Thursday, August 4, 2016

गिरवी रखी जमीन को सरकारी घोषित कर दिया प्रशासन ने

न्यायालय दे चुका वसूली और बजावरी आदेश
चार साल पहले कर्जदाता संस्था ले चुकी है कब्जा
इंदौर. विनोद शर्मा ।
जिला प्रशासन ने जिन दो बहनों की जमीन को वारिसों के अभाव में सरकारी घोषित कर दिया है उनके खिलाफ द रीयल नायक सहकारी साख संस्था आठ साल से साढ़े तीन करोड़ की रिकवरी निकालकर बैठी है। अलग-अलग न्यायालय द्वारा 2010 और 2012 में जारी वसूली आदेश के आधार पर संस्था 2012 में ही दोनों बहनों की अचल संपत्ति का भौतिक कब्जा ले चुकी थी। संस्था का कहना है कि कलेक्टर के आदेश से हमारा कोई लेना-देना नहीं है, हमारा मामला कोर्ट में है जो कुर्की आदेश जारी कर चुकी है।
मामला जेरू मादन व नरगिस मेहता से संबंधित है जो सगी बहने थी और 3/3 न्यू पलासिया में रहती थीं। दोनों ने 2002 में अस्तित्व में आई द रीयल नायक सहकारी साख संस्था मर्यादित, नंदलालपुरा की सदस्यता ली। 2004-05 में इन बहनों ने अपने स्व सहायता समूह की महिलाओं के नाम से सवा करोड़ की एफडी कराई। आरबीआई की गाइडलाइन (बचत से चार गुना) के अनुसार समूह को संस्था ने इसी साल 4 करोड़ का लोन दे दिया। इसी बीच संस्था के अध्यक्ष पद को लेकर दीपक पंवार और रामचंद्र सोलंकी के बीच खींचतान शुरू हुई। तभी वसूली का मामला (0715/2005) 1999 एक्ट में गठित मध्यस्थम परिषद न्यायालय पहुंचा। जहां संस्था के वसूली नोटिसों का जवाब देते हुए दोनों बहनों ने कहा था कि पहले अध्यक्ष तय हो जाए, फिर पैसा जमा कर देंगे। अभी पैसा किसे जमा कराएं।
अध्यक्षता का मामला मप्र राज्य सहकारी अधिकरण, भोपाल पहुंचा जहां 6 नवंबर 2006 में फैसला दीपक पंवार के पक्ष में हुआ। फैसले के बाद संस्था ने  फिर वसूली का तकादा लगाया। दोनों बहनों ने अपनी बीमारी, संस्था में जमा एफडी और गिरवी रखी अपनी चल-अचल संपत्ति का हवाला देते हुए कहा कि ऋृण अदा कर देंगे। कुछ वक्त चाहिए। बावजूद इसके ऋृण नहीं चुकाया गया। 30 दिसंबर 2010 और 2 जून 2012 में मध्यस्थम परिषद न्यायालय ने चल-अचल संपत्ति जब्ती-कुर्की के आदेश पारित कर दिए।
संस्था ने बजावरी लगाई, उधर रजिस्ट्री हो गई
दोनों आदेश का हवाला देते हुए संस्था ने 8 सितंबर 2015 को जज वी.एस.रघुवंशी की 42 नंबर कोर्ट में बजावरी प्रकरण लगाया। इसी बीच दोनों बहनों के तथाकथित वारिस के रूप में सामने आए जहांगीर पिता दाराशाह मेहता, हिल्लू पिता दाराशाह मेहता, रोशन उर्फ रशीदा पिता गुजोर टेंगरा, केटी सुरेंद्र मेहता पिता रतन शाह, मीनू पिता दर्शन मेहता ने बिल्डर अशोक जैन के नाम 3/3 न्यू पलासिया स्थित 11600 वर्गफीट जमीन की रजिस्ट्री कर दी। संपत्ति पर संस्था के बोर्ड लगे होने के बाद भी जैन ने कब्जे का प्रयास किया। संस्था ने विरोध किया और इसकी शिकायत 9 फरवरी 2016 को तुकोगंज थाने पर की। कोई कार्रवाई  नहीं हुई। रजिस्ट्री निरस्त करने के नोटिस जारी हो चुके हैं।
कोर्ट ने दर्ज किया जैन के खिलाफ मामला
अंतत: संस्था के परिवाद पर न्यायालय ने 10 मार्च 2016 को अशोक  जैन और नवाब के खिलाफ संस्था संचालकों को धमकाने के मामले में धारा 506/504 में प्रकरण पंजीबद्ध कर लिया। 294, 457, 427, 120 बी/34 जैसी अन्य धाराओं के तहत जज बी.के.द्विवेदी की 43 नंबर कोर्ट ने जहांगीर, अशोक और नवाब को नोटिस जारी कर दिए जो अब तक  तामिल नहीं हुए।
