Thursday, January 21, 2016

पूरे बायपास के दोनों ओर बनेगी सर्विस रोड

- 32 किलोमीटर लंबे रोड पर 102.43 करोड़ की 30.10 किलोमीटर सर्विस मंजूर
- आईडीटीएल और लिया कंसलटेंट को लिखा पत्र, दी तैयारियों की हिदायत
- अभी आधे हिस्से में है सर्विस रोड
इंदौर. विनोद शर्मा ।
निर्माणाधीन इंदौर-देवास सिक्सलेन प्रोजेक्ट के तहत 32 किलोमीटर लंबे बायपास (राऊ सर्कल से सेंट्रल पॉइन्ट मांगलिया) पर दोनों तरफ पूरी सर्विस रोड बनेगी। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन की मांग के बाद नेशनल हाईवे अथॉरिटी आॅफ इंडिया (एनएचएआई) ने सर्विस रोड का खांका खींच दिया है। सर्विस रोड को मैदानी शक्ल देने की अनुमानित लागत 102.43 करोड़ आंकी गई है। इस सड़क के बनने से न सिर्फ बायपास पर सफर सुरक्षित होगा बल्कि आसपास की कॉलोनियों के लोगों को चौराहों तक पहुंचने में आसानी होगी।
एनएचएआई ने प्रोजेक्ट पर काम कर रही कंपनी आईडीटीएल और कंसलटेंट कंपनी लिया एसोसिएट्स साउथ एशिया प्रा.लि. को पत्र लिखकर सर्विस रोड की संभावनाएं जांचने के निदे्रश दिए हैं। पत्र में एनएचएआई ने 28 मई 2015 को लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती महाजन द्वारा ली गई बैठक और बैठक में की गई सर्विस रोड की मांग की भी जानकारी दी।  एनएच ने कहा है कि बायपास के दोनों तरफ फूल लैंग्थ सर्विस रोड बनना है। निर्माण डिजाइन बिल्ट फाइनेंस आॅपरेट एंड ट्रांसफर (डीबीएफओटी) के तहत आईडीटीएल से हुए अनुबंध के तहत ही होंगे। जो अतिरिक्त लागत आएगी, उसकी रिकवरी के लिए टोल वसूली की समयसीमा बढ़ा दी जाएगी।
ऐसी होगी सर्विस रोड...
अभी बायपास पर 50 फीसदी हिस्से में सर्विस रोड है। चेंज आॅफ वर्क स्कॉप (सीडब्ल्यूएस) के तहत दोनों तरफ 30.10 किलोमीटर लंबा सर्विस रोड बनेगा। इस दौरान सर्विस रोड के साथ पुल-पुलिया और कलवर्ट भी बढ़ेगी। इसीलिए इस प्रोजेक्ट की लागत 102.48 करोड़ आंकी गई है। सर्विस रोड की चौड़ाई 5 मीटर होगी।
क्या-क्या बनेगा...
माइनर ब्रिज 7
बॉक्स कलवर्ट 2
स्लैब कलवर्ट 7
सिंगल रो पाइप कलवर्ट 11
डबल रो पाइप कलवर्ट 4
ट्रिपल रो पाइप कलर्वट 1
190 बिजली के खम्बे शिफ्ट होंगे
फुल लैंग्थ सर्विस रोड जिस जमीन पर बनना है वहां 190 बिजली के खम्बे लगे हैं। ये सभी हाइटेंशन लाइन (1100 और 3200 केवी) के हैं तो काफी कुछ जम्बो लाइन के जो बायपास की कॉलोनियों को रोशन करने के लिए बिछाई गई है। सर्विस रोड बनाने के लिए इनकी शिफ्टिंग जरूरी है।  34.16 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित कर सड़क बनेगी।
यहां से यहां तक नहीं है सर्विस रोड...
- राऊ जंक्शन से कैलोदकर्ताल : 7 किलोमीटर
- मिर्जापुर से मुुंडला नायता : 2.3 किलोमीटर
- मुंडला नायता से स्वामीनारायण मंदिर : 0.8 किलोमीटर
-  नेमावर रोड से बिचौली मर्दाना : 1.2 किलोमीटर
- ओमेक्स-1 से विस्तारा : 1 किलोमीटर
- इन्फोसिटी से अरंडिया : 1 किलोमीटर
क्यों जरूरी...
- बायपास के दोनों ओर कॉलोनियां हैं जहां सर्विस रोड नहीं है वहां लोग रॉन्ग साइड आते-जाते हैं। जिससे हादसे की संभावना बनी रहती है।
- सर्विस रोड न होने से कई जगह ट्रक मेन रोड पर खड़े हो जाते हैं।
- चौराहा रहित बायपास पर वाहनों की गति को इधर-उधर से जुड़ने वाले लोग प्रभावित करते हैं।
फायदे क्या...
- सर्विस रोड बनने से रॉन्ग साइड चलने की मजबूरी खत्म हो जाएगी।
- मेनरोड का दबाव डाइवर्ट होगा। जाम की संभावना कम होगी।
- मेन रोड और सर्विस रोड दोनों पर जोखिम कम होगा।



