Friday, July 23, 2010


200 करोड़ का फटका

इंदौर । स्टेट बैंक ऑफ इंदौर के भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) में विलय ने इनकम टैक्स के खजाने को भी तगड़ा झटका दिया है। झटका भी छोटा नहीं, सीधे 200 करोड़ रूपए सालाना है। अब तक इसका मुख्यालय इंदौर में होने से स्थानीय आयकर कार्यालय में यह मोटी रकम जमा होती थी, जो विलय के बाद मुंबई में जमा होगी। सालाना 50 हजार करोड़ से अधिक कारोबार करने वाली यह बैंक अब तक इंदौर की सबसे बड़ी करदाता रही है।

दूसरी ओर प्रदेश सरकार को आयकर के मिलने वाले करीब 60 करोड़ रूपए से हाथ धोना पड़ेगा। बहरहाल, विलय ने आयकर अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है।2008-09 की मंदी से 2009-10 में बमुश्किल उबरे आयकर इंदौर के सामने वर्ष 2010-11 में दो नई चुनौतियां हैं।

एक सबसे बड़े करदाता और दूसरी इस करदाता से मिलने वाले 200 करोड़ की भरपाई की। जानकारों की मानें तो विलय के बाद इंदौर बैंक का संचालन एसबीआई करेगी। एसबीआई का मुख्यालय मुंबई में है। ऎसी स्थिति में इंदौर बैंक से मिलने वाली रकम भी एसबीआई अपने खाते से मुंबई में जमा करेगी।

वह भी उस वक्त जब मौजूदा वित्तीय वर्ष में इंदौर रीजन का आयकर लक्ष्य करीब 1400 करोड़ से बढ़ाकर करीब 1600 करोड़ किया जाना प्रस्तावित है। आयकर के कई जिम्मेदार अधिकारी इतनी बड़ी रकम की भरपाई को लेकर हाथ खड़े कर चुके हैं। वहीं कुछ ने इसके लिए करदाताओं का सूक्ष्म सर्वे कराए जाने का प्रस्ताव भी आला अधिकारियों को देना शुरू कर दिया है।

...इसलिए व्याकुलता

इंदौर रीजन में इंदौर-उज्जैन संभाग के 14 जिले हैं। इनसे मिलने वाला राजस्व बीते वर्ष 1405 करोड़ था। ऎसे में बैंक दो जिलों के बराबर कर देती थी।
इंदौर, देवास व पीथमपुर में टाटा, रैनबैक्सी, फोर्स जैसी कंपनियां हैं। इनका कारोबार हजारों करोड़ में है, पर सबके मुख्यालय दूसरे राज्यों में होने से इंदौर को कुछ नहीं मिलता।

नुकसान तो मप्र का

आयकर को यही फर्क पडेगा कि इंदौर को मिलने वाला कर मुंबई में जमा होगा। नुकसान मप्र को है, क्योंकि बैंक 200 करोड़ का राजस्व चुकाती तो केंद्र को उसका 30 प्रश हिस्सा मप्र को लौटाना पड़ता था। यह राशि 60 करोड़ होती थी। सत्यनारायण गोयल, सीए

विनोद शर्मा

No comments:

Post a Comment