नगर निगम कर्मचारी गृह निर्माण संस्था में संचालकों के खेल की शिकायत लोकायुक्त को
अध्यक्ष ने बयाने के एक लाख बैंक में जमा नहीं किए, सहकारिता विभाग ने भी पाया दोषी
इंदौर.
स्कीम 59 में 173 नंबर आवंटित 13774.79 वर्गफीट का प्लॉट नगर निगम कर्मचारी गृह निर्माण सहकारी संस्था ने मन ज्योति गृह निर्माण सहकारी संस्था को बाले-बाले ओनेपोने दाम पर बेच डाला। सौदा 2014 में 1.5 करोड़ में हुआ जबकि उस वक्त प्लॉट की बाजार कीमत तकरीबन 9 करोड़ थी। इसका खुलासा नगर निगम कर्मचारी गृह निर्माण सहकारी संस्था के ही पूर्व उपाध्यक्ष राजेंद्र यादव और प्रबंधक केदार यादव द्वारा लोकायुक्त को की गई शिकायत के बाद हुआ। दोनों का आरोप है कि सहकारिता विभाग के अधिकारी ले-देकर गबनबाजों को बचा रहे हैं।
नगरनिगम कर्मचारी गृह निर्माण संस्था के पूर्व अध्यक्ष रामलाल यादव और वर्तमान अध्यक्ष महेश राही पर आरोप है कि है कि उन्होंने अचानक दूसरी संस्था को प्लॉट बेचने का ठहराव-प्रस्ताव पास करवा लिया। सदस्यों को इसकी भी भनक तक नहीं लगने दी। सहकारिता विभाग की एनओसी के आधार पर आईडीए ने भी प्लॉट अन्य संस्था को बेचने और नामांतरण करने की सशर्त मंजूरी दे दी। इस सबके बीच संस्था के कर्ताधर्ता सदस्यों को प्लॉट पर कब्जा देने का आश्वासन देते रहे।
दोनों पदाधिकारियों के साथ संस्था के सदस्यों का कहना है कि नियमानुसार तीन अखबारों में जाहिर सूचना प्रकाशित करना होती है लेकिन एक ही अखबार में प्रकाशित कराई गई और मात्र एक ही निविदा मनज्योति की प्राप्त की गई और प्लॉट का सौदा कर दिया गया। इससे पूर्व 11 मई 2010 को प्लॉट पेटे एक लाख रुपए का बयाना लिया गया लेकिन ये राशि न तो संस्था के स्टेट बैंक निगम परिसर शाखा के अकाउंट नंबर 53003158675 में जमा कराई गई और न संस्था की केश बुक में इसकी इंट्री है।
यूं किया पैसा हजम
सौदा 12 जून 2014 को उक्त प्लॉट मन ज्योति गृह निर्माण सहकारी संस्था को 1 करोड़ 40 लाख 76 हजार 920 रुपए में हुआ। उस वक्त क्षेत्र में गाइडलाइन वेल्यू 26000 रुपए प्रति वर्गफीट थी। इस हिसाब से भी प्लॉट तकरीबन 3 करोड़ 32 लाख 46 हजार 720 रुपए की कीमत रखता था। बाजार कीमत 5 हजार रुपए वर्गफीट है जिससे कुल बाजार कीमत तकरीबन 7 करोड़ होती है।
ठहराव-प्रस्तावमें की मनमानी
संस्थाके पूर्व अध्यक्ष ने प्लॉट बेचने के लिए मप्र सहकारी समिति प्रावधान 1960 की धारा 38 को हथियार बनाया। इस नियम के अनुसार यदि संस्था के पास भूखंड पर भवन निर्माण करने के लिए जरूरी धन नहीं है तो वह अन्य संस्था को भूखंड बेच सकती है। इसी आधार पर उन्होंने 15 जून 2008 को ठहराव-प्रस्ताव पास करवा लिया। इसमें अध्यक्ष के अलावा अन्य किसी सदस्य के हस्ताक्षर नहीं है। हवाला सर्वसम्मति का दिया गया।
खेल यह भी...
