Thursday, September 23, 2010

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Tuesday, September 21, 2010

वर्ष 2013 से 24 घंटे बिजली

40 हजार मेगावॉट उत्पादन के लिये 28 निजी कंपनियों से एमओयू

August 28, 2010



मध्यप्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों में वर्ष 2013 से 24 घंटे बिजली देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। राज्य शासन ने इस लक्ष्य की पूर्ति के लिये करीब 40 हजार मेगावॉट ताप विद्युत उत्पादन के लिये लगभग 28 निजी कम्पनियों से करारनामे किये हैं। प्रदेश में बिजली उत्पादन प्रयासों को ठोस रूप देने तथा निजी क्षेत्र के निवेशकों को आकर्षित करने के लिये मध्यप्रदेश इन्वेस्टमेंट इन जनरेशन प्रोजेक्ट पालिसी 2010 भी बनाई गई है।

वर्ष 2013 तक 24 घंटे बिजली देने का लक्ष्य

निजी कंपनियों से 40 हजार मेगावॉट की ताप विद्युत परियोजनाओं के लिये एमओयू

निजी कंपनियों द्वारा कार्य प्रारंभ

1200 मेगावॉट की श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना का कार्य शुरू

परियोजना पर इस वर्ष 292 करोड़ रुपये राशि का प्रावधान

निजी कंपनियों के माध्यम से प्रदेश की उत्पादन क्षमता बढ़ाये जाने के लिये किये गये प्रयासों में निजी क्षेत्र की कंपनियों मैसर्स बीना पॉवर सप्लाय कंपनी, बीना, मैसर्स एस्सार पॉवर, बैढन, जिला सिंगरौली, मैसर्स चितरंगी जिला सिंगरौली, मैसर्स जयप्रकाश पॉवर वेंचर्स, निगरी जिला सिंगरौली एवं मैसर्स बीएलए पॉवर जिला नरसिंहपुर द्वारा कार्य भी प्रारंभ कर दिया गया है।

मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कम्पनी द्वारा 1200 मेगावॉट की श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना का कार्य प्रारंभ हो गया है। इस परियोजना पर वर्तमान वित्तीय वर्ष में 292 करोड़ रुपये राशि के खर्चों का प्रावधान किया गया है। इसी प्रकार सतपुड़ा ताप विद्युतगृह सारणी में 500 मेगावॉट की विस्तार इकाईयों का कार्य भी शुरू हो गया है। एन.टी.पी.सी. की सीपत इकाई से मध्यप्रदेश को 242 मेगावॉट विद्युत प्राप्त होगी। इसी प्रकार एन.टी.पी.सी. की मौदा इकाई से 150 मेगावॉट का शेयर भी मध्यप्रदेश को प्राप्त होगा।

पश्चिम बंगाल स्थित दामोदर वैली कार्पोरेशन से 300 मेगावॉट विद्युत प्राप्ति के लिये अनुबंध किया गया है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के प्रयासों से महेश्वर जल विद्युत परियोजना का कार्य पुन: शुरू हो गया है। इससे आगामी दिसम्बर तक 400 मेगावॉट विद्युत प्राप्त होना संभावित है। विद्युत अधिनियम 2003 के अंतर्गत विद्युत प्राप्ति के लिये दीर्घावधि के अनुबंध किये जाने के प्रयास किये जा रहे हैं। इस संबंध में 1200 मेगावॉट का रिलायंस तथा 150 मेगावॉट का एस्सार से अनुबंध किये जाने के प्रयास भी जारी हैं। इसके साथ ही 1600 मेगावॉट विद्युत क्षमता की ताप विद्युत परियोजना की स्थापना खण्डवा जिले में करने के लिये मैसर्स बीएचईएल के साथ मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी का संयुक्त उपक्रम अनुबंध हस्ताक्षरित किया गया है। नेशनल थर्मल पॉवर कार्पोरेशन द्वारा 2640 मेगावॉट गाडरवारा जिला नरसिंहपुर में स्थापित करने के लिये गत माह नवम्बर में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए थे। इस ताप परियोजना से 80 प्रतिशत विद्युत मध्यप्रदेश राज्य को आवंटित करने के लिये भारत सरकार से आग्रह किया गया है।

