Wednesday, August 20, 2025

एमओएस हजम करके बुना 90 करोड़ के मुनाफे का सपना

तीन तरफा रोड पर झुल गया गिरीराज का ड्रीम 

इंदौर. नगर संवाददाता । 
इंदौर में अवैध इमारतें खड़ी करने के आदी हो चुके नीरज उर्फ निक्की नीमा की गिरीराज ड्रीम्स पर नगर निगम मेहरबान है। इसीलिए तो लगातार हो रही शिकायतों को नजरअंदाज करके बिल्डिंग को पोषित करने का पाप नगर निगम मुख्यालय में बैठे अफसर कर रहे हैं। दूसरी तरफ सरकारी संरक्षण से बेखौफ नीमा ने तीन तरफ जो सड़क है उससे सटाकर बिल्डिंग बना दी।  
  गिरीराज ड्रीम्स जिस प्लॉट पर बन रही है वह राजस्व रिकार्ड में प्रतिभा सिन्टेक्स लिमिटेड के डायरेक्टर शिवकुमार चौधरी व अन्य के नाम दर्ज है। 2 फरवरी 2024 को नगर निगम ने 16951.32 वर्गफीट के इस प्लॉट पर भवन अनुज्ञा (PMT/IND/0152/296/2024) जारी की थी। 1.3 फ्लोर एरिया रेशो (एफएआर) और 26.52 प्रतिशत के प्रस्तावित ग्राउंड कवरेज के साथ कुल 21949.44 वर्गफीट निर्माण की अनुमति दी गई थी। इसमें 3862.73 वर्गफीट निर्माण व्यावसायिक उपयोग के लिए होना है जबकि 18086.70 वर्गफीट निर्माण का उपयोग आवासीय होना है। 
 प्लॉट के बाकी हिस्से का एमओएस के रूप में होना था। सामने 25 फीट, पीछे 20 फीट, एक तरफ 20 फीट, दूसरी तरफ 20 फीट जमीन खूली छोड़ना थी ताकि उसका उपयोग सार्वजनिक हित में हो सके। नीमा ने चारों तरफ कब्जा कर लिया। बिल्डिंग की प्लींथ तीन तरफ सड़कों से मिला दी वहीं पश्चिम की ओर बनी बिल्डिंग तरफ 5-6 फीट जमीन छोड़ी। ऐसा करके नीमा ने ग्राउंड कवरेज (प्लींथ) बढ़ा लिया ताकि उस पर मंजूरी से ढ़ाई-तीन गुना अधिक निर्माण करके मनमाना मुनाफा कमाया जा सके।  
निगाहें करोड़ों के मुनाफे पर
बिल्डिंग जहां है वहां बाजार मुल्य 15 हजार रुपए/वर्गफीट है। जिस ग्राउंड कवरेज के साथ बिल्डिंग बन रही है उसमें 81 हजार वर्गफीट से अधिक निर्माण होना है। जो मंजूरी से 59416.89 वर्गफीट अधिक है। मतलब करीब 90 करोड़ का मुनाफा। चूंकि मुनाफा बढ़ा है इसीलिए नीमा को रिस्क लेना परवर रहा है। उनका मानना है कि यदि बहुत ज्यादा विरोध हुआ और शिकायतें हुई भी तो 1-2 करोड़ रुपए बांटकर मामला रफा-दफा करा सकते हैं। बाकि मुनाफ तो होगा ही।  
शिकायतें होती रही, बिल्डिंग तनती रही
बिल्डिंग को लेकर लगातार शिकायतें होती रही है। कुछ समय तक नगर निगम ने काम भी रुकवाए रखा लेकिन बाद में ले-देकर काम शुरू हो गया। बताया जा रहा है कि संघ से जुड़े पदाधिकारियों ने क्षेेत्र के पार्षद और विधायक तक को फोन करके बिल्डिंग-बिल्डर को संरक्षण देने की बात कही थी।

Tuesday, August 19, 2025

गिरीराज का नक्शा...


