Monday, November 10, 2025

3.25 करोड़ ट्रांसफर, सुविधाओं के नाम पर िगना रहे हैं संकट

माहेश्वरी ट्रस्ट ने कॉलेज को बनाया कमाई का जरिया 

जिम्नेशियम-कैफेटेरिया सिर्फ ब्रोशर में ही, स्टूडेंट्स ने डिमांड की, जवाब मिला जहां है वहां एडमिशन ले लो 
इंदौर. विनोद शर्मा । 
77 से 4700 स्टूडेंट्स तक का सफर तय करने वाला आरपीएल माहेश्वरी कॉलेज इन दिनों माहेश्वरी ट्रस्ट की मनमानियों की मार झेल रहा है। कॉलेज को ट्रस्ट अपनी कमाई का जरिया बना चुका है। इसीलिए तो 2025 के 10 महीनों में कॉलेज के अकाउंट से ट्रस्ट ने 3.25 करोड़ रुपए अपने अकाउंट में ट्रांसफर किए हैं। अब तंगी का बहाना बनाकर कॉलेज में जिम्नेशियम और कैफेटेरिया बनाने को तैयार नहीं है। उलटा, जो स्टूडेंट्स आवाज उठाते हैं, उन्हें कहा जाता है जिन्हें जिम्नेशियम चाहिए वे दूसरे कॉलेज में एडमिशन ले लें। 
 कॉलेज में अकेडमिक स्टाफ और मैनेजमेंट के बीच तनातनी जारी है। जिसका खामियाजा स्टूडेंट्स और कॉलेज चुका रहे हैं। बताया जा रहा है कि एक दर्जन से अधिक स्टूडेंट्स टीसी निकाल चुके हैं जिन्होंने जुलाई में ही एडमिशन लिया था। इसमें कई फस्र्ट ईअर में हैं। जिस कॉलेज ने अपने पैसों से कॉलेज परिसर में स्कूल की बिल्डिंग बनवा दी, उसे अचानक किसकी नजर लग गई? इसका जवाब है पुरुषोत्तमदास पसारी। ट्रस्ट मैदान के सबसे बड़े खिलाड़ी कहलाने वाले पसारी दो साल पहले ही माहेश्वरी के ट्रस्ट के अध्यक्ष बने हैं। 
 उन्होंने अध्यक्ष बनने के बाद ही कॉलेज के प्रेसिडेंट रामअवतार जाजू के माध्यम से कॉलेज के खाते से 3.25 करोड़ रुपया ट्रस्ट के अकाउंट में ट्रांसफर करा लिया। इसके लिए न कोई प्रस्ताव पास हुआ। न ये बताया गया कि इस रकम का ट्रस्ट क्या करेगा? ट्रस्ट ने इसके पहले भी कॉलेज के अकाउंट से बतौर लोन पैसा लिया था। जिसका जिक्र अकाउंट सेक्शन में है। इस बार ऐसे किसी कारण का उल्लेख नहीं है। 
नियमों के खिलाफ है फंड ट्रांसफर
कॉलेज आरपीएल माहेश्वरी विद्यालय ट्रस्ट द्वारा संचालित है। ये ट्रस्ट फर्म एंड सोसाइटी में पंजीबद्ध है। इसके बायलॉज के अनुसार कॉलेज के फंड को ट्रांसफर नहीं किया जा सकता।  
विश्वविद्यालय परिनियम कॉलेज कोड 28 के तहत कॉलेज का पैसा उसकी फाउंडेशन सोसाइटी भी नहीं ले सकती। पैसे का उपयोग कॉलेज में शैक्षणिक सुविधाओं के विस्तार और स्टाफ के नियमित वेतन पर खर्च होना चाहिए।  
ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ टेक्निकल एज्यूकेशन (एआईसीटीई) कॉलेजों को मान्यता देती है। उसके द्वारा एडमिशन एंड फीस रेग्यूलेटरी कमेटी(एएफआरसी) बनती है जिसके तहत कॉलेज का पैसा ट्रांसफर नहीं हो सकता।  
सभी संस्थाओं के साथ धोखा 
इन सभी जगह कॉलेज के अध्यक्ष या ट्रस्ट को शपथ-पत्र के साथ लिखकर देना पड़ता है कि वह भविष्य में इन संस्थाओं के नियमों का पालन करेगा? वहीं माहेश्वरी काॅलेज के पैसे का मनमाना उपयोग करके माहेश्वरी ट्रस्ट सभी के मापदंडों का उल्लंघन कर रहा है। 
कॉलेज की साख गिरने लगी है...
काॅलेज में स्टूडेंट्स की संख्या 2021-22 में बढ़बर 4700 तक पहुंच गई है जो कि फिर से 3100 तक आ गई है। इसका असर कॉलेज की कमाई पर भी पढ़ेगा। जो 5.25 करोड़ तक पहुंच गई थी। 
विगत कई दिनों से कॉलेज की नकारात्म्क खबरों से स्टूडेंट्स के साथ ही फेकल्टी भी टेंशन में है। मैनेजमेंट लगातार नोटिस पर नोटिस दे रहा है, ताकि फाइल मजबूत हो जाए, उसी के आधार पर फेकल्टी की छूट्‌टी की जा सके।  
(मामले में कॉलेज के अध्यक्ष रामअवतार जाजू से हिंदुस्तान मेल ने उनका पक्ष जानने की कोशिश की लेकिन उन्होंने आधी बात सुनकर फोन काट दिया।)

No comments:

Post a Comment