Tuesday, July 5, 2016

तहसीलदार-आरआई ने कैबिन में ही नाप दी ज्योति की जमीन

- एडीएम खारिज कर चुके हैं 2011 को सीमांकन
- 2015 में फिर वही कहानी दोहराई
- राजस्व मंडल के स्टे से मंसूबे ध्वस्त
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
आईडीए की सड़क उखाड़कर फेंकने वाली ज्योतिनगर गृह निर्माण सहकारी संस्था पर राजस्व निरीक्षक और पटवारी मेबरहान हैं। इसीलिए 2011 में बिना आसपास के किसानों को सूचना दिए बिना सीमांकन कर दिया जिसे बाद में अपर कलेक्टर को रद्द करना पड़ा।  इसके बाद भी समझ नहीं आई, 2015 में दूसरी बार उसी तरह से मनमाना सीमांकन कर दिया। आसपास के किसानों को भनक भी नहीं लगी और सीमांकन की रिपोर्ट तैयार हो गई। यदि वक्त रहते किसान राजस्व मंडल, ग्वालियर की शरण नहीं ली। राजस्व मंडल ने स्टे दे दिया, अन्यथा अब तक संस्था जमीन पर बाउंड्रीवाल तान चुकी होती।
25 हजार वर्गफीट जमीन से सड़क उखाड़कर फेंकने और अपनी 7 हजार वर्गफीट जमीन पर नई सड़क निकालने के बाद संस्था के कर्ताधर्ताओं ने सीमांकन की तैयारी शुरू कर दी। समीपवर्ती भू-स्वामियों को सूचना दिए बिना ही 5 सितंबर 2011 को राजस्व अधिकारियों ने विवादित जमीन (सर्वे नं. 308/2 पैकी, 308/4 और 308/5 पैकी ) का सीमांकन प्रतिवेदन प्रस्तुत कर दिया। प्रतिवेदन को किसान बलजीतसिंह साहनी और पुरुषोत्तम राठौर ने चुनौती दी। अंतत: अपर कलेक्टर, आलोक सिंह ने 26 जून 2012 को सीमांकन रद्द कर दिया। चार साल बाद तहसीलदार डीडी शर्मा और राजस्व निरीक्षक राजेश सरवटे ने फिर संस्था पर दरियादिली दिखाई। 1 अगस्त 2015  को बिना मैदान में जाए कैबिन में बैठे-बैठे ही सीमांकन कर दिया। इस सीमांकन पर समीपवर्ती किसानों ने फिर से आपत्ति ली। इस बार अपर कलेक्टर का दरवाजा खटखटाने के बजाय वे राजस्व मंडल पहुंच गए। मंडल के स्टे बाद बाउंड्रीवाल का काम रूका।
समीपवर्ती किसानों की मौजूदगी जरूरी
मप्र भू-राजस्व सहिंता 1959 की धरा 129 के तहत सीमांकन आवेदन मिलने पर भूमि से लगे समीपवर्ती किसानों को सूचना पत्र जारी किए जाने चाहिए। प्रकरण में जिन किसानों को सूचना-पत्र तामिल कराए गए उनमें से एक भी व्यक्ति के साइन सीमांकन के दौरान बनाए गए पंचनामे पर नहीं है। इसीलिए सीमांकन गलत और असंवैधानिक है।
बिना मौके पर आए हुआ सीमांकन
दोनों शिकायकर्ताओं का कहना है कि राजस्व अधिकारियों ने  2015 में सीमांकन की जो तारीख बताई थी उस दिन हम मौके पर दिनभर इंतजार करते रहे। हमारा मौके पर रहना जरूरी था क्योंकि सीमांकन के बाद हमारा रास्ता बंद हो रहा था। दिनभर इंतजार करने के बाद भी अधिकारी नहीं है लेकिन दूसरे दिन पता चला कि सीमांकन हो चुका है, कैसे?