न प्लींथ सर्टिफिकेट, न नोटिस पर कार्रवाई, काम जारी 

ब्रोशर दिखाकर प्लॉटधारकों को सुविधाओं से महरूम रखने वाले जिन बिल्डरों को कलेक्टर ने नोटिस थमाया था उनमें गिरीराज ग्रुप भी शामिल है। ग्रुप मनमानी आदी है। इसका उदाहरण है स्कीम-134 में निर्माणाधीन गिरीराज ड्रीम। मंजूरी के विपरीत मनमाना निर्माण करके ग्रुप ने नगर निगम की नाक में दम कर रखा है। प्लींथ सर्टिफिकेट को लेकर नगर निगम ने बीच में काम बंद कर दिया था लेकिन बाद में ले-देकर काम शुरू हो गया।

गिरीराज ड्रीम्स स्कीम नंबर 134 के प्लॉट नंबर 19 आर-सी सेक्टर डी पर बन रही है। प्लॉट का क्षेत्रफ‌ल 16951.32 वर्गफीट है। भवन अधिकारी से लेकर नगर निगम आयुक्त तक को शिकायत हो चुकी है। बताया जा रहा है कि इंदौर के वजनदार मंत्री के दबाव में कार्रवाई नहीं हो पा रही है। इसीलिए मामले की शिकायत मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव और मुख्य सचिव के साथ ही लोकायुक्त-ईओडब्ल्यू को भी की गई है। 

नगर निगम की भवन अनुज्ञा के अनुसार बिल्डिंग में बड़े पैमाने पर मनमानी सामने आई है। अब तक प्लींथ सर्टिफिकेट जारी नहीं हुआ। बावजूद इसके मनमाना निर्माण हो रहा है। ईओडब्ल्यू ने भी नगर निगम को चिट्‌ठी लिखकर प्लींथ सर्टिफिकेट की कॉपी मांगी है, जो निगम ने जारी ही नहीं किया। 

बीओ का ट्रांसफर हो गया...कार्रवाई नहीं हुई

बिल्डिंग के अवैध निर्माण को लेकर जब शिकायतें हुई तब भवन अधिकारी (बीओ) शैलेंद्र मिश्रा थे। उन्होंने बिल्डिंग और बिल्डर को बचाने की भरचक कोशिश की। इसी शिकायत के बाद उनका तबादला हो गया था। अब बीओ का दायित्व टीना सिसोदिया को सौंपा गया है। 

निगम को मुंह चिढ़ा रह है मनमानी

16951.32 वर्गफीट के प्लॉट पर मार्जिनल ओपन स्पेस (एमओएस) के लिए खूली छोड़ी जाने वाली जमीन पर कब्जा करते हुए ग्राउंड कवरेज 4495.49 वर्गफीट से बढ़ाकर 13561 वर्गफीट कर लिया। इसी के आधार पर बेसमेंट बनाया। तल मंजिल बनी है। शिकायतकर्ता अजय यादव के अनुसार इसी के आधार पर ऊपर निर्माण हुआ तो कुल 81,366 वर्गफीट के आसपास निर्माण होगा। जो मंजूर निर्माण 21949.44 वर्गफीट से 59416.89 वर्गफीट अधिक और अवैध होगा।

नया नहीं है गिरी का राज

नीरज उर्फ निक्की नीमा की इस कंपनी ने इससे पहले स्कीम-54 के प्लॉट नं. 64 और 65 को जोड़कर गिरीराज ग्रांड नाम की बिल्डिंग बनाई थी। इस बिल्डिंग में भी 798.68 वर्गफीट कमर्शियल निर्माण की अनुमति दी गई थी जबकि मौके पर इससे 10 गुना कमर्शियल निर्माण हुआ है। सुदामानगर क्षेत्र में भी कई ऐसी मनमानी इमारतें तनी हुई है।