मामला विचाराधीन, बना दिया फर्जी आदेश
संस्था को जमीन से दूर करने के लिए जहांगीर और अशोक ने सहकारिता ट्रिब्यूनल में अगस्त 2015 को रिविजन प्रस्तुत की जबकि आदेश के विरुद्ध अपील करना थी। संस्था के पक्ष में 2012 में जारी बजावरी आदेश की फोटोकॉपी कर नया आदेश बनाया और उसमें इसकी तारीखें बदलकर जुलाई 2015 कर दी। ताकि वसूली के प्रकरण को चुनौती देने के लिए जमा की जाने वाली 25 प्रतिशत राशि से बचा जा सके। 45 दिन के बाद अपील नहीं होती। इसीलिए जुलाई का आदेश बनाया और अगस्त में अपील कर दी।
420 का मुकदमा ठोका संस्था ने
फर्जीवाड़े की जानकारी मिलते ही संस्था ने जहांगीर और अशोक के खिलाफ 25 जनवरी 2016 को धोखाधड़ी का केस लगाया। 25 मार्च 2016 को जज अमित रंजन समाधिया की कोर्ट ने ट्रिब्यूनल से आदेश की ओरिजनल कॉपी मांगी है। नहीं मिलने पर धोखाधड़ी का केस पंजीबद्ध होगा। 

प्राधिकरण पर मढ़े भेदभावपूर्ण कार्रवाई के आरोप

 सायाजी की सीनाजोरी
- अखबार और अखबार मालिकों पर भी साधा निशाना
इंदौर. विनोद शर्मा ।
कौड़ियों के दाम पर करोड़ों की जमीन लीज पर लेकर जमीन की मनमानी बंदरबांट करने वाला सायाजी होटल्स प्रा.लि. ठोस जवाब देने के बजाय अब सीनाजोरी पर उतर आया है। बुधवार को हुई बोर्ड बैठक से ठीक पहले सायाजी के प्रतिनिधि व वकील ने करारा पत्र लिखकर प्राधिकरण पदाधिकारियों पर भेदभावपूर्ण कार्रवाई का आरोप तक मढ़ दिया। प्रबंधन का कहना है सायाजी को लेकर बोर्ड पदाधिकारी शत्रुता का भाव रखते हैं। इसीलिए लीज निरस्ती का निर्णय हो चुका है, बोर्ड बैठक में चर्चा सिर्फ औचारिकता है।
बुधवार को बोर्ड बैठक का मुख्य विषय सायाजी की लीज ही थी लेकिन लीज निरस्त करने को लेकर ठोस निर्णय फिर टल गया। इसी बीच सायाजी के वकील ने इंदौर के प्रमुख समाचार पत्र में अब तक सायाजी के खिलाफ छपती आ रही खबरों की कॉपियों के साथ एक पत्र सीईओ को थमा दिया। पत्र में प्रबंधन ने कहा कि प्रेस कॉम्पलेक्स में अखबरों को दिए गए प्लॉटों पर प्राधिकरण मेहरबान है। इसीलिए यहां समझौतावादी नीतियां अपनाई जाती है जबकि सायाजी के खिलाफ एकजूट होकर सब यही कोशिश में जूट चÞुके हैं कि लीज निरस्त हो। यदि इनके लिए समझौता नीति है तो हमारे लिए भी हो अन्यथा इनकी भी लीज निरस्त हो।
निर्णय हो चुका, बहस औपचारिकता
प्रबंधन का कहना है कि सभी बोर्ड मेम्बर सायाजी के प्रति द्वेष रखते हैं। हमें पता है कि हम कुछ भी सफाई रखें लेकिन लीज निरस्त होगी ही। क्योंकि लीज निरस्ती का फैसला तो यह पहले ही ले चुके हैं, बैठक में चर्चा करना तो सिर्फ औपचारिकता है ताकि इन पर एकपक्षीय कार्रवाई का आरोप न लगे।
सायाजी के कारनामे
- होटल प्रबंधन ने प्लॉट के एक हिस्से (7000 हजार वर्गफीट) में सयाजी प्लॉजा के नाम से कॉम्पलेक्स बना दिया। जांच रिपोर्ट के अनुसार अंडर ग्राउंड(यूजी) पर 10 दुकानें, ग्राउंड फ्लोर पर 10 दुकानें और प्रथम तल पर 2 दुकानें बनाई गई।
- लीज शर्तों के अनुसार प्लॉट अविभाजित था लेकिन होटल प्रबंधन ने कॉम्पलेक्स की दुकानें बेच दी। सभी की रजिस्ट्री हो चुकी है। इन दुकानों का खरीदार अपने हिसाब से उपयोग कर रहे हैं।
- रिपोर्ट के अनुसार आवंटी लीज शर्त क्र. 4 का उल्लंघन करके होटल के लिए आवंटित प्लॉट पर बनी दुकानों का कमर्शियल इस्तेमाल कर रहे हैं।