नेशनल थर्मल पॉवर कार्पोरेशन द्वारा खरगौन जिले में 1320 मेगावॉट की ताप विद्युत परियोजना स्थापित की जा रही है। परियोजना के लिये 1750 एकड़ भूमि एवं 55 क्यूसेक जल के संबंध में राज्य शासन द्वारा सैद्धांतिक सहमति भी प्रदान की गई है। साथ ही नेशनल थर्मल पॉवर कार्पोरेशन द्वारा छतरपुर जिले में चार हजार मेगावॉट ताप विद्युत परियोजना हाथ में ली गई है। परियोजना के लिये 150 क्यूसेक जल एवं 2249.88 एकड़ भूमि की उपलब्धता के संबंध में राज्य शासन द्वारा सैद्धांतिक सहमति गत माह मार्च में दी गई है। इसके अलावा राज्य शासन द्वारा 1600 मेगावॉट क्षमता की चंदिया ताप विद्युत परियोजना, जिला कटनी में तथा बाणसागर परियोजना जिला शहडोल में 1600 मेगावॉट स्थापित करने के संबंध में प्रशासकीय अनुमोदन प्रदान किया गया है। एम.पी. पॉवर ट्रेडिंग कंपनी द्वारा 1320 मेगावॉट शहपुरा ताप विद्युत परियोजना का कोल लिंकेज/ब्लॉक का आवंटन प्राप्त न होने से एम.पी. पॉवर ट्रेडिंग कंपनी के संचालक मण्डल की बैठक में इस परियोजना को एन.टी.पी.सी./एन.एच.डी.सी. को सौंपने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में आगामी कार्यवाही भी की जा रही है।
मध्यप्रदेश में शीघ्र ही एक नई जल विद्युत नीति
जल विद्युत विकास पर निवेशकों का सम्मेलन

Sep 10,2010

मध्यप्रदेश में शीघ्र ही एक नई जल विद्युत नीति बनाई जायेगी। इसकी घोषणा मध्यप्रदेश के अक्षय ऊर्जा मंत्री श्री अजय विश्नोई ने आज यहाँ मध्यप्रदेश में जल विद्युत विकास पर आयोजित एक दिवसीय सम्मेलन में निवेशकों को मध्यप्रदेश में आमंत्रित करते हुए बतायी। यह सम्मेलन संयुक्त रूप से मध्यप्रदेश नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण और केन्द्रीय सिंचाई तथा उर्जा बोर्ड नई दिल्ली द्वारा आयोजित और भारत सरकार अक्षय उर्जा विभाग तथा उर्जा एजेन्सी इरेडा द्वारा आयोजित किया गया।

निवेशकों के सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए मध्यप्रदेश के अक्षय उर्जा मंत्री श्री अजय विश्नोई ने कहा कि उर्जा के महत्व को ध्यान में रखते हुए राज्य शासन ने एक नए विभाग का गठन किया है जो सिर्फ अक्षय उर्जा को देखेगा। नई नीति के लिए निवेशकों से उनकी इस संबंध में राय मांगी जा रही है और उनसे इसके लिए सुझाव भी आमंत्रित किए गए हैं। श्री विश्नोई ने निवेशकों को आमंत्रित करते हुए राज्य सरकार द्वारा पूरे सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने अक्षय उर्जा पर अपनी कटिबद्धता दोहराते हुए कहा कि अभी इसका दोहन किया जाना शेष है। उन्होंने बताया कि राज्य के पास विकसित अधोसंरचना है, अच्छी सड़कें और पर्याप्त मात्रा में उर्जा उपलब्ध है। राज्य में अभी 13 थर्मल पावर प्रोजेक्ट चल रहे हैं।

नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण ने नर्मदा घाटी में छोटी जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण के लिये निजी क्षेत्र को आमंत्रित किया। इस सम्मेलन में भाग लेने वाली निजी कंपनियों को नर्मदा घाटी में उपलब्ध लघु जल विद्युत परियोजना निर्माण की संभावनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए उन्हे मध्यप्रदेश में आने के लिये प्रोत्साहित किया गया। इस आयोजन में अक्षय ऊर्जा विभाग के मंत्री श्री अजय विश्नोई और नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष श्री ओ.पी.रावत भी उपस्थित थें।

श्री रावत ने अपने संबोधन में बताया कि नर्मदा घाटी में अब तक आंकलित 3201 मेगावाट जल विद्युत संभावनाओं में से नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण ने वृहद् जल विद्युत परियोजनाओं से अब तक 2471 मेगावाट जल विद्युत उत्पादन की क्षमता निर्मित कर ली है, शेष संभावनायें लघु जल विद्युत परियोजनाओं के माध्यम से दोहन किया जाना है। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण ने लघु जल विद्युत उत्पादन की संभावना तलाशने के लिये आई.आई.टी. रूड़की से नर्मदा घाटी का अध्ययन कराया है। इस अध्ययन में आई.आई.टी. रूड़की ने 182 ऐसे स्थल चयनित किये हैं जिन पर परियोजनाओं का निर्माण कर 25 मेगावाट क्षमता तक की जल विद्युत परियोजना निर्मित की जा सकती है। राज्य की लघु जल विद्युत विकास प्रोत्साहन नीति 2006 के अनुसार छोटी जल विद्युत परियोजनाओं का निर्माण निजी क्षेत्र के माध्यम से कराया जाना है। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष, अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री ओ.पी.रावत ने बताया कि देश में छोटी जल विद्युत संभावनाओं के दोहन से 15 हजार मेगावाट जल विद्युत उत्पादन की संभावनायें है। इसमें से लगभग 400 मेगावाट जल विद्युत उत्पादन की संभावनायें मध्यप्रदेश में मौजूद हैं। इनका दोहन किया जाना शेष है।

