Monday, December 28, 2015

शुक्ला की ‘कृपा’ से कट रही है कश्यप की कॉलोनी

- सख्ती के बाद भी सरकारी जमीन पर कब्जे
- 3 से 4 लाख में बेचे जा रहे हैं प्लॉट
इंदौर. विनोद शर्मा ।
खजराना, असरावद बुजुर्ग और बाणगंगा क्षेत्र में कलेक्टर की सख्ती के बावजूद छोटा बांगड़दा की सरकारी जमीन पर अवैध कॉलोनी कट रही है। सूरजबली नगर और सूर्यदेव नगर के नाम से जिस जमीन पर कॉलोनी काटी जा रही है उसका एक हिस्सा सरकारी है जबकि दूसरे हिस्से पर कांग्रेस नेता कृपाशंकर शुक्ला और कुख्यात भू-माफिया रामसुमिनर पिता मुरली कश्यप के नाम का बोर्ड लगा है। सूर्यदेवनगर में कश्यम के नाम की तख्तियां टंगी है जबकि सूरजबलीनगर को शुक्लाजी की कॉलोनी बताकर प्लॉट बेचे जा रहे हैं। वह भी उस स्थिति में जब
मामला ग्राम छोटा बांगड़दा की सर्वे नं. 336 और 337 की तकरीबन पांच एकड़ जमीन का है। 336 सरकारी जमीन है जबकि 337 कृपाशंकर पिता महावीरप्रसाद शुक्ला और उनके भाई मनोहरप्रसाद  व सत्यनारायण शुक्ला के नाम दर्ज है। इन जमीनों पर 20-20 फीट चौड़ी रोड डालकर कॉलोनी काटी जा रही है। कॉलोनी दो हिस्सों में कट रही है। एक हिस्से का नाम सूर्यदेवनगर है। दूसरा सूरजबलीनगर। सूर्यदेवनगर में सड़क के साथ मकान और बाबा रामदेव के मंदिर का निर्माण शुरू हो चुका है जिस पर रामसुमिरन कश्यम का बोर्ड लगा है। सूरजबलीनगर में कुछ मकान पुराने बने हैं जबकि अब नए सिरे से प्लॉट बेचे जा रहे हैं।
सूरजबलीनगर पंडितजी की, सूर्यदेवनगर कश्यप की
सर्वे नं. 337 शुक्ला परिवार की जमीन है। यहां सूरजबलीनगर के नाम से कुछ मकान पुराने बने हैं। इस अवैध कॉलोनी का जिक्र राजस्व दस्तावेजों में भी है। बड़ी बात यह है कि शुक्ला द्वारा काटी गई इस कॉलोनी के सभी पुराने प्लॉट मास्टर प्लान 2021 में 100 फीट चौड़ी रोड और बीते दिनों इंदौर विकास प्राधिकरण द्वारा प्रस्तावित की गई 45 मीटर चौड़ी एमआर-5 में बाधक के रूप में चिह्नित किए जा चुके हैं। मौके पर प्लॉट बेच रहे कश्यप के कारिंदे भी सीमांकन दिखाते हुए कहते हैं यह सब मकान टूट जाएंगे, आपका प्लॉट फ्रंट में आ जाएगा। अभी कीमत 3 लाख है बाद में 20 लाख कीमत होगी। कारिंदों ने बताया कि सर्वे नंबर 336 की जमीन पर कट रहा  सूर्यदेवनगर कश्यप की कॉलोनी है। उसकी नोटरी कश्यपजी ही करेंगे जबकि सूरजबलीनगर शुक्लाजी और कश्यप दोनों की मालिकी की है।
लेख पैलेस भी कश्यप की...
छोटा बांगड़दा में रामसुमिरन पिता मुरली कश्यप और उनके दो भाई राजाराम और रामस्वरूप के नाम से सर्वे नं. 315/1/2 की 0.405 हेक्टेयर जमीन है जिस पर कश्यप परिवार पहले ही लेख पैलेस नाम की अवैध कॉलोनी काट चुका है। जमीन शहरी सीलिंग से भी प्रभावित है।
ऐसे बिक रहे हैं प्लॉट..
रिपोर्टर : प्लॉट बताओगे भैया...
कारिंदा : आपको किसने भेजा।
मैं तो ईधर ही रहता हूं किराए से?
- कितना बड़ा चाहिए।
800 से 1000 वर्गफीट?
मेरे पास 600 फीट के प्लॉट हैं। 15 बाय 40 के।(प्लॉट दिखाते हुए ये 600 फीट हैं।)
इनका फेस किधर रहेगा।
- (सीमांकन के बाद आईडीए द्वारा लगाए गए सीमा पत्थर दिखाते हुए) रोड किनारे की पूरी पट्टी टूटेगी। आप फ्रंट पर आ जाओगे।
कॉलोनी का नाम क्या रखा?
- उधर, सूर्यदेवनगर, इधर, रोड किनारे सूरजबलीनगर।
दो कॉलोनी ?
कुछ एडजस्टमेंट है। (इशारे से जमीन दिखाते हुए) यह सूरजबलीनगर है कृपाशंकर शुक्लाजी और कश्यपजी का। सूर्यदेवनगर कश्यप की है।
एक प्लॉट कितने का?
- रामनगर में 1.5 लाख के प्लॉट हैं। रोड भी ठंग की नहीं है। हम 20 फीट की रोड दे रहे हैं। इसीलिए 3.5 लाख रुपए। रोड किनारे 4 लाख। बाकी जो बैठक में टूट जाए।
टाइम कितना दो गे?
3-4 महीने।
नौटरी या रजिस्ट्री?
नौटरी है।
जैसे खजराना में टूटी यहां तो नहीं टूटेगी?
- नहीं, वहां सरकारी जमीन पर कॉलोनी थी। यहां पंडितजी और कश्यपजी की निजी जमीन है।
सोनू कश्यप,
 रामसुमिरन कश्यप का बेटा
कश्यप चोर काट रहा है कॉलोनी। मेरा कोई लेना-देना नहीं है। मैंने स्वयं अधिकारियों से शिकायत की और कार्रवाई की मांग की है। मैं नहीं चाहता गरीबों का नुकसान हो। जमीन रावला की है। मेरा मालिकी को लेकर उससे विवाद चल रहा है।
पं.कृपाशंकर शुक्ला
कांग्रेस नेता
कॉलोनी नॉलेज में। बीते दिनों रिमुवल की कार्रवाई भी की है। इसके बाद भी प्लॉट बिक रहे हैं और मकान बन रहे हैं तो फिर कार्रवाई करेंगे।
मुनीश शिकरवार
अपर तहसीलदार