- दुकानें अलग-अलग लोगों को बेचकर व्ययन नियम की शर्त- 29 का उल्लंघन है।
- नाकोड़ा डेवलपर्स, आरती जितेंद्र चुघ, कल्पवृक्ष आनंदमोहन श्रीवास्तव, अमित नामदेव बालानी, देवीप्रसाद मोहनलाल शर्मा, अर्पित गुप्ता, सुधीर सोन्थलिया, महेंद्र दाबानी, निहालसिंहं पिता सुखदेव सिंह, चंदू कुरील, राजकुमार कुरील, सुचित्रा धनानी, एल्पिक फाइनेंस लि., मुरलीधर भाटिया के नाम 28 रजिस्ट्री कर दी।
- निर्माण भी मनमाना किया। जिसे लेकर पहले ही लोकायुक्त की जांच और हाईकोर्ट में केस चल रहा है।
अखबार और होटल में बड़ा अंतर है
सायाजी
- जमीन होटल के लिए ली और बड़ा हिस्सा दुकानें बनाकर बेच दिया।
- होटल का विशुद्ध उपयोग व्यावसायिक है।
- जांच हुई, रिपोर्ट के बाद लीज निरस्त हुई।
- एमओएस की जमीन बेची है।
- हाईकोर्ट में कोई मामला पेंडिंग नहीं।
- प्राधिकरण के पत्रों के जवाब तक नहीं दिए।
प्रेस कॉम्पलेक्स
- जितनी प्रेस को जमीन दी उनमें से किसी ने नहीं बेची।
- किराया पर दी है जो कभी भी खाली कराया जा सकता है।
- लीज निरस्त 2005 में हो गई थी। हाईकोर्ट के आदेश पर 2008 में आईडीए में तत्समय की गाइडलाइन से पैसा जमा कराया है।
- अखबार को व्यावसायिक प्रतिष्ठान नहीं कहा जा सकता।
- जांच हुई, रिपोर्ट के बाद मामला कोर्ट में है।
- सुप्रीमकोर्ट ने इंडियन एक्सप्रेस के मामले में व्यवस्था देते हुए कहा था कि समाचार पत्र घाटे का सौदा है इसीलिए अखबार अपनी बिल्डिंग का हिस्सा किराए पर दे सकते हैं। 

प्लॉट दिया रहने को, बना दिया अस्पताल, स्कूल और होटल

स्कीम-94 के सेक्टर डी में प्लॉटधारकों की मनमानी
रोड फेसिंग 40 प्लॉटों का व्यावसायिक उपयोग
इंदौर. विनोद शर्मा ।
एमआर-9 चौराहे से खजराना चौराहे के बीच जिन प्लॉटों पर यूरो किड्स स्कूल, पाकिजा स्कूल, चिक एंड सर्व जैसी चर्चित होटल चल रही है उनका आवंटन आवासीय उपयोग के लिए किया गया था। आवासीय स्कीम में इंदौर विकास प्राधिकरण की तमाम आपत्तियों के बावजूद नगर निगम के मैदानी अमले की मिलीभगत से प्लॉटों पर व्यावसायिक प्रतिष्ठान बनाए गए। इसका खुलासा प्राधिकरण द्वारा की गई जांच रिपोर्ट में हुआ है।
मामला रिंग रोड से लगी स्कीम-94 के सेक्टर ‘डी’ का है। सेक्टर में आवासीय उपयोग के लिए प्लॉट लीज पर दिए गए थे। बावजूद इसके रोड फेसिंग तकरीबन सभी प्लॉटों पर आला दर्जे के व्यावसायिक प्रतिष्ठान आकार ले चुके हैं। इसमें शराब दुकान, अस्पताल, स्कूल से लेकर पत्थर और सिरेमिक शॉप तक शामिल है। इस मामले में प्राधिकरण बोर्ड ने 20 जून 2016 को जांच आदेश दिए थे। सहायंत्री व अन्य जांच अधिकारियों ने बीते दिनों जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की।
आठ  प्लॉट की लीज निरस्ती की तैयारी
रिपोर्ट के अनुसार 41 प्लॉटों का व्यावसायिक इस्तेमाल हो रहा है। इसमें से आठ मामलों में आईडीए लीज निरस्ती का विचार कर रहा है। इन्हें प्राधिकरण ने 14 जून को 22 जून तक जवाब देने के लिए कहा था। इनके अलावा 33 में से अन्य सात प्लॉटधारकों ने 29 जून को आवेदन देते हुए जवाब के लिए 31 जुलाई तक का समय मांगा था।
कर्मचारी कोटे के प्लॉट पर भी खेल
जांच में पांच ऐसे प्लॉट भी सामने आए हैं जो कर्मचारी कोटे में लीज पर दिए गए थे। इनमें प्लॉट नं. ईडी 110(30/डीए) पर द सिरामिक नाम का शो-रूम बना है। वहीं प्लॉट नं. ईडी 155 पर प्लायवुड व टाइल्स शो-रूम, ईडी 156 पर जे.के.टायर हाउस, ईडी 158 पर बड़ी बिल्डिंग बनी है जिसके ग्राउंड फ्लोर पर दुकानें चल रही है। इसी तरह ईडी 159 को गोदाम बना दिया है।