अफसरों की अंधेरगर्दी

‘सरकार’ को दे दी शिकायतकर्ताओं को सीधा करने की सुपारी
- सरकारी जमीन पर जिसकी कॉलोनी का किया खुलासा, उसी की शिकायत पर पुलिस-प्रशासन ने कर दिया जीना मुश्किल
इंदौर. विनोद शर्मा । 
असरावद खुर्द की सरकारी जमीन पर कॉलोनी काटने वाले भू-माफिया गुंडों से शिकायतकर्ताओं पर जो दबाव नहीं बनवा पाए, अब उसकी जिम्मेदारी जरखरीद अफसरों को सौंप दी गई है। न नियम, देखा न कायदा, अफसर भी निकल पड़े शिकायतकर्ताओं को सबक सीखाने। जातिसूचक शब्दों की झूठी शिकायत पर एक तरफ पुलिस ने पूर्व सरपंच पर शिकंजा कसा तो दूसरी तरफ कब्जों के खिलाफ कमर कसकर बैठे मौजूदा सरपंच को सरकारी जमीन से गुमटी हटाने के मामले में धारा 40 का नोटिस थमाकर प्रशासनिक अधिकारियों ने पद से हटाने की तैयारी शुरू कर दी।
सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर चर्चा में आया असरावद खुर्द सरकारी सपोर्ट से भू-माफियाओं की जागिर बनता जा रहा है। मौजूदा सरपंच भोजराज चौधरी और पूर्व सरपंच सीताराम चौधरी व अन्य शिकायकर्ताओं की शिकायत पर दबंग दुुनिया ने कब्जों का खुलासा किया। कलेक्टर पी.नरहरि के आदेश पर एसडीएम श्रृंगार श्रीवास्तव, तहसीलदार राजकुमार हलधर और पटवारी आर.एस.पवार ने जांच की। जांच के दौरान सरकारी जमीन (सर्वे नं. सर्वे नं. 19/2, 19/3, 37/1/1, 37/1/3, 37/2, 171/1, 171/1/1, 171/1/2, 171/1/3, 171/1/4 और 172/1) पर चार साल में अवैध कॉलोनियां कट चुकी है। यहां तकरीबन 170 मकान बन चुके हैं। तकरीबन 50 का निर्माण जारी है। कब्जों की वीडियोग्राफी हो चुकी है। आधुनिक मशीन से जमीन का सीमांकन भी हो चुका है। हालांकि अब तक कार्रवाई शुरू नहीं हुई।
भू-माफियाओं की धमकी पर पुलिस मौन...
पूर्व सरपंच पिंकी राजौरिया के पति पप्पू राजौरिया, देवर दिनेश राजौरिया, समधी महेश भीमाजी, विनोद मोरे, अमरचंद, सिकंदर व अन्य ने कॉलोनी काटी है। इसका खुलासा सतत प्रकाशित समाचारों में किया। 14 दिसंबर को पप्पू राजौरिया और विनोद मोरे ने रिपोर्टर को तीन अलग-अलग फोन से धमकी दी जिसकी शिकायत डीआईजी संतोष सिंह और सीएसपी आजादनगर को की। रिकॉर्डिंग की सीडी भी दी लेकिन महीनेभर में पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। जब भी सीएसपी कार्यालय में फोन करके पूछा एक ही जवाब मिला, मेडम अभी छूट्टी पर हैं, लौटेंगी तब कार्रवाई होगी। शिकायत में उल्लेखित था कि पप्पू और उसके साथियोें ने शिकायतकर्ता और उसका साथ देने वाले हर शख्स को सबक सीखाने की बात कही है। इसीलिए भू-माफियाओं ने गुंडों का सहारा नहीं अफसरों की ही मदद ली।
जहां मिला पैसा, वहां काम हुआ ऐसा
सरकारी जमीन कब्जा मुक्त कराने की कल्पना करने वाले शिकायतकर्ताओं और उनके सहयोगियों को सरकार की तरफ से सराहना या प्रोत्साहन नहीं मिला। उलटा, पप्पू राजौरिया की झूठी शिकायत पर पहले आदिमजाति कल्याण थाने की पुलिस ने पूर्व सरपंच सीताराम चौधरी को पकड़ा। जैसे-तैसे अधिकारी कन्वेंस हुए और चौधरी को छोड़ा। इसके बाद 30 दिसंबर को तेजाजीनगर पुलिस ने पप्पू की शिकायत पर चौधरी को पकड़ा, फोन जब्त कर लिया। पूरा परिवार परेशान होता रहा। शुभचिंतकों की दखल के बाद चौधरी को देर रात छोड़ा गया।
भू-माफिया और अफसरों की मिलीभगत का दूसरा शिकार हुए मौजूदा सरपंच भौजराज चौधरी। 4 जनवरी 2016 को एसडीएम श्रृंगार श्रीवास्तव ने कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए मप्र पंचायती राज स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 40 के तहत चौधरी को सरपंच पद से हटाने की चेतावनी तक दे दी। चौधरी का कसूर यह है कि उसने सरकारी जमीन पर किसी महिला को गुमटी लगाने से मना कर दिया। इसी महिला की शिकायत पर एसडीएम ने कार्रवाई की और यहां तक कहा कि जब गुमटी हटा रहे हो तो सरकारी जमीन पर बने या बन रहे मकान क्यों नहीं हटाए।
क्यों सवालों के घेरे में ‘सरकार’
- 2009 से 2015 के बीच असरावद की सरपंच पिंकी राजौरिया रही। उनके पति और उनके देवर व समधी ने कई परिवारों को सरकारी जमीन पर प्लॉट बेचे। नौटरी की। दर्जनों शिकायतें हुई लेकिन एसडीएम कार्यालय ने कोई नोटिस नहीं दिया। क्यों?
- अवैध कॉलोनी यदि राजौरिया परिवार की नहीं थी तो उन्होंने प्रशासन पर कब्जों पर कार्रवाई के लिए दबाव क्यों नहीं बनाया? प्रशासन ने पिंकी को धारा 40 का नोटिस क्यों नहीं दिया?
- एमआर-10 पर सीलिंग की जमीन पर कॉलोनी काटने वालों के खिलाफ प्रशासन ने एफआईआर कराई है। आधा दर्जन कॉलोनाइजरों की गिरफ्तारी की। फिर असरावद में कब्जेदारों पर रहमोकरम क्यों?
- पूर्व सरपंच और मौजूदा सरपंच के खिलाफ हुई शिकायतों की जांच किए बिना कैसे उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई? जबकि वे आदतन अपराधी नहीं है, सरकारी जमीन के चिंतक हैं।