12 महीने में निकली 1200 करोड़ की काली कमाई

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भोपाल,19मई (इ खबरटुडे)।मध्य प्रदेश में भ्रष्ट अफसरों और कारोबारियों की तिजोरी से अकूत संपदा निकल रही है। पिछले एक साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो 1200 करोड़ से अधिक की संपत्ति उजागर हुई है। यानी हर माह सौ करोड़ रुपए भ्रष्टों की जेब से निकले हैं। आयकर, लोकायुक्त सहित अन्य एजेंसियों द्वारा डाले गए छापों में यह रकम उजागर हुई है। आयकर व लोकायुक्त अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि यदि उन्हें और अधिकार दे दिए जाएं तो वे उस चल-अचल संपत्ति को भी पकड़ सकते हैं जो भ्रष्ट तरीके से अर्जित की गई है अथवा जिसमें कालेधन का निवेश किया गया है।आयकर इन्वेस्टिगेशन विंग

इंदौर, भोपाल, जबलपुर व ग्वालियर में की गई 17 छापामार कार्रवाइयों में इन्वेस्टिगेशन विंग ने 482 करोड़ रुपए सरेंडर कराए हैं। इस दौरान केटी ग्रुप, बंसल ग्रुप, सुरेश चंद बंसल ग्रुप, सागर ग्रुप, सिगनेट ग्रुप, मोखा बिल्डर-डॉ. जामदार, अंबिका साल्वेक्स आदि समूहों पर कार्रवाई हुई। नगद व अन्य चल संपत्तियां 45 करोड़ की जप्त की गईं।