कॉलोनियों से गायब है ब्रोशर का सब्जबाग

17 कॉलोनियों को नोटिस, आधे बिल्डरों ने दिया जवाब

किसी ने समय मांगा, किसी ने कहा कॉलोनी कंपलिट है, साहब एक बार आकर तो देखो

इंदौर. नगर संवाददाता ।

सुविधाओं का सब्जबाग दिखाकर  कॉलोनाइजरों ने कॉलोनी काटी। मनमाफिक कीमत पर प्लॉट बेचे। रजिस्ट्री की। प्लॉट के कब्जे के साथ बिल्डरों ने वादों का ब्रोशर थमाया लेकिन बुनियादी सहुलियतें आज तक जुटाकर नहीं दी। किसी में पानी की टंकी नहीं है। किसी में स्ट्रीट लाइट नहीं है। कहीं सीवरेज लाइन का संकट है। कहीं सड़क के ही पते नहीं है। परेशान प्लॉटधारकों की शिकायत पर कलेक्टर आशीष सिंह ने करीब 400 एकड़ जमीन पर कॉलोनियां काटकर बैठे 17 नामी बिल्डरों को नोटिस थमाकर पूछा है कि काम क्यों नहीं हुआ। सात दिन हो चुके हैं। कुछ बिल्डर बगले झांक रहे हैं। कुछ ने जवाब के नाम पर बहानेबाजी थमा दी।  

कलेक्टर के निर्देश पर एडीएम गौरव बैनल ने 17 बिल्डरों को नोटिस दिए थे। नोटिस के अनुसार बिल्डरों को सात दिन में बताना था कि उन्होंने उनके द्वारा काटी गई कॉलोनियों में काम क्यों नहीं किया? सात दिन से ज्यादा हो चुका है। नोटिस जारी हुए। अब तक करीब 7-8 बिल्डरों की तरफ से जवाब गया है। जवाब भी अलग-अलग है। किसी ने कहा कि उनका प्रोजेक्ट कंपलिट हुआ नहीं है, काम चल रहा है। इसीलिए यह नहीं कह सकते कि सुविधाएं जुटाए बिना बाहर हो गए। कुछ ऐसे हैं जिन्होंने सीधे से गलती तो नहीं मानी लेकिन ये कहा कि लोगों की शिकायतों का निराकरण कर देंगे, बस थोड़ा वक्त दे दो। 

एडीएम बैनल ने बताया कि तकरीबन आधे बिल्डरों ने जवाब दे दिए हैं। जवाब को सुचिबद्ध किया जा रहा है। काम न होने पर हर एक ने अलग-अलग कारण बताए हैं। हमारी प्राथमिक्ता भी कॉलोनियों में बुनियादी सुविधाएं डेवलप कराना है ताकि रहवासी परेशान न हों।

धरोहर के प्लॉट न छुटे इसीलिए दिए नोटिस 

कुछ बिल्डरों का कहना है कि उनकी कॉलोनी कंपलिट है। प्रशासन सड़क, बिजली, पानी, सीवरेज, गार्डन, सुरक्षा जैसी सुविधाएं होने के बाद भी नोटिस थमा रहा है जो कि गलत है। कुछ बिल्डर ऐसे भी हैं जिन्होंने कंपलिशन सर्टिफिकेट के लिए अप्लाई कर रखा है ताकि निश्चित समयावधि में प्रशासन कॉलोनी की सुविधाएं जांचकर धरोहर के प्लॉटों को मुक्त कर सके। कंपलिशन न देने के लिए जबरन नोटिस दिए हैं। 

बिल्डर जिन्हें नोटिस जारी हुए 

हरप्रीतसिंह भािटया 'मोनू' : चोरल के सर्वे नं. 132/1/1क/1 व अन्य की 2.414 हेक्टेयर जमीन पर सतगुरु नगर बसाया। सड़क पर 15 फीट जगह छोड़ी है, जो इंट्रेंस है कॉलोनी का। गेट पर लिखा है संपूर्ण वैध कॉलोनी।

शैलेष पिता शिवनारायण माहेश्वरी तर्फे दृष्टि डेवकॉन प्रा.लि. : कंपनी ने महू के पिपलिया लौहार में गिरीराज वैली-1 और और खरडाखेड़ा में गिरीराज वैली-2 के नाम से कॉलोनी काटी है।  तीसरी कॉलोनी जोशी गुराडिया में है। नाम है गिरीराज सिटी। 

जेआरपीएल इस्टेट डेवलपर्स तर्फे अखिलेश कोठारी : कंपनी ने पालाखेड़ी में क्रिसेंट गार्डन सिटी और गार्डन सिटी के नाम से कॉलोनी काटी है।  

कृष्णमुरारी तिवारी : महू के सातेर में श्री रेसीडेंसी के नाम से कॉलोनी काटी है। 

केशर सिंह चौहान : महू गांव में शिव शक्तिनगर के नाम से कॉलोनी काट रखी है। वैध बताकर बेची गई इस कॉलेानी में कई बुनियादी सुविधाएं नहीं है। 