36 अफसरों को शराब कंपनियां दे रही है 70 करोड़ का पैकेज

पाने वालों में कलेक्टर और आबकारी आयुक्त तक 
इंदौर. विनोद शर्मा । 
देशी-विदेशी शराब बनाने वाली एक कंपनी (ब्रेवरीज और डिस्टलरी) अधिकारियों को सालाना 3.5 करोड़ रुपए की ‘तनख्वाह’ बांट रही है। इनमें सहायक जिला आबकारी अधिकारी (एडीईओ) से लेकर आबकारी आयुक्त (ईसी) और क्षेत्र के थाना प्रभारी से लेकर संबंधित जिले के कलेक्टर तक शामिल हैं। मप्र में दो दर्जन ब्रेवरीज और डिस्टलरी कंपनियां हैं। प्रदेश के तीन दर्जन भ्रष्ट अफसरों को सालाना 70  करोड़ का पैकेज मिल रहा है ताकि वे अपने फर्ज के साथ बेइमानी करते रहें।
इसका खुलासा इनकम टैक्स इन्वेस्टिगेशन विंग द्वारा शराब किंग शिवहरे समूह के खिलाफ की गई छापेमार कार्रवाई के दौरान हुआ। आधा दर्जन ब्रेवरीज और डिस्टलरी में समूह की दखल है। कार्रवाई के दौरान कुछ अहम लेजर डॉक्यमेंट और उनकी कॉपी हाथ लगी है जिनमें इस बात का पूरा हिसाब है कि किस अफसर को कितना पैसा गया। सूची के अनुसार इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, खरगोन, धार, राजगढ़, रायसेन, मुरैना, छतरपुर, शाजापुर के 36 फर्स्ट-सेकंड क्लास के अफसरों के नाम शामिल हैं।
ये है समूह की ब्रेवरीज और डिस्टलरी
रेजेंट बियर एंड वाइन प्रा.लि. मप्र
पेसिफिक अल्को बेव प्रा.लि. झारखंड
मालवा वाइन इंडिया लि. मप्र
मालवा ब्रेव एंड अल्कोहल(इंडिया) प्रा.लि. मप्र
पिनेकल ब्रेवरिज एंड डिस्टलरी इंडिया प्रा.लि. मप्र
अग्रवाल डिस्टलरी प्रा.लि. मप्र
भोपाल ब्रेवरीज एंड डिस्टलरी मप्र
ग्रेट गेलन लि. मप्र
चीयर्स ब्रेवरीज प्रा.लि. मप्र
(इन कंपनियों में लक्ष्मीनारायण शिवहरे, मनीश राय, रमेशचंद्र राय, सुनीत मंडहोक, हरमिंदरसिंह भाटिया, वैशाली शिवहरे, गोपाल सिंह डायरेक्टर हैं। ये सभी रिजेंट बियर एंड वाइन लि. में डायरेक्टर हैं।)
कैसे बाहर आया लेजर...
एक कंपनी में चार-छह लोग पार्टनर हैं। एक पूरा काम संभालता है, अफसरों को साधने की जिम्मेंदारी भी उसी की है। वह अफसरों को जितना पैसा देता है उसकी नाम और पद के साथ दी गई राशि के साथ इंट्री करता है ताकि अपने पार्टनर को सही-सही हिसाब दे सके। अलग-अलग ठिकानों पर से ऐसे दस्तावेज मिले हैं।
किसे कितना पैसा/माह
आबकारी आयुक्त 1 लाख
एडिशनल/डिप्टी कमिश्नर 50 हजार
डिविजनल कमिशनर 50 हजार
डिस्ट्रिक्ट एक्साइज आॅफिसर 50 हजार
अ.डिस्ट्रिक्ट एक्साइज आॅफिसर 50 हजार
कलेक्टर 25 हजार
एसपी 25 हजार
थाना/मैदानी स्टाफ 15 हजार
ब्रेवरीज
ब्रेवरीज जिला क्षमता
लिलासंस बे्रवरीज भोपाल 1.0
एमपी बियर प्रोडक्ट प्रा.लि. इंदौर 2.25
ेसोम डिस्टलरी एंड ब्रेवरीज रायसेन 9.92
तिरुपति अल्को ब्रेव प्रा.लि. मुरैना 9.5
जेगपिन ब्रेवरीज लि. छतरपुर 1.0
रिजेंट बियर एंड वाइन लि. शाजापुर 3.0
माउंट ब्रेवरीज लि. इंदौर 5.0
डिस्टलरी
ंअग्रवाल डिस्टलरी प्रा.लि. खरगोन
असोसिएटेड अल्कोहल खरगोन
कोक्स इंडिया लि. छतरपुर
ग्वालियर अल्कोब्रू प्रा.लि. ग्वालियर
ग्रेट गेलन लि. धार
ओएसिस डिस्टलरी लि. धार
सोम डिस्टलरी प्रा.लि. रायसेन
विंध्याचल डिस्टलरी प्रा.लि. राजगढ़


