Tuesday, December 7, 2010

पुलक सिटी के रास्ते पर 'फिनिक्स


- पीडि़तों ने दी आईजी ऑफिस में अर्जी
- कहा :- लाखों रुपया लेने के बाद भी पजेशन नहीं

इंदौर, सिटी रिपोर्टर ।
मप्र सरकार के साथ दो सौ करोड़ का हवाई एमओयू साइन करने वाली फिनिक्स डेवकॉन प्रा.लि.सवा सौ से 'यादा लोगों को चार साल से फ्लैट के नाम पर भटका रही है। कंपनी के कर्ताधर्ता निलेश अजमेरा हैं। वे और उनके साथियों ने 2006-07 में पीपल्याकुमार तालाब के पास फिनिक्स ग्रांट टाउनशिप का काम शुरू किया था जो आज तक जारी है। कंपनी की हीलाहवाली के खिलाफ लोग आवाज उठाते हैं तो कर्ताधर्ता ऑफिस के अते-पते के साथ अपना फोन तक बदलकर बैठ जाते हैं। बुधवार को लिखित शिकायत देते हुए यह बात फिनिक्स के पीडि़तों ने दी।
शिकायतकर्ताओं की मानें तो बॉम्बे हॉस्पिटल के बाद रिंग रोड पर निरंजनपुर की ओर पीपल्याकुमार से लगी जो निर्माणाधीन इमारतें नजर आती हैं वही फिनिक्स ग्रांट है। कंपनी का नाम बदलकर फिनिक्स लेजर एंड लाइफ स्टाइल प्रा.लि. करने के बाद फिनिक्स डेवकॉन के कर्ताधर्ता अब टाउनशीप काम नाम भी बदलने की तैयारियों में लगे हैं। साल-डेढ़ साल में पजेशन देना थी लेकिन पजेशन या पैसे लौटाने के नाम पर कंपनी के कर्ताधर्ता सांस तक नहीं लेते। टाउनशीप के नाम पर बैंकों के फर्जी पोस्टर लगा कर बताते हैं कि लोन सुविधा उपलब्ध है लेकिन अप्लाई करने पर बैंके लोन देती ही नहीं। फिनिक्स ग्रांट में कभी शरद डोसी-मोहन चुघ के नाम माल बेचा तो कभी कैलाश गर्ग के नाम पर। चार वर्षों में एक फ्लैट की डिलीवरी भी किसी को नहीं दी। बिल्डरों के पास जाते हैं तो बदतमीजी करके हमें भगा देते हैं। कहते हैं जितना पैसा दे रखा है लो और फ्लैट-प्लॉट सरेंडर करके चलते बनो। इसके लिए उन्होंने साइट पर भी संजय बंडी को बिठा रखा है। 50 से 60 लोग डर के मारे सरेंडर कर भी चुके हैं।
नक्शा ही बदल डाला
पीडि़तों ने बताया पहले नक्शे में आठ ब्लॉक 'एÓ, 'बीÓ, 'सीÓ, 'डीÓ, 'ईÓ, 'एफÓ, 'जीÓ और 'एचÓ बताए गए थे। तिकोनी डिजाइन में एक सिरे में ब्लॉक 'एÓ और 'बीÓ थे। दूसरे में 'जीÓ और 'एचÓ। तीसरी ओर 'सीÓ, 'डीÓ, 'ईÓ और 'एफÓ थे। 'एÓ से 'सीÓ और 'डीÓ के बीच लॉन टेनिस कोर्ट, स्वीमिंग पुल, बास्केटबॉल कोर्ट, बेडमिंटन कोर्ट का जिक्र था। बाद में सभी ब्लॉक को इधर-उधर करके तमाम कोर्ट गायब कर दिए गए। बगीचा बना दिया।
हजम कर गए सुविधाएं
फिनिक्स ग्रांड 52 सार्वजनिक सहुलियतों की फेहरिस्त दी थी। इसमें स्वीमिंग पूल, पार्क, जिम, सुपर मार्केट और क्लब हाउस जैसी सहूलियतें शामिल थीं। बाद में कंपनी कई सुविधाएं हजम कर गईं।
आधी कीमत कर चुके है वसूल
1100 और 1900 वर्गफीट के फ्लैट 1271 रुपए/वर्गफीट के हिसाब से बुक किए गए थे। इसके एवज में बिल्डर 3.60 लाख रुपए और दूसरे चरण में 2.50 रुपए दे चुके हैं। कंपनी का रवैया देखने के बाद बाकी किश्त रोक दी। पहले पजेशन फिर पैसा।
फिनिक्स ग्रांट:- एक नजर में
कुल पांच लाख वर्गफीट जमीन
--- टाउनशिप की बाउंड्रीवॉल के आधार पर जमीन तिकोनी है। तालाब के पास चौड़ाई 395 फीट से 'यादा है। रिंग रोड की ओर लंबाई 1350 फीट है जबकि पीपल्याकुमार की ओर तकरीबन 1200 फीट।
--- ब्लॉक- आठ 'एÓ, 'बीÓ, 'सीÓ, 'डीÓ, 'ईÓ, 'एफÓ, 'जीÓ और 'एचÓ ('डीÓ और 'एफÓ सहित बने चार ब्लॉक ही हैं।)
--- मास्टर प्लान के नियमानुसार किसी भी तालाब की पाल से साठ मीटर की दूरी तक निर्माण नहीं किया जा सकता। वहीं यहां एक ब्लॉक पीपल्याकुमार तालाब की पाल से बमुश्किल 30 फीट दूर है।
--- बेचे गए कुल फ्लैट- 154/ तकरीबन साठ से सरेंडर कराए।
--- कीमत- 1271 रुपए/वर्गफीट
--- कुल कीमत वसूली- 9 करोड़
--- पजेशन- किसी को नहीं।
--- कंपलीट फ्लैट- एक भी नहीं।
छह महीनों में पजेशन दे देंगे
लोगों ने फ्लैट बुक कराने के बाद किश्ते ही नहीं दी। इसीलिए वित्तीय प्रबंधन गड़बड़ाया और काम में देर हुई। काम जारी है। हमने अभी तक किसी की रजिस्ट्री नहीं की है। लोग जैसे ही पैसा देते हैं उन्हें रजिस्ट्री करके फ्लैट की पजेशन दे देंगे। महीने-दो महीने का वक्त और लगेगा। बाकी बातें झूठी है। रहा सवाल सहुलियतों का तो हमने वादा किया है तो सहुलियतें तो देना पड़ेगी।
रितेश उर्फ चंपू अजमेरा
जांच कराकर कार्रवाई करेंगे
मैं इंदौर से बाहर था इसलिए मुझे शिकायत की जानकारी नहीं है। ऑफिस में शिकायत दर्ज हो गई होगी। मैं कल देखता हूं क्या शिकायत है? कैसे निराकरण किया जा सकता है? अन्यथा जांच कराकर मुकदमा तो दर्ज करेंगे।
संजय राणा, आईजी

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