ऋृषभ महाजन तर्फे विशाल रिर्सोट्स एंड होटल्स : झलारिया में रूचि लाइफ स्कैप के नाम से कॉलोनी काटी है। इस कॉलोनी में भी ग्रीड को लेकर शिकायतें हैं।  

व्यंकटेश इंडस्ट्रीयल प्रा.लि. तर्फे योगेश मेहता : जाख्या में कंपनी ने अल्पा इंडस्ट्रीयल पार्क बनाया है। जहां ब्रोशर में जो सुविधाएं गिनी। कई अब तक उपलब्ध नहीं।  

संजय लुणावत : महू के भाटखेड़ी में सबसे बड़ी 53.054 हेक्टेयर की कॉसमॉस सिटी कॉलोनी काटी है। कॉलोनी में भी कई सुविधाएं अब तक विकसित नहीं। कॉलोनी 12 साल पुरानी है। 

बंटी सरदार सिंह : ढाबली में ज्ञानशीला सिटी नाम की कॉलोनी काटी है। यहां भी बुनियादी सुविधाएं वह नहीं है, जो ब्रोशर में थी।

गणेश रावत तर्फे संस्कार इन्फ्रा एंड रियल : पुवार्डा जुर्नादा में संस्कार सिटी नाम से कॉलोनी काट रखी है। कॉलोनी आधा हेक्टेयर की है लेकिन सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं। 

सिद्धार्थ कोठारी तर्फे शुभम बिल्डकॉन : हिंगोनिया में शुभम सिटी कॉलोनी काटी है। कॉलोनी 3.701 हेक्टेयर पर है।  

विद्युत मित्तल तर्फे ज्ञानशीला डेवलपर्स : महू गांव में सुपर सिटी के नाम से 2009 में 20 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन पर कॉलोनी काटी थी। 

अनिल बाफना : देपालपुर में न्यू शांति विहार कॉलोनी काटी है। डेढ़ हेक्टेयर की इस कॉलोनी में सुविधाएं कम है। 

अरविंद दुबे तर्फे एसबीडी डेवलपर्स : जाख्या में ब्रजधाम के नाम से काॅलोनी काट रखी है। कॉलोनी 10 हेक्टेयर से अधिक जमीन पर है। 

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डेवलपमेंट करीब-करीब पूरा है। ग्रीड का मुद्दा है। जो तैयार कर दिया था लेकिन बिजली के लिए 4.68 किलोमीटर लंबी लाइन डालना थी। दो बार खम्बे खड़े किए। एक बार 23 पोल चोरी हो गए। दूसरी बार सड़क बनाने के चक्कर में आईडीए ने पोल तोड़ दिए। 

अखिलेश कोठारी

हमारी कॉलोनी 16 साल पुरानी है। कॉलोनी कंपलिट है। कोई काम बाकि नहीं है। हम प्रजेंटेशन के साथ जवाब दे चुके हैं।  

विद्युत मित्तल,ज्ञानशीला समूह

Wednesday, August 13, 2025

वोट चोरी के खिलाफ मतदान अधिकार यात्रा 17 से

 

बिहार में हुंकार भरेंगे राहुल गांधी

नई दिल्ली।  वोट चोरी को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी गंभीर और सरकार के  खिलाफ आक्रामक है। वे सरकार के खिलाफ अपनी निर्णायक लड़ाई 17 अगस्त से शुरू करने जा रहे हैं। इसे मतदान अधिकार यात्रा का नाम दिया है। राहुल का कहना है कि  यह सिर्फ़ चुनावी मुद्दा नहीं है - यह लोकतंत्र, संविधान और 'एक व्यक्ति, एक वोट' के सिद्धांत की रक्षा के लिए एक निर्णायक लड़ाई है।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को कहा कि हम बिहार की धरती से 'मतदाता अधिकार यात्रा' के ज़रिए वोट चोरी के ख़िलाफ़ सीधी लड़ाई लड़ रहे हैं और ज़ोर देकर कहा कि उनकी पार्टी पूरे देश में एक साफ़-सुथरी मतदाता सूची सुनिश्चित करेगी। गांधी ने कहा कि वोट चोरी सिर्फ़ एक चुनावी मुद्दा नहीं है, बल्कि लोकतंत्र, संविधान और 'एक व्यक्ति, एक वोट' के सिद्धांत की रक्षा के लिए एक निर्णायक लड़ाई है। एक्स पर एक पोस्ट में, गांधी ने कहा, "17 अगस्त से, 'मतदाता अधिकार यात्रा' के साथ, हम बिहार की धरती से वोट चोरी के ख़िलाफ़ सीधी लड़ाई लड़ रहे हैं।