शराब से ग्लास-बोतल तक छाये शिवहरे

देवास में करीब भारीभरकम निवेश से बनाई हाईलाईन ग्लास र्वक्स प्रा. लि.
लोकल को ब्रांडेड शराब बना रही है ‘बोतल’
इंदौर. विनोद शर्मा । 
जिस शिवहरे समूह के खिलाफ आयकर ने छापेमार कार्रवाई की है उसका शराब से लेकर ग्लास और बोतलों तक पर कब्जा है। ये बोतलें लोकल शराब को ब्रांडेड बनाने के काम भी आती है ताकि मोटा माल कमाया जा सके। इसीलिए समूह ने नागदा (देवास बायपास पर) में ग्लास बोटलिंग फैक्टरी डाली है। इस फैक्टरी में शिवहरे समूह के सर्वेसर्वा लक्ष्मीनारायण शिवहरे हैं।
शराब कारोबारी लक्ष्मीनारायण शिवहरे ने शराब के वैध-अवैध धंधे से हुई कमाई का बड़ा हिस्सा ग्लास कारोबारी राजनारायण गुप्ता के साथ देवास की ग्लास कंपनी (हाईलाईन ग्लास र्वक्स प्रा. लि.) में निवेश किया है। इस कंपनी में अत्याधुनिक मशीनें स्थापित की गई ताकि देशी-विदेशी शराब के साथ ही ब्रांडेड शराब की बोतलें भी बनाई जा सके। शिवहरे समूह की दखल सांवेर रोड औद्योगिक क्षेत्र स्थित एक बोटलिंग कंपनी में भी है। यहां भी ब्रांडेड शराब की बोतलें बनाई जाती है। बाद में इनमें सामान्य शराब मिलाकर ब्रांडेड शराब बनाई जाती है।
ऐसी है हाईलाईन ग्लास र्वक्स
देवास शहर से लगे गांव नागदा की सर्वे नं. 414, 415/1/1, 415/1/2, 415/1/3, 415/1/4,  415/2, 416, 417/1, 417/2, 418/1/1, 418/1/2, 418/1/3, 418/1/4,  418/2, 419/1/1, 419/1/2 और 419/2 की 3.643 हेक्टेयर जमीन सहित आठ एकड़ पर बनी हाईलाईन ग्लास र्वक्स प्रा. लि. है। 2009 में स्थापित हुई कंपनी में फार्मास्यूटिकल्स, लीकर और डेयरी प्रोडक्ट के लिए बोतलें बनाई जाती है। कंपनी ग्लास कारोबारी गुप्ता और शराब किंग शिवहरे परिवार संयुक्त रूप से संचालित कर रहा है। यहां आॅटोमेटिक ग्लास फॉर्मिंग मशीन स्थापित है। ज्यादातर 100 एमएल की बोतल बनाई जाती है। प्रोजेक्ट कुल आठ एकड़ जमीन पर है। मेन्युफेक्चरिंग केपेसिटी 150 टन/डे है इसका जिक्र नवंबर 2012 की एक रिपोर्ट में है। प्रोजेक्ट कॉस्ट 55.62 करोड़ है। 40.5 करोड़ की बैंक फेसिलिटी इकरा ने उपलब्ध कराई है।
कंपनीे ये बनाती है...
ग्लास बोटल (शराब, दवा और दूध की बोटलें)
ड्रिंकिंग ग्लास (सभी तरह के)
ग्लास क्रॉकरी
कंपनी के डायरेक्टर...
नाम पता
लक्ष्मीनारायण शिवहरे ग्वालियर
रवींद्र शिवहरे ग्वालियर
संध्या शिवहरे ग्वालियर
हरिओम शिवहरे ग्वालियर
कमला शिवहरे ग्वालियर
राजनारायण गुप्ता फिरोजाबाद
मनोज कुमार गुप्ता फिरोजाबाद 