जो पैसा आया उसमें से उन 9 लोगों को 5-5 लाख रुपए दे दिए गए जिन्होंने प्लॉट या फ्लैट-मकान के लिए राशि जमा की थी। ये राशि 5 हजार से 40 हजार रुपए तक थी लेकिन 5 लाख रुपए देकर उनका मुंह बंद कर दिया गया।
प्लॉट पेटे बयाने के एक लाख रुपए मिले जो संस्था के खाते में जमा नहीं किए गए। बाकी पैसा अध्यक्ष ने अपने पास रख लिया जो कि संस्था के खाते में जमा नहीं हुआ।
साथ दे रहे हैं सहकारिता अधिकारी
सहकारिता विभाग के अंकेक्षण अधिकारी डीएस चौहान ने जब मामले की जांच की तो वर्तमान अध्यक्ष महेश राही समेत पूर्व अध्यक्ष रामलाल यादव और अन्य पदाधिकारियों को दोषी पाया। कार्रवाई की सिफारिश की। इसके बाद मामला मामला संतोष जोशी और उनके बाद मोनिका सिंह को सौंपा गया लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी।
ये है वर्तमान संचालक मंडल-
अध्यक्ष महेश राही, उपाध्यक्ष श्रीमती रजनी केसरिया, संचालक रामलाल यादव (पूर्व अध्यक्ष), आदर्श यादव, विजय कुशवाह, अशोक व्यास, स्वर्णसिंह धारीवाल, पुरुषोत्तम यादव, उमेश मंगेश आरस, द्रोपदीबाई रामबाबू। कैलाशचंद्र गेहलोत का निधन हो चुका है।
5 लाख देकर इनका मुंह कर दिया बंद
पूर्व अध्यक्ष रामलाल यादव (5 हजार रुपए जमा किए थे और 5 लाख लिये।)
महेश गुप्ता
कृपाशंकर शुक्ला (मैनेजर)
सुरेंद्र कुशवाह
नंदलाल जैन
अरुण धाईगुड़े
सुनील व्यास
(दो अन्य हैं। इनके 5 से 40 हजार तक जमा थे।)
दो ने आपत्ति लगी और छह अब तक यादव-राही की राह पर नही ंचले।
अध्यक्ष ने बयाने के एक लाख बैंक में जमा नहीं किए, सहकारिता विभाग ने भी पाया दोषी
इंदौर.
स्कीम 59 में 173 नंबर आवंटित 13774.79 वर्गफीट का प्लॉट नगर निगम कर्मचारी गृह निर्माण सहकारी संस्था ने मन ज्योति गृह निर्माण सहकारी संस्था को बाले-बाले ओनेपोने दाम पर बेच डाला। सौदा 2014 में 1.5 करोड़ में हुआ जबकि उस वक्त प्लॉट की बाजार कीमत तकरीबन 9 करोड़ थी। इसका खुलासा नगर निगम कर्मचारी गृह निर्माण सहकारी संस्था के ही पूर्व उपाध्यक्ष राजेंद्र यादव और प्रबंधक केदार यादव द्वारा लोकायुक्त को की गई शिकायत के बाद हुआ। दोनों का आरोप है कि सहकारिता विभाग के अधिकारी ले-देकर गबनबाजों को बचा रहे हैं।
नगरनिगम कर्मचारी गृह निर्माण संस्था के पूर्व अध्यक्ष रामलाल यादव और वर्तमान अध्यक्ष महेश राही पर आरोप है कि है कि उन्होंने अचानक दूसरी संस्था को प्लॉट बेचने का ठहराव-प्रस्ताव पास करवा लिया। सदस्यों को इसकी भी भनक तक नहीं लगने दी। सहकारिता विभाग की एनओसी के आधार पर आईडीए ने भी प्लॉट अन्य संस्था को बेचने और नामांतरण करने की सशर्त मंजूरी दे दी। इस सबके बीच संस्था के कर्ताधर्ता सदस्यों को प्लॉट पर कब्जा देने का आश्वासन देते रहे।