शराब-स्कूल-कैफे-अस्पताल सब एक जगह
800 मीटर लंबी यह ऐसी सर्विस रोड है जहां एमआर-9 चौराहे पर बड़ी शराब दुकान है। 500 मीटर लंबे हिस्से में सिरामिक, पीवीसी, इलेक्ट्रॉकिन और स्टील के शो-रूम है। 550 मीटर की दूरी पर समर मेटरनिटी होम, ओजोन कैफे, मेडिकल, पाकिजा व यूरो किड्स स्कूल तक हैं। इसके साथ ही दो-दो होटल हैं। इनमें चिक एंड सर्व बड़ी होटल है। स्कूल के बच्चों का रास्ता इसी शराब दुकान के सामने से है।
तयशुदा ही उपयोग हो प्लॉटों का
जिस उपयोग के लिए प्लॉट लीज पर दिए गए है वही उपयोग कंस्ट्रक्शन के बाद भी होना चाहिए। मामले की जांच रिपोर्ट आ चुकी है। रिपोर्ट के आधार पर कारण बताओ नोटिस थमाए गए हैं।
ललित पोरवाल, उपाध्यक्ष
कहां पर क्या है...
प्लॉट नं. प्रतिष्ठान
ईडी 75 (65/डीए) शराब दुकान
ईडी 78 (58/डीए) स्टोन स्टाइल एंड सिरामिक शो-रूम
ईडी 99(39/डीए) ओजोन कैफे ‘वाइन एंड डाइन’
ईडी 172(15/डीए) यूरो किड्स स्कूल
ईडी 180(6/डीए) चिक एंड सर्व होटल
ईडी 170(17/डीए) पाकिजा स्कूल
ईडी 173(14/डीए) कैफे संचालित
ईडी 109(31/डीए) श्रीकृष्णा मार्केटिंग प्लाय एंड वूड शो-रूम
ईडी 110(30/डीए) द सिरामिक शो-रूम
ईडी 165(22/डीए) समर मेटरनिटी होम
ईडी 104 (34/डीए) गुरुनानक डेकोरेटर्स 

नुकसान का नहीं, फायदे का सौदा है जीएसटी

द सियागंज होलसेल किराना मर्चेंट एसोसिएशन की वर्कशॉप में वाणिज्यिक कर अपर आयुक्त व उपायुक्त ने दूर किए भ्रम
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
नई व्यवस्था के साथ आशा और आशंका रहती हैं लेकिन आशंकाओं के कारण नई व्यवस्था को नहीं रोका जा सकता। प्रजातांत्रिक व्यवस्था में कर या कर नीति को लेकर न राज्य मनमानी कर सकते हैं। न केंद्र। जीएसटी को लेकर केंद्र आश्वस्त है राज्यों को नुकसान नहीं होगा। इसीलिए पांच साल तक नुकसान की भरपाई की गारंटी भी दी जा रही है। रविवार को द सियागंज होलसेल किराना मर्चेंट एसोसिएशन द्वारा जीएसटी को लेकर आयोजित कार्यशाला पर बतौर मुख्य अतिथि बोलते हुए यह जानकारी वाणिज्यिक कर अपर आयुक्त राजेश बहुगुणा ने दी।
होटल रेडिसन ब्लू में आयोजित वर्कशॉप में श्री बहुगुणा ने कहा कि आज देश में एक ही चीज पर अलग-अलग तरह के शुल्क और कर लगते हैं। जैसे- किसी चीज के निर्माण पर लगने वाला एक्साइज ड्यूटी या उत्पादन कर, वस्तु के आयात पर कस्टम ड्यूटी। किसी चीज की बिक्री पर वैट टैक्स और उपभोक्ता द्वारा खपत पर सर्विस टैक्स। गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) या वस्तु व सेवा कर के अंतर्गत इन सभी टैक्सों को हटाकर एक ही टैक्स कर दिया जाएगा। जीएसटी को लेकर केंद्र द्वारा बनाई गई एम्पावर्ड कमेटी ‘जिसकी आखिरी बैठक 26 जुलाई को हुई’, के सदस्य व वाणिज्यिक कर उपायुक्त सुदीप गुप्ता ने कहा कि टैक्स भुगतान है, दान नहीं। टैक्स सरकार तय करती है, देना सबको है। गलत पैसा न केंद्र ले सकता है, न राज्य। नियम तुगलकी नहीं है। 5000 सुझाव आए थे कमेटी के पास। कई को शामिल किया गया। अब भी फाइनल नहीं है ड्राफ्ट। आप राय दे सकते हैं। वरिष्ठ कर सलाहकार अमित दवे ने भी जानकारी दी।
उपायुक्त सुदीप गुप्ता से सीधे सवाल-जवाब
जीएसटी में कौनसे टैक्स खत्म होंगे?
