
-- एनएचएआई ने शुरू की टोल की तैयारियां, सड़क सुधारने वाला कोई नहीं
- 49 किलोमीटर लंबा 325 करोड़ में बनेगा इंदौर-देवास सिक्सेलन
इंदौर.विनोद शर्मा ।
कहीं पेंचवर्क के पैबंद के बीच से झांकते गड्ढे तो कहीं गड्ढों की कतार नजर आती है। जिस हिस्से पर टोल वसूला जाता था वह पूरी तरह उधड़ चुका है। ये हाल है इंदौर-देवास फोरलेन के। निर्माण के दस बरस बाद तक दूसरी सड़कों के लिए आदर्श उदाहरण रही यह सड़क रिनुअल के दूसरे साल ही बदहाल है। वह भी उस वक्त जब फोरलेन को सिक्सलेन में तब्दील करने की तैयारियां करने वाला नेशनल हाई-वे अथॉरिटी ऑफ इंडिया नवंबर के अंतिम सप्ताह से यहां टोल वसूलने का ऐलान कर चुका है।
हम बात कर रहे हैं फोरलने के मांगलिया (सेंट्रल पॉइन्ट) से जवाहरनगर (देवास) के बीच 1997-99 के बीच बनाए गए 17 किलोमीटर लंबे हिस्से की। केंद्रीय मंजूरी के बाद लोक निर्माण विभाग की राष्ट्रीय राजमार्ग शाखा ने तकरीबन 10 करोड़ की लागत से इस हिस्से का नए सिरे से डामरीकरण 2008-09 में किया था। तीन साल की ग्यारंटी के साथ किया गया रिनुअल डेढ़ साल में ही जवाब दे गया। 2009 में सड़क एनएचएआई को सौंपने के बाद जिम्मेदार अब पल्ला झाड़ते नजर आते हैं। दूसरी तरफ एनएचएआई कहते हैं हमारा काम सिक्सलेन बनाना है। उधर, लोक निर्माण विभाग और एनएचएआई की आपसी टालमटौल के कारण लोग गड्ढों में हिचकौले खा रहे हैं।
उधर, लोगों की फजीहत को अनदेखा करके एनएचएआई ने इंदौर बायपास और इंदौर-देवास फोरलेन रोड पर टोल वसूलने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए सड़क के सिक्सलेनिंग का काम शुरू करने वाली डीएलएफ और गायत्री इन्फ्रास्ट्रक्चर ने मांगलिया के पास बेस बनाना शुरू कर दिया है। दरअसल, एनएचएआई ने इंदौर बायपास और देवास फोरलेन (कुल लंबाई 45 किलोमीटर) को छह लेन का बनाने का निर्णय लिया है। इसका काम शुरू हो चुका है। शर्तो के मुताबिक कांट्रेक्टर जिस दिन सिक्सलेनिंग का काम शुरू करेगा, उसी दिन से उसे रोड पर टैक्स वसूलने का अधिकार रहेगा।
पहले सड़क सुधारें बाद में टोल वसूले
नौकरी के सिलसिले में इंदौर आने-जाने वाले देवास निवासी भूपेंद्र सोनगरा ने बताया थोड़ी-बहुत रफू-रंगाई हो गई है। नहीं तो हालत यह थी कि आठ साल चकाचक सड़क पर चलने के बाद यहां आते-जाते भी शरम आती है। ऐसे में टोल शुरू करने से पहले एनएच को सड़क सुधारना चाहिए। शिप्रा निवासी अरविंद बंसल ने कहा नई रोड बनने में वक्त लगेगा। क्या तब तक लोग यूं ही हेरान-परेशान होते रहेंगे। सड़क सुधरती है तो निर्माण के वक्त यातायात बदहाल भी नहीं होगा। एमआईजी निवासी राजू अग्रवाल ने बताया नवरात्रि में बिजसन टेकरी की रोड दुरुस्त हो गई लेकिन इस सड़क पर चामुंडा देवी के दर्शनार्थी धकौले खाते रहे।
क्यों बदहाल हो गई रोड
1:- लोक निर्माण विभाग के अधिकारी कहते हैं रिनुअल में गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखा?
जवाब में तकनीकी जानकार कहते हैं सामग्री की गुणवत्ता का ध्यान रखा होता तो ये दिन नहीं देखना पड़ते। गड्ढे तो ठिक है कई जगह रिनुअल बहकर पुरानी रोड उभर आई है। निर्माण के वक्त ढाल का भी ध्यान नहीं रखा।
2:- बड़ी वजह बजट की कमी रही। 10 करोड़ में 17 किलोमीटर फोरलेन के रिनुअल में गुणवत्ता कैसे आएगी?
जानकार कहते हैं यदि ऐसा था तो विभाग को राशि लौटाकर नए सिरे से प्रस्ताव बनाकर भेजना था। क्यों नहीं भेजा।
3:- भारी वाहनों का भी तो दबाव है?
रिनुअल से पहले भी भारी वाहन आते-जाते थे और आज भी। हाई-वे पर भारी वाहन नहीं चलेंगे तो क्या किसी कॉलोनी की सड़क पर नजर आएंगे।
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