बिना शुल्क जमा कराए कर दिया सीमांकन
सीमांकन कराने के लिए निर्धारित शुल्क जमा कराना पड़ता है लेकिन  ज्योति का सीमांकन बिना शुल्क के हुआ। सीमांकन रिपोर्ट पर स्पष्ट लिखा था कि प्रतिप्राथी संस्था सीमांकन का आवश्यक शुल्क जमा कराने के लिए तैयार है।

बिना काम, दिया पूर्णता प्रमाण, छोड़े 191 प्लॉट


सेटेलाइट हिल्स पर एसडीएम की मेहरबानी
तेजाजीनगर पुलिस की पहल और नगर निगम की जांच में उजागर हुआ घपला
इंदौर. विनोद शर्मा ।
जमीन बिक्री और सवा अरब के कर्जे के नाम पर बैंकों से हुई धोखाधड़ी का केंद्र रही सेटेलाइट हिल्स में जिला प्रशासन के अधिकारियों की भूमिका भी भू-माफियाओं के मनमाफिक रही। शायद, इसीलिए 2008 में सड़क, बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता के बिना ही एसडीएम ने कॉलोनी का न सिर्फ पूर्णता प्रमाण-पत्र जारी कर दिया बल्कि धरोहर के रूप में रखे 191 प्लॉट भी रीलिज कर डाले। पूर्णता प्रमाण-पत्र मिलते ही भू-माफियाओं ने काम बंद कर दिया जो आज तक शुरू नहीं हुआ।
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग(टीएंडसीपी) और एसडीएम को साधकर सेटेलाइट हिल्स में जमकर काला-पीला किया गया। नायता मुंडला की 37.460 हेक्टेयर जमीन की टीसीपी (4917) हुई 20 जुलाई 2007 को। एवलांचा रिएल्टी प्रा.लि. तर्फे संजय लुणावत के आवेदन पर नारायण अम्बिका इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रा.लि. तर्फे रितेश उर्फ चंपू अजमेरा के नाम 25 जनवरी 2008 को विकास अनुमति (04/2008) जारी हुई। डेवलपमेंट की गारंटी के रूप में 191 प्लॉट धरोहर के रूप में एसडीएम को सौंप दिए गए। चंपू और उसकी चौकड़ी ने 850 मीटर लंबे मेनरोड सहित कुल सात किलोमीटर लंबी 18 सड़कें बनाई जो कि आधी-अधूरी थी। बावजूद इसके बड़ी रकम लेकर तत्कालीन एसडीएम ने 5 नवंबर 2008 को पूर्णता प्रमाण-पत्र (क्र. 2375/2008) जारी कर बंधक प्लॉट मुक्त कर दिए।
बिना मौके पर जाए ही छोड़े प्लॉट
कॉलोनी में कुल 765 प्लॉट विकसित होना थे। इसमें से प्लॉट नं. 575 से 765 तक कुल 191 प्लॉट धरोहर रखे गए थे। जिस वक्त अधिकारियों ने इन प्लॉटों को मुक्त किया उस वक्त कुल 10 किलोमीटर लंबी 32 सड़कों में से करीब 3 किलोमीटर लंबी 14 सड़कें कच्ची ही थी। यही स्थिति सीवरेज लाइन की थी। बावजूद इसके अधिकारियों ने मौका तस्दीक किए बिना ही पूर्णता प्रमाण-पत्र जारी कर दिया।
पुलिस ने जांच कराई तो हकीकत सामने आई..
सेटेलाइट हिल्स के संचालकों के खिलाफ तेजाजीनगर पुलिस ने 27 दिसंबर 2014 को आपराधिक प्रकरण (3171/2014) दर्ज किया था। पुलिस भी पूर्णता प्रमाण-पत्र और कॉलोनी की मैदानी हकीकत देख चौक गई। इस संबंध में नगर निगम से पत्राचार चलता रहा। कॉलोनी की मैदानी जांच कराने का निर्णय लिया गया। जांच करके उपयंत्री ने मार्च 2016 में रिपोर्ट दी।
क्या कहती है रिपोर्ट
1- अधिकांश रोड नहीं बनी है।
2- डेÑनेज लाइन भी अधूरी है।
3- 13000 हजार वर्गफीट का एक ही बगीचा दिखता है। जबकि कॉलोनी  में आधा दर्जन बगीचे प्रस्तावित है।
4- बिजली के खम्बे नहीं है।
5- पानी की टंकी बनी है लेकिन लाइन नहीं है।
6- वर्षा जल निकाली की कोई व्यवस्था नहीं है।
इन खसरों पर है कॉलोनी...