राज्य द्वारा लिए जाने वाला लीट, इंट्री टैक्स, सीएसटी, वेट, टैक्स आॅन गुड्स जैसे टैक्स खत्म होंगे। केंद्र के सभी टैक्स खत्म होंगे।
कौनसे टैक्स रहेंगे?
राज्य में प्रोफेशनल टैक्स और केंद्र में कस्टम ड्यूटी ।
सीएसटी खत्म होगा तो आईजीएसटी आ जाएगा?
उसका प्रभाव सिर्फ पेट्रोलिम और अल्कोहॉलिक प्रोडक्ट्स पर ही होगा।
कस्टम ड्यूटी 36 प्रतिशत है, आईजीएसटी ज्यादा रही तो आयात महंगा नहीं होगा?
एसजीएसटी और सीजीएसटी की कुल दर के बराबर होगा आईजीएसटी।
अभी दर तय नहीं।
इनके तेवर थे तीखे...
फ्रांस में 1954 से जीएसटी लागू हैं। ऐसे में यदि यहां लागू हुआ तो हिंदुस्तान सर्वोच्च शक्ति कैसे बन जाएगा जबकि हम फ्रांस सहित कई देशों से 60 साल पीछे हैं। व्यापारियों को प्रयोगशाला समझ रखा है सरकार ने। जब देखो नए कर या कर प्रणाली के नाम पर प्रयोग होते रहते हैं। जैसे आज जीएसटी की मार्केटिंग हो रही है वैसे ही कल वेट की मार्केटिंग हुई थी। क्या हुआ, हर राज्य की अपनी दरें हैं। व्यापार शिफ्ट हो रहा है। जीएसटी लागू होने के बाद किसी राज्य को नुकसान हुआ तो भरपाई केंद्र 5 साल तक करेगा। 5 साल बाद क्या होगा? फिर राज्य अपनी दरें तय करके बैठ जाएंगे। अभी तिमाही रिटर्न दाखिल करते हैं, जीएसटी में मासिक रिटर्न सहित सालभर में 37 रिटर्न दाखिल करना होंगे। मतलब सरकार ने हमें बिना तनख्वाह का कारकून बना दिया है। हम आवाज भी नहीं उठा सकते।
रमेश खंडेलवाल, अध्यक्ष मालवा चेम्बर आॅफ कॉमर्स
जीएसटी के तीन प्रकार
सेंट्रल जीएसटी (सीजीएसटी): यह केंद्र सरकार द्वारा लगाया और वसूला जाएगा।
स्टेट जीएसटी (एसजीएसटी): यह राज्य सरकार द्वारा लगाया और वसूला जाएगा।
इंटरस्टेट जीएसटी (आईजीएसटी): जब माल एक राज्य से दूसरे में जाएगा, तब यह टैक्स लगाया जाएगा।
कहां होगा ज्यादा पैसा खर्च
सर्विस सेक्टर होगा महंगा। लग्जरी कार खरीदने में खर्च करना होगा ज्यादा पैसा। शुरू के 2 सालों में उपभोक्ता रहेंगे घाटे में। शहरी उपभोक्ता ज्यादा घाटे में, क्योंकि ये ज्यादा सर्विस का उपयोग करते हैं। हवाई किराया भी हो जाएगा महंगा।
किसे होगा ज्यादा फायदा
टेक्सटाइल इंडस्ट्री में आएगा बूम। आॅटो इंडस्ट्री में आएगा उछाल। फार्मा इंडस्ट्री के ऊपर जाने की संभावना। एफएमसीजी इंडस्ट्री में भी होगा जबरदस्त उछाल। देश के आयकर दाताओं का दायरा बढ़ने से सरकार को होगा फायदा। व्यापारियों को भी मिलेगा एकीकृत टैक्स सिस्टम का लाभ। कम कर दरों का मिलेगा फायदा।
कहां बचेगा पैसा
घूमना फिरना होगा सस्ता।
कम कीमत की कारें होंगी और सस्ती।
दवाइयों के दाम भी गिरेंगे।
दैनिक उपभोग की वस्तुएं जैसे साबुन, सोडा भी होंगी सस्ती।

हर निवेशक को मिलेगी जमीन- शुक्ल

दबंग दुनिया कार्यालय पहुंचे उद्योगमंत्री ने कहा दो हजार करोड़ में नौ नए औद्योगिक क्षेत्र तैयार करेंगे
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
हमने एकल खिड़की की व्यवस्था कर रखी है लेकिन उसे और कारगर बनाने की जरूरत है ताकि निवेशकों को खिड़की-खिड़की परेशान न होना पड़े। टीसीएस और इन्फोसिस जैसी कंपनियों को जल और जल निकासी जैसे छोटे मुद्दों पर परेशान नहीं होने देंगे। मैं इस संबंध में कल ही संबंधित अधिकारियों से बात करूंगा। यह बात रविवार शाम दबंग दुनिया कार्यालय पहुंचे उद्योग मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कही। उन्होंने कहा कि 2000 करोड़ की लागत से नौ नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित कर रहे हैं ताकि हर निवेशक को जमीन दे सकें।