आयकर विभाग

मध्यप्रदेश में 182 सर्वे किए गए। भोपाल में 87 व इंदौर में 95 सर्वे में क्रमश: 56 करोड़़ व 323 करोड़ रुपए सरेंडर हुए। ये सर्वे व्यापारियों, संस्थाओं और बिजनेस समूहों पर किए गए।

लोकायुक्त
वर्ष 2011 से 8 मई 2012 तक लोकायुक्त ने 161 लोगों को रंगेहाथ रिश्वत लेते पकड़ा। इनसे 95 लाख रुपए बरामद हुए। इसके अलावा 64 छापे मारे गए। इसमें 500 करोड़ रुपए की अनुपातहीन संपत्ति का पता लगा। बाजार मूल्य से यह राशि दो से तीन गुना होगी।
केंद्रीय सेवा कर
पिछले एक साल में इस विभाग ने तीन करोड़ से अधिक सर्विस टैक्स की राशि वसूली। साथ ही 400 से अधिक ऐसे लोगों को पकड़ा है जो सर्विस टैक्स जनता से तो वसूल रहे थे लेकिन विभाग में जमा नहीं करा रहे थे। इतनी राशि से ये हो सकता है
: प्रदेश में गांवों व कस्बों तक 7 मीटर चौड़ाई की 3000 किमी सड़क बनाई जा सकती है (या)
: फुटपाथों पर रहने वाले अथवा गरीबों के लिए 1.20 लाख घर बन सकते हैं (या)
: प्रायमरी शिक्षा के लिए आठ हजार भवन बनाए जा सकते हैं (या)
: सर्वसुविधायुक्त व अत्याधुनिक पांच हॉस्पिटल बन सकते हैं (या)

लोकायुक्त की गिरफ्त में रोज आ रहा एक भ्रष्ट

भोपाल। प्रदेश में रोजाना एक भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारी लोकायुक्त की गिरफ्त में आ रहा है। मौजूदा साल में लोकायुक्त की विशेष स्थापना पुलिस ने 400 से ज्यादा लोगों को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर चुका है। इनसे 50 लाख रुपए नकद बरामद किए गए हैं, जबकि आय से अधिक संपत्ति के 23 मामलों में 37 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति उजागर हुई है। नौ दिन बाद समाप्त होने वाले साल में लोकायुक्त संगठन ने भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को रंगे हाथों पकड?े के मामले में अपना पिछला रिकार्ड तोड़ा है।

पिछले साल 390 ट्रेप (रंगे हाथों रिश्वत लेने के) केस बने थे, जबकि इस साल ये संख्या 400 पहुंच चुकी है। बरामद राशि भी 38 लाख से बढकर 50 लाख पहुंच चुकी है। अधिकारियों का मानना है कि जिस तरह एक दिन में एक से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं उसे देखते हुए प्रकरणों की संख्या 425 के आसपास पहुंच जाएगी। छापे की संख्या जरूर बीते साल के 38 से घटकर 23 रह गई है। इसमें करीब 37 करोड़ की संपत्ति प्रथम दृष्टया अनुपातहीन उजागर हुई है। इस बार पद के दुरुपयोग के मामले तेजी से बढ़े हैें। संगठन ने 179 नए प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की है।
रिश्वत लेने में पटवारी आगे- लोकायुक्त पुलिस का सालभर का रिकार्ड देखने से साफ है कि रिश्वत लेने के मामले में पटवारी सबसे आगे हैं। इनके खिलाफ ही प्रदेश में सर्वाधिक मामले दर्ज किए गए हैं। इसके बाद पंचायत सचिव का नंबर आता है। संगठन अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सर्वाधिक काम इन्हीं दोनों से पड़ता है।