109, 110, 11, 112, 113/2/2, 114/1/1, 115/1, 122/2, 123, 124, 125, 127, 128, 130/3, 130/4, 138, 138/1, 139/1, 140/1, 140/2, 141/2, 142, 143, 144, 145/2, 149/1, 149/2, 150/2, 150/1/2, 150/1/3, 150/1/4, 150/1/5, 152/1, 152/2, 153/5, 153/2, 153/3, 154/4, 157, 215/1/1, 215/1/2, 215/1/3, 215/1/4/1, 160, 161, 164
कुल जमीन : 37.460 हेक्टेयर



किसान को पता नहीं, जमीन पर कट गए 161 प्लॉट

चंपू चौकड़ी ने बिना सौदे के ही करा ली टीएनसी व डाइवर्शन
इंदौर. विनोद शर्मा ।
फिनिक्स टाउन के नाम प्लॉट होल्डरों से लेकर सरकारी विभागों की आंख में धूल झौंकते आई चंपू चौकड़ी ने कैलोदहाला के किसानों को भी नहीं बख्शा। बेफिक्र होकर खेती करते आ रहे कुछ किसान तो ऐसे हैं जिन्हें यह जानकारी ही नहीं है कि टीएनसी और डायवर्शन कराकर उनकी जमीन पर प्लॉट काटे जा चुके हैं। प्लॉट भी चार-छह-दस नहीं बल्कि सैकड़ों की संख्या में है जिन्हें चमत्कारी चौकड़ी ने ओने-पोने दाम पर बेच चुकी है।
30 अक्टूबर 2010 को कैलोद हाला की 41.575 हेक्टेयर जमीन पर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट से कॉलोनी के तीन अलग-अलग नक्शे मंजूर हुए थे। दूसरे नंबर का ले-आउट प्लान 21 खसरों की 17.625 हेक्टेयर जमीन पर मंजूर हुआ था। इसमें लक्ष्मीचंद पिता कन्हैयालाल, राजूबाई बेवा मूलचंद, भगवानसिंह पिता मूलचंद की 1.740 हेक्टेयर जमीन (सर्वे नं. 263/1 और 263/2) भी शामिल है जहां खेती हो रही है। जिस जमीन पर खेती हो रही है वहां टीएनसी से स्वीकृत नक्शे में प्लॉट है यह जानकारी भी दबंग दुनिया की टीम ने किसान परिवार को दी। पहले तो परिवार के सदस्य हक्के-बक्के रह गए फिर उन्होंने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया कि उनका और उनकी जमीन का कॉलोनी से कोई लेना-देना नहीं है।
कभी बेची ही नहीं जमीन
नक्शे में दो अलग-अलग खसरों का जिक्र है। खसरा नं.  263/1  की 1.384 हेक्टेयर और 163/2 की 0.356 हेक्टेयर जमीन। कुल 1.740 हेक्टेयर (4 एकड़, 13 हजार वर्गफीट) जमीन। किसान भगवान सिंह ने कहा कि उन्होंने या उनके परिवार ने कभी जमीन का सौदा चंपू-चिराग की चौकड़ी को नहीं किया है। एक बार सौदे की बात हुई थी। कुछ रकम बयाने के एवज में भी दी थी लेकिन आगे कोई न रकम मिली, न सौदा हुआ। ऐसे में बिना मेरी या मेरे परिवार की लिखित सहमति के जमीन की टीएनसी कैसे हुई और कैसे नक्शे पास हुए इसकी तस्दीक करने के बाद वे पुलिस की मदद लेंगे।
बाकी जमीनों की स्थिति भी यही है
सर्वे नं. 260, 261 और 262 की जमीन की स्थिति भी यही है। हालांकि कुछ हिस्से में कॉलोनाइजर ने सड़कें जरूर बना रखी है लेकिन सड़क के दोनों तरफ होती खेती ही है।
किसान का नुकसान...