कुछ समय पहले ही मंत्रालय की जिम्मेदारी मिलने के बाद अक्टूबर में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) की तैयारियों का जायजा लेने इंदौर पहुंचे थे। दबंग दुनिया से खास बातचीत में शुक्ल ने बताया तैयारियां जोरों पर है। बाकी समिट्स की तरह इस बार भी बेहतर परिणाम सामने आएंगे। क्योंकि बीती समिट्स के माध्यम से मप्र की मार्केटिंग दुनियाभर में हुई है। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के प्रयासों ने मप्र के माथे पर लगे बुनियादी सुविधाओं के संकट के काले दाग भी धो दिए हैं। आज सड़क से लेकर पॉवर तक में प्रदेश मजबूत है।
समिट का आकर्षण
समिट में नौ सेक्टर पर जोर दे रहे हैं। इनमें फोकस ज्यादा एग्रो इंडस्ट्री, फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल्स और रीनेवेबल एनर्जी पर रहेगा। हर बार की तरह सेक्टोरियल डिस्कर्शन होंगे। 30 से अधिक देशों के एम्बेसेडर आएंगे। नौ देश सहभागी होंगे।
टीसीएस-इन्फोसिस में ऐसा कैसे?
हाल में टीसीएस और इन्फोसिस में जलजमाव और निकासी की व्यवस्था में संबंधित एजेंसियों की कोताही चर्चा का विषय है। जब इसकी जानकारी श्री शुक्ल को दी गई तो उन्होंने चौकते हुए कहा कि इतनी बड़ी कंपनियों में ऐसी दिक्कतें हैं! मैं इस संबंध में कल ही अधिकारियों को निर्देशित करता हूं।
सरकार आईटी सेक्टर पर भी फोकस कर रही है। क्रिस्टल आईटी पार्क के बाद दो नए आईटी पार्क करीब-करीब तैयार है। क्रिस्टल पार्क में छोटी कंपनियों के लिए भी आईटी पार्क बन रहा है जो 2000 से 5000 वर्गफीट की जरूरत पूरी करेगा। कोशिश यही है कि प्रदेश के भावी आईटी एक्सपर्ट बैंगलोर जैसे शहरों का रूख न करे।
डीएमआईसी को मिलेगी राह
अर्से से दस्तावेजों में ही अटके महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट डीएमआईसी को लेकर शुक्ल ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार बैठकर इस संबंध में बात करेगी। प्रोजेक्ट को अमली जामा पहनाने की पूरी कोशिश करेंगे।
ताकि अन्य शहरों का भी हो विकास
इंदौर-भोपाल निवेश का मुख्य केंद्र बन चुके हैं लेकिन अन्य शहरों की स्थिति संतोषजनक नहीं है। इसीलिए सरकार ने नौ नए औद्योगिक क्षेत्र चिह्नित किए हैं। इनसे रीवा, जलबपुर, ग्वालियर, होशंगाबाद जैसे शहरों में भी निवेश व रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
पीथमपुर को जल्द देंगे पानी
उन्होंने कहा कि पीथमपुर और देवास में कुछ समय पहले तक पेयजल का संंकट था। देवास में पानी की व्यवस्था हो चुकी है। अब बारी पीथमपुर की है जल्द ही पानी की व्यवस्था कर देंगे। क्योंकि इससे एकेवीएन की आय भी बढ़ेगी। 

जिन्होंने चुना वही नकारने लगे मंगवानी को

वार्डवासियों ने कार्यक्रम में नहीं बुलाया, खुद ने बुलाया तो मोघे नहीं आए
इंदौर. विनोद शर्मा ।
