Tuesday, December 7, 2010

सरकारी सुस्ती की 'रिंगÓ में उलझी 'रोडÓ


-- भूमि पूजन के सवा दो साल बाद नहीं हुआ पश्चिमी रिंग रोड का श्रीगणेश
- लागत 54 से बढ़कर 81 करोड़ पहुंची
- मुद्दा चंदननगर से मोहताबाग के बीच दो किलोमीटर लंबे हिस्से का

इंदौर, सिटी रिपोर्टर ।
इंदौर को महानगर का सपना दिखाने वाली रा'य सरकार दो बरसों के लंबे इंतजार के बावजूद पश्चिमी रिंग रोड के निर्माण को हरी झंडी नहीं दे पाई। मंजूरी के इंतजार में लंबे समय से अटके पड़े पश्चिमी रिंग रोड के दो किमी हिस्से के लिए इंदौर विकास प्राधिकरण ने रा'य शासन को रिमाइंडर पर रिमाइंडर भेज रहा है। बावजूद इसके बात तो नहीं बनी। उलटा दो साल में प्रोजेक्ट की लागत 54 से बढ़कर जरूर 81 करोड़ हो गई। उधर, सरकारी सुस्ती का खामियाजा बदहाल यातायात के कारण आम नागरिकों को जान देकर चुकाना पड़ रहा है।
दर्जनों घोषणाएं, भूमि पूजन के बाद सवा दो साल का इंतजार और आखिर में हाथ लगी निराशा। ये हाल है रिंग रोड की उस रिंग की जो आज तक अधूरी है। विधानसभा चुनाव-2008 के ठिक दो महीने पहले सितंबर में लोक निर्माण मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और तत्कालीन प्राधिकरण अध्यक्ष मधु वर्मा ने लंबे-चौड़े वादों के साथ मोहताबाग के पास भूमि पूजन करते हुए जो शिलालेख लगाया था उसे ही लोग उखाड़ ले गए। सरकार की बेरूखी देख प्राधिकरण ने भी पैर खींचे और दिया हुआ वर्कऑर्डर निरस्त कर दिया। सड़क कब बनेगी? अब इसके जवाब में प्राधिकरण सरकार की तरफ इशारा करता है तो सरकार प्राधिकरण की तरफ। कुल मिलाकर सरकार-प्राधिकरण के दोराहे पर सड़क का मकसद चकरघिन्नी हो चुका है।
इस लेटलतीफी के चलते रोड निर्माण की अनुमानित लागत 27 करोड़ तक बढ़ गई। आंकड़ों के लिहाज से बात करें तो 2008 में जो लागत 54 करोड़ आंकी गई थी वही आज 81 करोड़ के पार पहुंच चुकी है। हाल यह है कि उस वक्त सड़क के बाधक 850 मकानों को हटाने के लिए मुआवजा 15 करोड़ देना था आज मुआवजे की लागत भी बढ़कर 18 करोड़ के पार हो चुकी है।
क्या है लड़ाई
-- 2008 में सड़क की लागत 54 करोड़ थी। इसमें 10 करोड़ रुपए प्राधिकरण को अपनी ओर से देना थे जबकि बची राशि शासन को। दो बरसों में न सरकार ने राशि दी और न ही यह स्पष्ट किया कि उक्त अनुदान रोड के लिए है। या प्रभावितों को दिए जाने वाले मुआवजे के लिए। पूरा मामला शासन के आवास और पर्यावरण विभाग के इर्द-गिर्द घूम रहा है।
-- अब नया झगड़ा यह भी है कि उस वक्त 18.50 प्रतिशत की दर से प्राधिकरण को 10 करोड़ रुपए देना थे। चूंकि लागत बढ़ चुकी है ऐसे में यदि पुराने अनुपात के आधार पर बंटवारा किया जाता है तो प्राधिकरण को 15 करोड़ रुपए देना पड़ेंगे। देरी सरकार की ओर से हुई तो प्राधिकरण यह कीमत चुकाने के लिए तैयार होगा इसकी ग्यारंटी भी कम है।
क्यों जरूरी है
-- बिजलपुर क्रॉसिंग से लेकर चंदननगर तक पश्चिमी रिंग रोड तकरीबन पांच किलोमीटर लंबा बना है। चंदननगर तक हल्के-भारी वाहन गंगवाल की ओर आकर धार रोड का दबाव बढ़ा देते हैं। इस वजह से कई हादसे पहले भी हो चुके हैं।
-- दो किलोमीटर लंबे इस टुकड़े के न बनने से लोगों को चार किलोमीटर घुमकर मोहताबाग जाना पड़ता है। रास्ता बनता है तो पोलाग्रांउड और सांवेर रोड औद्योगिक क्षेत्र आने-जाने वाले भारी वाहन गंगवाल-बड़ा गणपति क्षेत्र में दबाव बढ़ाए ही चंदननगर से एरोड्रम और एरोड्रम रोड से वीआईपी रूट होते हुए मरीमाता आ-जा सकेंगे।
बाधा क्या है
-- चंदननगर से मोहताबाग (एरोड्रम रोड) और मोहताबाग तक काम होना है। बीच में चंदननगर, नंदननगर, हुजुरगंज, गंगानगर, ग्रेटर तिरूपति और राजनगर के 850 निर्माण हटाए जाना है। इनके मुआवजे की लागत ने बढ़ाई दिक्कतें।
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मामला मंजूरी के लिए सरकार के पास विचाराधीन है। हम रिमाइंडर भेज रहे हैं। सरकार की मंजूरी मिलते ही काम शुरू कर देेंगे।
चंद्रमौली शुक्ला, सीईओ प्राधिकरण
मामला केबिनेट की मंजूरी के इंतजार में है। जो फैसला होगा उसके आधार पर निर्णय लेंगे।
जयंत मलैया, आवास एवं पर्यावरण मंत्री
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अगले वित्तवर्ष में शुरू कराएंगे काम
रिंग रोड की रिंग आज तक क्यों पूरी नहीं हुई?
- सरकार और प्राधिकरण के बीच का विवाद है।
पांच साल से प्राधिकरण से लेकर सरकार तक आपकी रही फिर आपने बतौर क्षेत्रीय विधायक क्या किया?
- मैंने तीन बार विधानसभा में मुद्दा उठाया। एक बार ध्यानाकर्षण भी लगाया।
नतीजा तो कुछ निकला ही नहीं?
- आवास एवं पर्यावरण मंत्री जयंत मलैया ने मुझे आश्वस्त करते हुए कहा था यदि प्राधिकरण पैसा नहीं लगाता तो हम अगले वित्त वर्ष में सड़क के लिए बजट प्रावधानित कर देंगे।
प्राधिकरण पर कभी जोर नहीं दिया?
- दिया लेकिन उसकी स्थिति खराब होने के कारण बात नहीं बनी।
प्राधिकरण के पास स्कीम-134, 140 और 136 के विकास के लिए पैसा था रिंग रोड के लिए नहीं?
- ये आईडीए को समझना चाहिए।
सड़क बनने के बाद यहां कौनसी स्कीम विकसीत होना है जो पैसा लगाए? आईडीए की सोच तो नहीं है?
- जनहित में फायदा-नुकसान नहीं देखा जाता। वैसे भी प्राधिकरण ने कई काम किए हैं।
कुल मिलाकर शहर आपसे और आपकी सरकार से क्या अपेक्षा रखे?
- अगले वित्त वर्ष में बजट मंजूर कराने के साथ काम शुरू कराकर रहेंगे।
सुदर्शन गुप्ता, क्षेत्रीय विधायक

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