इंदौर अव्वल

रिश्वत के मामले सर्वाधिक इंदौर संभाग में सामने आए हैं। यहां अभी तक 89 प्रकरण दर्ज किए गए हैं, जबकि भोपाल में 52, ग्वालियर 41 और जबलपुर में 46 अधिकारी-कर्मचारी रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़ाए हैं।



शिकायतें बढ़ी हैं
विशेष स्थापना पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक अशोक अवस्थी का कहना है कि संगठन के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ा है। शासकीय कार्यालयों के बाहर रिश्वत मांगने या लेते देखने पर सूचना देने के पोस्टर चस्पा करना भी फायदेमंद रहा है। एक साल में शिकायतों की संख्या काफी बढ़ गई है। शिकायत की पुष्टि होने के बाद कार्रवाई की जा रही हैं। यही कारण है कि अधिकांश मामलों में दोषियों को अदालत से सजा मिल रही है।



भ्रष्ट अफसरों की सोशल मीडिया पर खुली पोल
पिछले तीन माह में सोशल मीडिया पर भी कई भ्रष्ट अफसरों की पोल खुल चुकी है। प्रमुख सचिव, विभाग प्रमुख से लेकर कलेक्टर तक पर मैदानी अफसरों से डिमांड करने के आरोप लग चुके हैं। हालत ये है कि सरकार में छह अपर मुख्य सचिव में से तीन सोशल मीडिया से सामने आए भ्रष्टाचार की जांच कर रहे हैं। ताजा मामला पीडब्ल्यूडी के एसडीओ अरूण मिश्रा ने कार्यपालन यंत्री रमाकांत तिवारी पर प्रमुख सचिव प्रमोद अग्रवाल के लिए वसूली करने का आॅडियो वायरल होने का है। इसकी जांच लोकायुक्त पुलिस रीवा कर रही है।



इसके पूर्व आदिम जाति कल्याण आयुक्त जेएन मालपानी का आॅडियो वायरल हुआ था, जिसमें वे खुलेआम मैदानी अफसर से अकेले खाने पर बदहजमी की बात कह रहे थे। प्रकरण की जांच अपर मुख्य सचिव राधेश्याम जुलानिया कर रहे हैं। उन्होंने अभी रिपोर्ट नहीं सौंपी है। इसी तरह आईएफएस अफसर अजीत श्रीवास्तव का भी आॅडियो वायरल हुआ था। इसमें वे वन विभाग के ठेकेदार से 55 लाख रुपए की मांग कर रहे थे।



इस मामले में अपर मुख्य सचिव बीपी सिंह जांच कर रहे हैं। इसके पहले वन विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपकर खांडेकर दतिया कलेक्टर प्रकाश जांगरे के खिलाफ रिपोर्ट दे चुके हैं। हालांकि, उन्होंने भ्रष्टाचार की जांच नहीं करते हुए कार्यपालन यंत्री से की गई अभद्रता के लिए कलेक्टर को दोषी ठहराया है। इस आॅडियो में कलेक्टर संबंधित कार्यपालन यंत्री से अपने बाथरूम के लिए सोप हैंगिंग लगाने की बात कर रहे थे।

छोटे शहर, बड़ी कार्रवाई

मध्य प्रदेश प्रदेश में आयकर विभाग की छोटे शहर में छापे की बड़ी कार्रवाई का सिलसिला जारी है. अब आयकर विभाग की टीम ने सेंधवा में छह व्यापारियों के ठिकानों पर छापे की कार्रवाई की है. इस कार्रवाई में बड़ी कर चोरी का खुलासा होने की उम्मीद है.
जानकारी के मुताबिक, बड़वानी जिले में सेंधवा, पलसुद और बलवाड़ी में आयकर विभाग की टीम ने मंगलवार सुबह छापे की कार्रवाई की. सेंधवा में 4 स्थानों और पलसुद और बलवाड़ी में एक-एक स्थान पर आयकर विभाग की कार्रवाई जारी हैं.
आयकर विभाग की इस कार्रवाई में कपड़ा, सराफा, अनाज और रेडीमेड कारोबारी निशाने पर है. विभाग की इस कार्रवाई से पूरे अंचल में हडकंप मच गया है. माना जा रहा है कि यह कार्रवाई अगले दो से तीन दिन तक जारी रह सकती है.
छापे की इस कार्रवाई में इंदौर के अलावा खंडवा, बुरहानपुर और खरगोन के अधिकारी शामिल है.प्रदेश में पिछले कुछ समय से आयकर विभाग ने छोटे शहरों को टारगेट करते हुए यहां हो रही कर चोरी को पकड़ने की कार्रवाई शुरू की है. इसके पहले विदिशा और होशंगाबाद जिले में भी इसी तरह की कार्रवाई हो चुकी है.