चुनाव में अपने क्षेत्र को प्रदेश का आदर्श वार्ड बनाने का दम भरने वाली पार्षद सरिता मंगवानी को उनके अपनो ने ही बेगाना कर दिया। फरवरी 2015 में जिन्होंने मंगवानी को पांच साल के लिए पार्षद चुना था वही लोग डेढ़ साल में ही किनारा करने लगे हैं। रविवार सुबह गुरुनानक कॉलोनी के बाशिंदों ने पार्षद को बुलाए बिना ही पौधारोपण का बड़ा कार्यक्रम कर दिया। शाम को पार्षद न हाउसिंग बोर्ड अध्यक्ष मोघे की शान में सम्मान समारोह रखा लेकिन मोघे ही नहीं पहुंचे।
रविवार को वार्ड-66 की गुरुनानक कॉलोनी में वैष्णवमाता मंदिर और गुरुद्वारे के पास हरियाली महोत्सव के तहत हर घर के सामने पौधारोपण हुआ। कार्यक्रम पार्षद पति व वरिष्ठ भाजपा नेता जवाहर मंगवानी के कट्टर प्रतिद्वंदी इंदौर विकास प्राधिकरण के संचालक विनय मालानी, भाजपा नगर अध्यक्ष कैलाश शर्मा, गुरुसिंह सभा के अध्यक्ष मनजीतसिंह भाटिया के नेतृत्व में हुआ। कार्यक्रम कमल वाघेला और ऋृषि खनूजा जैसे कई क्षेत्रवासियों ने आयोजित किया था।
खुदाई है नाराजगी की वजह
पार्षद कब्जेदार हटा नहीं पाए। उलटा, माणिकबाग ब्रिज के दोनों ओर जेसीबी से नाली खोदी और किनारे मिट्टी पटक दी ताकि गाड़ियां क्रॉस न हो। पैदल निकलना भी मुश्किल हो गया है। लोगों ने बताया  आईडीए ने ब्रिज बनाकर रखरखाव के खर्च के साथ नगर निगम को सौंप दिया था। स्थिति खराब है। मिट्टी-गड्ढे के कारण लोग गिर रहे हैं।
गोपालबाग, त्रिवेणी एक्सटेंशन, राजमहल कॉलोनी, गुुरूनानक कॉलोनी में सीवरेज, सड़क, नर्मदा के काम शुरू हुए लेकिन खत्म नहीं हुए। पार्षद से पूछो तो जवाब मिलता है ठेकेदार-इंजीनियर से बात करो। इसीलिए लोग अब पार्षद को खोदू मौसी कहने लगे हैं। गोपालबाग कॉलोनी में बीच सड़क पर आठ दिन से गड्ढा है। एक गड्ढे में एक वृद्ध दस दिन पहले ही गिरे थे।
गुरुनानक कॉलोनी में काम की शुरूआत नहीं हुई। विनय मालानी ने आईडीए से बगीचा स्वीकृत कराया लेकिन मंगवानी ने टेंडर रूकवा दिए। काम नगर निगम से कराने को कहा था लेकिन आज तक बगीचा नहीं बना। खुदाई को लेकर मामला सीएम हैल्प लाइन तक पहुंच चुका है।
मंगवानी के बुलावे पर नहीं आए मोघे
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व महापौर कृष्णमुरारी मोघे को बीते दिनों सरकार ने हाउसिंग बोर्ड अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी। इसीलिए 2009-2014 के बीच नगर निगम में जनकार्य समिति प्रभारी व तत्कालीन महापौर मोघे के सबसे नजदीकी एमआईसी सदस्य रहे जवाहर मंगवानी ने स्कीम-71 स्थित सुरूचि गार्डन में रविवार को सम्मान समारोह आयोजित किया। सम्मान मोघे का होना था। लंबे समय तक मंगवानी और उनके समर्थक इंतजार करते रहे लेकिन मोघे नहीं आए। कहलवा दिया कि तबीयत खराब है।
हम तो बुला रहे थे, रहवासियों ने मना कर दिया
चूंकि हम पार्टी से जुड़े हैं इसीलिए पार्षद को बुला रहे थे लेकिन क्षेत्रवासियों ने कहा कि पार्षद को बुलाते हो तो हम नहीं आएंगे। क्षेत्रवासियों और पार्षद के बीच नाराजगी की वजह दोनों को पता है, मुझे नहीं।
ऋृषि खनूजा, भाजयुमा नेता
पार्षद राजनीतिक द्वेशता के साथ काम कर रही हैं। इसीलिए अब तक गुरुनानक कॉलोनी में कोई काम नहीं किया है। पानी भी महापौर को बोलने पर मिलता है। जब उन्हें हमारी चिंता नहीं तो हम उनकी चिंता क्यों करें।
संजय पंजाबी, क्षेत्रवासी

जिन्हें दी वसूली की जिम्मेदारी वही पीते रहे फ्री का पानी

