Friday, July 23, 2010


तो मुंह नहीं ताकेंगे उद्योग
इंदौर। प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र जल्द ही सड़क, पानी, सफाई और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए स्थानीय निकायों पर आश्रित नहीं रहेंगे। क्षेत्रों में जरूरत के मुताबिक बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए गुजरात की तरह मप्र सरकार "इंडस्ट्रियल कॉरिडोर एक्ट" या "इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एक्ट" लागू करेगी। एक्ट लागू होने के बाद क्षेत्रों के बुनियादी विकास की जिम्मेदारी औद्योगिक केंद्र विकास निगम जैसी उद्योग हितैषी संस्थाओं की रहेगी।

प्रदेश की उद्योग नीति 30 जून तक लागू होनी है। मैसादा तैयार है। कैबिनेट ने अनुशंसा कर दी। इंतजार है तो सिर्फ नीति की विधिवत मंजूरी का। एक्ट लागू होते ही औद्योगिक क्षेत्रों के विकास का रोडमेप तैयार होगा। रोडमैप बीओटी और पब्लिक प्रायवेट पार्टनर्शिप (पीपीपी) पद्धति पर आधारित होगा। इसमें सड़कों का निर्माण एवं चौड़ीकरण, बाग-बगीचों का निर्माण-रखरखाव, स्ट्रीट लाइट, पेयजल, कचरा प्रबंधन और ऊर्जा बचत जैसी योजनाओं पर काम होगा।

इसलिए जरूरत पड़ी एक्ट की
2003-04 में स्वीकृत उद्योग नीति में औद्योगिक उपनगर बनाने की बात हुई थी। उपनगर व्यवस्था में स्थानीय निकायों की तरह औद्योगिक क्षेत्रों में प्रतिनिधि निर्वाचित होते। क्षेत्र की आवश्यकतानुसार काम करते और टैक्स लेते। लेकिन नगरीय प्रशासन ने उद्योग मंत्रालय के इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। ऎसे में बुनियादी सुविधाओं के अकाल के कारण दम तोड़ते औद्योगिक क्षेत्रों को बचाने के लिए इन उपायों पर विचार किया गया। ताकि उद्योगों को सुविधाएं मिल सकें।

विनोद शर्मा

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