- जिस जमीन पर वह खेती करके कृषि लगान चुका रहा है वह डायवर्शन के बाद आवासीय उपयोग की हो चुकी है। दोबारा डाइवर्शन कराना भी मुश्किल है और टीएनसी कराना भी।
- जो प्लॉट काटे है यदि उनके सौदे हो चुके हैं तो प्लॉट होल्डर भी परेशान हो रहे होंगे। यह बात अलग है कि खेत होने के कारण वे समझ नहीं पाते कि प्लॉट कहां और किस तरफ है। अन्यथा वे भी कब्जा लेने की कोशिश करेंगे। इससे जमीन मालिक और प्लॉट होल्डरों के बीच विवाद भी तय है।
जमीन पर कटे प्लॉट...
प्लॉट नं. 425 से 435 : 11
प्लॉट नं. 436 से 447 : 12
प्लॉट नं. 448 से 458 : 11
प्लॉट नं. 1073 से 1092 : 20
प्लॉट नं. 1156 से 1182 : 27
प्लॉट नं. 1281 से 1298 : 19
प्लॉट नं. 1363 से 1380 : 18
प्लॉट नं. 1465 से 1471 : 7
प्लॉट नं. 1529 से 1541 : 13
प्लॉट नं. 1542 से 1545 : 4
प्लॉट नं. 1474 से 1488 : 15
प्लॉट नं. 1470 से 1473   : 4
कुल 161 प्लॉट
सार्वजनिक उपयोग भी....
पार्क- 4  और एमिनिटीज - 1

‘फिनिक्स टाउन में कैसे बिकते हैं प्लॉट’ एसडीएम के इस सवाल पर बोले रहवासी

आप बत्ती वाली गाड़ी में नहीं होते तो चम्पू के चार चमचे अभी घेर लेते
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
कॉलोनी में सुविधा नहीं है, फिर प्लॉट खरीदते कैसे हैं..? साहब आप बत्ती वाली गाड़ी में आए हो इसीलिए कोई नहीं आया, किसी दिन सादी गाड़ी लेकर आना ‘कितना बड़ा प्लॉट लेना है, क्या बजट है’ पूछते हुए चंपू के चार दलाल आपको यहीं घेर लेंगे। वो तो ठीक है लेकिन सुविधा का नहीं पूछते क्या? पूछते हैं लेकिन दलाल रंगीन ब्रोशर निकालकर बैठ जाते हैं और फिर सुविधाएं गिनाना शुरू कर देते हैं। बुधवार को कैलोदाहला स्थित फिनिक्स टाउन की हकीकत जानने जब एसडीएम रवीश श्रीवास्तव मौके पर पहुंचे तो क्षेत्रवासियों ने उन्हें रोककर कुछ इसी सख्त लहजे में अपनी बात रखी।
फिनिक्स टाउन में चंपू-चिराग की चौकड़ी ने कैसे कानून को ठेंगा दिखाकर मनमानी कॉलोनी काटी है इसका खुलासा दबंग दुनिया 23 जून को ‘पंजीयक ने कर दी 150 फर्जी प्लॉटों की रजिस्ट्री’, 27 जून को ‘नाले बंद करके काट दिए प्लॉट’  और 28 जून को ‘’ 2300 प्लॉटों की कॉलोनी एक ट्रांसफार्मर के भरौसे’  शीर्षक से प्रकाशित समाचारों में कर चुका है। मामले में क्राइम ब्रांच केस दर्ज करके चिराग शाह और चंपू के पिता पवन अजमेरा सहित चार को सलाखों के पीछे पहुंचा चुकी है। वहीं कलेक्टर के सख्त रवैये के बावजूद अब तक मामले को टालते आ रहे प्रशासनिक अधिकारी बुधवार को कॉलोनी पहुंचे। यहां जनउपयोगी जमीनों पर काटे गए प्लॉट, नाला बंद करके काटे गए प्लॉट, नाले किनारे पड़ी मिट्टी, एक ट्रांसफार्मर और उस पर झुलते 2 हजार तारों को देखा। फोटोग्राफी की। लोगों से जानकारी ली।
जहां 20 प्लॉट बेचे, वहां निकले 16 ही
नक्शे से भी मिलान करने लगे तो क्षेत्रवासियों ने कहा कि नक्शे की तो पूछो ही मत। जिस लाइन में 20 प्लॉट बताकर बेचे गए हैं वहां मौके पर निकले 16 प्लॉट ही है। चार प्लॉट वाले वर्षों से रजिस्ट्री लेकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।
गाड़ी में से ही नहीं उतर रहे थे अधिकारी
मौके पर पहुंचे एसडीएम व उनके मातहत काफी देर तक गाड़ी में बैठकर ही हवाई दौरा करते रहे। इस पर क्षेत्रवासियों ने आपत्ति ली। इसके बाद अधिकारी जमीन पर उतरे और तकरीबन एक घंटे तक जमीनी हकीकत जानने की कोशिश की। कॉलोनी के नाम पर बिल्डरों की मनमानी देख अधिकारी भी हैरान हो गए। हालांकि वे बार-बार गाड़ी के कांच बंद करके या इतनी दूर जाकर आपस में बात करते रहे कि कॉलोनीवासियों को सुनाई न दे।
चार दिन में 50 कंपलेन डाली है..