नौ साल हो गए इंदौर में, खाता खुला मंगलवार को 
इंदौर. विनोद शर्मा ।
नगर निगम ने जिस उपायुक्त को मुफ्त का पानी पीने वालों या पानी पीकर बिल का पैसा डकारने वालों पर नकेल कसने की जिम्मेदारी सौंप रखी है वह भी जल कर की बड़ी डिफाल्टर हैं। नौ साल से वह इंदौर में पदस्थ हैं लेकिन उनका जल कर खाता खुला दो दिन पहले। इसका खुलासा संभागायुक्त के निर्देश पर खोले जा रहे सरकारी कर्मचारियों-अधिकारियों के नए खातों की लिस्ट में हुआ।
23 जुलाई को संभागायुक्त कार्यालय में कमिश्नर संजय दुबे सरकारी मुलाजिमों पर बकाया जल कर को लेकर चर्चा की। बैठक में आवंटित आवासों की सूची नगर निगम को उपलब्ध कराई गई थी। अंत में दुबे ने तनख्वाह से जल कर काटने के निर्देश दिए। इसके बाद नगर निगम ने डेढ़ हजार लोगों की सूची तैयार की। इनमें उपायुक्त जलकर लता अग्रवाल का नाम भी शामिल हैं। एफ-2 रेडियो कॉलोनी स्थित जिनके निवास पर दो कनेक्शन है। अग्रवाल की बतौर उपायुक्त नगर निगम में पोस्टिंग को तकरीबन नौ साल हो चुके हैं। 31 जुलाई 2016 तक उनके नाम या उपायुक्त निवास के नाम से भी नगर निगम में खाता तक नहीं है।
2 अगस्त को खुले खाते...
बकायादारों की सूची में अपना पता देखने के बाद दो दिन से उपायुक्त अग्रवाल अपने नाम का जलकर खाता खुलवाने का प्रयास करती रही। खाता खुला 2 अगस्त 2016 यानी मंगलवार को। जोन क्रमांक 11 के वार्ड क्रमांक 54 में पहला सर्विस क्रमांक  है 2540805 और 2540806 दूसरे कनेक्शन का सर्विस नंबर है। पुराने किसी सर्विस क्रमांक का जिक्र नहीं है। ऐसे ही नगर निगम के पूर्व कार्यपालन यंत्री जी.एस.जादौन और सोलंकी के घर भी नल है, कनेक्शन नहीं।
नए कर दिए पुराने खाते...
जिन डेढ़ हजार कनेक्शन की सूची नगर निगम ने बनाई है उन्हें संभागायुक्त के निर्देशानुसार नए सिरे से कनेक्शन दिए जा रहे हैं। रेसीडेंसी एरिया में ही 2540 की सीरिज हुए कनेक्शन की संख्या 100 से अधिक है। बताया जा रहा है कि तकरीबन 1000 कनेक्शन नए सिरे से किए जा चुके हैं।
25 जुलाई की सूची के अनुसार सुपरीटेंडेंट सेंट्रल टेलीग्राफ पर 15,17,361 रुपए, फोरेस्ट रेंजर पर 8,29,979, एसएसपी इंदौर पर 2,40,957, रजनीश वैश पर 40636 और बीबीएस ठाकुर पर 11917 रुपए बकाया थे। ऐसी करोड़ों की बकायादारी है जिसे धीरे-धीरे वेतन से काटा जाएगा। मौजूदा बिल भी जमा कराया जाएगा।
नए क्यों?
चूंकि अधिकारी-कर्मचारियों के तबादले होते रहते हैं। कई ऐसे घर मिले जिनमें कनेक्शन जिन नाम से है वे वर्षों पहले ही इंदौर छोड़ चुके हैं। इसीलिए मौजूदा आवंटियों के नाम से कनेक्शन किए गए हैं।
इनके भी खुले ताजा खाते...
राकेश कुमार सिंह 2540804
जी.एस. सोढी, एम.व्हाय.एच. 2540802
श्री वरदमूर्ति मिश्र, कलेक्टर कार्यालय 2540801
महेन्द्रसिंह चौहान म.प्र.रा.कृ.वि. बोर्ड 2540797
वरूण कपूर निदेशक, रेडियो पुलिस 2540796
कल्याण चक्रवर्ती, एसपी पश्चिम 2540795
आर.जी.पाण्डेय उपश्रमायुक्त 2540793
संजीव दुबे सहायक आयुक्त आबकारी 2540792
अखिलेश झा, एसपी मुख्यालय 2540791
पवन श्रीवास्तव, एडीजी एसएएफ 2540788
सुरेश सोनी संयुक्त संचालक कृषी 2540781
बालकृष्ण मोरे जिला पंजीयक 2540775
राजेश मेहता अधिक्षक भृ अभिलेख 2540766
सुधीर पोल, उपभोक्ता फोरम 2540755