी। शिकवा-शिकायत करो तो महापौर-निगमायुक्त दौरे के साथ हवाई आश्वासन देकर अलविदा हो जाते हैं।
फातिमा खान, पार्षद
वार्ड-2
संसाधन नहीं थे तो दूसरी सड़क पर काम क्यों किया
जब कंपनी के पास एक साथ दो मौकों पर काम करने वाले संसाधनों की कमी थी तो उसने धार रोड को छोड़ दूसरी सड़क पर काम क्यों शुरू किया। मौजूदा हालात से लगता है सड़क छह महीने और नहीं बन पाएगी। अब इस दौरान लोग परेशान हो तो हो। किसे फर्क पड़ता है।
सुरजीतसिंह चड्ढा, पार्षद
वार्ड-66
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