उन्होंने कहा, "हम पूरे देश में एक साफ़-सुथरी मतदाता सूची सुनिश्चित करेंगे। युवा, मज़दूर, किसान - हर नागरिक, उठ खड़े हों और इस जन आंदोलन में शामिल हों।" गांधी ने आगे कहा कि इस बार वोट चोरों की हार - जनता की जीत, संविधान की जीत।

एमपी बोर्ड ने तय की 10वीं-12वीं की परीक्षा तारीख

 


होली से पहले संपन्न हो जाएगी एक्जाम 

16.59 लाख स्टूडेंट्स देंगे एग्जाम


मध्य प्रदेश बोर्ड परीक्षा 10वीं या 12वीं की परीक्षा का टाइम टेबल जारी कर दिया है। 12वीं की परीक्षा 7 फरवरी 2026 से शुरू होगी और 10वीं की परीक्षा 11 फरवरी से शुरू होगी। 

  मंडल ने 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 की डेटशीट जारी कर दी है। एमपी बोर्ड 12वीं की परीक्षा 7 फरवरी 2026 से 3 मार्च 2026 तक चलेगी।  10वीं की परीक्षा 11 फरवरी से शुरू होगी और 2 मार्च को खत्म होगी। परीक्षा एक ही शिफ्ट में सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक चलेगी। सभी उम्मीदवारों को सुबह 8 बजे तक परीक्षा केंद्र पर उपस्थित होना होगा। दोनों की कक्षा का पहला पेपर हिंदी है। 10वीं में  9.53 लाख और 12वीं में 7.06 लाख स्टूडेंट्स शामिल होंगे।  

डेटशीट...............

10वीं की परीक्षा : 11 फरवरी- हिंदी, 13 फरवरी-उर्दु, 14 फरवरी-एआई,  17 फरवरी-अंग्रेजी, 19 फरवरी-संस्कृत,  20 फरवरी-मराठी, पंजाबी, गुजराती, सिंधी, 24 फरवरी-गणित, 27 फरवरी-विज्ञान और 2 मार्च- सामाजिक विज्ञान 

12वीं की परीक्षा : 7 फरवरी-हिंदी, 9 फरवरी-उर्दु, मराठी, 13 फरवरी- भौतिकी, अर्थशास्त्र, पोल्ट्री, मछली पालन, 14 फरवरी- बायोटेक्नोलॉजी, गायन, वादन, तबला, बखावज, 16 फरवरी-संस्कृत, 17 फरवरी- ड्राइंग एंड डिजाइन, 18 फरवरी-रसायन शास्त्र, इतिहास, 19 फरवरी-मनोविज्ञान, 20 फरवरी-  शरीरिक परीक्षा, 21 फरवरी- कृषि, होम साइंस, अकाउंटेंसी, 23 फरवरी- जीवन विज्ञान, 25 फरवरी-गणित, 26 फरवरी-राजनीति शास्त्र, 27 फरवरी-इन्फॉर्मेट्रिक, 2 मार्च- समाज शास्त्र, 3 मार्च-भूगोल, फसल उत्पादन


आवारा कुत्तों के कारण बच्चों की हो रही है मौत

सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा

बताया एक साल में 37 लाख डॉग बाइट के मामले सामने आए  



नई दिल्ल्ली। कोर्ट ने दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में आवारा कुत्तों से संबंधित मामले में गुरुवार को सुनवाई की और फैसला सुरक्षित रख लिया। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की तीन सदस्यीय पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। सुनवाई के दौरान, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों के कारण बच्चों की मौत हो रही है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को सुलझाने की जरूरत है, न कि इस पर विवाद करने की।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शीर्ष कोर्ट में कहा कि कोई भी जानवरों से नफरत नहीं करता। उन्होंने कोर्ट को बताया कि देश में एक साल में कुत्तों के काटने के 37 लाख से अधिक मामले सामने आए हैं। वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कोर्ट से अनुरोध किया कि दिल्ली-एनसीआर में अधिकारियों को आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश देने वाले 11 अगस्त के आदेश पर रोक लगाई जानी चाहिए। 

