Tuesday, August 4, 2015

मुश्ताक पर पुलिस मेहरबान

सहकारिता विभाग/नगर निगम की शिकायतें छोटे से लेकर बड़े अफसर तक हुई दरकिनार

- 2012 से मिल रही शिकायतों के बाद भी नहीं की कार्रवाई

इंदौर. विनोद शर्मा ।

छोटे-मोटे अपराधियों को खिलाफ सख्ती करके ‘सिंघम’ कहलाने वाली इंदौर पुलिस कुख्यात भू-माफिया शेख मुश्ताक के प्रति सहानुभूति रखती है। शायद यही वजह है कि नगर निगम और सहकारिता विभाग जैसे सरकारी महकमों की शिकायतों के बावजूद मुश्ताक के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई। खजराना और कनाड़िया दो थानों की पुलिस दोनों महकमों को कार्रवाई के नाम पर आज दिन तक टाले ही देती आ रही है।
    पहला मामला सहकारिता विभाग का है। डायमंड गृह निर्माण सहकारी संस्था की जांच के बाद वरिष्ठ सहकारिता निरीक्षक एवं परिसमापक एम.सी.पालीवाल ने 4 मार्च 2015 को कनाड़िया थाने से लेकर आईजी आॅफिस तक पत्र लिखकर शेख मुश्ताक, मो.इब्राहिम पिता चांद खान और चांद खान पिता रज्जाक खान के खिलाफ कार्रवाई की अनुसंशा की थी। पालीवाल ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कर दिया था कि 1987 में पंजीबद्ध हुई डायमंड के खिलाफ परिसमापन (12/3675) की कार्रवाई करते हुए परिसमापक नियुक्त कर दिया था। संस्था के सभी अधिकार परिसमापक को सौंपे गए। अवैध कॉलोनी काटने के कारण संस्था का रिकार्ड पहले ही पलासिया पुलिस जब्त करके विशेष न्यायालय के सुपुर्द कर चुकी है। हमने कोर्ट से डॉक्यूमेंट की कॉपी मांगी है। इधर, पता चला कि शेख इब्राहिम (निवासी 30 कादर कॉलोनी, यह शेख मुश्ताक का पता है।) स्वयं को संस्था का प्रबंधक बताकर काम कर रहा है।
    उन्होंने चौदवें अतिरिक्त जिला न्यायालय में संस्था की तरफ से मनमाना वाद (44-ए/2012) दायर कर दिया। इतना ही नहीं डायमंड पैलेस कॉलोनी कनाड़िया रोड तर्फे डायमंड गृह निर्माण सहकारी संस्था (पुराना पता-653 आजादनगर, नया-हाजिल मंजिल 30 कादर कॉलोनी) शेख मुश्ताक भी स्वयं को कॉलोनाइजर बता रहा है। दोनों के ही काम  आईपीसी की धारा 420 और 464 के तहत अपराध है। ये दोनों 15 अपै्रल 2014 को सहकारिता विभाग में भी बतौर प्रबंधक-कॉलोनाइजर दस्तावेज पेश कर चुके हैं जो फर्जी है। श्री पालवाल ने कहा कि मैंने परिसमापक के नाते अब तक किसी भी व्यक्ति को प्रबंधक या कॉलोनाइजर नियुक्त नहीं किया है। ये दोनों फर्जी दस्तावेजों से सरकारी विभागों की आंखों में धूल झौंक रहे हैं।
हाजी मंजिल में ही बन जाते हैं वकील से लेकर सांसद
ृृ1 जनवरी 2012 से लेकर 28 अगस्त 2012 तक नगर निगम की कॉलोनी सेल ने लगातार वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से लेकर खजराना और एमजी रोड थाने तक को शिकायत की और प्रकरण दर्ज करने की मांग की। कॉलोनी सेल उपायुक्त ने शिकायत में लिखा कि सांसद वीरेंद्र कुमार जैन और चरणदास महंत के लेटर हेड पर लगातार सेल को विक्रय कर अल्प आय गृह निर्माण सहकारी संस्था की शिकायतें मिलती रही। शंका होने पर जब सांसदद्वय से बात की तो उन्होंने बताया कि उन्हें शिकायत की जानकारी ही नहीं है। उन्होंने अपने नाम से जारी लेटरहेड भी फर्जी बताए। इसके अलावा वरिष्ठ अधिवक्ता एम.एल.शर्मा और एम.आई.खान के नाम से लेटरहेड और सील लगे शिकायती पत्र भी मिलते रहे। इनकी भी जांच की गई। पता चला दोनों वकील न बार काउंसिल इंदौर के मेम्बर हैं और न ही किसी वकील ने उन्हें कभी देखा। शिकायती पत्रों पर दोनों के पते हाजी मंजिल 30 कादर कॉलोनी है जो कि शेख मुश्ताक के घर का पता है। निगम द्वारा बुलाये जाने के बाद भी दोनों उपस्थित नहीं हुए।
मुश्ताक का दामाद बड़ा शिकायती
सांसद और वकीलों के लेटरहेड के साथ अधिकांश शिकायतें 27 मेजेस्टिक कॉलोनी आदिल पालवाला और मोहम्मद अतीक पिता अब्दुल लतीफ निवासी 255 मदीनानगर(आजादनगर) की हैं। सांसद और वकीलों के कुटरचित दस्तावेज बनाकर उन्हें इस्तेमाल करके इन्होंने सरकारी महकमों की आंखों में धूल झौंकी है। उन्हें गुमराह किया है। इसीलिए इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
कब-कब की शिकायत...
1 फरवरी 2012     पत्र क्र . 2558/कॉ-सेल : एसएसपी
27 फरवरी 2012     पत्र क्र. 2710/कॉ-सेल : एमजी रोड थाना
16 मार्च 2012     पत्र क्र. 2847/कॉ-सेल : एमजी रोड थाना
28 अगस्त 2012    पत्र क्र.  2908/कॉ-सेल : खजराना थाना


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