पीओएस राशन के नाम पर दिखा रही है ठेंगा

पूरी तरह अमल से पहले सुधार और समझाइश जरूरी
इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
राशन वितरण प्रणाली व्यवस्था को हाईटेक करने के मकसद से राशन दुकानों पर लगई गई आधुनिक मशीनें शासन और विभागों के साथ अब उपभोक्ताओं को भी ठेंगा दिखा रही है। मशीन ने वितरण प्रणाली को सुधारने के बजाए उलझा कर रख दिया। एक आदमी के राशन की इंट्री पहले 2 मिनट में हो जाती थी, 8-10 मिनट लग रहे हैं। 4जी के जमाने में 2जी से चल रहे सर्वर के अटकने से 10 दिनों में दुकानों से राशन नहीं बंट पाया है। हर दिन दुकान पर कतार नजर आ रही है सो अलग।
राशन के लिए शासन और खाद्य आपूर्ति विभाग ने आधुनिक पाइंट आॅफ सेल (पीओएस) मशीनें दुकानों पर उपलब्ध करवाई।  इसमें समग्र आईडी नंबर डालने के बाद संबंधित व्यक्ति के अंगूठे का निशान लिया जाता है। लेकिन कई उपभोक्ताओं के आधार नंबर लिंक नहीं होने से फिंगर प्रिंट मैच नहीं हो पा रहे हैं। जबकि इसमें उपभोक्ता और उसके पारिवारिक सदस्य की आईडी और नाम सही दर्ज होना चाहिए। उपभोक्ताओं की मशीनी शिनाख्ती या पर्ची निकलने में हो रही देर से एक राशनकार्ड पर राशन देने में 10-12 मिनट लग रहे हैं। पाबंदी के कारण दुकानदार चाहकर भी रजिस्टर में इंट्री करके राशन नहीं दे पा रहे हैं।
अकाउंट नहीं तो राशन नहीं...
सुप्रीमकोर्ट ने राशन वितरण में आधार की अनिवार्यता रोकी तो सरकार ने बैंक अकाउंट की अनिवार्यता लाद दी। गेैस की तरह सरकार भले राशन पर नकद सब्सिडी न दे लेकिन राशन वितरण के लिए राशनकार्डधारकों के बैंक अकाउंट जरूरी कर दिए गए हैं। 1 अपै्रल से जिन जिलों में उपभोक्ताओं को नकद सब्सिडी मिलेगी उनमें भी इंदौर को नाम नहीं है, फिर राशन से वंचित रखने का क्या मतलब।
सेल्समेन या सहायक ही खोल पाएगा मशीन
मशीन रोज ओपन करना पड़ती है। यह सेल्समैन या फिर उसके सहायक के थम्ब इम्प्रेशन से ही खुलती है। सेल्समैन या उस्रे सहायक की अनुपस्थिति में कोई अधिकृत होने के बावजूद राशन नहीं बांट पा रहा है। एक सेल्समैन ने बताया कि वह तीन बार थम्ब इम्प्रेशन अपडेट करवा चुका है लेकिन मशीन उसके थम्ब को एक्सेप्ट ही नहीं कर रही है।
राशन देने के बाद भी स्टॉक वहीं का वही
मशीन की बड़ी समस्या यह है कि इसमें स्टॉक अपडेट नहीं होता। उदाहरण के तौर पर एक उपभोक्ता को राशन देने के बाद जब मशीन से पर्ची निकाली जाती है तो उस पर उपभोक्ताओं को दिए गए राशन की क्वांटिटी तो होती है लेकिन वह सेल्समैन के स्टॉक से डिडक्ट नहीं होती।
यह भी होना चाहिए...
- जब तक मशीन संतोषजनक काम नहीं करती तब तक मेन्युअल वितरण भी हो।
- सप्ताह में एक बार सेल्समैन से स्टॉक डिटेल ली जाए।
- थम्ब इम्प्रेशन अटकने की स्थिति में रजिस्टर पर साइन कराई जा सके ताकि लोग भटके न।
 नेटवर्क बना परेशानी
पीओएस मशीन को आॅपरेट करने के लिए विभाग ने निजी दूरसंचार कंपनी से टाईअप किया है। कंपनी भी 2 जी नेटवर्क उपलब्ध करा रही है जबकि अब 3जी और 4जी का दौर है। 2जी के मुकाबले इनकी स्पीड ज्यादा है इससे उपभोक्ताओं को सहुलियत भी ज्यादा मिलती।
मेंटेनेंस भी नहीं...
मशीनें ठीक से काम नहीं कर रही। मेंटेनेंस का जिम्मा जिस डीएसके डिजिटल कंपनी को दिया गया है, वह मशीनों में आए दिन आ रही समस्याओं का निराकरण नहीं कर पा रही है। हर दिन दर्जनों शिकायतें आ रही है। पाइंट आॅफ सेल (पीओएस) न तो ठीक से काम कर रही और न ही उपभोक्ताओं के फिंगर प्रिंट रिड कर रही है। चौंकाने वाली बात तो यह है कि मशीनें आधार कार्ड से भी लिंक नहीं हो पा रही है।