सम्मेलन में केन्द्र सरकार के अक्षय उर्जा विभाग के सचिव श्री दीपक गुप्ता, इरेडा के अध्यक्ष श्री देवाशीश मजूमदार और मध्यप्रदेश उर्जा विकास निगम के प्रबंध संचालक श्री नीरज मंडलोई सहित एन वी डी ए के उच्च अधिकारी उपस्थित थे। सम्मेलन में करीब 80 निवेशकों ने भाग लिया। एन वी डी ए ने दृश्य एवं श्रव्य माध्यम से निवेशकों को विभिन्न रियायतें और सहूलियतों के बारे में विस्तार से बताया और साथ ही अन्य तकनीकी जानकारियाँ दीं।
देवास से ग्वालियर सौ किमी की रफ्तार

शुक्रवार,27
अगस्त, 2010 को 01:20 तक के समाचार
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देवास से ग्वालियर तक एबी रोड के करीब 400 किमी के हिस्से को फोरलेन करने की तैयरियां अंतिम चरण में हैं। तकरीबन 2200 करोड़ के इस प्रोजेक्ट पर दिल्ली में मंत्रालय की बैठक भी हो चुकी है। फोरलेन की सुगबुगाहट के साथ ही एनएच के दोनों ओर की जमीन के अधिग्रहण को लेकर भी अटकलें लगाई जाने लगी हैं। जमीनों के मालिक फोरलेन निर्माण के दौरान कितनी भूमि अधिहग्रहण की जाएगी, इसका वे सही आंकलन नहीं कर पा रहे हैं। इससे ना तो लोग अपनी जमीन बेच पा रहे हैं वहीं खरीददार भी असमंजस की स्थिति मेंं है।

एक अधिकारी के मुताबिक फिलहाल हाईवे ३० मीटर चौड़ा है। इसे फोरलेन में तब्दील करने के लिए ३० मीटर जगह की और जरूरत होगी। यानी कुल २१० फीट चौड़ा फोरलेन बनाया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के बाद जमीन की कीमत बढ़ेगी, लेकिन अधिग्रहित भूमि के बदले में कितना मुआवजा मिलेगा इसे लेकर किसान अभी से सजग हो चुके हैं।

फोरलेन के दौरान ग्वालियर शिवपुरी, गुना, ब्यावरा, पचोर, सारंगपुर, शाजापुर, मक्सी व देवास शहर से एक एक किमी दूर से फोरलेन के बीच विद्युत व्यवस्था की जाएगी। इससे गुजरने वाले वाहन चालकों को रात के सफर के दौरान सामने आ रहे वाहनों की लाइटें सीधे आंखों पर नहीं पड़ेगी। विशेष प्रकार की लगाई जाने वाली इन लाइटों की वजह से दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी।

फिलहाल एबी रोड पर ५० से ६० किमी प्रति घंटा की रफ्तार से वाहन चलते हैं, लेकिन फोर लेन के बाद यह १०० किमी प्रति घंटा की गति से दौड़ेंगे। इसके बावजूद हादसों की तादाद वर्तमान के मुकाबले नगण्य रह जाएगी। जानकारों के मुताबिक आने-जाने वाले वाहनों के लिए अलग-अलग लेन होने की वजह से आमने-सामने की टक्कर होने की आशंका खत्म हो जाएगी। सबसे ज्यादा मौतें इसी तरह के हादसों में होती हैं। इसके अलावा दूरियां भी जल्द तय होंगी। ब्यावरा से इंदौर की दूरी करीब २०० किमी है, जिसे तय करने के लिए वाहन चालकों को साढ़े चार घंटे का समय लग जाता है। जो बाद में महज सवा दो घंटे का सफर हो जाएगा। इस हाईवे पर बढ़ते ट्रैफिक से कई स्थानों पर जाम लग जाता है। निर्माण से हजारों वाहन चालकों की मुश्किलें कम हो सकेंगी।