आयकर भरने वालों की संख्या में इजाफा, 27 लाख नए टैक्सपेयर

नई दिल्ली। मोदी सरकार के प्रयास रंग लाते दिख रहे हैं। देश में इनकम टैक्स भरने वालों की संख्या बढ़ गई है। करीब 27 लाख नए टैक्सपेयर टैक्स के दायरे में आए हैं। आयकर विभाग ने चालू वित्त वर्ष में एक करोड़ नए लोगों को आयकर के दायरे में लाने का लक्ष्य रखा है।
वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक सबसे ज्यादा नए टैक्सपेयर पश्चिमी राज्यों मसलन गुजरात, गोवा और महाराष्ट्र में जोड़े गए हैं। सूत्रों ने बताया कि 27 लाख से ज्यादा नए लोगों की पहचान की गई है और उन्हें टैक्स दायरे में लाया गया है। इन नए लोगों और इकाइयों को विभाग साल के मध्य में शुरू किए गए अभियान के बाद कर दायरे में आया है।
सूत्रों ने स्वीकार किया है कि इस लक्ष्य को हासिल करना काफी कठिन है। आयकर विभाग के फील्ड कार्यालयों ने वित्त मंत्रालय को सूचित किया है कि तय समय में 60 से 70 प्रतिशत लक्ष्य हासिल हो पाएगा।

वर्ष 2015 में आयकर विभाग ने कर चोरों पर कसी नकेल

नयी  दिल्ली : वर्ष 2015 में आयकर विभाग का ज्यादातर समय विदेशी निवेशकों और घरेलू करदाताओं के साथ वाद विवाद में बीता. हालांकि, वर्ष के दौरान समस्या का समाधान ढूंढने के प्रयास भी तेज हुए. नये साल (वर्ष 2016) के दौरान विभाग ने भारी भरकम आयकर कानून को सरल बनाने और कर वसूली के वैर-भाव मुक्त प्रभावी प्रणाली तैयार करने का लक्ष्य रखा है. सरकार आसान कर कानून के साथ अपना कर राजस्व ज्यादा से ज्यादा करने की कोशिश कर रही है.
हालांकि, राजस्व लक्ष्य पाने के लिए कर विभाग बड़ी कंपनियों से अतिरिक्त अग्रिम कर की मांग करने या कर रिफंड रोकने का रास्ता नहीं अपनाना चाहता है. विभाग ने कर विवादों को सुलझाने की दिशा में कई पहल की हैं, विदेशी निवेशकों से जुडे ज्यादातर कर विवादों को 2015 में सुलझा लिया गया. हालांकि, राजनीतिक खींचतान के कारण महत्वाकांक्षी वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विधेयक पारित नहीं हो पाया. कालाधन वापस लाने के भाजपा के मुख्य चुनावी वादे को पूरा करने की कोशिश वर्ष के दौरान की गयी लेकिन आरंभिक प्रतिक्रिया इतनी अच्छी नहीं रही.