शराब कारोबारी अफसरों को बांट रहे हैं सालाना 260 करोड़

आबकारी को  ‘फ्रीडम टैक्स’
 और पुलिस को ‘पार्किंग टैक्स’
इंदौर. विनोद शर्मा ।
आयकर की छापेमार कार्रवाई में शराब कारोबारी शिवहरे समूह से ज्यादा मप्र आबकारी विभाग एक्सपोज हो गया। शिवहरे के ठिकानों से आयकर को मिले दस्तावेजों और शराब कारोबार से जुड़े सूत्रों की मानें तो सिर्फ इंदौर में ही आबकारी विभाग के अधिकारी सालाना 20 करोड़ से ज्यादा की रिश्वत लेते हैं।  यदि 5 करोड़/जिले के औसत से बात करें तो प्रदेश में सालाना 260 करोड़ बांटना पड़ते हैं। बंटवारा आबकारी विभाग में इंस्पेक्टर से लेकर ऊपरी आकाओं तक का होता है। पुलिस और नेताओं की फीस अलग।
पेट्रोलियम प्रोडक्ट के बाद शराब है जो सरकार को ज्यादा राजस्व देती है। आबकारी विभाग, पुलिस और नेताओं की जैब भी यही भरती है। न दे तो मप्र आबकारी एक्ट में इतनी धाराएं हैं कि उनका पालन करने में व्यापारी बुजुर्ग हो जाए लेकिन शराब का व्यापार न कर पाए। फिर मामला दुकानों पर टंगे आबकारी सूचना के बोर्ड का हो या फिर बोर्ड पर लिखे अक्षरों की साइज का। इसी एक्ट से शराब दुकानों पर अधिकारियों की जमावट होती है। इंदौर में पब और क्लब संस्कृति ने फीस बढ़ाई है।
600 करोड़ की ड्यूटी, 20 करोड़ की रिश्वत
इंदौर जिले में शराब की 171 इनमें 90 अंग्रेजी और 81 देशी शराब की हैं। 2015-16 में जिले की इन दुकानों ने तकरीबन 600 करोड़ की एक्साइज ड्यूटी चुकाई। अनुमानित कारोबार है करीब 1100 करोड़ का, एक नंबर में। 3.28 करोड़/दिन। एक दुकान से औसत 80-90 हजार रुपए का बंटवारा होता है जो कुल 18.50 से 19 करोड़ होता है।
मप्र में कुल 3694 दुकाने हैं। देशी 2634 और 1060 विदेशी। इन दुकानों से औसत 60 हजार रुपए के हिसाब से हर महीने 18.47 करोड़ की रिश्वत बंटती है। सालाना यह आंकड़ा 265 करोड़ तक पहुंचता है।
किसको किस काम के कितने...
- आबकारी सर्कल बनाकर काम करता है। भोई मोहल्ला, काछी मोहल्ला, बंबई बाजार, मलवा मिल अ मालवा मिल ब, पलासिया, ग्रामीण में एक-दो, सांवेर, देपालपुर सर्कल हैं। हर सर्कल के लिए मैदानी अमला तय है।
- एक दुकान से हर महीने इंस्पेक्टर 10-12 हजार रुपए और एडीओ व उससे ऊपर वाले को 15 से 20 हजार रुपए तक मिलते हैं। ताकि दुकान घंटे-आधे घंटे जल्दी खुले, घंटे-आधे घंटे देर तक चालू रहे। देर रात तक कारोबार हो। लाइसेंसी दुकानों के माल की बिक्री (एरिया) चाय-पान की दुकानों पर हो सके।
- पुलिस 5-10 हजार तक क्षेत्र के थाना प्रभारी को ताकि पुलिस की अनावश्यक दखल न हो। विवाद-झगड़े में मदद मिले। दुकानों के सामने अवैधानिक पार्किंग होती रहे।
लाइसेंस...
- बार लाइसेंस 3.50 लाख में बनता है जबकि क्लब-पब लाइसेंस 7.30 लाख में। नियम से ये लाइसेंस 3-3 महीने तक नहीं बन पाते जबकि लाख-दो लाख रुपए दो तो 15-20 दिन में लाइसेंस मिल जाता है।
- बार वालों से ज्यादा पैसा मिलता है। क्योंकि बार वाले संबंधित दुकानों से पूरा कोटा नहीं लेते। दो नंबर की शराब खरीदकर बेचते हैं। इसीलिए उन्हें मुनाफा ज्यादा होता है।
-जिले में इंस्पेक्टर, एडीओ और डीओ बैठते हैं। हर दुकान पर इनकी दखल और फीस ज्यादा है। उड़नदस्ते का आॅफिस अलग है। उसकी फीस कम है।
 शराब में सक्षम है सबसे पिछड़े जिले...
अलीराजपुर, झाबुआ और धार को इंदौर-उज्जैन संभाग के पिछड़े जिलों में होती है लेकिन प्रतिबंध के बावजूद गुजरात में गैरकानूनी रूप से हो रही शराब की बिक्री ने इन जिलों की पूछपरख इंदौर जैसे प्रदेश के महानगर से ज्यादा कर दी है। सबसे ज्यादा दुकानें इंदौर जिले में हैं। इन जिलों में दुकानों का अनुपात भले कम हो लेकिन रिश्वत का रेशो बहुत ज्यादा है। हालात यह हैं कि कभी सजा समझी जाने वाली इन जिलों की जिम्मेदारी लेने के लिए अब अधिकारी कुछ भी करने को तैयार हैं।
विधायकों की दखल से बिक रही है शराब...
खरगोन, धार, झाबुआ, अलीराजपुर और खंडवा में विधायक शराब दुकान चलवाने के पैसे ले रहे हैं। धंधा करना है तो उन्हें पैस देना ही है। जितना वजनदार विधायक, उतना ज्यादा पैसा। सबसे ज्यादा खराब स्थिति धार में है। बुरहानपुर और नेपानगर में कुछ पत्रकार भी हैं जो गाड़ियों के फोटो खींचते हैं और बाद में बड़ा पैसा लेते हैं।
देशी घटी, विदेशी बढ़ी..
2010-11 2012-13 2014-15
देशी शराब 2770 2751 2634
विदेशी 916 934 1060
शराब कंजम्शन..
2010-11 2012-13 2014-15
देशी 828.59 926.33 1103.69
विदेशी 1078.12 1383.45 1439.77
(लाख प्रुफ लीटर)