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रखा

सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया है, जिसमें 11 अगस्त के आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी। 

कोर्ट का आदेश वापस हो: पशु प्रेमी 

पशु प्रेमियों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को वापस लेने की बुधवार को मांग की। उन्होंने  ‘‘स्वतंत्रता दिवस, किसके लिए?’’ लिखी तख्तियों के साथ प्रदर्शन किया।  प्रदर्शन में कार्यकर्ता, स्वयंसेवी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रवक्ता अनीश गवांडे, कार्यकर्ता राय मानवी और पूर्व केंद्रीय मंत्री तथा पशु अधिकार कार्यकर्ता मेनका गांधी की बहन एवं पीपल फॉर एनिमल्स की संस्थापक अंबिका शुक्ला शामिल थीं। 

 

इंदौर को जामवंत चाहिए...जो पुलिस को शक्ति याद दिला सके


इंदौर में जिस गति से अपराध बढ़ रहे हैं, उन्हें देखते हुए लगता है कि शहर को एक जामवंत की तलाश है...। जी..हां...जामवंत की...। जो पुलिस कमीश्नर संतोष सिंह और आईजी अनुराग को उनकी खोई हुई ताकत का अहसास करा सके...। जो बता सके कि आपको जिस इंदौर को सुरक्षित रखने का दायित्व सौंपा गया है उसका प्रभार छोटे-मोटे मंत्री के पास नहीं है, स्वयं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पास हैं, जिनके पास गृह मंत्रालय भी है।  

जामवत जरूरी है जो बता सके कि सिंह साहब आपने डीआईजी रहते इंदौर में डंडे की जो धांक और अपराधियों में पुलिस का खौफ पैदा किया था वह पूरी तरह काफूर हो चुका है...। अब गली-मेाहल्ले और रोड-चौराहे तो दूर अपराधी प्रगति विहार जैसी पॉश कॉलोनियों में ऐसे जजों के घरों में अपना शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं....जिनके घुरने मात्र से बड़े-बड़े पुलिस कप्तान थर-थर कांपने लगते थे। सिंह साहब इंदौर में पुलिस कमीश्नरी लागू हो चुकी है। मतलब, पुलिस को पहले से ज्यादा पॉवर है। अब आप डीआईजी भी नहीं रहे...। महाराज, आप इंदौर के पुलिस कमीश्नर हैं..। जागो...।  थानों को मांडवाली का अड्डा बनाकर बैैठे थाना प्रभारियों को कसो, वरना इनकी हिलाहवाली आपकी इज्जत खराब कर रही है। 

1988 बैच के आईएएस अनुराग अग्रवाल की गिनती भी पुलिस के होनहार अफसरों में होती है।  टीकमगढ़, सिंगरौली, भिंड, हरदा और उज्जैन में बतौर एसपी काम कर चुके अग्रवाल सागर जोन (बुंदेलखंड) के आईजी रह चुके हैं। माननीय ये सही है कि आपके पास ग्रामीण थाने हैं। जिनमें बल कम है लेकिन कार्यक्षेत्र ज्यादा है। हालांकि शहर के मुकाबले गांवों में अपराध कम ही होते हैं लेकिन फिर भी शहरसीमा से लगे गांवों में आपसे जिस कसावट की उम्मीद की जाती है वह दिख नहीं रही है। थाने के स्टाफ के पास कानून का राज कायम रखने के अलावा बहुत काम है। अवैध कॉलोनाइजरों को संरक्षण देना है और गुंडे-बदमाशों से जमीनों के विवाद निपटाना है। वह भी यह कहते हुए कि थोडी दाड़की हमारी निकल जाएगी।  अब स्टाफ दाड़की निकालने में लगा रहेगा तो अपराध पर नियंत्रण मुश्किल है।