Monday, September 20, 2010

सौ करोड़ में संवरेगा इंदौर-बैतूल मार्ग




इंदौर। हादसों का हाईवे बन चुके इंदौर-बैतूल रोड (एनएच-59 "ए") पर 2013 तक खंडवा रोड की तरह गाडियां दौड़ती नजर आएंगी। पूरी तरह उधड़ चुके इस रोड की दशा सुधारने के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी (एनएचएआई) ने करीब सौ करोड़ की तीन योजनाओं पर काम शुरू कर दिया है। पहले चरण में 35 करोड़ के टेंडर निकालने के बाद एनएचएआई ने इंदौर-डबल चौकी मार्ग के लिए 35 करोड़ और रपटों को पुल में तब्दील करने के लिए करीब 30 करोड़ की योजनाओं का खाका बनाना शुरू कर दिया है।

दस साल पहले नेशनल हाईवे का दर्जा पाने एनएच-59"ए" को लेकर एनएचएआई अब गंभीर है। वह अब तक 288 किमी लंबी इस सड़क के 37 किलोमीटर लंबे हिस्से में टू-लेन निर्माण के लिए 35 करोड़ के टेंडर निकाल चुका है। निर्माण किलोमीटर 42 (चापड़ा) से 77 (कलवार) के बीच 35 किमी और किलोमीटर 124 से 126 के बीच 2 किमी पर होना है।

इससे पहले कलवार से कन्नौद किमी 77 से 123 तक दो-लेन रोड बनाई जा चुकी है, हालांकि उसकी हालत अभी से बिगड़ने लगी है। अब बारी है इंदौर से डबल चौकी (किमी 0 से 30 किमी) रोड की। इसका सर्वे हो चुका है। प्रस्ताव बनाया जा रहा है। लागत 35 करोड़ आंकी जा रही है। अधिकारियों की मानें तो केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री कमलनाथ की मंशानुरूप मंत्रालय से अनुमोदित हुई इस रोड के निर्माण की तमाम कवायदें दिल्ली से चल रही हैं। सर्वे से लेकर वर्कऑर्डर तक सभी वहीं के अधिकारियों की निगरानी में होगा।

टोल-फ्री होगी सड़क
सड़क की लागत 90-95 लाख रूपए प्रति किमी आएगी। उधर, केंद्रीय सड़क-परिवहन मंत्रालय की गाइडलाइन के अनुसार उन सड़कों पर टोल नहीं लगेगा, जिनकी लागत एक करोड़ रूपए प्रति किलोमीटर से कम हैं। हालांकि मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि इस रोड के निर्माण की गुणवत्ता टोल वाली सड़कों से उन्नीसी नहीं होगी।

इसलिए जरूरी है निर्माण
- 1200 करोड़ की लागत से इंदौर-अहमदाबाद मार्ग के साथ यह रोड बनती है तो यह तीन राज्यों (गुजरात, मप्र और महाराष्ट्र) को जोड़ेगी।
- बैतूल, होशंगाबाद और इटारसी से आने वाले वाहनों को भोपाल होकर इंदौर नहीं आना पड़ेगा। उनका 150 किमी से ज्यादा चक्कर बचेगा।
- इंदौर से आष्टा-कन्नौद होते हुए नेमावर जाकर 40 किमी लंबा चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
- रोड बनने के बाद इंदौर आसपास के हर शहर से दोलेन और चारलेन से जुड़ेगा। सिंगल ट्रैक खत्म होगी।

रपटें होंगी खत्म, बनेंगे पुल
खातेगांव में हुए बागदी बस हादसे और एक दशक में सड़क पर हुए ऎसे अन्य हादसों से सबक लेते हुए एनएचएआई ने तमाम रपटों को पुल में तब्दील करने का मन भी बनाया है। दुधिया नाला, शिप्रा नदी, कालापाठा नाला, सतखालिया, उमरिया खाल, कालीसिंध नदी, करनावत नाला और बागदी नदी सहित रोड पर दर्जनभर से ज्यादा नदी-नालों पर मौजूदा रपटें तोड़कर ऊंचे-व्यवस्थित पुल बनाए जाना है। बागदी बस हादसे के बाद "पत्रिका" ने नेमावर रोड की रपटों और उनकी दुर्दशाओं के साथ वहां हुए हादसों की तस्वीर बयां की थी। पुल बनाने की तैयारियां उसके बाद ही शुरू हुई।

विनोद शर्मा

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