Monday, December 28, 2015

शुक्ला की ‘कृपा’ से कट रही है कश्यप की कॉलोनी

- सख्ती के बाद भी सरकारी जमीन पर कब्जे
- 3 से 4 लाख में बेचे जा रहे हैं प्लॉट
इंदौर. विनोद शर्मा ।
खजराना, असरावद बुजुर्ग और बाणगंगा क्षेत्र में कलेक्टर की सख्ती के बावजूद छोटा बांगड़दा की सरकारी जमीन पर अवैध कॉलोनी कट रही है। सूरजबली नगर और सूर्यदेव नगर के नाम से जिस जमीन पर कॉलोनी काटी जा रही है उसका एक हिस्सा सरकारी है जबकि दूसरे हिस्से पर कांग्रेस नेता कृपाशंकर शुक्ला और कुख्यात भू-माफिया रामसुमिनर पिता मुरली कश्यप के नाम का बोर्ड लगा है। सूर्यदेवनगर में कश्यम के नाम की तख्तियां टंगी है जबकि सूरजबलीनगर को शुक्लाजी की कॉलोनी बताकर प्लॉट बेचे जा रहे हैं। वह भी उस स्थिति में जब
मामला ग्राम छोटा बांगड़दा की सर्वे नं. 336 और 337 की तकरीबन पांच एकड़ जमीन का है। 336 सरकारी जमीन है जबकि 337 कृपाशंकर पिता महावीरप्रसाद शुक्ला और उनके भाई मनोहरप्रसाद  व सत्यनारायण शुक्ला के नाम दर्ज है। इन जमीनों पर 20-20 फीट चौड़ी रोड डालकर कॉलोनी काटी जा रही है। कॉलोनी दो हिस्सों में कट रही है। एक हिस्से का नाम सूर्यदेवनगर है। दूसरा सूरजबलीनगर। सूर्यदेवनगर में सड़क के साथ मकान और बाबा रामदेव के मंदिर का निर्माण शुरू हो चुका है जिस पर रामसुमिरन कश्यम का बोर्ड लगा है। सूरजबलीनगर में कुछ मकान पुराने बने हैं जबकि अब नए सिरे से प्लॉट बेचे जा रहे हैं।
सूरजबलीनगर पंडितजी की, सूर्यदेवनगर कश्यप की
सर्वे नं. 337 शुक्ला परिवार की जमीन है। यहां सूरजबलीनगर के नाम से कुछ मकान पुराने बने हैं। इस अवैध कॉलोनी का जिक्र राजस्व दस्तावेजों में भी है। बड़ी बात यह है कि शुक्ला द्वारा काटी गई इस कॉलोनी के सभी पुराने प्लॉट मास्टर प्लान 2021 में 100 फीट चौड़ी रोड और बीते दिनों इंदौर विकास प्राधिकरण द्वारा प्रस्तावित की गई 45 मीटर चौड़ी एमआर-5 में बाधक के रूप में चिह्नित किए जा चुके हैं। मौके पर प्लॉट बेच रहे कश्यप के कारिंदे भी सीमांकन दिखाते हुए कहते हैं यह सब मकान टूट जाएंगे, आपका प्लॉट फ्रंट में आ जाएगा। अभी कीमत 3 लाख है बाद में 20 लाख कीमत होगी। कारिंदों ने बताया कि सर्वे नंबर 336 की जमीन पर कट रहा  सूर्यदेवनगर कश्यप की कॉलोनी है। उसकी नोटरी कश्यपजी ही करेंगे जबकि सूरजबलीनगर शुक्लाजी और कश्यप दोनों की मालिकी की है।
