Tuesday, August 4, 2015

लीज निरस्ती से 18 साल पहले ही बेच दी जमीन

विक्रय कर अल्प आय गृह निर्माण सहकारी संस्था में मुश्ताक मंडली का कारनामा
- जून 2015 में अपर कलेक्टर ने कर दी लीज निरस्त, सौदा हुआ था 1997 में
इंदौर. विनोद शर्मा ।

शर्तों के उल्लंघन पर जिस मप्र विक्रय कर अल्प आय कर्मचारी गृह निर्माण सहकारी संस्था की जमीन की लीज प्रशासन ने जून में निरस्त की है उसका सौदा 1997-98 में ही हो चुका है। कुख्यात भू-माफिया शेख मुश्ताक और संस्था में अध्यक्ष रहे गुलाम नबी ने फर्जी अनुबंधों से सौदों को अंजाम दिया। इन अनुबंधों की जानकारी न सहकारिता विभाग को है। न ही जिला पंजीयक को। 2002 में मुश्ताक के खिलाफ छापेमारी करने वाले आयकर विभाग के पास इसके दस्तावेजी प्रमाण हैं जो वह कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत कर चुका है।
     सोसायटी को खजराना में वर्ष 1996 में करीब 5 एकड़ शासकीय जमीन इस शर्त पर मिली थी कि वह तीन साल में अपने सदस्यों को भूखंड देकर आवासों का निर्माण कर ले। मुश्ताक और विक्रय कर संस्था के अध्यक्ष गुलाम नबी ने संगमनत होकर 1996 से 2001 के बीच संस्था की 1,94,500 वर्गफीट (4.465 एकड़) जमीन 2 करोड़ 93 लाख 63 हजार 500 रुपए में बेच दी थी। एक और चौकाने वाला तथ्य यह है कि जिन 250 अनुबंधों से जमीन बेचना बताया गया है वे सभी 5 जून 2002 को आयकर के छापे के दौरान मुश्ताक के मयूरनगर स्थित अड्डे से जब्त किये किए गए थे। उधर, 2005 में जब अनुबंधों की प्रमाणिकता के संबंध में विभागों से जानकारी मांगी गई तो पता चला इसकी जानकारी सहकारिता विभाग को नहीं है। न ही जिला पंजीयक कार्यालय को जहां से स्टॉम्प जारी किये जाते हैं। 
लंबे अर्से तक क्यों दबा रहा मामला...
19 नवंबर 2011 को अंतरिम आॅडिट हुआ। इस दौरान संस्था के मौजूदा अध्यक्ष सोबरन सिंह गौड़ ने बताया कि 23 मार्च 1998 को संस्था का रिकार्ड चोरी हो चुका। खजराना थाने में दर्ज एफआईआर की कॉपी भी सहकारिता विभाग को दी। 2002 में आयकर ने छापा मारा तब रिकार्ड मुश्ताक के घर से मिले। 2013 में आयकर ने कोर्ट में दस्तावेज दिए।
तत्कालीन अध्यक्ष व अन्य पर आयकर बकाया होने के कारण आयकर विभाग ने संस्था का रिकॉर्ड जब्त किया था। उससे रिकॉर्ड लेकर 14 वर्ष का आॅडिट कराया जा रहा है। उसके बाद रिकॉर्ड का मिलान कर 2014-15 में हुआ।
इसीलिए अवैध है सौदा
- बिना टीएनसी, डायवर्शन, डेवलपमेंट के कर दी लीज।
- संस्थाएं आवंटन-कब्जा लेटर के बाद प्लॉट की रजिस्ट्री करती है तो यहां लीज अनुबंध क्यों? अनुबंध सहकारिता कानून में मान्य ही नहीं। इसीलिए विभाग की अनुमति नहीं ली।
- अनुबंध हुए थे तो उनकी कॉपी सदस्यों के पास होना थी न कि मुश्ताक के महल में।
- 15 साल हो चुके हैं अनुबंध हुए अब तक एक भी दावेदार क्यों नहीं आया?
पंजीयक तक नहीं पहुंचा पंजीयन ‘शुल्क’
लीज डॉक्यूमेंट का रजिस्ट्रेशन जरूरी है। अनुबंध 11 महीने से लेकर 30 साल तक का होता है। यदि लीज 2,93,64,500 रुपए में हुई थी तो 5.25 प्रतिशत के हिसाब से 15,41,583 रुपए के स्टॉम्प और कुल स्टॉम्प शुल्क का 75 प्रतिशत यानी 11,56,387 फीस लगती। यानी मुश्ताक मंडली ने 26,97,870 रुपए की सेंधमारी की।
ऐसे बेचे प्लॉट
प्लॉट का आकार     संख्या     कीमत
3000 वर्गफीट         34    1,53,00,000
1000 वर्गफीट         89    1,33,50,000
3500 वर्गफीट         01    5,25,000

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