
बिजली मीटर बने शोपीस
विनोद शर्मा
इंदौर । एनर्जी ऑडिट के नाम पर लगाए गए मीटर शोपीस की तरह ट्रांसफार्मरों की शोभा बढ़ाने से ज्यादा काम नहीं आ रहे हैं। एकलेरेटेड पॉवर डेवलपमेंट एंड रिफॉर्म प्रोग्राम (एपीडीआरपी) के तहत लगाए गए सैकड़ों मीटर बंद पड़े हैं।
बंद मीटरों से बेखबर शतप्रतिशत मॉनिटरिंग का दावा करके कंपनी बिजली कंपनी के साथ उपभोक्ताओं की आंखों में भी धूल झोंक रही है। कंपनी की मनमानी से बिजली कंपनी प्रबंधन भी वाकिफ है। हालांकि भाजपा के राष्ट्रीय नेता से ताल्लुक रखने वाली इस कंपनी की मनमानियों पर लगाम कसने की हिम्मत जुटाने वाला कोई नहीं।
एपीडीआरपी के तहत मप्र की तीनों वितरण कंपनियों (पूर्व, पश्चिम और मध्य क्षेत्र) के तकरीबन 25 हजार ट्रांसफार्मरों पर मीटर लगना थे। इनमें 15 हजार मीटर ओमनी एगेट सिस्टम प्रा.लि. को लगाना थे।
बिजली के जानकारों की मानें तो एपीडीआरपी की समयसीमा खत्म हो चुकी है लेकिन कंपनी 65 प्रतिशत से ज्यादा काम नहीं कर पाई। लगाए गए 15 प्रतिशत मीटर बंद हैं। ट्रांसफार्मरों की मॉनिटरिंग करके बिजली की आपूर्ति और खपत का आंकलन हो इसके लिए ये मीटर लगाए गए थे। अब यदि 15 प्रतिशत मीटर बंद है तो कंपनी शतप्रतिशत मॉनिटरिंग का दावा कैसे कर सकती है? इसका संतोषजनक जवाब देने वाला कोई नहीं।
इसलिए मेहरबान
ओमनी एगेट सिस्टम प्रा.लि. मुलत: चैन्नई की कंपनी है। कंपनी को भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पारिवारिक संपत्ति बताया जाता है। मप्रपक्षेविविकं के अधिकारियों की मानें तो कंपनी हमेशा राजनीतिक दबाव बनाकर काम कराती है। रोक चुके हैं 70 लाख का पेमेंट
कंपनी द्वारा लगाए कई मीटर बंद है।
ऎसे मप्रपक्षेविविकं के अधिकारी भी मानते हैं कि कंपनी का काम सिर्फ मीटर लगाना नहीं था। बल्कि मीटर लगाकर उनकी मॉनिटरिंग करना और ऑब्जरवेशन रिपोर्ट देना था। अब तक कंपनी ने मीटर लगाने और मॉनिटरिंग करने दोनों ही क्षेत्र में निराश किया है। इसके लिए कंपनी को नोटिस देकर 70 लाख का पेमेंट भी रोका जा चुका है।
मॉडेम का बहाना
मनमानी को नकारने वाली कंपनी का रिलायंस से विवाद हुआ। बकाया भुगतान न होने पर रिलायंस ने कंपनी को दी सिमें बंद कर दी थी। अब कंपनी कहती है मॉडेम में खराबी से मॉनिटरिंग में दिक्कत आ रही है।
असेम्बल किए मीटर
अनुबंध के अनुसार कंपनी ब्रांडेड मीटर लगाने के बजाय यहां-वहां से सामान जुटाकर असेम्बल किए हुए मीटर लगा रही है। कारण टैक्स चोरी। इसका खुलासा 18 फरवरी 2010 को कंपनी के क्षेत्रीय कार्यालय पर हुई छापामार कार्रवाई में भी हो चुका है।
अभी तो एक्सपेरिमेंटल स्टेज है
अभी मामला एक्सपेरिमेंटल स्टेज पर है। मॉडम के माध्यम से डाटा कलेक्शन करने का काम चल रहा है। कंपनी द्वारा लगाए गए मीटरों का भौतिक सत्यापन हमारा मैदानी अमला कर रहा है। कहीं 30 प्रतिशत तो कहीं 70 प्रतिशत तक हुआ है। काम अभी जारी है।
संजय शुक्ला, सीएमडी मप्रमक्षेविविकं
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