Tuesday, September 21, 2010

मध्यप्रदेश में शीघ्र ही एक नई जल विद्युत नीति
जल विद्युत विकास पर निवेशकों का सम्मेलन

Sep 10,2010

मध्यप्रदेश में शीघ्र ही एक नई जल विद्युत नीति बनाई जायेगी। इसकी घोषणा मध्यप्रदेश के अक्षय ऊर्जा मंत्री श्री अजय विश्नोई ने आज यहाँ मध्यप्रदेश में जल विद्युत विकास पर आयोजित एक दिवसीय सम्मेलन में निवेशकों को मध्यप्रदेश में आमंत्रित करते हुए बतायी। यह सम्मेलन संयुक्त रूप से मध्यप्रदेश नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण और केन्द्रीय सिंचाई तथा उर्जा बोर्ड नई दिल्ली द्वारा आयोजित और भारत सरकार अक्षय उर्जा विभाग तथा उर्जा एजेन्सी इरेडा द्वारा आयोजित किया गया।

निवेशकों के सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए मध्यप्रदेश के अक्षय उर्जा मंत्री श्री अजय विश्नोई ने कहा कि उर्जा के महत्व को ध्यान में रखते हुए राज्य शासन ने एक नए विभाग का गठन किया है जो सिर्फ अक्षय उर्जा को देखेगा। नई नीति के लिए निवेशकों से उनकी इस संबंध में राय मांगी जा रही है और उनसे इसके लिए सुझाव भी आमंत्रित किए गए हैं। श्री विश्नोई ने निवेशकों को आमंत्रित करते हुए राज्य सरकार द्वारा पूरे सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने अक्षय उर्जा पर अपनी कटिबद्धता दोहराते हुए कहा कि अभी इसका दोहन किया जाना शेष है। उन्होंने बताया कि राज्य के पास विकसित अधोसंरचना है, अच्छी सड़कें और पर्याप्त मात्रा में उर्जा उपलब्ध है। राज्य में अभी 13 थर्मल पावर प्रोजेक्ट चल रहे हैं।

नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण ने नर्मदा घाटी में छोटी जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण के लिये निजी क्षेत्र को आमंत्रित किया। इस सम्मेलन में भाग लेने वाली निजी कंपनियों को नर्मदा घाटी में उपलब्ध लघु जल विद्युत परियोजना निर्माण की संभावनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए उन्हे मध्यप्रदेश में आने के लिये प्रोत्साहित किया गया। इस आयोजन में अक्षय ऊर्जा विभाग के मंत्री श्री अजय विश्नोई और नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष श्री ओ.पी.रावत भी उपस्थित थें।

श्री रावत ने अपने संबोधन में बताया कि नर्मदा घाटी में अब तक आंकलित 3201 मेगावाट जल विद्युत संभावनाओं में से नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण ने वृहद् जल विद्युत परियोजनाओं से अब तक 2471 मेगावाट जल विद्युत उत्पादन की क्षमता निर्मित कर ली है, शेष संभावनायें लघु जल विद्युत परियोजनाओं के माध्यम से दोहन किया जाना है। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण ने लघु जल विद्युत उत्पादन की संभावना तलाशने के लिये आई.आई.टी. रूड़की से नर्मदा घाटी का अध्ययन कराया है। इस अध्ययन में आई.आई.टी. रूड़की ने 182 ऐसे स्थल चयनित किये हैं जिन पर परियोजनाओं का निर्माण कर 25 मेगावाट क्षमता तक की जल विद्युत परियोजना निर्मित की जा सकती है। राज्य की लघु जल विद्युत विकास प्रोत्साहन नीति 2006 के अनुसार छोटी जल विद्युत परियोजनाओं का निर्माण निजी क्षेत्र के माध्यम से कराया जाना है। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष, अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री ओ.पी.रावत ने बताया कि देश में छोटी जल विद्युत संभावनाओं के दोहन से 15 हजार मेगावाट जल विद्युत उत्पादन की संभावनायें है। इसमें से लगभग 400 मेगावाट जल विद्युत उत्पादन की संभावनायें मध्यप्रदेश में मौजूद हैं। इनका दोहन किया जाना शेष है।

सम्मेलन में केन्द्र सरकार के अक्षय उर्जा विभाग के सचिव श्री दीपक गुप्ता, इरेडा के अध्यक्ष श्री देवाशीश मजूमदार और मध्यप्रदेश उर्जा विकास निगम के प्रबंध संचालक श्री नीरज मंडलोई सहित एन वी डी ए के उच्च अधिकारी उपस्थित थे। सम्मेलन में करीब 80 निवेशकों ने भाग लिया। एन वी डी ए ने दृश्य एवं श्रव्य माध्यम से निवेशकों को विभिन्न रियायतें और सहूलियतों के बारे में विस्तार से बताया और साथ ही अन्य तकनीकी जानकारियाँ दीं।

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