क्षेत्रवासियों की बड़ी नाराजगी बिजली व्यवस्था को लेकर थी जो 2303 प्लॉटों वाली इस कॉलोनी में ऊंट के मुंह में जीरे की तरह है। एक ट्रांसफार्मर पर झुलते तार दिखाकर क्षेत्रवासियों ने कहा कि 75 हजार रुपए डेवलपमेंट शुल्क देने के बाद भी ऐसी स्थिति, ऐसा तो चंदननगर, आजादनगर, खजराना, बांगड़दा जैसे क्षेत्र में भी नजर नहीं आता है। एक केबल जली हुई है। 4 दिन में 50 कंपलेन डाल चुके हैं। बिजली कंपनी सुनने को तैयार नहीं, जैसे यहां मनुष्य रहते ही नहीं है।
7  दिन में कार्रवाई करना थी, कॉलोनी पहुंचे 5 दिन बाद
जो एसडीएम रवीश श्रीवास्तव मातहतों के साथ फिनिक्स टाउन पहुंचे थे उन्हें कलेक्टर पी.नरहरि ने क्षेत्रवासियों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए 13 जून की शाम 5 बजे जांच करके कार्रवाई के निर्देश दिए थे। कलेक्टर ने साफ कर दिया था कि जो प्लॉट अवैध हैं उन्हें केंसल करें। मकान बन चुके हैं तो उन पर कार्रवाई करें।
आए भी इसलिए...
फिनिक्स के कर्ताधर्ताओं को रिमांड पर लेकर जेल पहुंचा चुकी क्राइम ब्रांच संभवत: गुरुवार को पटवारी अनिता कुंभकर और राजस्व निरीक्षक योगेंद्र राठौर को फिनिक्स टाउन लेकर जाएगी। वहां दस्तावेजों के साथ मैदानी हकीकत पर क्राइम ब्रांच इनके बयान लेगी।  इसीलिए अब तक भू-माफियाओं की मेहरबानी से कॉलोनी से परहेज करते आए अधिकारी आखिरकार बुधवार को मजबूरन कॉलोनी पहुंचे। 

पांच संस्थाओं के 470 सदस्योंं की वरीयता सूची जल्द होगी जारी

कलेक्टर की सख्ती से सहकारिता विभाग और आईडीए करेगा कार्रवाई
कलेक्टर का दावा : दो महीने में 2800 सदस्यों को मिलेगा लाभ
इंदौर. दबंग रिपोर्टर ।
कसेरा, वैभव, बशनशाह और महात्मागांधी जैसी पांच गृह निर्माण सहकारी संस्थाओं के प्लॉट से वंचित सदस्यों के लिए अच्छी खबर यह है कि जल्द ही संस्था की वरीयता सूची जारी होने वाली है। सूची जारी होते ही प्लॉट आवंटन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। कलेक्टर पी.नरहरि के निर्देश पर सहकारिता विभाग और आईडीए  ने वरीयता सूची पर काम शुरू कर दिया है।
बीती जनसुनवाइयों के दौरान सामने आए मामले के बाद कलेक्टर ने दोनों विभागों को कहा था कि लोग प्लॉट के लिए परेशान हो रहे हैं।  इनकी समस्याओं का निराकरण हो। कसरा गृह निर्माण समिति, वैभव गृह निर्माण समिति, बसनशाह गृह निर्माण समिति, महात्मा गांधी गृह निर्माण समिति, विकास अपार्टमेंट संस्था के 367 सदस्यों की वरीयता सूची जल्द जारी की जा रही है जो कि वर्षों से लंबित थी। श्रीराम कृपा गृह निर्माण समिति और स्कीम नम्बर 103 के अंतर्गत आने वाली संस्था के  85 प्लॉटों के लिए भी वरीयता सूची आईडीए को भेजी जाएगी।
60 दिन, 3050 को फायदा
