Monday, September 20, 2010

इंदौर से 400 करोड़ का हवाला



मुंबई से लौटकर विनोद शर्मा

इंदौर । इंदौर के एक रियल एस्टेट समूह सैटेलाइट से जुड़े कुछ लोगों के खिलाफ हवाला का बड़ा मामला पकड़ में आया है। विदेश से रकम के अवैध लेनदेन का यह आंकड़ा शुरूआती जांच में ही करीब 400 करोड़ रूपए का बताया जा रहा है। मुंबई से प्रवर्तन निदेशालय ने फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (फेमा) के तहत सैटेलाइट के कर्ताधर्ताओं समेत इंदौर के 13 लोगों को इस मामले में नोटिस थमाए हैं। शहर में कई कॉलोनियां काटने वाले सैटेलाइट समूह के कर्ताधर्ता इंदौर के अजमेरा बंधु व अन्य हैं।

छापे में मिले थे सुराग
नवंबर 2009 में आयकर विभाग ने सैटेलाइट, चिराग रियल एस्टेट, मयूरी हिना हर्बल और फिनिक्स ग्रुप के इंदौर-उज्जैन व मुंबई स्थित ठिकानों पर छापा मारा था। इसी में हवाला के सुराग मिले।सैटेलाइट समूह का मुख्यालय मुंबई में है। इसके बाद मुंबई स्थित प्रवर्तन निदेशालय के अफसरों ने छानबीन की और फेमा के तहत जांच शुरू की। पहले चरण में सैटेलाइट गु्रप और उसकी सहयोगी कंपनियों से ताल्लुक रखने वाले 13 लोगों को नोटिस जारी हुए हैं।

घेरे में कई बड़े नाम
आरोपियों में सैटेलाइट समूह के कर्ताधर्ता रितेश अजमेरा उर्फ चंपू, उसका भाई निलेश अजमेरा, दीपक जैन (दिलीप सिसौदिया), हैप्पी धवन, अरूण डागरिया, चिराग शाह, वीरेंद्र चौधरी, विनोद गुप्ता, मोहन चुघ, अतुल सुराना के अलावा जमीन के बड़े खिलाड़ी शरद डोसी व अन्य हैं। एक बड़ा नाम मुंबई के ब्रजेश शाह का भी है।

इंदौर में चार टाउनशिप
अजमेरा बंधुओं और उनके सहयोगियों ने 23 फर्म बना रखी है। इनमें वे अलग-अलग डायरेक्टर हैं। इन्हीं कंपनियों में से एक है सैटेलाइट ग्रुप। इंदौर में इसकी चार टाउनशिप है। सैटेलाइट जंक्शन (पंचवटी), सैटेलाइट टाउनशिप (बिजलपुर क्षेत्र), सैटेलाइट हिल्स (बायपास) और सैटेलाइट सिटी (खंडवा रोड)। गु्रप का कारोबार 20 शहरों में फैला है।
भोपाल में कई एकड़ जमीन नकद खरीदे जाने के बाद से आयकर विभाग की निगाह इस समूह पर थी।
आयकर विभाग ने छापे में 25 करोड़ की प्रॉपर्टी के दस्तावेज, 20 लाख रूपए नकद और 80 लाख के जेवर बरामद किए थे। 13 खाते सील किए गए थे। इसके बाद ग्रुप ने 25 करोड़ रूपए सरेंडर किए।

मंदी ने ध्वस्त किए सारे मंसूबे
हवाला के इस पूरे कांड की कड़ी दुबई से जुड़ी है। अजमेरा बंधु और उनके सहयोगी दुबई में कॉलोनी काटना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने दिसंबर 2007 से जनवरी 2008 के बीच डेढ़ से दोगुना रूपए लौटाने का प्रस्ताव देकर इंदौर के नामी-गिरामी लोगों से करोड़ों रूपए जुटाए।

रूपया देने वालों में पीडीपीएल के डायरेक्टर विनोद गुप्ता सहित कई लोग शामिल हैं। पैसा इकटा होते ही अजमेरा बंधुओं ने दुबई में जमीन खरीदी और आधा पैसा चुका दिया। आधे के भुगतान के लिए चेक दिए गए। सौदे के बाद जब मंदी के कारण जमीन की कीमत में 80 फीसदी तक की गिरावट आई तो इनकी योजना ध्वस्त हो गई।

चेक बाउंस काभी आरोपी है चंपू अजमेरा
वादे के मुताबिक तय समय में जब अजमेरा बंधुओं ने पैसा नहीं दिया तो लेनदारों ने दबाव बनाना शुरू कर दिया। दबाव से तंग बंधुओं ने आनन-फानन में उन्हें चेक थमा दिए जो बाद में बाउंस हो गए। नाराज लेनदारों ने अजमेरा बंधुओं के खिलाफ धारा 138 के तहत मुकदमा दर्ज करवा दिया। 70 फीसदी रकम निकालने वाले कुछ लेनदार ऎसे भी हैं जो वसूली के लिए अजमेरा पर पिस्तौल तान चुके हैं।

पैसा देकर पछता रहे विनोद गुप्ता ने भी अजमेरा बंधुओं के खिलाफ मुकदमा ठोंक रखा है। "पत्रिका" को गुप्ता ने बताया, जनवरी 2008 को चेक से 2.5 करोड़ रूपए रितेश-निलेश को दिए थे। उन्होंने दो महीने में पैसा लौटाने को कहा, लेकिन आज तक नहीं लौटाया। पैसा सामान्य कर्ज के रूप में दिया था। पैसे का उन्होंने क्या किया? इसकी मुझे जानकारी नहीं है।

कहां से आई इतनी रकम?
हवाला कारोबार की रकम चार सौ करोड़ रूपए बताई जा रही है। ऎसे में सवाल यह है कि एक दशक पहले तक मेहंदी का कारोबार करने वाले अजमेरा बंधुओं की अरबों रूपए की हैसियत कैसे हो गई? ऎसे ही सवालों के जवाब तलाशने के लिए प्रवर्तन निदेशालय कडियां तलाश रहा है। किस-किसने उन्हें पैसा उपलब्ध कराया? और क्यों? उनका निजी हित क्या था?

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