लेख पैलेस भी कश्यप की...
छोटा बांगड़दा में रामसुमिरन पिता मुरली कश्यप और उनके दो भाई राजाराम और रामस्वरूप के नाम से सर्वे नं. 315/1/2 की 0.405 हेक्टेयर जमीन है जिस पर कश्यप परिवार पहले ही लेख पैलेस नाम की अवैध कॉलोनी काट चुका है। जमीन शहरी सीलिंग से भी प्रभावित है।
ऐसे बिक रहे हैं प्लॉट..
रिपोर्टर : प्लॉट बताओगे भैया...
कारिंदा : आपको किसने भेजा।
मैं तो ईधर ही रहता हूं किराए से?
- कितना बड़ा चाहिए।
800 से 1000 वर्गफीट?
मेरे पास 600 फीट के प्लॉट हैं। 15 बाय 40 के।(प्लॉट दिखाते हुए ये 600 फीट हैं।)
इनका फेस किधर रहेगा।
- (सीमांकन के बाद आईडीए द्वारा लगाए गए सीमा पत्थर दिखाते हुए) रोड किनारे की पूरी पट्टी टूटेगी। आप फ्रंट पर आ जाओगे।
कॉलोनी का नाम क्या रखा?
- उधर, सूर्यदेवनगर, इधर, रोड किनारे सूरजबलीनगर।
दो कॉलोनी ?
कुछ एडजस्टमेंट है। (इशारे से जमीन दिखाते हुए) यह सूरजबलीनगर है कृपाशंकर शुक्लाजी और कश्यपजी का। सूर्यदेवनगर कश्यप की है।
एक प्लॉट कितने का?
- रामनगर में 1.5 लाख के प्लॉट हैं। रोड भी ठंग की नहीं है। हम 20 फीट की रोड दे रहे हैं। इसीलिए 3.5 लाख रुपए। रोड किनारे 4 लाख। बाकी जो बैठक में टूट जाए।
टाइम कितना दो गे?
3-4 महीने।
नौटरी या रजिस्ट्री?
नौटरी है।
जैसे खजराना में टूटी यहां तो नहीं टूटेगी?
- नहीं, वहां सरकारी जमीन पर कॉलोनी थी। यहां पंडितजी और कश्यपजी की निजी जमीन है।
सोनू कश्यप,
 रामसुमिरन कश्यप का बेटा
कश्यप चोर काट रहा है कॉलोनी। मेरा कोई लेना-देना नहीं है। मैंने स्वयं अधिकारियों से शिकायत की और कार्रवाई की मांग की है। मैं नहीं चाहता गरीबों का नुकसान हो। जमीन रावला की है। मेरा मालिकी को लेकर उससे विवाद चल रहा है।
पं.कृपाशंकर शुक्ला
कांग्रेस नेता
कॉलोनी नॉलेज में। बीते दिनों रिमुवल की कार्रवाई भी की है। इसके बाद भी प्लॉट बिक रहे हैं और मकान बन रहे हैं तो फिर कार्रवाई करेंगे।
मुनीश शिकरवार
अपर तहसीलदार