दोनों पदाधिकारियों के साथ संस्था के सदस्यों का कहना है कि नियमानुसार तीन अखबारों में जाहिर सूचना प्रकाशित करना होती है लेकिन एक ही अखबार में प्रकाशित कराई गई और मात्र एक ही निविदा मनज्योति की प्राप्त की गई और प्लॉट का सौदा कर दिया गया। इससे पूर्व 11 मई 2010 को प्लॉट पेटे एक लाख रुपए का बयाना लिया गया लेकिन ये राशि न तो संस्था के स्टेट बैंक निगम परिसर शाखा के अकाउंट नंबर 53003158675 में जमा कराई गई और न संस्था की केश बुक में इसकी इंट्री है।
यूं किया पैसा हजम
सौदा 12 जून 2014 को उक्त प्लॉट मन ज्योति गृह निर्माण सहकारी संस्था को 1 करोड़ 40 लाख 76 हजार 920 रुपए में हुआ। उस वक्त क्षेत्र में गाइडलाइन वेल्यू 26000 रुपए प्रति वर्गफीट थी। इस हिसाब से भी प्लॉट तकरीबन 3 करोड़ 32 लाख 46 हजार 720 रुपए की कीमत रखता था। बाजार कीमत 5 हजार रुपए वर्गफीट है जिससे कुल बाजार कीमत तकरीबन 7 करोड़ होती है।
ठहराव-प्रस्तावमें की मनमानी
संस्थाके पूर्व अध्यक्ष ने प्लॉट बेचने के लिए मप्र सहकारी समिति प्रावधान 1960 की धारा 38 को हथियार बनाया। इस नियम के अनुसार यदि संस्था के पास भूखंड पर भवन निर्माण करने के लिए जरूरी धन नहीं है तो वह अन्य संस्था को भूखंड बेच सकती है। इसी आधार पर उन्होंने 15 जून 2008 को ठहराव-प्रस्ताव पास करवा लिया। इसमें अध्यक्ष के अलावा अन्य किसी सदस्य के हस्ताक्षर नहीं है। हवाला सर्वसम्मति का दिया गया।
खेल यह भी...
जो पैसा आया उसमें से उन 9 लोगों को 5-5 लाख रुपए दे दिए गए जिन्होंने प्लॉट या फ्लैट-मकान के लिए राशि जमा की थी। ये राशि 5 हजार से 40 हजार रुपए तक थी लेकिन 5 लाख रुपए देकर उनका मुंह बंद कर दिया गया।
प्लॉट पेटे बयाने के एक लाख रुपए मिले जो संस्था के खाते में जमा नहीं किए गए। बाकी पैसा अध्यक्ष ने अपने पास रख लिया जो कि संस्था के खाते में जमा नहीं हुआ।
साथ दे रहे हैं सहकारिता अधिकारी
सहकारिता विभाग के अंकेक्षण अधिकारी डीएस चौहान ने जब मामले की जांच की तो वर्तमान अध्यक्ष महेश राही समेत पूर्व अध्यक्ष रामलाल यादव और अन्य पदाधिकारियों को दोषी पाया। कार्रवाई की सिफारिश की। इसके बाद मामला मामला संतोष जोशी और उनके बाद मोनिका सिंह को सौंपा गया लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी।
ये है वर्तमान संचालक मंडल-
अध्यक्ष महेश राही, उपाध्यक्ष श्रीमती रजनी केसरिया, संचालक रामलाल यादव (पूर्व अध्यक्ष), आदर्श यादव, विजय कुशवाह, अशोक व्यास, स्वर्णसिंह धारीवाल, पुरुषोत्तम यादव, उमेश मंगेश आरस, द्रोपदीबाई रामबाबू। कैलाशचंद्र गेहलोत का निधन हो चुका है।
5 लाख देकर इनका मुंह कर दिया बंद
पूर्व अध्यक्ष रामलाल यादव (5 हजार रुपए जमा किए थे और 5 लाख लिये।)
महेश गुप्ता
कृपाशंकर शुक्ला (मैनेजर)
सुरेंद्र कुशवाह
नंदलाल जैन
अरुण धाईगुड़े
सुनील व्यास
(दो अन्य हैं। इनके 5 से 40 हजार तक जमा थे।)
दो ने आपत्ति लगी और छह अब तक यादव-राही की राह पर नही ंचले।
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