कलेक्टर की पहल के बाद सहकारिता विभाग अगले 60 दिन में न्याय नगर गृह निर्माण समिति, लक्ष्मण नगर गृह निर्माण समिति और कष्ट निवारण गृह निर्माण संस्था के 2800 सदस्यों की वरीयता सूची जांच कर प्रकाशित करेगा। सशस्त्र पुलिस बल गृह निर्माण संस्था के 250 सदस्यों की सूची भी जारी होगी। इन्हें आईडीए भेजा जाएगा। आईडीए अपनी स्कीमों में शामिल इन संस्थाओं के प्लॉटों की रजिस्ट्री कराएगा। 

हाईकोर्ट से नौ केस जीतने के बाद खुला प्लॉट मिलने का रास्ता

बॉबी की आकाश गृह निर्माण संस्था में 29 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ते रहे पीड़ित
इंदौर. विनोद शर्मा ।
29 बरस के इंतजार, हाईकोर्ट से जीते नौ मुकदमों और सहकारिता विभाग में इंदौर से लेकर भोपाल तक लिखी गई 500 से ज्यादा चिट्ठियों के बाद अब जाकर तय हुआ कि देवेंद्र तोतला को प्लॉट मिले। तोतला रणवीरसिंह उर्फ बॉबी छाबड़ा की जैबी आकाश गृह निर्माण सहकारी संस्था के सदस्य हैं उन्होंने संचालकों की मनमानी के खिलाफ जवानी में जंग शुरू की थी, अब बेटा जवान हो गया है।
आकाश गृह निर्माण सहकारी संस्था ने केसरबाग रोड पर सच्चिदानंदनगर कॉलोनी काटी है। इस कॉलोनी में 1987 में तोतला के नाम प्लॉट आवंटित हुआ था। 1993 में संस्था ने प्लॉट देने से मना कर दिया। इसके बाद जो कानूनी लड़ाई शुरू हुई, उसे विराम मिला 3 मई 2016 को। जब हाईकोर्ट ने मामले (रिट अपील क्र. 132/2016) की सुनवाई के बाद सहकारिता विभाग को जल्द से जल्द तोतला को प्लॉट दिलाने के आदेश दिए। इस आदेश का पालन करते हुए 8 जून को संयुक्त आयुक्त जगदीश कनौज भी उप आयुक्त को पत्र लिख चुके हैं।
धरना भी दे चुके हैं तोतला दंपति
6 दिसंबर 2014 को प्लॉट नं. 25 आई देने उप पंजीयक ने संस्था अध्यक्ष संजय यादव को पत्र लिखा था। जिला पंजीयक को भी लिखा कि तोतला के अलावा किसी को इस प्लॉट की रजिस्ट्री न हो। जब वे कब्जा लेने पहुंचे तो संजय ने यह कहते हुए उन्हें बिदा कर दिया कि प्लॉट देने से बॉबी भैया ने मना कर दिया है। कलेक्टर और डीआईजी को मामले की जानकारी देकर 9 फरवरी 2015 को तोतला दंपति गांधी प्रतिमा पर धरना भी दे चुके हैं।
हाईकोर्ट में ऐसे चली जंग
संस्था द्वारा प्लॉट दिए जाने से साफ मना करने पर 1993 में तोतला पहली बार हाईकोर्ट गए। हाईकोर्ट ने जांच के आदेश दिए। संस्था ने आदेश को डिविजन बैंच में चुनौती दी। जहां पुराने आॅर्डर को संसोधित करने के आदेश हुए। अपर पंजीयक को जांच दी। 29 अक्टूबर  1996 को तोतला फिर कोर्ट गए। जहां उन्हें प्लॉट की पात्रता मिली। इस बीच 9 सितंबर 1995 को संस्था ने उनकी सदस्यता खत्म कर दी। 8 सितंबर 1999 को फिर तोतला कोर्ट पहुंचे और कोर्ट ने सदस्यता बहाल कर दी। फिर भी संस्था ने न प्लॉट दिया। न ही 254 नंबर की पुरानी सदस्यता दी। तोतला फिर हाईकोर्ट पहुंचे। कोर्ट ने दो टूक शब्दों में कहा कि उप पंजीयक और संयुक्त पंजीयक आदेश का पालन करवाएं।
