इंदौर. चीफ रिपोर्टर ।
मंदी की आड़ में बैंकों से लिया 2650 करोड़ का कर्ज हजम करने वाली जूम डेवलपर्स प्रा.लि. ने अदायगी के नाम पर स्वयं दिवालिया बता दिया लेकिन दूसरी कंपनियों के नाम पर जमीन खरीदती रही। हाल में अटैच हुई बोलस्टर इन्फ्रा डेवलपर्स प्रा.लि. की मुंबई स्थित जमीन इसका बड़ा उदाहरण है। इस जमीन की पूरी कीमत जूम ने चुकाई लेकिन नाम कर दी बोलस्टर के।
इसका खुलासा ईडी की जांच के बाद हुआ। खुलासे के बाद जमीन अटैच की गई। छानबीन के दौरान पता चला कि बोलस्टर इन्फ्रा डेवलपर्स प्रा.लि. फरवरी 2006 में पंजीबद्ध हुई थी। इस कंपनी के कर्ताधर्ता अनिल कुमार जयप्रसाद और शरद काबरा है जो कि ईडी की पूछताछ के बादसे ही सलाखों के पीछे हैं। काबरा की कंपनियों के नाम और काम की तलाश के बाद ईडी उसकी अंधेरी स्थित 61 हजार वर्गफीट जमीन तक पहुंचा। जमीन के पंजीयन पत्र मांगे गये संबंधित विभाग से। पता चला 22 से 25 जुलाई 2008 को हुई तीन अलग-अलग सेल डीड में कहीं भी इस बात का जिक्र नहीं है कि जमीन की कीमत के बदले बोलस्टर ने कितना पैसा कब-कब दिया। न ही कंपनी के संचालक जो कि जूम डेवलपर्स के कारिंदे ही हैं उन्होंने इस संबंध में कोई जानकारी दी।
बाद में ईडी ने जब बारीकी से जांच की तो पता चला कि बोलस्टर ने जो जमीन खरीदी थी उसका पैसा तकरीबन 4.42 करोड़ जूम ने दिया है। इसके बाद ईडी ने जमीन के अटैचमेंट की तैयारी शुरू कर दी। भूगतान यूनियन बैंक आॅफ इंडिया और आंध्रा बैंक के खातों से हुआ।
बोलस्टर के संचालक भी मनी लॉन्ड्रिंग के दोषी
चूंकि काली कमाई का पैसा जमीनों में लगाया वह भी दूसरे किसी के नाम से इसीलिए प्रीवेंशन आॅफ मनी लॉन्ड्रिग एक्ट (पीएमएलए) का केस बोलस्टर के संचालकों के खिलाफ भी बनेगा।
यह है जमीन
प्रॉपर्टी (खसरा) क्षेत्रफल कीमत सेल डीड
9ए, 630,630/1,126 4126 3.21 करोड़ 8281/2008
112, 112/1, 2 167.5 13 लाख 8666/2008
100,100/1, 31 1388 1.08 करोड़ 8667/2008
(ग्राम चकाला,बामनवाड़ा अंधेरी। क्षेत्रफल हेक्टेयर में। )
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