कालेधन के बारे में जितनी बड़ी राशि का दावा किया जा रहा था उसके मुकाबले कालाधन जो अब तक सामने आया है वह उम्मीदों के अनुरूप नहीं है. पिछली सरकार से विरासत में मिले कर विवादों का अभी भी हल नहीं हो पाया है. विशेष तौर पर वोडाफोन और केयर्न एनर्जी जैसी बड़ी विदेशी कंपनियों पर पिछली तारीख से कलाधान जैसे मुद्दे अभी भी चल रहे हैं, हालांकि लंबे समय से चल रहे इन मुद्दों को सुलझाने की कोशिश की गयी है. सरकार ने वोडाफोन के साथ 20,000 रुपये करोड रुपये के कर विवाद के मामले में समझौते की प्रक्रिया शुरू की है, जबकि केयर्न ने 10,247 करोड रुपए के कर विवाद में सरकार को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में घसीटा है, ताकि मामले में मध्यस्थता हासिल की जा सके. दोनों मामले लंबे समय तक चलेंगे.

कर विभाग ने अपनी ओर से विवादों को कम करने की दिशा में जो बेहतर पहल की उनमें 50,000 से कम के कर रिफंड राशि तुरंत जारी करने और कम कर राशि की अपील वापस लेना शामिल है. अर्थव्यवस्था उम्मीद से कमतर वृद्धि दर्ज कर रही है, ऐसे में कर संग्रह लक्ष्य से चूक जाने की आशंका है. सरकार इस कमी की भरपाई, पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क बढाकर करने का प्रयास कर रही है. प्रधानमंत्री के महत्वाकांक्षी स्वच्छ भारत अभियान के वित्तपोषण के लिए करयोग्य सेवाओं पर 0.5 प्रतिशत का अतिरिक्त कर लागू किया गया.
राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने कहा ह्यह्यहमें अप्रत्यक्ष कर संग्रह लक्ष्य पाने का पूरा भरोसा है और हमें उम्मीद है कि प्रत्यक्ष कर लक्ष्य के नजदीक पहुंचने के भी हरसंभव प्रयास किये जायेंगे. लेकिन हम मौजूदा वर्ष में कुछ बड़ी कंपनियों से अनिवार्य तौर पर अतिरिक्त अग्रिम कर भुगतान के निर्देश या रिफंड रोककर लक्ष्य पूरा नहीं करना चाहेंगे.' अधिया ने नये साल के बारे में कहा कि कर विभाग का जोर बिना वैर-भाव और बिना जोर-जबरदस्ती के प्रभावी कर संग्रह व्यवस्था को अमल में लाना है. अधिया ने कहा ह्यह्यये पहलें करदाताओं को कुछ निश्चिंतता तथा संतोष प्रदान करेंगी और इससे कानूनी विवाद कम होंगे. वर्ष 2016 में हमारी कोशिश होगी आयकर कानून को आसान बनाने और रीयल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (आरईआईटी) और वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ) के कराधान संबंधी अन्य मुद्दों का समाधान किया जा सके.'

वर्ष 2015 के दौरान कर विभाग के समक्ष जो बडा मुद्दा आया वह विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों-विदेशी संस्थागत निवेशकों के पूंजीगत लाभ पर एक अप्रैल 2015 से पहले की अवधि के लिए न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) लगाने का रहा. इसको लेकर काफी विवाद हुआ और शेयर बाजार में इसका बड़ा असर दिखा.

विदेशी निवेशक पिछली अवधि के लिए पूंजीगत लाभ पर कर को लेकर काफी नाराज दिखे और उन्होंने पूंजी बाजार बाजार से धन निकासी की धमकी दी. लेकिन सरकार ने समस्या को सुलझाने के लिए विधि आयोग के अध्यक्ष एपी शाह की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया. समिति ने विदेशी संस्थागत निवेशकों और पोर्टफोलियो निवेशकों की एक अप्रैल 2015 से पहले की पूंजीगत आय पर मैट नहीं लगाने का सुझाव दिया.