संस्था ने इस आदेश को भी डिविजन बैंच में चुनौती दी लेकिन इस बार दाल नहीं गली। 9 सितंबर 2004 को कोर्ट ने संस्था की अपील निरस्त कर दी। जवाब में तोतला ने 2004 में ही कंटेप्ट फाइल कर दी। फैसला हुआ 28 नवंबर 2007 को। कोर्ट ने पंजीयक से अभ्यावेदन मांगा। पंजीयक ने अभ्यावेदन में चार माह में प्लॉट की पात्रता दी। तोतला फिर हाईकोर्ट पहुंचे। जहां कोर्ट के सामने उप पंजीयक और संयुक्त पंजीयक ने प्लॉट देने की सहमति दी। 29 अपै्रल 2010 को प्रभारी अधिकारी ने पत्र पेश करके कोर्ट को बताया कि तोतला को प्लॉट नं. 25 आई दे रहे हैं।
संस्था तीन प्लॉट (16, 14 और 31 ) को लेकर तीन अलग-अलग याचिकाओं के साथ फिर कोर्ट पहुंची। तोतला, रमाबाई और राधा बाहेती इंटरविनर बने और कोर्ट से मांग की कि उन्हें भी सूना जाए। वहां भी संस्था की नहीं चली। बावजूद इसके संस्था  ने प्लॉट नहीं दिए। न ही सहकारिता विभाग ने प्रयास किए। तोतला ने फिर हाईकोर्ट में दस्तक दी। फैसला हुआ 3 मई 2016 को। कोर्ट ने कहा हर हाल में चार महीने में निराकरण करके प्लॉट नं. 25 आई दें।

ज्योति के जागीरदारों ने उखाड़ फेंकी आईडीए की सड़क

2005 में 15 लाख में बनी थी
2011 में दोनों तरफ दीवार उठाई और मिटा दिया सड़क का वजूद
इंदौर. विनोद शर्मा।
इंदौर में भू-माफियाओं के हौंसले बुलंद है। इसीलिए ज्योतिनगर हाउसिंग सोसायटी और श्रीमाल होल्डिंग कंपनी के कर्ताधर्ताओं ने लाखों की लागत से बनी आईडीए की सड़क उखाड़कर फेंक दी और जिम्मेदार अफसर तमाशा देखते रहे। न्यायालय अपर तहसीलदार ने हिम्मत की और कब्जेदारों को कारण बताओ नोटिस भी थमाया हालांकि जवाब आने से पहले ही अपर तहसीलदार का तबादला हो गया। इसीलिए बाद में किसी ने मामले में दखल देने की हिम्मत नहीं की।
मामला तेजपुर गड़बड़ी का है। यहां सर्वे नं. 308/2 और  308/5 पर वर्षों पुराना रास्ता था। रास्ते के एक तरफ कतारबद्ध पेड़ थे तो दूसरी तरफ बिजली के खम्बे। पार्षद रहे दिलीप सुरागे की मांग पर एबी रोड से गुजर रही मेन लाइन से नर्मदा परियोजना के अधिकारियों ने छह इंच का कनेक्शन इसी सड़क के समानांतर पाइप डालकर मार्तंडनगर तक पहुंचाया गया था। मार्तंडनगर बस्ती, ट्रेजर टाउन, निहालपुर मुंडी और बिजलपुर के रहवासियों की वर्षों से चली आ रही मांग, तत्कालीन विधायक लक्ष्मणसिंह गौड़ के प्रयास और कलेक्टर इंदौर की पहल पर 10 मार्च 2004 को आईडीए ने आश्रय निधि के तहत रास्ते को सड़क बनाने की तैयारी की। अपै्रल 2005 में ठेका मिला था मंत्री कॉन्ट्रेक्टर प्रा.लि. को। कंपनी ने 630 फीट लंबी और 20 फीट चौड़ी रोड बनाई। दोनों तरफ फुटपाथ की जमीन भी छोड़ दी गई। सड़क 2010 तक रही। 2011 में ज्योति गृह निर्माण संस्था के संचालकों ने इस सड़क को उखाड़ फेंका।
