Friday, July 23, 2010

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आयकर पर मंदी की मार
इंदौर. FPRIVATE "TYPE=PICT;ALT=Incometax"
विश्वव्यापी मंदी का असर अब वित्त वर्ष की समाप्ति के साथ ही आयकर विभाग पर भी नजर आने लगा है। बीते वर्षो में अंतिम मौके पर लक्ष्य बढ़ाकर रिकॉर्ड वसूली करने वाला विभाग इस बार लक्ष्य में 500 करोड़ की कटौती करने के बाद भी वसूली के मामले में 15 फीसदी दूर है। हालात ये हैं कि अब तो आयकर विभाग के आला अधिकारी भी लक्ष्य प्राप्ति की संभावनाओं को नकारने लगे हैं। उनका कहना है कि अंतर ज्यादा है जिसे तमाम कोशिशों के बावजूद पाटा नहीं जा सकता।
वर्ष 2006-07 और 2007-08 में जमा हुए कॉपरेरेट टैक्स और इनकम टैक्स के आंकड़ों को देखते हुए केंद्र सरकार ने 2008-09 के लिए मप्र-छत्तीसगढ़ को 6,972 करोड़ आयकर वसूली का लक्ष्य दिया था। हालांकि अगस्त-सितंबर 2008 से बाजार पर छाई मंदी ने सरकार के मंसूबों पर पानी फेर दिया।
मंदी और वसूली में कमी की संभावनाओं को देखते हुए सरकार को लक्ष्य में 500 करोड़ की कटौती करना पड़ी। बावजूद इसके 25 मार्च तक 6,472 करोड़ के रिवाइज लक्ष्य के विरुद्ध 5,504 करोड़ रुपए ही जमा हो पाए। अंतर सीधे 968 करोड़ का। उधर, इस अंतर ने इंदौर, भोपाल और ग्वालियर के उन आयकर अधिकारियों के माथे पर पसीना ला दिया है जो लक्ष्य में 8 फीसदी की छूट मिलने के बाद राहत की सांस ले रहे थे। हालांकि उनका स्पष्ट कहना है कि हजार करोड़ के अंतर को पांच दिन में पाटा नहीं जा सकता।
ये दिन भी देखे
आयकर विभाग बीते वर्षो तक वसूली के मामले में बेहतर रहा। 2006-07 में विभाग को अंतिम तिमाही में लक्ष्य 4,575 से बढ़ाकर 4,863 करोड़ करना पड़ा। इन आंकड़ों से मजबूती मिलते ही 2007-08 में 5035 करोड़ का लक्ष्य रखना पड़ा। हालांकि इस बार भी बाजार की बेहतरी के चलते 403 करोड़ की बढ़ोतरी करके लक्ष्य 5,438 करोड़ रुपए तय करना पड़ा।
बावजूद इसके तकरीबन शत प्रतिशत वसूली हुई। इस वित्त वर्ष में 927 करोड़ के लक्ष्य के आगे 987 करोड़ की वसूली करके इंदौर ने रिकॉर्ड बनाया जबकि इस बार 2008-09 में हालात उलटे हैं। इस बार 1,165 में से करीब 900 करोड़ की ही वसूली हो पाई। अधिकारियों के अनुसार वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के बाद मंदी शुरू हुई। शुरुआत से होती तो यह आंकड़ा 750 से 800 करोड़ के बीच ही रह जाता।
कभी कॉपरेरेट, कभी इनकम टैक्स पर जोर
विभाग ने 6,972 करोड़ के लक्ष्य में कॉपरेरेट टैक्स 2,323 और इनकम टैक्स 4,649 तय किया था। हालांकि मंदी की मार से कंपनियों की हालत देखते हुए संशोधन के बाद स्थिति उलटी हो गई। अब कॉपरेरेट टैक्स 3,691 करोड़ है वहीं इनकम टैक्स का आंकड़ा 2,781 करोड़ रह गया।
विश्वव्यापी मंदी के कारण बिगड़ी बाजार की स्थिति को देखते हुए लक्ष्य कम किया था। बीते साल 25 मार्च तक 92 फीसदी वसूली हो चुकी थी, वहीं इस बार मामला 85 फीसदी तक पहुंचा है। वसूली के इन आंकड़ों और ग्राफ को देखते हुए अभी यह कह पाना मुश्किल है कि रिवाइज लक्ष्य तक भी पहुंचेंगे या नहीं। कोशिशें जारी हैं।
- एस.पी. सिंह, चीफ कमिश्नर, आयकर- इंदौर और भोपाल

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