वर्ष के दौरान काला धन वापस लाने की कोशिशें भी तेज हुईं. विदेशों में रखे कालेधन को लाने के लिए एक नया कानून बना. इसमें विदेशों में कालाधन रखने वालों के खिलाफ सख्ती बरतते हुए 10 साल तक की सजा और 120 प्रतिशत कर तथा जुमार्ने का प्रावधान किया गया. विदेशों में कालाधन रखने वालों को खुद को पाकसाफ करने के लिए 90 दिन की अनुपालन अवधि दी गयी लेकिन इस अनुपालन अवधि में केवल 4,160 करोड रुपये का ही खुलाशा किया गया जिससे 2,500 करोड़ रुपये कर और जुमार्ने के रूप में प्राप्त हुए.
 अप्रत्यक्ष करों के मामले में सरकार को जीएसटी पारित होने की उम्मीद थी लेकिन संसद के शीतकालीन सत्र में भी यह राज्यसभा में पारित नहीं हो सका. माना जा रहा है कि जीएसटी के अमल में आने से जीडीपी में डेढ से दो प्रतिशत वृद्धि होगी. अप्रैल से नवंबर के दौरान अप्रत्यक्ष कर संग्रह 34.3 प्रतिशत बढकर 4.38 लाख करोड़ रुपये हो गया. इस तरह यह पूरे वित्त वर्ष के लिए अनुमानित 6.46 लाख करोड़ रुपये के स्तर का 68 प्रतिशत है. प्रत्यक्ष कर वसूली 3.69 लाख करोड़ रुपये रही जो कि बजट में तय 7.97 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य का 46.26 प्रतिशत है.

टारगेट पूरा करने के लिए होगी सख्?ती, टैक्?स न देने वाली कंपनियों पर आयकर अधिकारियों की होगी विशेष नजर


  तीसरी तिमाही में कॉरपोरेट जगत की बड़ी कंपनियों ने टैक्?स भुगतान में विलंब किया है। ऐसे में आयकर अधिकारियों ने अब लक्ष्य को हासिल करने के लिए बकाया टैक्?स को वसूलने तथा नए सिरे से सर्वे करने का फैसला किया है। आयकर के प्रधान मुख्य आयुक्त तथा मुंबई क्षेत्र के प्रमुख डीएस सक्सेना ने शुक्रवार को बताया कि कुल कर संग्रहण पिछले साल से बेहतर रहा है, लेकिन कुछ कंपनियों का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है। ऐसे में हमारी उम्मीद अंतिम तिमाही में 12,000 करोड़ रुपए के बकाये की वसूली पर टिकी है। सक्सेना ने कहा कि हम सर्वे की संख्या बढ़ाने तथा 2,560 अरब रुपए के लक्ष्य को हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं।
सीबीडीटी ने मुंबई क्षेत्र के लिए 2,560 अरब रुपए का लक्ष्य तय किया है। यह सबसे बड़ा क्षेत्र है, जो कुल कर राजस्व में एक-तिहाई से अधिक का योगदान करता है। चालू वित्त वर्ष के लिए प्रत्यक्ष कर संग्रहण का सालाना लक्ष्य 7,980 अरब रुपए है। यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 16 फीसदी अधिक है। आयकर अधिकारियों के अनुसार कई कंपनियों ने तीसरी तिमाही में कर भुगतान में चूक की है, हालांकि कुल संग्रहण संतोषजनक रहा है।
मुंबई क्षेत्र से 22 दिसंबर तक शुद्ध कर संग्रहण 1,59,372 करोड़ रुपए रहा है, जो इससे पिछले वित्त वर्ष के 1,38,956 करोड़ रुपए से 14.6 फीसदी अधिक है। इसमें कॉरपोरेट कर का हिस्सा 1,08,209 करोड़ रुपए रहा है, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के 91,363 करोड़ रुपए से 18.4 फीसदी अधिक है। इसके बावजूद कॉरपोरेट कर संग्रहण तीसरी तिमाही में चिंता का विषय रहा है, क्योंकि इसके भुगतान के लिए अब एक सप्ताह का समय ही बचा है। इस्पात एवं सीमेंट कंपनियों से तीसरी तिमाही में कर संग्रहण में भारी गिरावट आई है।