चौतरफा बंद कर दी सड़क
सड़क के दोनों मुहानों को दीवार उठाकर बंद कर दिया गया है। वहीं बीच वाले हिस्से में पेड काटकर पटक दिए हैं। संस्था ने अपनी जमीन खोदकर मिट्टी एबी रोड के किनारे पटक दी ताकि पुराने रास्ते तक कोई आ-जा नहीं सके।
निकाल दिया नया रास्ता
संस्था ने 630 फीट लंबा रास्ता बंद करके सर्वे नं. 7 और 8 की जमीन से 270 फीट लंबी और 15 फीट चौड़ी नई सड़क निकाल दी। 27 जुलाई 2015 को दिए एक जवाब में आईडीए ने स्वीकारा कि जो 150 मीटर लंबा रोड बनाया था उसे क्षतिग्रस्त कर दिया है। क्षतिग्रस्त सड़क के पास नई सड़क बनी है जो न प्राधिकरण ने बनाई और न ही प्राधिकरण को उसकी जानकारी है।
क्या है संस्था का फायदा
सड़क के दोनों संस्था की जमीन है। सर्वे नं. 304/1/1, 304/4, 304/6/मिन-1, 305/1/मिन-1, 306/1/मिन-1, 307/1, 307/3/1/मिन-1, 307/4/1/मिन-1, 307/5/मिन-1, 307/6 पैकी. 308/2/मिन-1 308/4/पै, 308/5/पै ज्योतिनगर गृह निर्माण सहकारी संस्था की।  सर्वे नं. 307/8/1, .308/2/2 308/3/2, 308/4/2, 308/5/2 की जमीन 284-285 साकेत नगर निवासी पवन पिता किरणमल श्रीमाल की है। पेशे से एडवोकेट और उद्योगपति श्रीमाल भी ज्योति नगर संस्था में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष विशेष दर्जा रखते हैं। जिस सड़क को बंद किया उसका कुल क्षेत्रफल था करीब 25 वर्गफीट जबकि जो नई सड़क निकाली है उसका क्षेत्रफल है 4050 वर्गफीट। फायदा सीधे 21 हजार वर्गफीट का जिसकी बाजार कीमत 4 करोड़ 20 लाख।
बेखौफ हैं भू-माफिया
सड़क बनने से 310 और उससे लगे सर्वे की जमीन तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। सर्वे नं. 310 के मालिक 80 विष्णुपुरी निवासी बलजीतसिंह साहनी है। साहनी का साफ कहना है कि हाउसिंग सोसायटी की आड़ में जमीन का खेल पवन श्रीमाल, प्रहलाद नीमा, प्रेम चौहान, गिरधारी नीमा खेल रहे हैं। जिस सड़क को अपनी जमीन पर बनी बताकर उखाड़ा गया है असल में वह पुराना रास्ता है। 1960 की हमारी रजिस्ट्री में भी इस रास्ते का जिक्र है। बाद में राजस्व अधिकारियों को खरीदकर इन्होंने रिकार्ड से सड़क गायब करवाई। अब तकलीफ यह है कि मैं या अन्य किसान जमीन तक कैसे पहुंचे।
देते हैं जान से मारने की धौंस
एक अन्य किसान देवराज राठौर ने कहा कि चौतरफा घेराबंदी कर दी है। हमारी जमीन तक पहुंचने की जगह नहीं छोड़ी। निकलों तो भू-माफियाओं के गुंडे जान से मारने की धमकी देते हैं।
हमने तो जान लगा दी लेकिन अधिकारी बिक गए...
जब में पार्षद था तब सड़क तोड़ी गई थी। मैंने और क्षेत्रवासियों ने इसका पुरजोर विरोध किया लेकिन भू-माफियाओं के हाथों बिक चुके अधिकारियों ने मैदान में झांककर तक नहीं देखा। रास्ता पुराना था। मैं छोटा था तब से इससे आता-जाता था।
दिलीप सुरागे, पूर्व पार्षद