
-- राजकुमार ब्रिज से जूनी इंदौर अंडर ब्रिज के बीच डाली जाना है लाइन
-- यातायात के दबाव और बीएसएनएल की केबलों की अनदेखी
-- आठ महीनों में एक किलोमीटर लाइन डालने वालों को डालना है छह महीनों में दो किलोमीटर लंबी लाइन
-- महंगाई का बहाना बनाकर टाली जा रही है ट्रेंचलेस तकनीक
इंदौर, विनोद शर्मा ।
यातायात के दबाव और अंतररा'यीय संचार लाइनों की सुरक्षा के लिए बीएसएनएल द्वारा दी गई दरखास्त को अनदेखा करते हुए नगर निगम ने सीवरेज लाइन के लिए राजकुमार ब्रिज से लेकर जूनी इंदौर अंडर ब्रिज तक खुदाई की मंजूरी दे दी है। मंगलवार से काम शुरू करने वाली कंपनी और नगर निगम इसके लिए समयसीमा भले छह महीनों की मुकरर्र कर चुके हों लेकिन एबी रोड और राजमोहल्ला-अंतिम चौराहे जैसी सपाट सड़कों के कड़वे अनुभव बताते हैं कि यहां कमसकम सवा साल लोगों को परेशान होना पड़ेगा। इस तथ्य से जानकार भी सहमत है। उनकी मानें तो इस चट्टानी इलाके में खुदाई करके लाइन डालना आसान नहीं होगा। चट्टाने वक्त तो लेंगी ही।
भंडारी से जूनी इंदौर अंडर ब्रिज के बीच कुल तीन किलोमीटर लंबी लाइन डाली जाना थी। भंडारी से राजकुमार ब्रिज के बीच लाइन डल चुकी है। अब बारी है राजकुमार से जूनी इंदौर अंडर ब्रिज। इसकी लंबाई करीब दो किलोमीटर है। इसमें तीस फीट की गहराई पर कुल 600 पाइप डाले जाना है। आठ दिन पहले मिली नगर निगम की हरी झंडी के बाद पूर्व और मध्य क्षेत्र में सीवरेज प्रोजेक्ट को अंजाम दे रही नागार्जुन कंस्ट्रक्शन कंपनी (एनसीसी) मंगलवार से सड़क की खुदाई शुरू कर देगी। वह भी उस स्थिति में जब निर्माणाधीन भंडारी आरओबी के कारण सुनसान पड़े भंडारी- राजकुमार मार्ग पर एक किलोमीटर लंबी लाइन डालने में ही कंपनी ने आठ महीने लगा दिए। ऐसे में कंपनी राजकुमार से जूनी इंदौर के बीच दो किलोमीटर लाइन छह महीने में कैसे डाल देगी? इसका जवाब न निगम के पास है और न ही कंपनी के पास।
उधर, बीएसएनएल भी नगर निगम और कंपनी को पत्र लिखकर निगम को चेता चुका है कि नेहरू पार्क पुराना टर्मिनल है। यहां तीन सौ मीटर के दायरे में अंतररा'यीय केबलों के तार जूड़े हैं। यदि जरा-भी तोडफ़ोड़ हुई तो मप्र ही नहीं, आसपास के दूसरे रा'यों का नेटवर्क भी ठप हो जाएगा।
ऐसे करना होगा काम
पांच फीट से 'यादा डाया के इस पाइप को डालने के लिए आठ मीटर खुदाई करना होगी। इसमें चार मीटर तक मिट्टी और बाकी चार मीटर में चट्टाने हैं। ऐसे में खुदाई करके एक पाइप डालने में ही कंपनी को तीन दिन लग जाएंगे। यानी 600 पाइपों के लिए 1800 दिन। कंपनी एक साथ चार फ्रंट खोलती है तो भी काम 450 दिन में पूरा होगा। वह भी उस वक्त जब रोड पर यातायात पूरी तरह प्रतिबंधित रहे।
विकल्प और भी..
खातीवाला टैंक और लसूडिय़ा चौराहे की तरह यहां भी ट्रेंचलेस पद्धति से लाइन डाली जा सकती है। इस पद्धति में खुदाई जमीन के अंदर-अंदर होती है और ऊपर का यातायात भी प्रभावित नहीं होता। इस पद्धति को परम्परागत पद्धति के मुकाबले महंगी बताकर निम जिम्मेदारी कंपनी के कंधों पर ढोल रहा है।
क्यों है मुश्किल लाइन डालना
वल्लभन"र (राजकुमार ब्रिज) से रेसकोर्स रोड
लंबाई :- 450 मीटर
स्थिति :- एमजी रोड का विकल्प है रेसकोर्स रोड। राजकुमार आरओबी आने-जाने वालेे ट्रैफिक का दबाव 'यादा है।
वाहन संख्या :- एक मिनट में 40 से 50 वाहन।
रेसकोर्स रोड से शास्त्री ब्रिज
लंबाई :- 560 मीटर
स्थिति :- वीआईपी रोड का अहम हिस्सा जो राजकुमार को आरएनटी मार्ग से जोड़ता है। 300 मीटर के हिस्से में बीएसएसएल के अंतररा'यीय नेटवर्क के तार फैले हैं जिन्हें समेटपाना निगम के पास की बात नहीं।
वाहन संख्या :- एक मिनट में 50 वाहन।
शास्त्री ब्रिज से पटेल ब्रिज
लंबाई :- 550 मीटर
स्थिति :- रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड के साथ छोटी ग््वालटोली की व्यावसायिक गतिविधियों कारण यातायात 'यादा। रेलवे स्टेशन से पटेल ब्रिज के बीच पैर रखने की जगह भी नहीं मिलती दिन में। कई बार लगता है जाम।
वाहन संख्या :- एक मिनट में 70-80 वाहन।
पटेल ब्रिज से अंडर ब्रिज
लंबाई :- 350 मीटर
स्थिति :- बस स्टैंड और उसके आसपास की होटलों के कारण 'यादा है यातायात। पटेल ब्रिज से बस स्टैंड के पीछले हिस्से में पहुंचने के लिए करना होगी एस शेप की खुदाई जो आसान नहीं। अंडर पास के आसपास का इलाका है सबसे व्यस्ततम। छावनी से जूनी इंदौर को जोडऩे का दूसरा विकल्प नहीं।
वाहन संख्या :- एक मिनट में 70 से 90 वाहन।
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दिक्कत तो होगी लेकिन हमें वही करना है जो निगम कहेगा। निगम कहता है तो कंपनी ट्रेंचलेस के लिए भी तैयार है।
एस.पी.सिंह, प्रोजेक्ट ऑफिस एनसीसी
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